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00:00लोगधर्म क्या है और आप इसके इतने विरोध में क्यों है
00:03अध्यात्म गर्मा का नाम है
00:04सर्वाइव करना और ठसक के साथ जीना दो अलग बाते होती है
00:08अरे इतने सालों से चल रहा है तो हमारे पूरवज क्या सब ब्योपूफ थे
00:11और और एक प्रशन पूछ रहा हूं
00:12बुरा लगेगा लेकिन लगने दीजिए
00:14मिटी की दें वैसे ही खतम हो नहीं अच्छा लगे बुरा लगे क्या है
00:21आज से 400 करोड साल पहले फलाना यूग चल रहा था
00:24आज से 400 करोड साल पहले इंसान क्या बंदर भी नहीं था
00:28सबसे ज्याधा आजहा नास्तिक हो नहीं तथा कथि धार्म को द्वारा क्यों किये जातें
00:40आपि कना अब लोकिका बतो अप्यार शक्रां बॉरा महला अपत्ति करने लगता है
00:45यह क्यों बोलते हो कि यह करके परमात्मा मिल जागा इने, क्या है भईया, पूडी बन रही है, खीर बन रही है, क्या होगा इदे भगवान खुश हो जाए, खाओगे तुम, पर निकालोगे भी सुबह तुम ही, और खुश भगवान होने वाले हैं, जानवर काट रहे हैं, प
01:15लोकधर्म प्रचलित चलता है, उसका कोई महत भी है या परस उसका नुक्सान ही है, और आप इसके इतने विरोध में क्यों है, भर्म मने वो दिशा जो अहंकार को लेनी चाहिए, अपने आचरण में, अपने विचार में, अपनी पहचान में,
01:35लोकधर्म का अर्थ है वो दिशा जो मैं परमपरा से लेता रहा हूँ, बैठ जाएए, जो मैं परमपरा से लेता रहा हूँ, और इसी लिए आगे भी लेना चाहता हूँ, क्योंकि परमपरा में सुरक्षा है,
01:55लोकधर्म का अर्थ है ये कहना, कि जो मेरी पुरानी आदत है, वही मेरा अध्यात्म है,
02:10उसकी और हंकार जादा आकरशित होता है, क्योंकि वो सब कर चुकने के पश्चात, हंकार आज तक शेश है न,
02:22तो एक तरक उसको प्रमान सहीत मिल जाता है, वो कहता है, देखो, एक हजार साल से मैं इसी धर्म का पालन कर रहा हूँ,
02:33और इतना तो हुआ कि मैं आज तक बचा हुआ हूँ, और कोई लाब हुआ हो ना हुआ हो, बचे रहने का लाब तो हुआ है न,
02:43फलाने तरीके की माननिता है, फलाने तरीके का कर्म कांड है, फलाने तरीके के प्रतीक हैं, पहचान हैं,
02:55मैं इनको पकड़के चल रहा हूँ, हजार साल से, आप बता रहे हो कि कुछ नुकसान हुआ है, नुकसान तुम मुझे ज़्यादा दिख नहीं रहा है, पर एक लाब जरूर दिख रहा है इस पश्ट, क्या, मैं बचा हुआ हूँ,
03:08और उसके बाद और भी कई लाब हैं, जैसे कि सोयम सोचना नहीं पड़ता, और निजी सोच के कोई खतरे उठाने नहीं पड़ते, अपनी ओर से कोई प्रयोग नहीं करना पड़ता, कोई जग्यासा, कोई परिक्षण नहीं करना पड़ता, जो चला आ रहा है उसी को चलने �
03:38धारणा को क्या बोल दिया? और आदत को क्या बोल दिया? इसी को और बढ़ाना हो, तुकबंदी करके तो बोल दो सुविधा को समाध ही बोल दिया
03:52और ये सब बोलने के पीछे सोयम को समझा लिया, अगर ये सब गलत होता, तो मैं आज तक बचाई क्यों होता? ये आज से चार पीड़ी पहले भी हुआ, उससे चार पीड़ी पहले भी हुआ, उससे भी पांच पीड़ी पहले हुआ, अगर ये बाते ठीक नहीं होती, तो हम
04:22है अगर हम बचे हुए हैं तो हमारे बचे रहने से ही सिद्ध हो जाता है कि ये धर्म
04:27श्रेष्ठ है तुम्हारे बचे रहने से ये नहीं सिद्ध हो जाता कि धर्म
04:31श्रेष्ठ है क्योंकि धर्म वास्तव में वास्तविक धर्म तुम्हारे बचे
04:37रहने का नाम है ही नहीं, वो इस बात का नाम नहीं है कि तुम कितने लंबे समय से कायम हो, वो इस बात का नाम है कि तुमारी गुडवत्ता क्या है, तुम आकड़े गिनते हो, तुम गिनते हो कि कितने हजार साल से हम बचे हुए हैं, तुम आकड़े गिनते हो कि कितने करोड �
05:07तुम कहते हो कुछ बात तो है कि हस्ती मिठती नहीं, हमारी सदी हो रहा है, दुश्मन दौरे जहां हमारा, ये बात धर्म पर लागू नहीं होती.
05:18आज आप क्या गा रहे थे?
05:26प्रेम भले ही प्राण ले.
05:31धर्म लंबा जीने का नाम नहीं है.
