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00:00इतना लंबा भ्यास इसका होता रहा है, होता रहा है, तो अब कुछ ना करने का एक एक नया पन लगता है।
00:07श्री कृष्ण कहते हैं न अरुजन से, इस प्रक्रति में गति तो निरंतर है, एक शन भी नहीं होता, जब यहां कोई भी ऐसा तत्त हो जो गतिहीन पड़ा हो, करने की कोई मना ही नहीं है।
00:17जो सही है मैं उसको होने से रोक सकता हूँ, मेरा काम ये है कि जो सही है, वो हो रहा है, उसको रोको मत।
00:24मैंने इतने हजार घंटे बोला है, इतने हजार घंटे, सिर्फ इस उम्मीद में कि शायद आप दो मिनट सुन लो, आप तक बस दो मिनट बात पहुंच जाए।
00:33और जब पहुंच जाती है बात तो सबसे मेरे लिए दिल तोड़ने आली बात होती है कि आपको आनंद नहीं आता, आपको डर आता है, जब आप तो मेरी बात पहुंचती है, आप डर जाते हो, बिल्कुत सकपका जाते हो, ये क्या हो गया, है वाइबीन, होट, अई लोग कहत
01:03प्रणाम आचारे जी, अभी तक जितनी भी समस्या रही है लाइफ में, तो उसका सॉल्यूशन दिमाग में बस ऐसे आता है कि कुछ करने से, या फिर जो भी माइंड सैट एक बन जाता है, वो ऐसा ही बनता है कि कोई समस्या है, तो कुछ करके ही उसका हल निकलेगा, तो इत
01:33कुछ ना करने का एक एक नया पन लगता है, कि जैसे अगर जो हो रहा है बस उसको होने देना है, जो खुद की उपस्ति, परने की थोड़ी कोई मनाही है बिठा, श्री कृष्ण कहते है न अरुजुन से दूतर अध्याय में, कि इस प्रक्रति में गतितो निरंतर है एक्ष
02:03बिना जाने करना मूर्खता है, जब कहा जा रहा है जानो, तो ये थोड़ी कहा जा रहा है मत करो, जान लो फिर जो होना होगा हो जाएगा, और वहां कह रहे हैं हो जाएगा करना नहीं होगा, क्योंकि दोनों में फिर अंतर आ जाता है करता भाव का, निश्कामता का, करने म
02:33और वो कुछ करेगा अपनी मुर्खता और होने देने में निश्कामता है
02:39होने दे रहा हूँ
02:43सही है तो मैं कौन होता हूँ उसको बाधा देने वाला
02:48सही है तो मैं बस उसको होने दे रहा हूँ
02:51ये मेरे अधिकार में नहीं था कि जो सही है मैं उसका कारण बनूँ
02:57लेकिन ये मेरे अधिकार में जरूर है कि जो सही है मैं उसकी बाधा बन जाओं
03:04तो मैंने स्वयम पर कृपा बस इतनी करी है कि जो सही है उसके रास्ते में जो सही है वो मेरे द्वारा करा नहीं जा रहा है
03:14मैं करी नहीं सकता जो सही है
03:18लेकिन रहात यह है कि जो सही है वो सोता ही हो जाता है
03:24तो चलो
03:24जो सही है वो मैं खुद तो कर नहीं सकता
03:26तो गड़बड हो गई? नहीं गड़बड नहीं हो गई
03:29क्योंकि जो सही है वो स्वैम ही हो जाता है
03:32तो मैं कर क्या सकता हूँ, सही तो मैं कर नहीं सकता हूँ, जो सही है मैं उसको होने से रोक सकता हूँ, मेरा काम ये है कि जो सही है, वो हो रहा है, उसको रोको मत, रोको मत, हाँ, रोकने के आपके पास कारण बहुत होंगे,
