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  • 17 hours ago
दिल्ली में पराक्रम दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके पराक्रम, साहस और राष्ट्रभक्ति को याद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी का जीवन और संघर्ष आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है और उनका योगदान देश की आत्मा में हमेशा जीवित रहेगा। कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रभक्ति का माहौल देखने को मिला। पीएम मोदी के संबोधन से जुड़ी पूरी बातें और दृश्य इस वीडियो में देखिए। 
 

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Transcript
00:00एड्मिरल डिके जोसी जी, नेता जी सुभासेंद्र बोस, आये ने, ट्रस्क के अध्यक्ष, ब्रिगेडियर, आर एस छिकारा जी, भारतिय स्वतंतरता अंदोलन के सहभागी,
00:23और आयने के सास्वत पुरूस, लेटनेंट आर माध्वन जी, तैईश्ट जन्वरी की ये गवरोवशाली तारीक,
00:41नेता जी सुभास चंद्र बोस की जन्मजेंती, नेता जी का पराक्रम, उनका शाओरिय,
00:54आज की ये तारीक हमें प्रेणा भी देती हैं, हमें नेता जी के प्रती स्रद्धा भाव से भी भरती हैं,
01:08साथियों, बीते वर्षों में, पराक्रम दिवस, देश की राष्ट्रिय भावना का, नेशनल स्पिरिट का, एक अभिन्न पर्व बन गया है,
01:28ये एक सुखत संयोग है, कि 23 जन्वरी को पराक्रम दिवस, 25 जन्वरी को मतदाता दिवस, 26 जन्वरी को गणतंतर दिवस, 29 जन्वरी को बिटिंग रिट्रिट,
01:52और फिर 30 जन्वरी को पुझ्य बापु की पुण्डिति थी तक, गणतंतर का महापर्व, मनाय जाने की एक नई परंपरा बन गई है,
02:10मैं इस अवसर पर आप सभी को और सभी देश वास्यों को पराक्रम दिवस की अनेक अनेक शुब कामनाई देता हूं,
02:26भायों भेनों, साल 2026 में पराक्रम दिवस का मुख्य आयोजन अन्डमान निकोबार में हो रहा है,
02:40शौरिय, पराक्रम और बलिदामों से ओत प्रोथ अन्डमान निकोबार का इतिहास,
02:54यहां की सेलूलर जेल में वीर सावकर जैसे अन्गिनित देश बक्तों की गाथाएं,
03:05नेताजी सुभास्चंद्र बोच से इसका सम्मंद, यह बातें पराक्रम दिवस के इस आयोजन को और भी खास बनाती हैं,
03:23अन्डमान की धर्ती, इस विश्वास का प्रतीक है कि स्वतंत्रता का विचार कभी भी समाप्त नहीं होता,
03:38यहां कितने ही क्रांतिकारियों को यातनाएं दी गई, यहां कितने ही सेनानियों के प्राणों की आहुती हुई,
03:52लेकिन स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी बूजने की जगह और तेज होती चली गई,
04:06और उसका परिणाम यह हुआ कि अन्डमान निकोबार की यही धर्ती आजहाद भारत के प्रतम सुर्योदय की साक्षी बनी,
04:221947 से भी पहले 30 दिसंबर 1943 उस दिन यहां समंदर की लहरों को साक्षी रखते हुए भारत का तिरंगा फैराया गया,
04:49मुझे आद है, साल 2018 में, जब इस महान घटना के 75 साल हुए थे,
05:02तब 30 दिसंबर के ही दिन मुझे अंडमान में उसी स्थान पर तिरंगा फैराने का सवभाग्य मिला था,
05:16राष्ट्र गान की धून पर, समंदर के तट पर, तेज हवाओं में लहरा था वो तरंगा,
05:29जैसे आवान कर रहा था, कि देखो, आज कितने अंगिनित स्वातंत्र सेनानियों के सपने पूरे हुए हैं,
05:43भाईयों बहनों, आजादी के बाद, अंडबान डिकोवार दिप समुओं के, इस गवरोव शाली इतिहास को, सह जा जाना चाहिए था,
06:01लेकिन उस दोर में सत्ता में पहुँचे लोगों के भीतर, एक असुरक्षा की भावना थी,
06:13वो आजादी का स्व्रे केवल, केवल एक परिवार तक सिमित रखना चाहते थे,
06:23इस राजनितिक स्वार्थ में देश के इतिहास की उपेख्षा कर दी गई,
