बेबाक भाषा के ख़ास कार्यक्रम Sunday Offbeat में पत्रकार भाषा सिंह ने मिथक और विज्ञान के बहाने आज के समय-समाज-सियासत पर बात की प्रसिद्ध शायर और वैज्ञानिक गौहर रज़ा से।
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00:00बाबाओं के आश्रमों में पले हुए लोग अगर देश की बागडोर समालने तो फिर वो बाबाओं के रास्ते पर चलाने की कोशिश करेंगे
00:12पालिटिक्स का मतलब ये कि कम से कम ये समझ तो होनी चाहिए कि जो टरंप कर रहा है और जो हमारे देश में उसके साथ तालुकात हैं और हमारे प्राइम इनिस्टर जो कर रहा है उसका असर हमारे बच्चों के उपर हमारे उपर सीधा बढ़ता है
00:27फासिवादी ताकतों के लिए और मैं RSS को फासिवादी ताकत ही मानता हूँ फासिवादी ताकतें जो हैं वो नफरत के आधार पर ही आगे बढ़ती हैं लोग साइंस के बारे में विग्यान के बारे में विग्यानिक दृष्टी के बारे में जानना चाहते हैं
00:43नमस्कार दोस्तों बेबाग भाशा की खास पेशकर्श में आपका स्वागत है आज हम मुलाकात आपकी करवाने जा रहे हैं गौहर रजा सहाब से जो शायर हैं विग्यानिक हैं डॉक्यूमेंटरी फिल्मेकर हैं और आज के हालाग पर बहुत तीकी नज़र रखने वाले शक
01:13अंग्रेजी में आचुकी है मराठी में आचुकी है हो और हमें उम्मीद है कि जल्दी और भाशाओं में भी आएगी वो उस समय इस किताब पर चर्चा है जिस समय देश में साइन्स विग्यान साइंटिफिक टेमपर बहुत तेजी से गिर रहा है उस पर हमले बहुत तेज
01:43खास बनाती है बेबाग भाशा में आपका बहुत-बहुत स्वागत है और यहां पर हमने जब हिंदी में किताब आई थी मिथकों से विज्ञान तक तब चर्चा की थी और उसमें भी जो सबसे खास बात मुझे लगी थी वो इसकी जबान थी यह बताएं गोहर की आप अपनी
02:13कौन से अपनी पहचान है यह सारी पहचाने प्रिये हैं और यह सारी पहचाने जो हैं वही शायद कम्प्लीट इंसान मनाती है मुझे लगेगा कि अगर इन में से कुछ भी एक चीज भी अलग कर दी जाए तो मैं अधूरा रह जाओंगा सिर्व यह नहीं है कि एक चौथा ह
02:43लोग कहते हैं आप साइंटिस्ट हैं आप पॉलिटिक्स पे क्यों बात कर रहे हैं या आप साइंटिस्ट हैं आप शायर कैसे हो गए तो इन में अगर आपको पॉलिटिक्स नहीं आती तो फिर आपको यह भी नहीं आता कि साइंस के ओपर क्या उसका असर पढ़ने जा रहा
03:13प्लम चेंज किया गया है, अब UGCE और सब को मर्च किया जा रहा है, तो ये तो डारेक्ली मेरी जिन्दगी के उपर अब इसा डालते हैं, बड़ी अजीब बात थी, अभी मैं किताब के ही सिलसिले में गया हुआ था, गुजरात, किताब कमा, गुजराती का आपने जिक्र ने
03:43कि जब से ये टरिफ लगा है, तब से अमरीका ने लगाया, तब से यहां की इंडस्ट्री, जो ओनमेंट्स की इंडस्ट्री थी, उसका ये हाल है कि लोगों ने अपने बच्चों को निकाल लिया है, उनके पास पैसे नहीं बचे हैं, फीस देने के स्कूलों से, तो ट्रम्
04:13लिख भी नहीं दिकाई दे रहें, फिकटो आप अंडे हैं, फिर आप बात करेंगे कि वो तो वहाँ पर हो रहा है, और इसका सूरत से क्या कनेक्षन है, और बच्चे की जिंठी से क्या कनेक्षन है, और वो भी सूरत के गाउं, आसपास के जगे, जहां से मौँस्दूर आ
04:43आप एलेक्शन लड़ने और जिंदाबाद मुर्दाबाद करने चल दें
04:46पालिटिक्स का मतलब यह कि कम से कम यह समझ तो होनी चाहिए
04:50कि जो टरंप कर रहा है और जो हमारे देश में उसके साथ तालुकात है