03:52आज तक गलत को ही सही बोला है
03:57तो जब जीवन कुछ सही होने लगता है
04:00तो बड़ा गलत लगता है
04:01तो बहुत कारण आ जाते हैं
04:03जिन्दगी खराब हो गई
04:05ये हो गया वो हो गया
04:06रोको रोको रोको रोको
04:08रोको नहीं
04:13दो ही बाते हैं
04:15जो सही है
04:16वो तुम्हारे जानने से होगा
04:19तो जानो और जानने के बाद जो हो
04:21बिल्कुल ज़रा दूर तटस्त खड़े हो जाओ
04:26और रोकना नहीं उसको
04:27जानो और जानने से जरूर कुछ होगा
04:31जो हो रहा हो रोकने मत खड़े हो जाना
04:34होने देना
04:35और दोनों ही स्तरों पर इस बात को बाधित करा जा सकता है
04:42सबसे आसान तो यह है कि जानो ही नहीं
04:45कौन जाने
04:46कौन जाने बोल दो हमें पहले ही सब पता है
04:49क्या क्या क्यों जाने हमको पता है
04:51तो सबसे आसान तो यह है कि जानो ही नहीं
04:54और किसी संयोग से
04:59किसी अनुकंपा से
05:01अगर जानना हो गया
05:04तो फिर जानने का जो परिणाम आए
05:06जानने के बाद जो कर्म घटे
05:08उसको देखो और रहो अरे बाप रवाप
05:11ये क्या होने लग गया
05:12और उसको तुरंट
05:14रोक दो
05:17अब रुद्ध कर दो
05:18ये दो तरीके से हम
05:20जिन्दगी बरबाद कर सकते हैं
05:23आप लोग भी ये दोनों ही तरीके आजमाते हैं
05:28पहला तो तरीका ये है कि सुनेंगे ही नी
05:31और दूसरा ये है कि कभी
05:37विरल घटना घट भी गई
05:39कि जादू सा हो गया और
05:43अनायास
05:45सुन गए
05:47तो सुनने का फिर जो परणाम होगा
05:54बिलकुल उसको वीटो कर देंगे
05:56नहीं ये नहीं होने देंगे
05:58मैंने कई लोगों को देखा है
06:03आप लोगी बैठे होते हैं आप तो मुझे देख रहा हूँ
06:04जैसे आएंगे सुनने
06:07तो कुछ अपना हिसाब किताब लेके आते हैं सवाल लेके आते हैं उद्देश है कामना लेकर आते हैं ठीक है
06:14अब बैठे हैं मैं थोड़ा सा उनका आपको दिखा देता हूँ भेने करके अब बैठे हैं सुन रहे हैं इधर भी उनके लोग है इधर भी लोग है बैठे हैं सुन रहे हैं तो पहले तो पूरी कोशिश करी कर्म करने की क्या कर्म
06:30कि कुछ विचलन रहे कर्म मने यही और सुनना न पड़े तो कुछ कर्म है पैन उठा के कागस गोद रहे हैं बगवला लोग कुहनी मार रहे हैं कुछ कर रहे हैं अपने ऐसे कंधा खुजा रहे हैं कुछ भी किया चश्मा साफ कर लिया यह सब करा पर सत्रब 30 मिनट 45 मिनट अ
07:00वो चीज होने लग गई अब जो सारा कर्म है वो शिथिल पढ़ने लग जाता है मुझे दिख रहा है यह हो रहा है हो रहा है होने देना होने देना हो रहा है हो रहा है अब अभी तक खेल रहे थे इसके साथ ऐसे ऐसे यह सब कर रहे थे ऐसे लटे सवार रहे कुछ कर रहे ह
07:30लिखना भी भूल गए
07:36ठीक है?