05:34धर्म अपनी आबादी और तादाद बढ़ाने का नाम नहीं होता है.
05:40धर्म सही जीवन में अपनी आहुती देने का नाम होता है.
05:47पर हंकार तो है डरा हुआ छोरा.
05:51उसके लिए यही बात सबसे बड़ी है.
05:54ऐसे ही तो चलता रहा है, ना?
05:57ऐसे ही तो चलता रहा है.
06:04आप अपने अभिवाव को को या दादा दादी को कुछ बोले
06:06या आपके तौर तरीके जो हैं ये बहुत अच्छे नहीं है
06:10जिस तरीके से मैं एक उधारण देता हूँ
06:15घर में पोता हो जाए या पोती
06:16और दादा दादी उसे कुछ अंधविश्वास की बाते बता रहे हो
06:24या मान लो जाते बात सिखा रहे हो कई बार
06:29पता भी नहीं चलता हम क्या सिखा जाते हैं
06:34जरूरी नहीं है कि जाते बात जानबूच की सिखाया जा रहा हो
06:36वो कई बार प्रचन होता है, इंप्लिसिट होता है
06:40और आप उनसे कहें कि देखिए इस तरीके से परवरिश करना ठीक नहीं है
06:45आप इनके मन में अंदोश्वास भर रहे हैं बच्चों के
06:47तो दादी का खट से जवाब आएगा
06:52यही करकर के हमने भी तो आठ बच्चे बड़े कर दिये
06:56तुम लोगों की सबकी परवरिश तो हमने ऐसे ही करके कर दी
07:00अब दादी लगी हुई है उसकी आख में कारवन मलने में
07:05कारवन क्या नाम से?
07:11और वो मिर्ची जला करके उसकी नजर उतारने में
07:14और आप बोल रहे हो कि यह जो आप कारवन घिस रहे हों
07:17डॉक्टर बोलते हैं कि यह गलबड़ भी कर सकता है मत करो
07:20बच्चे की कोमल आखों पर यह गलबड़ कर देगा
07:23तो दादी का खट से क्या जवाब आएगा?
07:26यही करकर के हमने आठ बच्चे तुमारे यह से बड़े कर दिये
07:31तो होई क्या हमारे एक बटे आठ तेरे कुल एक हुआ है
07:36मेरे तो आठ थे और मैंने आठ बड़े कर दिये
07:40यह तरक रहता है हंकार का उतना डरा हुआ है
07:43कि उसके लिए सबसे बड़ी बात यही है
07:45हम बच गए, हम जी गए
07:47हम किसी तरीके से
07:49सर्वाइव कर गए
07:50लेकिन अध्यात्म सर्वाइवल
07:53का नाम नहीं है
07:54अध्यात्म गर्मा का नाम है
07:57सर्वाइव करना
07:59और ठसक के साथ जीना
08:01दो अलग बाते होती है
08:02लोकधर्म कहता है
08:05जो चल रहा है
08:07that which has survived is great
08:09just because it has survived
08:13तो survive तो जानवरों की भी इतनी प्रजातियां गर गई
08:17मनुश्य तो बहुत नया है
08:18जानवरों की करोडों प्रजातियां हैं और पेड़ पौधों की हैं
08:24जो हमसे बहुत बहुत पुरानी हैं
08:26तो वो सबसे महान हो गए
08:28मच्छर, कौकरोच, केचुआ, कचुआ, मगरमच, ये छिपकली
08:34ये सब आपसे बहुत ज़्यादा पुराने हैं
08:38इनको तो छोड़ तो पेड़ भी हमसे बहुत ज़्यादा पुराने है
08:40पेड़ मिला एक उसको कहा जा रहा है कि इस पेड़ ने तो
08:46शाय दीसा मसीह को भी देखा होगा इतना पुराना है
08:482000 साल पुराना पेड़ मिल गया उसको कह रहे 2000 साल पुराना लग रहा है
08:53होते हैं, हम जानते हैं
08:56कोई बहार की बात नहीं, भारत में भी बहुत-बहुत सेगड़ों साल पुराने व्रिक्ष होते हैं
09:00तो मात्र शारीरिक तोर पर बचे रहना कौन सी बड़ी बात हो गई? यह हो गई? पर लोकधर्म के लिए यही सबसे बड़ी बात होती है क्योंकि वो जो सबसे आदिम प्राकृतिक वृत्ति होती है उससे संचालित होता है
09:16आदिम प्राकृतिक वृत्ति क्या है शरीर को बचाओ अपनी तादाद बढ़ाओ चुहे अपना शरीर भी बचाओ किसी तरीके से और अपनी तादाद बढ़ाओ
09:27वहाँ ये नहीं होता कि आत्मा से प्रेम ही धर्म है प्रेम भले ही प्राण ले
09:34वहाँ प्राण अगर दिया भी जाएगा तो अंधविश्वास और धारणा की रक्षा के लिए दिया जाएगा
09:43सत्य के यग्य में आहूति की तरह प्राण नहीं दिया जाएगा वहाँ
09:48मुझ में आ रही ही बात है
09:52लोग धर्म का एक और तर्क सुनो आप जानते ही हो मैं क्या सुना हूँ
09:58अरे इतने सालों से चल रहा है तो हमारे पूरवज क्या सब बेवकूफ थे
10:04तुम भी कल किसी के पूरवज होगे
10:08अच्छा आपने उपर बुरा लगता है यह तुमहारे बगल में बैठा हुआ है टट्टू
10:19मैं तुम से पूछू हूँ टट्टू कैसा है तुमाँ नाम टीटू तुम्हारे दोसका नाम टट्टू
10:25मैं पूछू है टट्टू कैसा है तुम बोलो कि एक नंबर है गधा है मूरख है पागल है बेवकूफ है ठीक है ये टट्टू भी कल किसी का पूरवज होगा और तुमने ही अभी कहा कि टट्टू बेवकूफ है आपके बगल में बैठा है टट्टू इनका नाम टीटू इनक
10:55जो आज का बंदा जब कल किसी पुर्खा बनेगा और बेवकूफ है
11:01तो तुम ये क्यों मान रहे हो कि किसी भी समय पर कुछ लोग बुद्धिमान और कुछ लोग बेवकूफ क्यों नहीं होते होते हैं
11:08और ये भी आप जानते हो कि चाहे एक किसवी शताब दी हो, चाहे पंदरवी शताब दी हो, चाहे दसवी शताब दी हो, चाहे पाचवी शताब दी हो, समाज में यदि बेवकूफ और बुद्धिमान दोनों होते हैं, तो दोनों में नुपात कितना होता है?