04:54और हमारे प्राइम इनिस्टर जो कर रहा है
04:57उसका असर हमारे बच्चों के उपर हमारे उपर सीधा पड़ता है
05:01गौहर आपकी किताब अंग्रेजी हिंदी में जो टाइटल है
05:06मिथक से विग्यान तर अंग्रेजी में from mist to science
05:10लेकिन दोहजार परच्चस अब खत्म हो रहा है
05:13और हम देख रहे हैं कि कहानी उल्टी चल रही है
05:17साइन्स अब हम मिथक पर जा रहे हैं
05:19और मिथक ही साइन्स हो रहे हैं
05:23साइन्स के तोर पर पेश किये जा रहे हैं
05:25और ये कोई fringe element भी नहीं कर रहा
05:28ये दरसल जिनके कंदों पर
05:32इस मुल्क को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है
05:34वहां से ये unscientific temper
05:36या अव विग्यानिक सोच
05:38या जो मिथक हैं वहां आ रहे हैं
05:41इसे आप कैसे देख रहे हैं
05:42ये क्या सिलसला है
05:44मुझे लगता है कि इनके कंदों पर
05:46गयर जिम्मेदारी डाल दी गई है
05:48बजाए जिम्मेदारी के
05:49इनके कंदे इसलिए बने ही नहीं थे
05:52कि देश की जिम्मेदारी
05:55इनके उपर डाली जाए
05:56बाबाओं के
05:58आश्रमों में पले हुए
06:00लोग अगर देश की बागडोर समालने
06:03तो फिर वो बाबाओं के रास्ते पर चलाने की कोशिश करेंगे
06:07जिसमें सबसे बड़ा कतले आम पहला कतले आम जो होगा
06:11वो साइंस का ही होगा
06:12और वो हमें होता हुआ दिखाई दे रहा है
06:15जहां तक अवाम का सवाल है
06:18मैं 30 साल तक जाता रहा लगातार कुम मेले में
06:25और कुम मेले के सारी रिसरच ये कहती है
06:29कि लोगों के बीच में अंधविश्वास कम हुए
06:31लोगों के बीच में साइंस की जानकारी भी बढ़ी है
06:36और साइंस में विश्वास भी बढ़ा है
06:39और ये भी कहना बहुत ज़रूरी है
06:41कि साइनटिस्ट की बहुत इजजट है
06:43इस मुल्क के अंदर अवाम के बीच में
06:46ये अलग बात है कि
06:47पॉलिटिशन्स उनकी कोई इजजट नहीं करते
06:49साइन्स की भी इजजट नहीं करते
06:51साइन्टिफिक टेमपर की भी
06:53इज़त नहीं करते और वो
06:55सिल्सिला प्राधान मंतरी से सीधे शुरू होता है
06:58कि हमें इज़त करनी ही नहीं है
07:00साइंस की
07:02तो ऐसे में ये कहना
07:05कि अवाम के बीच में
07:07कम हो रही है मैंनी समझता कि
07:09वो सही आंकलन होगा
07:11लेकि बाबाओं का जो मठ है
07:13और जिस तरह से लाखों की संक्या
07:15में लोग जाते हैं
07:16और अब जो बाबा है वो तो
07:19उस तरह के भी बाबा नहीं है अब 26-26 साल
07:21के धिरेन शास्त्री जैसे
07:23सनातन धर्म हिंदू राष्ट वाले बाबा है
07:25लेकिन भीड तो आम आदमी
07:27की ही है बहाँ पर
07:28ये कौन लोग है
07:30मैं अक्सर
07:33ये कहा करता हूँ कि जब
07:34गडिश जीन दूद पीना
07:37शुरू किया तो ऐसा
07:39लगा था कि
07:40पूरे देश की सारी जंता
07:42उमड के सड़क पर आ गई है
07:44और मंदिरों के चारों तरफ
07:46उस चमतकार को देख ले
07:48ये चमतकार में
07:50पार्टिसिपेट करने के लिए चली गई है
07:52लेकिन उस वक्त जो
07:54सर्वे किया था
07:55उसके अनुसार वो बहुँ चोटा सर्वे था
07:57लेकिन उसके अनुसार
07:59सिर्फ इस देश की 20% चंता
08:01बाहर निकल थी
08:03और उसमें भी हिंदू
08:04बाहर निकले थे
08:06जो 20% हिंदू थे
08:08तो 80% तो नहीं निकले थे
08:12हमारी नजर 80% पे नहीं है