07:38वो हो गया, अब मैं देख रहा हूँ
07:40और भीतर मेरे प्रार्थना जैसी है कि
07:42हो रहा है, होता रहे, होता रहे
07:44हो रहा है, हो रहा हो रहा
07:46हो रहा है
07:48कभी बगल वाले ने अपना पैन नीचे गिरा दिया
07:53अभी ऐसे सुन रहे थे, फिन गिरा हो रहे
07:59और फिर ऐसे देखेंगे
08:05और ऐसे देखेंगे, जैसे चोरी पकड़ी गई हो
08:09जैसे कोई लाज का काम कर रहे थे, किसी ने देख तो नहीं लिया
08:14तुरंत ये करते हो आप लोग
08:20जैसे ही उस आयाम से नीचे गिरते हो, ततकाल पहले तो कपड़े अपड़े ठीक करते हो
08:28विशेशकार अगर महिलाए हैं तो तुरंत कपड़ा और फिर ऐसे
08:33महिला हो, पुरुश हो, कोई हो, सब जैसे
08:36जैसे कुछ अन्होनी घटना घट गई थी, जो होनी नहीं चाहिए थी, और अब दुबारा उसको होने भी नहीं देंगे
08:48मैंने इतने हजार घंटे बोला है, इतने हजार घंटे
09:04बोलने का इतना काम तो इतिहास में किसी ने न किया हो
09:07इतने हजार घंटे क्यों बोला है, सिर्फ इस उम्मीद में कि शायद आप दो मिनट सुन लो
09:15आप तक बस दो मिनिट बात पहुँच जाए
09:19इसके लिए शायद 20,000 घंटे से बोल रहा हूँ
09:22और जरा भी इसमें अतिश योक्ती नहीं है
09:26बहुत लोग आप मेंसे ऐसे होंगे जिन्होंने उन 20,000 घंटों मेंसे
09:32शायद 2000 घंटे थक भी सुना हो पुराने लोग हो
09:35लेकिन उस 2000 घंटे में भी दो मिनिट भी आप तक बात पहुँची है
09:41कोई निश्चित नहीं
09:44इतनी ज्यादा बार इसी लिए करना पड़ रहा है
09:51क्योंकि आप हर बार बाधा बन कर खड़े हो रहे हो
09:55जैसे कि मेरे पास गेंद है
10:00और आपके पास कोई कोई रैकेट है पैडल है कुछ है
10:08कि मेरा �ैं बीस हजिए बार ही परयाप्ट होता नहिंड आप सामने बैठे और आपर
10:15दोन से यहां पर लगता सब खुल जाता है और आप के पास क्या है
10:20मेरा काम है फेक्ते जाना और आपका काम है
10:25तो यह लड़ाई है
10:31जिसमें मेरा काम है निशाना ले लेके फेकते जाना फेकते जाना इस उमीद में की एक तो लगे
10:38और आपका काम है लगने देन आप कर्म कर रहे हो
10:42कर्म ही बाधा है यह आपका कर्म है
10:44कहीं से भी फेक दें मैं स्पिन करा के फेक देता हूँ
10:48मैं ऐसे भी फेकता हूँ कि इनको मारना है तो पीछे दिवाल पर मारूँगा कि वहां से बाउंस करके इनके पीछे लगे तो इन्हें पता भी न चले
10:54पर इतनी चतुरा है ये पीछे खट से ऐसे रोक लेते हैं
10:58जितने तरीकों से हो सकता है उतने तरीकों से
11:05मैं कोशिश कर रहा हूँ कि आपको धोखा दे करके आपको चक्मा दे करके आपको सुला करके आपको ये कहके उधर देखो गया आप उधर देख रहे हूं इधर से यूँ मर दूँ
11:16सब कुछ करके कोशिश कर रहा हूँ कि
11:19दो मिनट की बाद तो आप तक पहुँच जाए
11:21आप नहीं पहुँचने देते
11:23आखों में लिखा होता है
11:28हम नहीं पहुँचने दे रहे
11:30और जब पहुँच जाती है बात
11:38तो सबसे मेरे लिए दिल तोड़ने आली बात होती है
11:42कि आपको आनंद नहीं आता आपको डर आता है
11:44जब आप तक मेरी बात पहुँचती है
11:48आप डर जाते हो
11:49बिलकुछ सकपका जाते हो
11:52यह क्या हो गया
11:53है वाई बीन
11:55कॉट
11:56जैसे बैट्समेन
12:00कि गिल्लियां वड़ गई हो तो उसका मुझ कैसा हो जाता है
12:02वो तो कोशिश कर रहा था कि
12:04बाल आ रही है तो हर बार उसको
12:05रोकी दूँ
12:07और एक बार
12:10लापरवाही हो गई गिल्ली वड़ गई तो पीछे देखता है
12:12तो उसकी कैथी शकल हो जाती है
12:14वैसे ही आप तक जब मेरी बात पहुंच जाती है
12:16तो आपकी शकल हो जाती है
12:18जैसे कोई गुना हो गया हो
12:20जैसे कोई शर्म की बात हो गई हो
12:22आज मैंने जितनी बाते बोली है
12:31उसमें से एक भी बात ऐसी है जो पहली बार बोली है
12:34कितना अजीव हो गया ये सब कुछ
12:43मेरी 90 प्रतिशत जो पुरानी बाते हैं recorded
12:48वो मुझे कोई सुनाए तो मुझे ताज्यूब होता है मैंने बूला कब
12:51कई कई गरंथ है
12:57मेरे सामने पढ़ते हैं मैं कहता हूँ अच्छा ये भी कोई गरंथ है
13:01ये क्या है गरंथ देखें फिर कोई बोलता है आपने इस गरंथ पर
13:0740 घंटे बोला हुआ है मुझे गरंथ का ही नाम नहीं पता
13:14और ये सब क्यों हुआ है क्योंकि 20,000 घंटे में 40 घंटे गुम हो जाते हैं
13:23याद कहां रह जाते हैं पर कर्म आपका जबरदस्त है
13:29वेल सिंक्रनाइज डांस चल रहा है इधर से गेंद आएगी और उधर रोग दी जाएगी
13:42चलिए किसी बात में तो हमारा सिंक्रमाइजेशन है
13:47जानने का प्रसेस है यही सहाज क्रम में आएगा क्या जानने का बात सहाज क्रम
14:01जब लोग कहते हैं प्र होगा क्या तो उसके प्रसेंग में कहा कि सहाज क्रम यह है कि जान लो फिर जो होना होता है वो स्वतह ही होता है
14:15लेकिन जानने का जो मतलब जानेंगे हम कैसे वो भी तो इसका भी तो एक
14:20कैसे नहीं जाना जाता है?