11:21निन्यानवे मूरक होते हैं तो एक बुद्धिमान होता है जी हां हमारे पुर्खों पर भी यही बात लागू होती है
11:29सौ में से निन्यानवे पुर्खे भी बेवकूफ ही थे
11:31आप नियमों का अपवाद थोड़ी बन जाओगे
11:36जो बात है तो है जैसे यह कहोगे कहेंगे
11:40साला अपने ही बाप दादाओं को बेवकूफ बोल रहा है
11:44तेरे बाप दादे होंगे बेवकूफ मेरे नहीं थे
11:47जी आपकी प्रतिक्रिया से पता चल रहा है
11:57अरे यह बहुत सोचने की बात है न
11:59जब दुनिया में किसी भी समय में किसी भी समाज में
12:03मूरख भी होते हैं और ग्यानी भी होते हैं
12:06और सौमे से 99 मूरख ही होते हैं
12:08तो आज से 500 साल पहले, 1000 साल पहले
12:13चाहे भारत हो, चाहे अफरीका हो, चाहे अरब हो
12:15चाहे यूरोप हो, चाहे चीन हो
12:17आप पंधरवी शताबदी का चीन ले लो, दसवी शताबदी का भारत ले लो
12:23हर समय, हर समाज में सौमे निन्यानवे बेवकूफी होते है
12:28यह प्रकृतिका नियम है, इसमें अहंकार को आहत करने वाली कोई बात नहीं है
12:33ऐसा होता है
12:34यह लगबग वैसी सी बात है कि जैसे खरगोशों के दोकान होते है
12:38इसमें आहत होने की क्या बात है, यह प्रकृतिका नियम है
12:41पर लोगधर्म कहता है नहीं, जो कुछ पीछे है
12:45वो शेष्ट है, वो सुरनिम है
12:48क्यों है भाई?
12:50क्यों है?
12:51और और एक प्रश्ण पूछ रहा हूँ
12:53बुरा लगेगा लेकिन
12:55लगने दीजिए
12:56मिट्टी की दे हैं, वैसे ही खतम हो नहीं
13:01अच्छा लगे, बुरा लगे, क्या लगे?
13:07ज्यान के ज्यादा साधन आज है या हजार साल पहले थे?
13:10जितनी शिक्षा आज मिल रही है तब मिलती थी
13:15एक से बड़े एक अंधविश्वासों में फसने की ज्यादा संभावना आज है या पहले थी?
13:28अरे यार आज आज आपको कोई बात बताई जाती है, आप तुरंट जाते हो, गूगल कर लेते हो, तथे सामने आ जाता है
13:40तो गाओं के इस तरपर जो अंधविश्वास है कभी भी उसका उन्मूलन हो सकता था, तो ग्यान की बात ज्यादा आज होगी या पीछे होगी?
13:49इसी लिए हम कहते हैं, परम से ना विलग हो, परमपरा बस यही है, और शेश विशय अतीत के नहीं जरूरी नहीं है
14:03ये लोकधर्म कहता है नहीं नहीं नहीं, जो कुछ पीछे है वही श्रेष्ट है, आँख मूंद के उसका पालन करते रहो, और पीछे है क्या?