08:15वो 20% पे है
08:16तो वही बात हमको
08:18यह विश्वास आपको आज भी है
08:20मुझे आज भी यह विश्वास है
08:22कि इस देश की जनता
08:24अभी भी
08:26साइंस के लिए
08:27विग्यान और विग्यानिकों
08:30और विग्यानिक संस्थानों के लिए
08:32जितनी इज़त है उसके दिल में
08:34वो और मुलकों में
08:36ज़रा कम देखने को मिलती है
08:38हमको
08:38मैंने कही
08:41यह मेरा एरिया है
08:43तो जाहर है कि मैं सर्वेज देखता रहता हूं
08:45लगाता
08:46तो मुझे ये अंदादा है
08:48कि हमारी देश की जनता के दिल में
08:52जो नई नौलिज के लिए
08:54जो कल नौलिज आई है
08:55जो वैज्ञानिक नौलिज है
08:57उसके लिए इज़त बहुत है
08:58खुँ सकता है वो समझ ना पाएं
09:00ये अलग बात है
09:02बहुत सारी नौलिज को
09:03पर जो सवाल आप उठा रहे हैं
09:05वो बहुत इंपॉर्टन सवाल है
09:06एक तरफ तो पुलिटिकल फोर्सेज है
09:09जो अंदविश्वास का
09:13धरम के नाम पर
09:15उसके साथ मिक्स करके
09:17नफरत ये दोनों चीज़ों को
09:19आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं
09:22दूसरी तरफ ये बाबा है
09:24जो एजेंट है
09:25इनको अपना एक मार्केट
09:28दिखाई देता है मुलक के अंदर
09:30और उनका प्रोड़क्ट ही
09:32अंधविश्वास है यानि वो अंधविश्वास
09:34बेच रहे हैं जनता के बीच में
09:36जनता थोड़ी देर
09:38सुनती है उनको
09:40कभी कभी होता है कि आव वाओ
09:42चमतकार हो गया ये कर दिया उस बाबा ने
09:44उसमें कभी
09:47बह भी जाते हैं लोग
09:47लेकिन
09:49ज्यादा तर अवाम
09:52इस मुलक के साइंस जानना चाहते हैं
09:54विग्यान जानना चाहते हैं
09:56विग्यान के आधार के उपर
09:57अपनी जिन्दगी गुजारना चाहते हैं
09:59having said that
10:00एक बड़ी
10:01अजीब बात शुरुवात में ही
10:06पता लगी जब मैंने
10:07इस एरिया में काम करना शुरू किया
10:09और वो ये थी जिसका दिक्र मैंने
10:11किताब में भी किया है
10:12कि एक आदमी के
10:15दिमाग का जो
10:16सोच है उसकी उसके ढाचे
10:19के अंदर एक हिस्सा ऐसा होता है
10:21जो साइन्स एक्स्प्लेन नहीं कर सकती
10:23यानि मैं बार बार इस्तमाल करता हूँ
10:27कि
10:27किसी की आवाज क्यों पसंद है
10:31कोई गाना क्यों पसंद आ रहा है किसी एक का
10:35किसी की कोई
10:37नजम क्यों पसंद आ रही है
10:39कोई रंग क्यों पसंद है आपको
10:40कोई फल क्यों पसंद है काने में
10:43इसकी कोई
10:44रैशनालिटी नहीं है ये साइन्स नहीं
10:47बता सकती कि इस वज़ा से है
10:48तो यहां से
10:51सिंसिला शुरू होता है
10:52और वो ही चीज़ हमको धर्मिक विश्वासों में भी दिखाई देती है
10:57और दूसी तरफ हम बिल्कुल रैशनल होते हैं
11:00यानि सबसे अच्छी एक्जाम्पल जो मुझे लगती है इसके लिए वो यही है
11:05कि शादी में आपकी जेब में कितने पैसे हैं ये डिसाइड गरता है
11:10कि आप कितना कहां कितने लोगों को क्या खाना खिलाने जा रहे है
11:16इसके लिए आप किसी धार्मिक आदमी को नहीं चुनते
11:22ये फैसला आपका सिर्व जेब के उपर डिपेंड करता है
11:26कौन से भराद घर में होगा
11:28डिस्टेंस क्या आए लोग आप आएंगे नहीं आप आएंगे पार्किंग है नहीं है
11:31पर सामगरी क्या होगी
11:35निकापड़ा जाएगा
11:36या फिरे लगाए जाएंगे
11:38तो ये जो बदलाओ है आदमी के अंदर