14:22ततकल
14:23मैं अगर आपसे कुछ बोल रहा हूं तो आप कैसे सुन रहा हूं?
14:30बूद्धी बीचर, हिंद्रियो
14:34इतना समय है? मैं आपसे लगतार बोल रहा हूं
14:37मैं आपसे लगतार बोल लहीं जा रहा हूं
14:40आप उसे कैसे सुन रहे हो?
14:44समझ के हैं, समझ जाते हैं मतलब
14:47समझना कोई कर्म हुआ क्या? कर्म हमेशा समय मांगता है
14:52मैं लगातार बोल रहा हूँ
14:55आप उसे कैसे सुन रहे हो?
15:02सुन रहे हैं बस
15:03कुछ ना करके
15:04कुछ ना करके
15:07आप उसके विशे में सोचने भी लग जाओ तो, क्योंकि सोचना भी एक सूक्ष्म, तो जानना कर्म नहीं होता, कर्म तो जानने की प्रक्रिया में बाधा बन जाता है,
15:26मैं आप से एक घंटे से लगातार बात कर रहा था, जो मैं बोल रहा हूँ, आप उसके बारे में सोचें अगर, आप सोचने की एक बड़ी विस्तरत इलाइबोरेट प्रक्रिया होती है, सोचने के लिए इस्मृत्य चाहिए, सोचने के लिए बुद्ध चाहिए, जो उसका इं
15:56जीवन का प्रवाह है सहज, इसके बारे में कुछ करके इसको नहीं जाना जाता, इसके सामने मौजूद रहकर इसको जाना जाता है, उसके बारे में कुछ करने लगोगे तो जब तक करोगे तब तक बात आगे निकल जाएगी, जानना माने सोचना नहीं होता, उपस्तित हो
16:26इसी लिए अंग्रेजी में
16:31listening और hearing
16:34दो अलग-अलग आयामों के शब्द है
16:37लिसनिंग में कोई कर्म नहीं हो सकता
16:45लिसनिंग सिर्फ तब है
16:46जब कर्म करने वाला
16:49बिल्कुल संकुचित होके, शान्त होके
16:52बैठ जाए
16:54listening करी नहीं जाती
16:56hearing करी जाती है
17:00listening को होने दिया जाता है
17:05जो कुछ भी असली है
17:08वो आपके कर्म का विशे नहीं होगा
17:12उसे होने दिया जाएगा
17:15तो यही बतात समझा रहे थे
17:19कि अध्यात्म कुछ खास करने
17:22कक्षेत्र नहीं है
17:25जो सही है उसको होने देने की बात है
17:30जो सही है वो होने के लिए हमेशा उपस्थित है
17:34पर हम कर्म करके उससे अपने आपको
17:38दूर कर लेते हैं
17:40उधारन के लिए
17:41आप यहां बैठे हुए हो आप कोई कर्म कर रहे हो क्या बैठके
17:44और अगर आप यहां सचमुच बैठे हो
17:48तो सुनना हो जाएगा
17:53पर आप एक कर्म कर सकते हो
17:55वो यह है कि यह आपके पास दो इंद्रियां है
17:57कर्म इंद्रियां
17:59दो टांगे
18:00आप इनका इस्तिमाल करें कमरे से
18:02बाहर निकल जाओ
18:04तो कर्म ने क्या करा
18:05बाधा बन गया
18:08आपको वंचित कर दिया सुनने से
18:10कर्म बाधा बनेगा
18:12उपस्थिती पर्यापत है
18:17कुछ करना नहीं है
18:18बस मौजूद होना है
18:19और जो फिर होना है
18:21वो अपने आप हो जाता है
18:22लेकिन जो अपने आप होता है
18:24उसका हमें पहले से कुछ पता नहीं होता
18:25तो हम डर जाते हैं
18:27डरते नहीं भी हैं
18:29तो निराश हो जाते हैं, कहते हैं, जो होने जा रहा है, वो अप हमारी आशा से मेल खाए न खाए, तो कभी डर में और कभी निराशा में हम कर्म करने लग जाते हैं, यह शद्धा का भाव है, शद्धा कहती है, जो हो रहा होने दो, उसके परिणाम सुरूप आगे, जो आपन