14:11लोकधर्म को इससे भी दादा मतलब नहीं है, ऐसा थोड़ी है कि लोकधर्म को मानने वाले इतिहास के तथ्यगत अध्ययन में कुछ रुची रखते हैं, वो इतिहास भी नहीं जानते हैं, उनसे पीछे क्या है, पुराने जमाने में, अरे पुराने जमाने में ऐसा थोड�
14:41एक बिलकुल परी कथा जैसी छवी है, कि रिश्यों गहरा घूम रहे हैं, और सतियुक चल रहा है, और सब कुछ बहुत अच्छा अच्छा, बढ़ियां-बढ़ियां, मीठा-मीठा है, क्योंकि तुम इतिहास पढ़िये नहीं रहे हो, तुमें पता ही नहीं है, कि दुनिय
15:11पर इसमें आहत होने अली क्या बात है, क्यों आहत हो जाएं, क्यों आहत हो जाएं, वंशाव अली में और आप पीछे तक जाओगे तो बंदर निकलेंगे, तो आहत क्या हो जाएं, है यही सच्छा ही, इसमें ऐसी क्या बात है, कोई बोले इसका मतलब तुम कह रहे हो, तु
15:41लोग धर्म का मतला पर कहानियों में जीना
15:45आज से
15:47400 करोड साल पहले
15:49फलाना यूग चल रहा था
15:50आज से 400 करोड साल पहले
15:53इंसान क्या बंदर भी नहीं था
15:55पर उन लगे हुए
15:57उनसे पूछो कि भाई ये शब्द सुने
15:59तो उन्हें पेलियोलिथिक एज, नियोलिथिक एज
16:01तू बता रहा
16:03इतने करोड साल पहले फराने रिशी हुए
16:05अरे उतने करोड साल पहले तो बंदर नए नए शुरू हुए थे
16:07तुम उन्हीं को रिशी बोल रहे हो तो बताओ
16:09हमारे जितने भी रिशी हुए हैं
16:13आप भारत की बात कर रहे हो, वो सब पिछले 3-4,000 साल के हैं,
16:1910,000 साल के भी नहीं है रिशी, तुम कहां लाखों साल,
16:22तुम कहां करोड़ों साल में पहुंचे कह रहे हो,
16:24इतने करोड़ों साल पहले ये रिशी हुए, कहां से हो गए,
16:27ये लोगधर में सब, यूई उचालना, लंबा लंबा फेकना, ये लोगधर में,
16:33और कोई पुछे कब हुए, तो बोल दो, पुराने जमाने में,
16:37once upon a time, पुराने जमाने में, अरे पुराना जमाना माने क्या,
16:41बताओ, कुछ कोई उत्तर नहीं है, क्यों, क्योंकि उत्तर पाने के लिए मेहनत करनी पड़ती है,
16:48मेहनत करने में धारनाएं तूटती है, कमर भी तूटती है,
16:53कौन मेहनत करे, इससे अच्छा जो बता दिया गया, चुपचाब उसको सुन लो,
16:57हमजमें आरी बात, लोगधर्म वो जो शिक्षा और ग्यान से बड़ी नफरत करे,
17:05जबर्दस नफरत, लोगधर्म वो जिसकी शब्दा वली में ग्यान एक गाली हो,
17:16चल रहे हैं ग्यान के पोते, ग्यान मत जाड़,
17:27बात आ रहे हैं समझें, लोगधर्म मैंने बैठे बिठाए अमर चित्रकथा का सेवन,
17:35और क्याना यही तो है, यही तत्थे है, यही तिहास है, यही धर्म है,
17:45इस हद तक जवर्दस्थ है लोगधर्म, कि कहीं पर मैंने बहुत एक साधारण सी बात गई,
17:52जब हमें आजादी मिली थी, तो ओसत जो आयू थी किसी भारतिये की,
18:01वो तीस साल भी नहीं थी, उस पर बिलकुल ट्रक भर भर के लोगों की आपतियां और आक्षे तौरगालियां आई,
18:12उनने का ये देखो, ये क्या बात, पुराने जमाने के लोग ज्यादा जीते थे, इन्हें तथ्थेों से कोई मतलब ही नहीं है,
18:21ये एक बार भी कोई किताब खोल कर नहीं देखेंगे, ये गूगल खोल कर भी नहीं देखेंगे, इनके हिसाब से,
18:281947 का भारतिये, 2024 के भारतिये से ज्यादा लाइफ एक्स्पेक्टेंसी रखता था,
18:37इनको मैंने कहा, कि गांधी का अहिंसात्मक आंदोलन, कुछ हद तक इसलिए भी था,
18:44क्योंकि उस समय पर भारत की बड़ी दुरदशा थी,
18:46इतना गरीब देश, भूखा देश, नंगा देश, ये कहां से सशस्त्र करांति कर देता,
18:57करोडों लोग तो अकाल में दाने-दाने के लिए मोताज होके मर रहे हैं,
19:01उस आदमी को तो कोई भी अगर जा करके थोड़ा से दाने दिखा देगा,
19:04तो वो उसके पीछे चल देगा, कैसे गौरव और गर्मा के लिए करांति संभव हो पाती?