11:43ये बड़ा सिंपल सा बदलाओ होता है
11:45बाबाओं ने और पुलिटिकल फोर्सेज ने इस बात को बहुत अच्छी तरह से पहचान लिया है
11:51उनकी कोशिश ये है कि
11:54अवाम के बीच में एक नफरत का टुकड़ा है
11:58एक महभबत का टुकड़ा है
12:00हम नफरत के टुकड़े को बड़ा कर देते हैं
12:03और उसका इस्तमाल करते हैं अपनी पॉलिटिक्स के लिए
12:06हम इर्राशनल जो हिस्सा है दिमाग का सोच का
12:12हम उसको बड़ा कर देते हैं
12:13कोशिश ही हमारी रहेगी ताकि हमारा प्रोड़क्ट जादा बिक सके
12:16और हम गद्धी पे बैठे रहे हैं लोग बेवकूप बनते रहें
12:19पर इसमें प्राब्लम यह है कि रोज निया तमाशा दिखाना पड़ता है
12:23लेकिन तमाशा तो चला ही जा रहा है और सामने विज्ञानिक भी बैठे रहते हैं
12:27तो भी वो अंध्विश्वास पर ताली बजाते रहते हैं तो मोदी जी के तमाम प्लास्टिक सर्जरी से लेकर नाले से गैस वाला सिलसिला और एक्स्टा टू एबी एक्स्टा एक्स्टा टू एबी मिलता है कि नहीं मिलता है
12:52यह तू एबी कहां से आया तू एबी कहां से आया यह तू एबी कहां से आया यह तू एबी है वो जुड़ने की एक्स्टा एनर्जी होता है यह जो तू एबी एक्स्टा एनर्जी परदा हुई उस ब्रेकेट में से विश्वास के ब्रेकेट में से एक्स्टा एनर्जी पर
13:22तुए भी निकलता है
13:24किसी भी देश के विज्ञानिक ने सामने जो बैठे थे
13:29किसी ने कोश्टन नहीं किया इस पर
13:31ये बात आपको अभी भी सालती है
13:33नहीं बहुत खलती है
13:34बहुत खलती है ये बात
13:36खास तोर से मुझे जो
13:38पॉलिटिक्स कर रहे हैं वो तो पॉलिटिक्स कर रहे हैं
13:41दो तरह की पॉलिटिक्स होती है
13:42एक भाईचारी की पॉलिटिक्स होती है
13:44एक ग्यानिक सोच की पॉलिटिक्स होती है
13:46और दूसी तरह अंदविश्वास की और
13:48नफरत की पॉलिटिक्स होती है
13:50तो उनसे भी शिकायत है लेकिन उनसे कम शिकायत है
13:54पर जो लोग समझधार हैं, जो लोग पढ़े लिखे हैं, डॉक्टर्स हैं, एंजीनियर्स हैं
14:01या साइंटिस्ट हैं, या किसी और फिल्ड में हैं, उनको इतनी साइंस तो आती ही है
14:06कि नाले की गैस के उपर ताली बजाई जाएं
14:10बरतन को उल्टा करके उसमें छेट करके एक पाइप डाल दी
14:13और जो गटर से गैस निकलता था, उप पाइप लाइन से उसके अपने चाय के ठेले में ले लिया
14:19और वो चाय बनाने के लिए उसी गैस का उप्योग करके चाय बनाता था
14:24सिंपल सी टेक्नोलोजी है
14:25मतलब मैं काम जाता हूँ
14:29जब होता है कि प्लास्टिक सरजेरी का प्रमान बताया जाता है
14:35गडेशी को और लोग ताली बजाते हैं
14:38और ये पढ़े लेके डॉक्टर्स हैं जो ताली बजाते हैं
14:41तो मैं काम जाता हूँ
14:42क्योंकि यहां ये पॉलिटिक्स का एक रस्ता चुल लिया गया फिर
14:46और आप उसको उस पॉलिटिक्स के रस्ते को फिर आप ताली बजा करके
14:51सैंक्टिटी दे रहे हैं
14:52एक सवाल जो मेरे दिमाग में उठता है, कि जो नहरुवियन मॉडल है, नहरु वैसे भी हमारे मोदी जी के बहुत खास रात में, दिन में, सोते समय, हर समय उनके दिमाग में आते हैं, उनका जो एक विकास का मॉडल, साइंटिफिक टेमपर का जो मॉडल, जिसके आप काफी म
15:22कहीं भी कोई resistance नहीं हुआ, constitution हमारे पास है, democracy हमारे पास है, लेकिन दिखाई देता है, कि वो जो मॉडल था, वो ताश के पत्तों की तरह भेरा के गिर गया.
