00:00न्याई पालिका की मर्यादा के लिए जिसने सालों तक मौन साधे रखा आज वही मौन तूट गया है
00:11जो कोई सवाल नहीं बलकि एक चेतावनी बन कर आई है वो भी सीधे देश के सबसे उचे न्याई पद भारत के चीफ जस्टिस को
00:19नमस्कार मैं हूँ संध्या और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:23आज देश के न्याई के तिहास से जुड़ा एक बेहत गंभीर और आसाधारण घटना करम सामने आया
00:34जहां बार काउंसिल ओफ इंडिया और न्याई पालिका यानि बार वर्सिस बेंच के वीच तनाव खुल कर सामया आ गया है
00:41क्या है पूरा मामला आईए जानते
00:44बार काउंसिल ओफ इंडिया की अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने भारत के मुख्य नयाईधीश चस्टिस सूर्यकान को एक कड़ा पत्र लिखा है
00:52इस पत्र में साफ शब्दों में कहा गया हमारी चुप्पी और सयम को कमजोरी ना समझा जाए
00:58ये कोई सामान्य शिकायत नहीं बलकि एक संस्थागत चेताबनी है
01:03ये पूरा विवाद शुरू हुआ केरल राजय बार काउंसिल चुनाव से
01:06केरल बार काउंसिल के चुनावों में 1,25,000 रुपे की नॉमिनेशन फीस तै की गई थी
01:12इस फीस को चुनावों से जुड़े मामलों की सुनवाई हाई कोट या अन्या दालते नहीं करें
01:29इसके लिए सुप्रीम कोट ने एक विशेश तंत्र और समीतिया भी बनाए है
01:33इसके बावजूद केरल हाई कोट की सिंगल बेंच ने ना सिर्फ याची का सुनी बलकि सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ओफ इंडिया पर मोखिक टिपनिया भी की
01:42BCI ने इन टिपनियों को बे बुन्याद, लापरवा और सम्विधानिक संदुलन को बिगाडने वाला बताया
01:48अपने पत्र में BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा लिखते हैं कि बार काउंसिल ओफ इंडिया न्याए पालिका की गरिमा और विश्वश्नियता बनाए रखने के लिए कई बार न्याएक पुरणाली की खामियों पर जान बूच कर चुप रहती हैं
02:01हम चुप इसलिए थे क्योंकि सिस्टम की इज़द करते हैं लेकिन इस चुपपी को मिली भगत या कमजोरी समझना एक खतरनाक सोच है
02:10BCI ने एक एहम तथे भी साफ किया जिसमें उन्होंने बताया कि 1,25,000 रुपे की नॉमिनेशन फीस का एक भी रुपया बार काउंसल अफ इंडिया को नहीं मिलता
02:20पुरी राशी राजे बार काउंसल के पास ही रहती है और BCI को इससे कोई आर्थिक लाब नहीं होता
02:27BCI के मताबिक सुप्रीम कोट के निर्देश पर चुनावों की निगरानी के लिए पूर्वहाई कोट जजों की अध्यक्षता में हाई पावर का मेटिया बनाई जाती है
02:35ट्राबल, अकॉमेडेशन, ओनेरेरियम और विवस्थाओं में 20 कड़ों के पैसे जादा खर्च आने का अनुमान है
02:42ये पूरा खर्च वकीलों के समुदाय द्वारा ही उठाया जाता है
02:45ना कोई सरकारी मदद, ना कोई बाहरी फंडिंग पत्र के अंत में
02:49BCI ने पहली बार बेहत सक लहजे में लिखा
02:52अगर अधिवक्ताओं के निर्वाचत निकायों पर इस तरह के अनुचित हमले जारी रहे
02:57तो वकीलों को सामोही कानूनी विरोध और आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है
03:02जिसर्थ असहमिती नहीं ये एक संथागट टकराव की आहट है
03:07अब सवाल ये है क्या सीजय सूरक कांत इस मामले में कोई सलाह या निर्देश जारी करेंगी
03:13जब न्याय देने वाले और न्याय की लड़ाई लड़ने वाले ही आमने सामने आ जाए
03:17तो सवाल फिर कानून का नहीं लोक टंतर की आत्मा का होता है
03:21क्या टकराव यहीं थमेगा या फिर बार और बेंच की ये जंग न्याय पालिका के इतिहास में एक नए अध्याय लिखेगी
03:29इन जबाबों के साथ फिर मिलेंगे आप देखते रहें वान इंडिया हिंदी
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