19:09तो जवाब देते हैं, यह देखो, इन्हें तो पता ही नहीं है कि भारत तो अतीत में सोने की चडिया था,
19:17इनके हिसाब से पिछली शताब्दी के पूरवार्द का भारत सोने की चडिया था,
19:21यह लोग धर्म है, पुराने दवाने में हम सोने की चडिया थे,
19:25अरे कौन से पुराने दमाने में सोने की चडिया थे औरे सोने की चडिया का मतलब क्या होता है
19:30लोगधर्म की ये भी निशानी है इसे मुहावरे बहुत चलते हैं
19:33खाली मुहावरे, खोखले मुहावरे, जुमले, सोने की चडिया, कब, कहा, कैसे
19:39criteria क्या है सोने की चड़िया कहलाने का
19:42बताओ तो
19:42कुछ उत्तर नहीं है बस ऐसे ही
19:45पीछे जो कुछ है वो सब स्वरणिम है
19:47और पीछे जो कुछ है
19:51सब स्वरणिम है ये बात
19:53किस मनोविज्ञान से आ रही है कहिए
19:55तो पेश करूँ
19:55वो यहां से आ रही है कि
20:00पीछे सब से पीछे कोई
20:01रचयिता भगवान बैठा हुआ है
20:03तो जितना पीछे जाओगे
20:06तुम भगवान के उतने निकट होते जा रहे हो ना
20:08सारी समस्या है
20:11कि अतीत में तुम जितना पीछे जाओगे
20:14तुम भगवान के उतना निकट जा रहे हो इसलिए चीज़े उतनी बहतर होंगी पीछे
20:17और यही वज़य है कि बहुत सारे देशों में जहां पे धारणा से ही बहुत प्यार है
20:24जहां अपनी बिलीफ्स और जो रीजियस आगर है उनसे बहुत प्यार है जिस पाकिस्तान हो गयरा
20:31वहां पर वो किसी भी हालत में स्कूल कॉलेजों में एवॉल्यूशन पढ़ाने नहीं देते
20:38क्योंकि अगर ये तैह हो गया कि हम एवॉल्यूशन से आए हैं तो वो सारी बात खंडित हो जाएगी
20:44कि वन फाइंडे गॉड मेड मैन
20:47और सारा जो लोगधर में वो इस बात पर चलता है कि वन फाइंडे गॉड ने मैन की रचना करी
20:55और चुकि गॉड पीछे है अतीत में है तो इसलिए अतीत में तुम जितना पीछे जाओगे तुम गॉड की उतने समीप होते जाओगे
21:03और इसलिए चीज़ें उतनी सुन्दर होती जाएंगी
21:05लेकिन तथ्य ये है कि तुम पीछे जितना जाते जाओगे
21:09तुम उतना ज्यादा जंगल में प्रवेश करते जाओगे
21:12तुम जितना पीछे जाओगे तुम ईश्वर के नहीं बंदर के निकट होते जाओगे
21:17लोगधर्म वो जिसे तथेओं से बड़ी आपत्ति है बदहजमी है बिलकुल तथे नहीं चाहिए आँख बंद करके कलपना करनी है बस ये लोगधर्म है
21:33और इसलिए लोगधर्म को वास्तविक धर्म से बड़ी चिड़ है वास्तविक धर्म कहता है तथे ही सत्य का द्वार है वेदान्त कहता है व्यवहारिक तल से होकर के ही पारमार्थिक तल पर पहुँचा जा सकता है और व्यवहारिक तल का अर्थ होता है तथे
21:52विदान्त की वास्ताव में कुल बात ये है कि अगर तुम व्यवहारिक तल पर उत्कृष्ट नहीं हो तो पार्मार्थिक तल को तो बेटा भूली जाओ
22:04व्यावब हरिक तल ने ये जो जगत है हमारा सांसारिक तल और इस सांसारिक तल पर उत्कृष्ट होने का मतलब होता है चीजों को जस कतस जानना आम को आम जानना चाकू को चाकू जानना
22:18कल्पनाओं के बुलबुले नहीं उड़ाना
22:22तथ्य सत्य का द्वार है
22:26जो तथ्यों के संपर्ग में आ गया
22:29प्रयोग करके परीक्षण करके
22:32इंद्रिय और मन का सैयम रखके
22:36मात्र वही है जिसके लिए सत्य की संभावना खुलेगी
22:41यह वास्तविक धर्म है
22:43तो वास्तविक धर्म सारा सम्मान किसको देता है तथ्यों को
22:48और लोक धर्म सारा सम्मयान किसको देता है कल्पना को
22:51तो इसलिए लोक धर्म के लिए जो तथाकथित अनिश्वरवादी है
22:57वो भी उतना बड़ा खत्रा नहीं होता
22:59लोग धर्म के लिए बड़े से बड़ा खतरा होता है वास्तविक धर्म
23:02अब आपको समझ में आएगा कि मुझे पे सबसे ज़्यादा आगहात
23:10नास्तिकों द्वारा नहीं
23:11तथा कथित धर्मिकों द्वारा क्यों किये जाते हैं
23:16क्योंकि नास्तिक उनके लिए खत्रा है ही नहीं, लोक धर्म के लिए नास्तिक कोई खत्रा नहीं है, लोक धर्म के लिए खत्रा है असली धर्म
23:24बहुत सारे तो ऐसे हैं जो मुझे इतना याद करते हैं भक्त हैं बिचारे
23:32वो भक्त मुझे इतना याद करते हैं इतना उन्होंने अपने भगवान को याद किया हो तो उन्हें भगवान मिल जाते
