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  • 6 hours ago
अपने_GST_इलेक्ट्रॉनिक_लेजर्स_को_समझें

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00:00GST, ये नाम सुनते ही थोड़ा मुश्किल लगता है, है न? लेकिन चलिए, आज इसके एक बहुत जरूरी हिस्से, यानि electronic ledgers को बिलकुल आसान भाशा में समझते हैं. तो ये GST electronic ledgers आखिर हैं क्या? इन्हें समझने का सबसे अच्छा तरीका है एक digital wallet की तरह सोचना. जी हां, �
00:30digital wallet की पहली pocket है cash pocket, जिसे हम आधिकारिक तौर पर कहते हैं electronic cash ledger. अब इसका नाम ही सब कुछ बता देता है, electronic cash ledger. मतलब ये वो ledger है जहां एक taxpayer द्वारा GST portal पर जमा किया गया असली cash balance दिखता है. बिलकुल एक bank खाते की तरह जहां पैसा जमा होता है. तो इसमें पैसा आता
01:00या फिर over the counter payment से भी. और इस पैसे का इस्तमाल कहा होता है? इसका इस्तमाल GST tax, ब्याज, late fees, penalty, मतलब GST से जुड़ा हर तरह का भुकतान करने के लिए किया जा सकता है. एक उधारन से समझते हैं, मान लीजे cash ledger में 50,000 रुपे जमा किये गए. फिर उसमें से 30,000 रुपे का
01:30इन्हें आगे के बुकतानों के लिए रखा जा सकता है, या फिर इनका refund भी claim किया जा सकता है. चलिए, अब wallet की दूसरी pocket देखते हैं. ये pocket थोड़ी अलग है. ये एक तरहां से rewards account जैसी है. इसे कहते हैं electronic credit ledger. तो इसमें क्या होता है? ये ledger business के लिए की गई खरीदारी पर
02:00के लिए कुछ खरीदता है, तो उस पर दिये गए tax का credit यहां जमा हो जाता है. और सबसे अच्छी बात, ये credit अपने आप GSTR 1, GSTR 3B और GSTR 2B filing के आधार पर यहां जुड़ जाता है. मतलब, खुद से entry करने का कोई जंजट नहीं. इसमें IGST, CGST, SGST हर तरहां के credit का हिसाब रह
02:30IGST tax का भुकतान करने के लिए हो सकता है. इससे ब्याज, late fees या penalty नहीं भरी जा सकती. ये एक बहुत बड़ा अंतर है. तो इस मामले में देखे तो business की खरीदारी से कुल 18,000 रुपे का input tax credit जमा हो गया है. अब ये 18,000 रुपे आगे जब tax देना होगा, तो उस देंदारी को स
03:00इसमाल होगा बिल चुकाने में. और वो बिल कहां दिखता है? वो दिखता है electronic liability ledger में. ये ledger आसान शब्दों में एक business की कुल tax देंदारी को दिखाता है. मतलब GST और दूसरे बकाये मिला कर कुल कितना पैसा सरकार को देना है, वो सब यहां record होता है. तो ये देंदारी बं
03:30जाती है और ये कम कैसे होती है? आसान है जब cash या credit ledger से भुकतान कर दिया जाता है. ठीक है, तो अब तीनों हिस्सों को एक साथ जोड़ कर देखते हैं. देंदारी पता चल गई और हमारे पास cash और credit की दो pockets भी हैं. तो आखिर भुकतान होता कैसे है? चलिए, पूरे process को step by
04:00पैसा है, उसका इस्तमाल होगा. हमारे पास 25,000 का credit है, तो वो इस्तमाल कर लिया. तीसरा कदम, अब बचे कितने? 15,000. ये बची हुई रकम अब cash ledger से चुकाई जाएगी. और चौथा कदम हो गया. अंतिम देंदारी अब शुन्य है. बिल क्लियर! तो अब तक जो भी हमने
04:30refund मिल सकता है और इससे tax, ब्याज, late fees सब कुछ चुकाया जा सकता है. Credit ledger ITC balance के लिए है. इससे refund नहीं मिलता और इसका इस्तमाल सिर्फ tax भुकतान के लिए होता है. और liability ledger तो बस ये बताता है कि कितना tax देना है. काफी साफ है ना? तो इसको ऐसे याद रखिए, cash ledger मतलब �
05:00आरी है, यानि कुल tax जो चुकाना है. तो अब जब ये सारा पैसो का लेंदेन समझ आ गया है, cash कहां से आता है, credit कहां से मिलता है और भुकतान कैसे होता है, तो एक बड़ा सवाल सामने आता है. इस प्रक्रिया को अच्छे से समझ कर, क्या कोई भी business अपने finance को बहतर तरीके
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