15:37मैं पूरी तरह सहमत नहीं हुई इस बात से, और वो इस वज़ा से, कि आपने जो बात कही है, वो बड़ी important बात कही है, कि मॉडी जी को रात को नीन नहीं आती, तो वो मॉडल उने सोने नहीं दे रहा है, वो मॉडल जिसमें दो हिस्से थे बड़े, एक तरफ था institutions का बनान
16:07institutions बढ़ाएंगे, बनाएंगे हम, उनका विस्तार करेंगे, रिसर्च होगी, और वो फिर हमारे यहां technology के development तत्मोच आएगी, और यह शुरुआत education से हो जाती, यह मॉडल का एक हिस्सा है, दूसरा नहरू, जब scientific temper की बात करते हैं, तो दूसरा है बहुत important बात वो कह रहे है
16:37उनका सोच का तरीका बदलने की जरूरत है देश के अंगर, जो लोग science नहीं भी पढ़ रहे हैं, उनकी सोच का तरीका बदलने की जरूरत है, ताके वो तरक के उपर आधारत अपनी सिंदगी गुजार सकें, तो यह दो हिस्से हैं इस model के, और मैं समझता हूँ कि इन दोनो
17:07पर यह जो बात कही थी मैंने शुरूरत में ही कि आज भी इज़त science की विक्यान की हमारे देश में बहुत है, और उसकी वज़ा यही है कि हमने नहरू की leadership में उस वक्त कोशिश की कम से कम के scientific temper लोगों तक पहुँचे, सोच का तरीका थोड़ा बदले लोगों का, और दूसर
17:37थे, जखमी मुलक थे, और उस वज़ा से लगबग 70 साल तक इस देश में democracy रही है, हमारे पड़ोसी देशों में नहीं रह पाई, लेकिन आप जिस institution की बात कर रहे हैं, दो हजार पर चिस में, वो जो institution हैं, हम देश की राज़ानी दिली में बैठे हैं, वो institution गौम मुतर पर
18:07दिली विश्विद्याले के colleges में हवन से कितना उर्जा पैदा की जा सकती है, इसके लिए बड़े पैमाने पर हवन करने के लिए छात्रों को बैठाया जाता है, आइंस्टाइन गायब हैं, डार्विन गायब हैं, और institution की तरफ से जो challenge होना चाहिए, जो हमें बाकी मुलकों
18:37हमें याद रखना चाहिए कि हिंदोस्तान की हिस्ट्री में जो scientific organizations तीन बड़ी हैं, जहां scientists की जो organizations हैं, एक डिली की है, एक बैंगलोर की है और एक अलहबाद की है, तीनों ने मिलके पहली बार आवाज उठाई सरकार के हैं और वो 2014 के बाद ही हुआ है, इस से पहले कभी न
19:07आक्शन उनकी तरफ से आया था, तो यह कहना सही नहीं होगा कि scientist ने आवाज नहीं उठाई, scientist आवाज उठा रहे हैं, पर वो आवाज बहुत कंजोर है, इसमें कोई शक नहीं, और उसकी वज़ा यह है कि science का सारा पैसा government control करती है, Department of Science and Technology और DBT control करते हैं, थोड़ा बहुत U
19:37जासे हमेशा ही scientist की आवाज हमारे मुलक में धबी रही है, उनके participation के तरीखे अलग थे science policy में, अब उनको science policy से ही दूर किया जा रहा है, पर यह याद रखना चाहिए कि बिलकुल रूडी वादी scientist जो RSS की शाखा से निकला हुआ है, उसका भी कहीं न कहीं commitment science की तरफ रहता ह
20:07जहां पर attack उनके लिए मुश्किल है, आसान नहीं है, क्योंकि वो जो बिलकुल ही भक्त है, वो भक्त भी कहीं न कहीं science की तरफ committed है, और इसलिए जो science के ऊपर यह सब कुछ हो रहा है, उसमें वो भी section scientist का छट बटा रहा है, उसके पास जवाब नहीं है देने के लिए, कि य