23:37भगवान से आदा मुझे याद करते हैं
23:40दिन में दो-दो बार याद करते हैं
23:42सोचिए तो क्यों
23:44मैं क्यों
23:46इतना बड़ा उनके
23:48खृदय में शूल बनकर घुसा हुआ हूँ
23:51कारण सोच में आ रहा है
23:53लोकधर्म के लिए
23:54न बाजारवाद खतरा है
23:57बाजारवाद और लोकधर्म तो साथ चलते हैं
23:59लोकधर्म के लिए
24:00अनिश्वरवाद नास्तिक्ता ये सब भी कोई खतरा नहीं है
24:03पर लोकधर्म के लिए
24:05सत्य माने वास्तविक धर्म
24:06बहुत बड़ा खतरा है
24:07तो क्याते क्याते
24:13आप भी
24:15उपनिशत पढ़ा रहे हो
24:17पर वो लोग जो वेद वेदानत की बहुत बात करते हैं
24:20वो बिलकुल आपके कटर दुश्मन है
24:22अचार जी आप गीता पढ़ा रहे हो
24:24पर कृष्ण भक्त तो बिलकुल उतार हुए है
24:26खतम कर दें आपको ऐसा क्यों हो रहा है
24:28आप समझ में आ रहे हैं क्यों हो रहा है
24:29लोकधर्म अधर्म से नहीं घबराता
24:38क्योंकि अधर्म तो वो स्वयम है
24:39लोकधर्म सच्चे धर्म से घबराता है
24:42इसलिए मुझे जो विरोध भी आता है
24:48मालो में वो कहां से आता है
24:50पकड़िएगा
24:51मुझे विरोध
24:54अमेरिका में बैठे भारतियों या हिंदुओं से नहीं आता
24:59बैंगलोर, मुंबई, गुडगाओं, चंडीगण
25:08यहां बैठे लोगों से भी मुझे विरोध नहीं आता
25:11मुझे विरोध आता है उन शहरों से जो सबस्यादा धार्मिक है
25:17सबसे आधा जो धार्मिक जगहे हैं मुझे वहां से सबसे आधा विरोध आएगा
25:25चाहे वो काशी हो उजयाद हो मतुरा हो
25:28यहां से आएगा
25:31और इन जगहों पर भी जो ग्रामीड इलाके होंगे
25:35अशिख्षित सबसे आधा
25:37जो जितना अशिक्षित होगा, जितना अंधविश्वास की चपेट में होगा, वो उतनी कटरता से मेरा विरोध करेगा, अब वाद हो सकते हैं, अब तो पढ़े लिखे जाहिल भी होते हैं, वो अंग्रेजी में बात करते हैं, निगेटिव एनरजी, और आज, वाइब्स, क्
26:07संभावना यही है कि अगर कोई जबरदस्त गाली गलॉज कर रहा है, तो पहली बात तो वो उसने गाली गलॉज हिंदी में करी होगी, रोमन में लिखी होगी, लिखना भी नहीं आ रहा होगा, यू की स्पैलिंग लिख रहा होगा, वाई, जे, भी, अरे मदाग की बात नह
26:37क्यों, क्योंकि शिक्षा थोड़ा भरोसा देती है, कि अपने पैरों पर खड़ा हुआ जा सकता है, अपनी चेतना से जाना जा सकता है, जो जितना कमजोर होता है, वो लोकधर्म का उतना जल्दी शिकार बनता है, और इसलिए अगर लोकधर्म को फैलाना है, तो बहुत जर
27:07तो घर आसपड़ोस पूरा महला आपत्ति करने लगता है, क्योंकि अगर आप ग्यान की तरफ बढ़े, तो बहुत सारे पिंजड़ों से मुक्त हो जाओगे।
27:37सब भी अपने ही बच्चे हैं, बस भोले हैं और बहके हुए हैं।
28:07तो वास्तविक धर्म बस उनके लिए है जो बहुत कड़ी शर्तें पूरी करते हो अगर आपके ममता के कामना के स्वार्थ के तार जुड़े हुए हैं तो वास्तविक धर्म का रास्ता आपके लिए नहीं है
28:30लोक धर्म वही है जिसकी बात कठोपनिशद में हो रही थी प्रेयमार्ग
28:47जो कुछ हंकार को अच्छा लगता है वो धर्म के नाम पे करो धर्म के नाम पे मों सब कुछ करूँगा जो मुझे पसंद है जो मुझे लगता है सुख्दे देगा जो मुझे प्रिय है
29:01दो मार्गों की बात हो रही थी यह मराज नचेगेतर चर्चा में श्रेय और प्रेय तो जो प्रेय मार्ग है वो लोक धर्म है
29:11हर काम अपनी मर्जी का करो और उसको जायस ठहराने के लिए उसके साथ एक नैतिक श्रिष्ठता की भावना जोड़ो उसे धार्मिक कहके
29:20मैं ऐसे ही थोड़ी तुमसे साड़ी और गहने मांग रही हूँ मैंने पूरे तुम्हाई लिए वरत किया है
29:29प्रेय मार्ग
29:31अब ऐसे तुम किसी को पकड़ो कि मुझे गहने लाके दो मुझे साड़ी लाके दो
29:36तो कैख है काम की नकाज की दुश्मन अनाज की
29:40और ऐसे बता दो नहीं है तो धार्मिक रस्म है ना, तुम्हें ये सब लाके देना पड़ेगा, ये प्रेय मार गया, जहां धर्म के नाम पे उसब चल रहा है, जिसमें तुम्हारी मौज रहती है, रात में ऐसे बाहर निकल करके नाचो, खाल तुई, हाँ मुझे प्यार हु�
