Skip to playerSkip to main content
  • 4 days ago
सवाईमाधोपुर. प्रदेशभर में थ्री डिजिट नंबर घोटाले की परतें खुलने के बाद जहां राज्य स्तर पर जांच तेज हुई, वहीं जिले में यह कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी है। उच्च स्तर पर बैकलॉग, अवैध स्वैपिंग, फर्जी दस्तावेजों पर रिअसाइनमेंट, चैसिस और इंजन नंबर में हेरफेर जैसी गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा हुआ था। मोटर वाहन अधिनियम 1988 के प्रतिकूल पाए गए पंजीयन को निरस्त करने के आदेश भी जारी हुए, वाहन मालिकों को तीन दिन में दस्तावेजों सहित भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए। लेकिन सवाईमाधोपुर परिवहन विभाग की सुस्ती और मिलीभगत के खेल ने जांच को ठप कर दिया है। नोटिस जारी होने के बावजूद न तो एफआईआर दर्ज हुई और न ही किसी रसूखदार पर कार्रवाई। नतीजा यह कि घोटाले की गूंज के बीच जिले में सब कुछ जस का तस है।

परिवहन विभाग मुख्यालय ने करीब 20 दिन पहले ही डीटीओ की नियुक्ति की थी ताकि बड़े घोटाले की जांच आगे बढ़ सकें। लेकिन नियुक्ति के बाद से ही विभाग में मिलीभगत का खेल शुरू हो गया है। रसूखदारों पर न तो एफआईआर दर्ज हुई है और न ही किसी तरह की ठोस कार्रवाई। नोटिस जारी होने के बावजूद लग्जरी वाहन जांच के लिए विभाग में आए जरूर लेकिन कार्रवाई की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
जानकारी के अनुसार राज्य स्तर पर पुरानी सीरीज (थ्री-डिजिट) के वाहनों से जुड़े मामलों की गहन जांच में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच में पाया कि कई वाहनों के पंजीयन में नियम विरुद्ध बैकलॉग, अवैध स्वैपिंग, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रिअसाइनमेंट, चैसिस और इंजन नंबर में हेरफेर, वाहन श्रेणी/वर्ग में अवैध परिवर्तन जैसी गंभीर त्रुटियां की गई हैं। कुछ वाहनों का पंजीयन मोटर वाहन अधिनियम 1988 और विभागीय निर्देशों के प्रतिकूल मिला है। ऐसे में मुख्यालय पर उच्च स्तर पर प्रदेशभर में ऐसे मामलों में मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 55(5) के तहत पंजीयन प्रमाण पत्र निरस्त करने के आदेश दिए है। वहीं वाहन मालिकों को अपने पंजीकृत, हस्तांतरित या पता परिवर्तित वाहन का भौतिक सत्यापन कराने के लिए आगामी तीन दिवस में संबंधित दस्तावेजों सहित कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए है। निर्धारित समय में अनुपस्थित रहने पर पंजीयन प्रमाण पत्र निरस्त कर करने और अपर परिवहन आयुक्त (प्रशा.) के आदेशानुसार विधिक कार्रवाई करने के आदेश दिए है लेकिन सवाईमाधोपुर जिले में परिवहन विभाग की ओर से अब तक न तो कोई कार्रवाई हुई है और न ही संबंधितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। नोटिस जारी होने के बावजूद विभागीय स्तर पर जांच ठप पड़ी है। इससे साफ है कि उच्च स्तर पर आदेश जारी होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर लापरवाही और मिलीभगत का खेल जारी है।

लाइसेंस के लिए दलालों का दबदबा

परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का खेल एक बार फिर खुलकर सामने आ रहा है। आम आदमी को लाइसेंस बनाने, आरसी परिवर्तन करवाने जैसे कामों के लिए दलालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। मोटी फीस वसूली जा रही है और यदि कोई व्यक्ति खुद से लाइसेंस बनवाना चाहे तो कर्मचारियों की ओर से ओटीपी और अप्रूवल न मिलने का बहाना बनाकर उसे टरका दिया जाता है। डीटीओ से मिलने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। इसके चलते आमजन के काम अटके हैं।
जांच में ढिलाई, घोटाले पर पर्दा
जानकारी के अनुसार रसूखदारों को नोटिस दिए गए थे, लेकिन जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। यह स्थिति आमजन में गहरी नाराजगी पैदा कर रही है क्योंकि भ्रष्टाचार और लापरवाही के चलते जनता को सीधी परेशानी झेलनी पड़ रही है। उधर, थ्री डिजिट नंबर घोटाले में तत्कालीन प्रादेशिक परिवहन अधिकारी जगदीश अमरावती पहले ही निलंबित हो चुके हैं। इसके बावजूद सवाईमाधोपुर में जांच की रफ्तार धीमी है और जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं।

.......................
इनका कहना है...

थ्री डिजिट नंबर घोटाला मामले में जिले में कार्रवाई की मुझे जानकारी नहीं है। अब तक किसी पर एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। इसकी जांच कराई जाएगी।
अभिजीत सिंह, जिला परिवहन अधिकारी, सवाईमाधोपुर

Category

🗞
News
Transcript
00:00..
00:06..
00:11..
00:15..
00:20..
Comments

Recommended