20:37मुत्र के उपर research करवा रहे हैं, पांच गबे के उपर research करवारे हैं, सन्जीव नी बूटी के उपर research करवारे हैं, हूतों के उपर उस तरह से research करवारे हैं, जैसे Pakistan में करवाने की कोषिट नी गई, तो Pakistan से blueprint जो आया यहां पर, वो अब implement करने की सरकार पूरी तरह से कोशश
21:07जो साइन्स के साथ टक्रा रहे हैं, बाबाओं की फैक्टरी से निकले हुए ये ख्यालात री पैकेज़्ट हैं, नए रैपर्स में आ रहे हैं लोगों के पास, और ये टक्राओ भीशन है बहुत, मुझे लगता है कि इस ब्लूपरिंट में हिंदुस्तान में इनका जीतना म�
21:37अभी जो टर्म्स हैं, जो दो हजार पच्चिस में हिंदु राष्ट से सनातन हिंदु राष्ट की तरफ बढ़ा है, इसमें साइन्स कहा है? मैंने आपसे कहा ना, कि जब मदारी है, तो उसे रोज निया तर्माशा दिखाना पड़ता है, कल तक हिंदु तो आप सनातन कहना
22:07की डिसिजन्स हैं, उसमें स्कीम्स के नाम, तो री पैकेजिंग लगातार होती है. चलती रहेगी है. लेकि इसमें जो एक बुनियादी चीज है, कि जो नफरत है, तो मैं आपसे ये भी जानना चाहूंगी, कि नफरत इसमें रूल ओफ लॉव के तौर पर है, कि आप मुसल
22:37करवाती जा रहे है, जिस अवाम का आप जिक्र कर रहे हैं, उसके दिमां में बड़े पैमाने पर हो गया है. लेकिन इसे तो टकराना चाहिए था, क्या आपको लगता कि नफरत का भी कोई साइंटिफिक आधार इनोंने घोश लिया है? नफरत का आधार नहीं लिए ये दो
23:07अगर आप तरक पे चल रहे हैं, तो फिर आप किसी से नफरत इस आधार पे नहीं कर सकते कि उसका विश्वास किसी और चीज़ में है. आप से उसका विश्वास नहीं मिलता है. तो नफरत अपनी जगा पे ज़रूरी है अंधविश्वास फैलाने के लिए. मेरा अंधवि�
23:37प्राज में तब तक अंधविश्वास प्हलाना मुश्किल है। और नफरत फासिवादी टाकतों के लिए। और मैं RSS को फासिवादी टाकत ही मानता हूँ।
23:46वो खुदों को मानते हैं। हिटलर का और मैसल लिनी का प्रापने को मानते हैं।
23:52गोलवाल करें किताब, साभर करें किताब, मुझे इन सब को देख लीजा, वो खुद को कहते हैं, बहुत सारे लोग उनको डिफेंड करते हैं कि नहीं नहीं, फासिवादी नहीं हैं, फासिवादी हैं, और ये भी मैं मानता हूँ कि सारे के सारे RSS हैं, मतलब जितनी और्गना
24:22एक example ले लेता हूँ
24:25अभी जो भयानक चीज़ सुनके आ रहा हूँ
24:27मैं गुजरात से
24:30कि पहले तो
24:31border खिचे हुए थे
24:33हिंदूओं की colonies
24:35और मुसल्मानों की colonies में
24:37और उनको कहा जाता कि देखते हैं
24:38border के पार जा रहे हो क्या
24:40इस बार ये सुनने को मिला
24:43कि मुसल्मानों के एरिया में
24:45तो हिंदू नहीं ले सकते
24:46प्रापर्टी और हिंदों के एरिया में मुसल्मान नहीं ले सकते
24:49लेकिन यह एक कदम आगे बढ़ गया है
24:51जातों की
24:53colonies बनी शुरू हो गई है
24:55और एक जातवाले दूसरे जातवालों
24:57को अपनी कॉलियों में बरदाश्ट नहीं कर रहे हैं
24:59बरदाश्ट नहीं करें वहां तो
25:01colleges और hostels
25:03जात के आधार पर हैं
25:04जात के आधार के उपर तो ये बटवारा और
25:07नफरत की राजनीती जो है
25:09इसका कोई अंत नहीं होता
25:10आखिर में आप अकेले रह जाते हैं
25:13नफरती
25:14जो अंध विश्वास से
25:17घेरा हुआ है
25:20और क्यूंके आपने ये पैकेज ले लिया है
25:23एक तरफ अंध विश्वास और दूसी तरफ नफरत पैकेज ले लिया है
25:26तो इसका कोई अंत नहीं है