30:10प्रेय मार्ग, वही सब कुछ करना है जिसमें चनन चनन, मस्त खाना है, मस्त नाचना है, खाने में कोई बुरा ही नहीं, नाचने में कोई बुरा ही नहीं, धर्म के नाम पे क्यों कर रहे हो, करो न, बिल्कुल जी भर के करो, पर ये क्यों बोल रहे हो कि ये धर्म है, सीधे
30:40है भाई या पूडी बन रही है खीर बन रही है क्या होगा इसे भगवान खुश हो जाएंगे खाओगे तुम और निकालो
30:46कीजिः भी सुबई तुम ही और खुश भगवान होने वाले
30:53कैसि जानवर काट रहे हैं थे बखरी थे काट रहे TIME वहीजानवर क्यों कटते हैं जिनका माज स्वाधिष्थ होता है
31:05बोलो अर काट के तुम यह तो करते नहीं कि बखरी काटी है तो शेर को दे दो जिसका
31:10जिसका वो प्राकृतिक आहार है
31:11काट के जाओ
31:14शेर को दे आओ जंगल में
31:15खुद क्यों खा रहे हो
31:16अभी तो
31:21नवदुर्गा भीती है
31:24भारत में यही वो समय होता है
31:27जब मंदिरों में भी खूब बलिया चड़ती है
31:28हजारों कटते हैं
31:30भारत में नेपाल में
31:32मौज का मार्ग
31:37प्रिये मार्ग
31:40भाई अप उनको न यह काम करना
31:43पर यह काम ऐसी करेंगे तो लोग कहेंगे
31:45चीची
31:46इस ज़स्ट सेडिस्फाइंग इस कार्णल डिजायर्स
31:49तो यह काम करते हैं
31:51धार्मिक कहानी के माध्यम से ही काम करते हैं
32:01बूस आरे ही बात ये
32:04कुछ भी वहाँ ऐसा नहीं है
32:06जो कामना पूरती के लावा
32:08किसी और उद्देश के लिए हो
32:10यहां तक कि भगवत गीता में
32:11श्री कृश्ण को बोलना पड़ता है
32:12अर्जुन ये सीधा सीधा श्लोक है बिलकुल इनी शब्दों में है
32:16अर्जुन जब तक तुम वेदों की सकाम रिचाओं से उपर नहीं उठते
32:23जब तक जो काम में कर्म हैं तुम उनसे बंदे हुए हो तब तक तुम्हें मेरी बात समझ में नहीं आएगी
32:29उपनिशदों में कामनाओं की बात नहीं है पर मंत्रों में हैं वहाँ सब कुछ कामना गती है
32:38सब प्राकृतिक देवी देउताओं से कहा जा रहा है हमारी ये कामना पूरी कर दो वो कामना और कामना है सारी वही हैं पुरानी कामना है
32:46बेटा दे दो, जमीन दे दो, हमारे पशुओं के जाधा दूध आए और हमारे शत्रूओं को आग लगा के मार दो, यही है
32:56बारिश करवा दो, बिमारी ना आए
33:00यह लोगधर्म है, कामना पूर्ति का ही बेइमानी भरा नाम
33:11और वास्तविक धर्म निशकामता
33:17जहां कहीं धर्म के नाम पे आप कामना पूर्ति होते देखें, जान लीजे यह नकली धर्म है, लोगधर्म है
33:25क्योंकि वास्तविक धर्म निशकामता है, निर अहंकार होना माने निशकाम होना यह वास्तविक धर्म है
33:33यही गीटा का संदेश है, यही उपनिशदों की सीख है, यही संतों ने गागा के समझाया है
33:43एक और अपने भीतर से गलत से हमी हटा दीजेगा बिलकुल
33:54कि शुरुआत लोगधर्म से होती है और फिर वास्तिक धर्म में प्रवेश होता है
34:00मैंने पहले भी बोला है इस पर, कई लोग कहना चाते हैं अरे अभी तो शुरुआत है
34:05हम उनके साथ ज्यादा सकती नहीं करना चाते शुरुआत में तो सब लोगधर्म वाले ही होते हैं फिर धीरे आ जाएंगे
34:12नहीं गलत बोल रहे हो विरोधी हैं लोगधर्म के लिए जहर जैसा है वास्तविक धर्म
34:21लोगधर्म आगे बढ़के वास्तविक धर्म नहीं बन जाता है
34:25लोगधर्म आगे बढ़के वास्तविक धर्म का हत्यारा और बन जाता है
34:31तो ये बात नहीं है कि सब धर्म के अलग-अलग तल है
34:36एक आरंभिक तल है फिर आगे का ऐसा कुछ नहीं है
34:39लोकधर्म धर्म का आरंभिक तल नहीं है
34:41बलकि जो लोकधर्म पर चल दिया उसके लिए अब धर्म का आरंभ कभी होगा ही नहीं
34:49आरी ये बात समझ में है
34:57और यही वज़य है कि जिन समाजों में
35:05लोकधर्म जितना फैला हुआ है वो उतने ज़्यादा पिछड़े हुए है
35:08क्योंकि लोकधर्म को फैलने के लिए
35:11अशिक्षा और अज्ञान की जमीन चाहिए ही चाहिए
35:17ये हमारे लिए बहुत शर्म की बात होनी चाहिए
35:21हम अपने आपको धर्मिक कहना चाहते हैं
35:23कि दुनिया भर में अगर तुलना करके देखो और भारत में भी अगर देखो तुलना करके
35:30तो जहां लोग अपने आपको जितना ज्यादा धार्मिक बताते हैं
