00:00नकसल बाड़ी एक ऐसा गाउं जिसने कभी नकसल आंदोलन को जनम दिया और आज वही गाउं पश्युम बंगाल की बदलती हुई राजनीती का प्रतीक बन चुका है नकसल बाड़ी में बदला साफ दिखता है गाउं के नए कारगिल वार मेमोरियल से लेकर इसके एतियासिक
00:30अब भारत्य जन्ता पार्टे का मजबूत गड़ बन चुका है इस बदलाव के शुरुआत मानी जाती है साल 2017 से जब अमित्षा ने नकसल बाड़ी में एक दलित परिवार के साथ भोजन किया और इसे ओप्रेशन लोटस के शुरुआत के तौर पर देखा गया
00:44बीते वर्षों में बीजेपी ने पश्चुम बंगाल में तेजी से विस्तार किया है विधान सबा में लगभग शुन्य से दो अंकों की सीटों तक खास फोकस रहा उत्तर बंगाल की आदिवासी और हाश्य पर रहने वाली आबादी पर कभी फूस की जोप्रियों में रहन
01:14अलग पहचान और राजनेतिक अलगाव की उमीद के साथ भाजपा को मसीहा के तौर पर देख रहे हैं
01:19यहां त्रणमुल कॉंग्रेस हाश्य पर दिखाई देती है
01:22कभी वाम पंथ का गड़ रहा नकसल बाड़ी अब इतिहास के पन्नों में सिमटता दिखता है
01:28कानू सानियाल और चारू मज़ुमदार से शुरू हुआ आंदोलन
01:31आज कुछ मूर्तियों और इसमारकों तक सीमित रह गया है
01:34नकसल बाड़ी का एलाका इस्थानिय लोग त्यानमेन स्क्वार के नाम से जानते हैं
01:40लेकिन आज हालात ये हैं कि पास के खेट में काम करने वाली महिलाओं को भी
01:44ये नहीं पता कि यहां खड़ी मूर्तिया किसकी है
01:47इसके उलट गाओं के प्रवेश दुआर पर बना कारगिल वार मेमोरियन हर किसी की नजर में है
01:53युआ यहां सेल्फी लेने आते हैं और इसे देश भक्ती के प्रतीक के तौर पर देखते हैं
01:59ये इसमार धीरे धीरे नई पीड़ी की स्मृति का केंद्र बनता जा रहा है
02:0387 साल की शान्ती मुंडा आज भी उस दौर को याद करती हैं
02:08जब नकसल बाड़ी में वाम आंदोलन्चरम पर था
02:11उनका मानना है कि सश़ष्ट्र संगर्ष एक गल्ती थी
02:37लेकिन उन्हें अब भी भरोसा है कि वाम आंदोलन एक दिन लोटेगा
02:41कानु सान्याल की बांस की जोपड़े जो अब एक पुस्तकाल्य है
02:46आज भी नकसल बाड़ी के इत्यास की गवाही देती है
02:49इसे परियाटन इस्थल बनाने की योजना पर इस्थाने लोगों में नराजगी भी है
02:54नकसल बाड़ी आज दो इस्मत्यों के बीच खड़ा है
03:00एक और नकसल वाद का ती
03:01दूसरी और रास्ट वाद का नया प्रती
03:04दोजाट 26 के चुनाओं में गाओं एक बार फिर पश्यम मंगाल के राजनीती की दिशा तै करता दिखेगा
03:09पश्यम मंगाल के नकसल बाड़ी से ETV भारत की रिपूर
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