06:32अंडबान निकोबार को भी गुलामी की पहचान से जुड़ा रहने दिया गया,
06:40इसके द्वीप आजादी के सत्तर साल बाद भी अंग्रेज अधिकारियों के नाम से जाने जाते थे,
06:51हमने इतिहास के इस अन्याए को खत्ब गिया,
06:57इसलिए पॉर्ट ब्लेर आज स्री विजय पुरम बन चुका है,
07:05श्री विजय पुरम ये नया नाम, ये पहचान नेता जी की विजय की याद दिलाती है,
07:16इसी तरह दूसरे अन्य द्विपों के नाम भी स्वराज दिप, शहीद दिप और सुभास दिप रखे गए,
07:31साल 2023 में अन्डमान के 21 द्विपों के नाम भी भारतिय सेना के जाँबाज वीर पुरुष 21 परम वीर चक्र विजयताओं के नाम पर रखे गए,
07:55आज अन्डमान निकोबार के गुलामी के नाम मिट रहे हैं,
08:00आज़ाद भारत के नए नाम अपनी पहचान बना रहे हैं,
08:07साथियों, नेता जी सुभास चंद्र बोश आज़ादी की लड़ाई के महानायक के साथ ही स्वतंत्र भारत के महान स्वप्न द्रश्ठा थे,
08:22उन्होंने एक ऐसे भारत की संकल्पना की थी,
08:29जिसका स्वरूप आधुनिक हो, और उसकी आत्मा भारत की पुरातन चेतना से जुड़ी हो,
08:40नेता जी के इस विजन से, आज की पीड़ी को परिचीत कराना हम सभी का दाईत्व हैं,
08:54और मुझे खुशी है कि हमारी सरकार इस दाईत्व को बखुबी निभा रही हैं,
09:04हमने दिल्ली के लाल कीले में नेता जी सुभास को समर्पित मुझियम का निर्मान किया है,
09:14इंडिया गेट के समीप नेता जी की विशाल प्रतिमा लगाई गई हैं,
09:22गणतंत्र दिवस की परेड में हिंद फोच के योगदान को भी देश ने याद किया है,
09:30हमने सुभास चंद्रबोश आपदा प्रबंदन पुरस्कार भी शुरू किये हैं,
09:41इविविन्न कार्य केवल नेता जी सुभास चंद्रबोश का सम्मान ही नहीं है,
09:49यह हमारी युवा पिड़ी के लिए और भविश्य के भी अमर प्रेणा के स्रोत है,
09:58अपने आदर्सों का ये सन्मान, उनसे प्रेणा, यही विश्य भारत के हमारे संकल्प को उर्जा और आत्म विश्वास से भर रहा है,
10:17साथ क्यों, एक कमजोर राष्का अपने लक्षों तक पहुँचना मुश्टिल होता है,
10:27इसलिए नेताजी सुभास ने हमेशना ससक्त राष्क का सपना देखा,
10:39आज एक कीश्वी सदी का भारत भी एक ससक्त और द्रढ़ प्रतिग्य राष्क के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है,
10:53अभी अभी आपने देखा है, आपरेशन सिंदूर भारत को जख्व देने वालों के घर में गुज़कर, हमने उन्हें तबाह कर दिया,
11:06भारत आज शक्ती बढ़ाना भी जानता है, शक्ती संबालना भी जानता है, और उसका इस्तेमाल करना भी जानता है,
11:22नेता जी सुभास के समर्थ भारत के वीजन पर चलते हुए, आज हम डिफेंस सेक्टर को आत्मन निर्फर बनाने में जुटे हैं,
11:34पहले भारत सिर्फ विदेशों के हत्यार मंगाने पर आस्रित रहता था, आज हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट तेईस हजार करोड को पार कर चुका है,
11:50भारत में बनी ब्रह्मोच और दूसरी मिसाइले कितने ही देशों का ध्यान खीच रही हैं,
12:01हम स्वदेशी की ताकत से भारत की सेनाओं का आधुनी करण कर रहे हैं,
12:09भाईयो बहनों, आज हम एक्सो चालिस करोड देश वासी विख्षिद भारत के संकर्प के लिए एक जूट होकर काम कर रहे हैं,
12:26विख्षिद भारत का रास्ता आत्म निर्भर भारत अभ्यान से मजबूत होता है,
12:35इसे स्वदेशी के मंत्र से ताकत बिलती है,
12:41मुझे विश्वास है, विख्षिद भारत की स्यात्रा में पराक्रम दिवस की प्रेणा हमें निरंतर इसी तरह बल देती रहेगी,
12:55मैं एक बार फिर आप सभी को नेता जी सुभास की जन्म जन्ती की बहुत बहुत बधाई देता हूं,
13:08भारत माता की जये!
13:25झाल
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