35:36वहां आशिक्षा उतनी ज्यादा है गरीबी उतनी ज्यादा है
35:38जो अपने आपको जितना धार्मिक बोलता है
35:45उसको उनके हाँ जाओ बीमारियां भी उतनी ज्यादा होंगी
35:51बच्चे भी उतने ज्यादा होंगे
35:52पाकिस्तान दुनिया के उन गिने चुने देशों में रह गया है जहां से पोलियो नहीं हट रहा
36:01वहाँ पर फ्हला रखा है कि ये जो कुछ भी है ये सब तो उपर वाले की देन है और ये जो पोलियो लगाने आते हैं
36:10ये पोलियो का अगर लगा देंगे तो काफिर बन जाएंगे हम
36:13वहाँ से पोलियो गी नहीं हट रहा
36:15ये लोगधर्म है
36:17पाकिस्तान की बात इसलिए करता हूँ क्योंकि हम भी अब वैसे ही बनना चाहते हैं
36:27तो इसलिए आपको अगाह करता हूँ बार बार
36:29पाकिस्तान से दुनिया से पोलियो कपका चला गया
36:37पाकिस्तान से नहीं जा पारा
36:38वो डोजी नहीं लेने देते
36:40जो वरकर्स होते हैं उनकी हत्या कर दी जाती है
36:43कहते हैं ये आया है इसलाम को खत्म करने मार दो इसको
36:45अब करिए का गूगल
36:46कौन जाए वहाँ पे दूर दराज के अंदरूनी इलाकों में
36:51जहां सब मुल्लों की जबरदस्त पकड़ है
36:54वहाँ पोलियों का काम करने जाई नहीं सकते
36:56वही भारत अब धीरे-धीरे उसी दिशा में जा रहा है
36:59बलकि तेजी से उसी दिशा में जा रहा है
37:01अशिक्षा होगी, गरीबी होगी
37:08शोशन खूब होगा
37:10जो जितने ज्यादा धार्मिक समाज है
37:14इसका मतलब क्या है
37:44इसका मतलब यह है कि अब दो तल बनते जा रहें, बस दो
37:47एक high एक low
37:49high वो जिनके पास सब कुछ है
37:53और low वो जिनके पास कुछ नहीं है
37:56middle class भी धीरे-धीरे
37:57lower class बनती जा रही है
37:59हमारी जैसे one वेवस्था है
38:02वैसे हमारी अर्थ वेवस्था होती जा रही है
38:04बड़ वस्था का भी तो यही मतलब है ना, जो उपर उसके आज सब कुछ है और सब लोग नीचे ही नीचे उनके पास कुछ नहीं है, अर्थ वस्था भी वैसी होती जा रही है, जो उपर वालन को आज सब कुछ, नीचे आज पास कुछ भी नहीं,
38:16यह एक तरह का जबरदस्त लोकतं तरा रहा है, सब एक बराबर हो जाओगे, किस अर्थ में, किसी के पास कुछ नहीं, सब एक बराबर हो गए, साम में वाद,
38:27ये लोगधर्म का काम है, मात्र भारत में नहीं, दुनिया भर में ऐसा ही है
38:35जहां जहां जहां जहां लोगधर्म की जितनी पकड़ है, वहां ये सब बाते पाई जाती है
38:41और सबसे आदा वहां क्या पाई जाता है? बहुत सारे बक्चे
38:45गजब का Fertility Rate
38:49अशिक्षा बीमारी बच्चे गरीबी असमानता हर तरीके से और बहुत सारी लडाईया युद्धोनमत्ता बेलिजरेंस
39:16लड़ने को हमेशा तयार अफगानिस्तान याद करो है कुछ नहीं लेकिन मारने को तयार
39:26है कुछ नहीं मारने को तयार
39:35और अच्छे से समझ लो लोकधर्म में मरना मारना बहुत ज़्यादा होता है और मरते मारते हमेशा गरीब है
39:41वो जो टॉप टायर है ना वो अपने बच्चों को या खुद को कभी अनुमते नहीं देगा ये मरने मारने के खेल में आने की
39:50वो नीचे वालों को बिलकुल धार में एक जजबात से भर देंगे और ये सब नीचे वाले ही मरते हैं
40:02आरही बात समझ में हैं
40:04अब ये भी देख रहा होगा कि उपर वालों का जबरदस्त स्वार्त है लोकदर्म को चलाने में
40:13हमच में हारी बात ये
40:14तो लोकदर्म का एक जबरदस्त आर्थिक तरक होता है
40:28ये लोकदर्म का काम है
40:34वर्ण विवस्था जैसी अर्थ विवस्था
41:04कर रहा हूं पिछले शीख सत्र के बाद मैंने एक और बदलाव महसूश किया है तो कहीं ना कहीं मेरे बीतर जो एक चूठा पाखंड था उसको तोड़ने में मैं ज्यादा तो ने लेकि फोड़ा बहुत काम्याब हो पाया हूं अज आचारे जी ने एक बहुत ही अच्छी बा
41:34और फिर वो फिर वो दुख मिलने पर छोड़ने की और बढ़ता है इस कारण त्याग दूखा और सन्यास पाखंड बन जाता है कर्म सम्यक्त कर रहा परेणाम से परमुक्त है सन्यास यही है वस्तुतह निश्काम ही सन्यस्त है
42:04कर दो दो दो कर दो कर दो कि आचारे जाता है
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