25:28आप अकेले ही बचेंगे
25:30आज की तारीख में
25:33एक तो हमने बात की
25:35कि साइंस के बारे में
25:36जो सोच है वो कितनी
25:39नीचे तक है और उस पे खत्रा
25:41कितना है दूसरा हमें खत्रा दिखाई
25:43दे रहा है कि देश की जमूरियत
25:45पे खत्रा है लोकतंतर पे खत्रा है
25:47और इसमें क्योंकि आप communicator हैं जो मीडिया है उसकी एक भूमिका दिखाई दे रही है मीडिया पूरी तरह से जिसे गोधी मीडिया है वो एक aligned है उससे भी जो अंधविश्वास फैल रहा है क्योंकि लगातार तमाम प्रोग्राम्स और हिंदुत्वा को जो एजेंडा है इस मी
26:17तुम नई संचरी जिसमें अब हम है 21 सदी की शुडवात से ही हो गया था और मुझे याद है कि हर दूसरे दिन किसी न किसी टिवी चैनल के उपर बुलाई जाता था कि अब यह चमतकार हो गया अब यह मिल गया आप वो मिल गया है कही मंदिर में मिल रहा था कही बाड़ आ
26:47विश्वास को बढ़ाने में जो रोल अदा किया है इस बीच में उसके लिए अगली जेनरेशन्स उसे माफ नहीं करेंगी
26:54ये बदलाओ इससे पहले ही आ चुका था कि मोधी सरकार आई
27:02इन फैक्ट मोधी सरकार के लिए आने के लिए जमीन उनने बुखता की
27:08उसको खाद पानी दिया और ऐसा लगा जैसे कि जो अंग्रेज हिंदुस्तान के बारे में कहा गरते थे
27:17वैसा हिंदुस्तान है दोबारा से यानि सब तरफ अंदविश्वास का राज है
27:24हाथियों का और चमतकार करने वालों का और सपेरों का राज है इस देश में
27:29ना कोई साइंटिस्ट बचा है ना कोई बुद्धिजीवी बचा है इस देश में बस सिर्फ बाबा है चमतकार हो रहे हैं
27:41मंदिरों में मस्जिदों में दरगाहों में कहां कहां चमतकार नहीं हुए
27:45पुरानी दिल्ली में तो उसे तो एक चमतकारी को लेकर के आ गए थे
27:49उसे भूत में लिया था तो मैं उसका साक्षी हूँ
27:52कि एक बड़ी चैनल में कितनी मारपीट हुई थी
27:55दोनों के बीच में पैसे पे जगड़ा हुआ था
27:58तो ये जो इमिज प्रोजेक्शन था
28:03अंदर हिंदुस्तान के हो हिंदुस्तान के बाहर हिंदुस्तान का
28:07वो बहुत भयानक था
28:09मेरे ख्याल में इस मीडिया को
28:12अभी तो कोई मुझे उम्मीद दिखाई नहीं देती
28:16कि इसमें कोई बतलावा नहीं जा रहा है
28:18ये नतमस्तक रहेगा
28:20जो भी सरकार में आ रहा है उसके और अभी ये जाने वाले दिखाई नहीं दे रहे हैं
28:26ऐसे ही एक मीडिया घराने में जिसने हिंदुत्व का एजेंडा बहुत तेजी से
28:31सुबे शाम नफरत चलती है हिंदु मसर्मान चलता है आज तक उसने जो सहित आज तक किया
28:38उसने आपको भी सम्मानित किया इस किताब को क्या आपको ये कॉंट्रडिक्शन नहीं लगा कि एक ऐसे मीडिया के ऐसे आयोजन में जाएं और जहां विज्ञान की बात है उसे लेकर जाएं आप
28:53मैंने जब मेरे पास टेलफून आया था तो मैंने मना कर दिया था और मैंने ये कहा कि अब मैं नाम नहीं लेना चाहता लेकिन जाहर है कि जो साब पहले जिनका चैन किया गया था देने के लिए अवर्ड उस पर ही मुझे आख पती तो जाने का सवाल ही नहीं था
29:19वहाँ पर फिर ये भी हुआ कि बदला गया हुआ नाम और जो दोस्त वहाँ थे उनका बार-बार इंसिस्ट कर रहे थे कि आप इसे एकसेप्ट कर लें तो मैंने बहुत सारे दोस्तों से पूछा
29:45अब उन दोस्तों के भी नाम लेना कोई बहुत अच्छा नहीं होगा कि जिनसे मैंने पूछा पर जो मेरी तरह की सोच रखते हैं जो जानते हैं कि
29:57ऐसे में क्या करना चाहिए या उन्होंने खुद क्या किया है ऐसे धरम सकट के वक्त के उपर