18:59आपको जान दा के नहीं करना है कुछ
19:02फ़ी लोग कहते हैं मैं बहुत कोशिश कर रहा हूं मुझसे हो नहीं पा रहा है
19:07आपकी कोशिश ही बाधा है
19:09आपकी कोशिश ही बाधा है जो होना है वो इतना सही है
19:16और इतना सच्चा है
19:19इतना सहज है
19:20कि वो तो हो ही जाएगा न
19:21जो मैं बात बोल रहा हूँ
19:24कोई 10 मिनट ठीक से सुन ले
19:26तो हो ही नहीं सकता
19:28कि भीतर
19:30पहले सब धुआ धुआ धुआ ना हो जाए
19:33फिर धुआ साफ ना हो जाए
19:34हो जाएगा अपने आप हो जाएगा
19:36आपको कोशिश थोड़ी करनी है
19:39अजारे जी आपकी बातों को
19:41जिंदगी में अमल में लाने की
19:42बहुत कोशिश करता हूँ पर हो नहीं पाता
19:44अमल में आपको लाना ही नहीं है
19:46आपको सुनना है
19:49अगर सुन लिया है तो वो अपर अमल में अपने आप आ जाएंगी आप से बिना पूछे होगा वो
19:55असली काम है वो आप से अनुमत लेकर थोड़ी होता है वो आप से बिना पूछे होगा
20:01और आप कह रहे हो आप पूरा जोर लगा रहे हो तब भी नहीं हो रहा हूँ
20:06इसके मह बतला आप ही बात हाओ
20:08आप ही बतला आप ही बात हाओ
20:16एक बच्चा है
20:17उसके सामने एक गड़िद का समी करने जो उससे हल नहीं हो रहा है
20:24मान लिजे कोई Algebra equation है
20:27वो उससे हल नहीं हो रही है
20:29X Y Z में
20:30ठीक
20:31वो उसी को लेके बैठा हुआ है
20:36कहरा है इसको हल करना है
20:37उसको हल करने से कुछ होगा
20:38कुछ उसको इनाम मिल जाएगा
20:41या उसको किसी जगहे पर
20:43अवल खोशित कर दिया जाएगा
20:45कुछ उसको लाब होगा
20:46तो वो अपना यहां पर वो समीकरन खोपड़े में रखे बैठ गया है मान लीजे मैं गनित का शिक्षक हूँ
20:53मैं सूत्र बता रहा हूँ
20:56मैं बता रहा हूँ सूत्र और उसके दिमाग में बैठा है
21:02वो एक खास समीकरण जिसको कह रहा है
21:05यह मेरी खास समस्या जिसका मुझे खास समधान चाहिए
21:08मैं जो कुछ ही बता रहा हूं क्या
21:11उससे उसकी समस्या हल होगी
21:15नहीं होगी
21:16दूसरी और अगर वो भूल जाए उसके मन में क्या है
21:19भूल जाओ
21:21तुम सूत्र समझ लो
21:24तो एक समीकरण नहीं
21:27जितने हो सकते हैं सब हल हो जाएंगे
21:30यह आपकी समस्या है आपके पास आपकी
21:32एक बात है एक समीकरण है एक समस्या है
21:35उसको आप लेके पड़े हुए हैं और बहुत जोर लगा रहे हैं
21:42इतना जोर लगा रहे हैं कि आपके पास मेरी बात सुनने की भी गुंजाईश नहीं बची है
21:49सारा जोर तो आपने अपनी समस्या में लगा दिया
21:51सुना जाता है स्वयम को और स्वयम के सरुकारों को भूल करके
22:00और भूलना कोई कर्म नहीं होता
22:02निर्बोज रहना तो चित्त का स्वभाव है याद रखना कर्म होता है
22:10आप जबरदस्ती याद न रखो तो सब भूल जाता है
22:14आप सुबह सो करके उठते हो
22:16कभी गौर करा है कि एक दो मिनिट लगते हैं रिबूट होने में
22:22अगर ये सब जो पूरा गुड़ गोबर होता है वो याद रखना स्वभाव होता
22:33तो सुबह उठने के बाद दो मिनिट क्यों लगते हैं वो सब याद आने में
22:36बहुत जिरूरी काम भी हो आप सो के उठे हो तो पलक जपकते याद नहीं आ जाता
22:41अब सोगे उठोगे पहले ऐसे आखें मीचोगे इधर उदर देखोगे कुछ करोगे
22:46घड़ी की और देखोगे दीवाल को देखोगे उठके बातरूम की और जाओगे
22:49तब याद आता है अरे बाद आज तो उसका सर फोड़ना है में इतना शान्त कैसे
22:56और फिर आज आज फोन उठा करके जान्त करना शुभाव नहीं था
23:02वो उपर एक जबरदस्ती ओड़ी हुई बात है
23:07तो जब मैं कहा रहा हूँ स्वयम को भूल कर सुना जाता है
23:11तो स्वयम को भूलना सुभाव है
23:14बाकी बाते जबरदस्ती कर्म करके पकड़ी जाती है
23:18समझा रहा हूँ कर्म बाधा है
23:20मत कर्म करो
23:22यहां तक कि समझने की कोशिश भी समझने की राह में बाधा है
23:28वो भी एक कर्म है मत करो वो कर्म
23:30बैट जाते हैं कई ऐसे शकलो नहेंगे
23:36समझने की कोशिश कर रहे है
23:39पूरा मूँ तेड़ा हुआ जा रहा है
23:41कईयों के तो गांट पड़ जाती है
23:45फिर खोलना पड़ता है
23:47उनको नहीं तो बाहर नहीं निकल पाएंगे
23:49ये समझने की कोशिश कर रहे थे
23:51चुप चाब बैठ जाओ
23:54शानती से पैठ जाओ
23:55भरोसा रखो जो होना है
24:01हो जाएगा
24:03जो समझ में आना है आ जाएगा
24:05और उस समझ में आने के बाद
24:09फिर जो कर्म होने है
24:11वो भी हो जाएगे
24:13हमें नहीं पता हो क्या कर्म होंगे
24:15ना आपको पता ना मुशको पता
24:17क्यों हो पता
24:18हो ना होगा
24:20होगा
24:22प्रेस प्रेस प्रेस
24:33अचार जी रिश्व जी है
24:3629 वर्षी है वो पूछ रहे हैं कि
24:38अचार जी मुक्तियदी
24:39कोई कर्म से नहीं मिलेगी
24:41बस जानने से मिलेगी
24:42लेकिन ये जानना भी तो हमारा चुनावी है
24:45तो फिर ये जानना भी तो कर्मी हुआ
24:48कर्म चुनाव थोड़ी होता है
24:50पागल
24:51चुनाव माने चेतना
24:59माने सुक्ष में तम बात
25:01कर्म स्थूल होता है
25:08कर्म के लिए
25:09विशय चाहिए
25:10बिना विशय के कर्म नहीं कर पाओ के
25:15जानने में क्या विशय है
25:17हाँ मैं जानूंगा
25:20इसमें क्या विशय है
25:22चेतना कि ये खुली हुई स्थित्य है वो
25:26open and receptive हाँ मैं जानूंगा
25:31जब कर्म की बात आती है तो
25:37उसमें करता लगता है
25:39करण लगता है
25:41करण माने जिस साधन से कर्म करते हो
25:48और फिर एक विशय लगता है
25:50जिसके उपर कर्म किया जाता है
25:52चुनाओ अपनी आंतरिक स्थित्य की बात है
26:00उसका संबंद किसी बाहरी विशय से नहीं है
26:02मैं जानूंगा
26:04क्या जानूंगा हम अभी बात नहीं कर रहे
26:11जो कुछ भी है सब जानूंगा
26:14हम किसी विशय की बात करी नहीं रहे है
26:17सब का निर्वान हो गया
26:22हुआ हुआ हुआ है
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