30:04तो कलिंग आवर्ड के लिए मैं मना करी चुका था तो यहां बहुत सारे फैक्टर्स थे और सब के कुल मिला के यह राय रही कि आपको जाना चाहिए और आपको एकसेप्ट करना चाहिए
30:20और उनका और्गुमेंट यही था मेरे दोस्तों का कि इसलिए एकसेप्ट करना चाहिए कि एक तो यह अच्छी किताब है आपकी इसको सम्मानित किया जा रहा है अगर इसको नहीं किया जाएगा तो फिर किसी बुरी किताब को शायद कर दिया जाए सम्मानित और दूसरा औ
30:50सेक्शन है वो जो प्रोग्राइम्स करते हैं वहां कम से कम नफरत नहीं होती है तो बहुत हैजिटेशन के बाद लगब एक डेड़ महीने की वारतालाब होने के बाद दोस्तों की जब यह राय बनी तो मैंने उसे क्योंकि इस सवाल इसलिए बहुत मौजू था मेरे लिए क
31:20मिलती है क्योंकि आज तक जिस तरह का प्रोगंडा और खास तोर से जो हिंदुत्व का नफरती एजेंडा है उसका एक तरह से चैंपियन है वो कोई भी यह गोदी मीडिया जितनी भी है यह बड़ी चैनल जो है उनका सब को ही है आप किसी के उपर उमली रख करके यह नहीं
31:50पहुची है आज की तारीख में आपको लगता है कि आप जो बाबाओं का पाखंड है जो धर्म और राजनीती के बाबा है उनका पाखंड है जिस तरह से आपने शुरू में काम किया उस तरह का काम की गुंजाईश अभी है जहां पर आप सीधे क्योंकि हमें ये भी दिखा
32:20अंदविश्वास पहलाया था भबूस से लेकर सोने की चेन फेकना जिसे उस समय की वग्यानिक कम्निटी ने काउंटर किया था और बताया था कि ये फ्रॉड है आज की तारीख में आपको लगता है कि आपकी जो जमात है इस तरह का काउंटर कर सकती है काउंटर कर रही है �
32:50है और मुझे लगता है कि इस किताब से मुझे बहुत उम्मीद मिली है मैंने नहीं सोचा था कि ये साल भर से जाड़ा बेस सेलर रहेगी और जब हजारों में परतियां जाती है तो वो मेरे दोस्तों हैं नहीं सारे के सारे हो सकता है 500 दोस्तों ने खरीद लियो ये किताब �
33:20अधिवानों में ये ट्रांसलेट हो रही है तो इस किताब की जरूरत है भूख है भूख है लोगों के अंदर जानने की जिग्यासा है नई चीजें या ऑल्टरनेटिव स्ट्रक्चर्टर्स जो सोच के ढांचे हैं उनको ग्रेंड करने की कम से कम उनको समझने की कोशिश की
33:50मेरे ख्याल मैं लाखों लोग कर रहे हजारों की बात नहीं कर रहा है लाखों लोग ऐसे हैं जो लगे हुए हैं और जो कमेंट्स आएं किताब के उपर मैं उन नफरती कमेंट्स को छोड़ दूँ जिन्हों ने किताब पढ़ी भी नहीं और बहुत ही अश्लील किसम के कमें
34:20एक बहुत रिपीटेड कमेंट जो आ रहा है, वो बड़ा अजीब कमेंट है, कि ये किताब हर घर में होनी चाहिए, ये किताब हर बच्चे को पढ़ना चाहिए, तो ये बड़ा एंकरेज करता है आपको, अपनी किताब के लिए नहीं, मैं कहा रहा हूँ, समाज में जो भू�
34:50हर सकते हैं, और इस मुहिम में इस देश के लाखों लोग लगे वे हैं, चलिए बहुत अच्छा पॉजिटिव संकेत है, और मैं आपसे दर्खवा सही करूंगी, कि बेबाग भाशा के दर्शकों के साथ भी, हम ये विज्ञान पर चर्चा का सिलसला आपके सोजने से आगे
35:20कितनी विडमना है कि हम अपने को विक्सित देश की तरफ धकेलने की कोशिश कर रहे हैं, और धिनोरा पीट रहे हैं इस तरफ और एक भी साइंस की चैनल नहीं है, हमने ये ठेका बाहर वालों को दे दिया, यानि तरह तरह की बाहर की अंग्रेजी में चैनल जो हैं, उनको ह
35:50शुरू करें, मेरा पूरा साथ होगा
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