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Operation Pawan के वीरों को तीन दशक बाद दी गयी सलामी, इसमें 1,171 सैनिक हुए थे शहीद | वनइंडिया हिंदी

श्रीलंका में भारतीय सेना के ऑपरेशन पवन के शहीदों को तीन दशक बाद मंगलवार को पहली बार सेना ने अधिकारिक तौर पर श्रद्धांजलि दी। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए 1,171 भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। इसमें 35 सौ से ज्यादा सैनिक घायल भी हुए थे। सेना प्रमुख के साथ इस ऑपरेशन में शामिल रहे सेना उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।

The Indian Army officially paid tribute to the martyrs of Operation Pawan in Sri Lanka for the first time in three decades on Tuesday. Army Chief General Upendra Dwivedi paid tribute to the 1,171 Indian soldiers who were martyred during the operation at the National War Memorial in New Delhi. More than 3,500 soldiers were also injured in this operation. Deputy Chief of Army Staff Lieutenant General Pushpendra Singh, who was involved in this operation, was also present with the Army Chief.

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00:00शिलंका में भारती सेना की आउपरेशन पवन के शहीदों को तीन प्रशक बाद मंगलवार को पहली बार सेना ने आधिकारिक तोर पर श्रद्धान जिली दी।
00:30शामंत्री राजनास सिंग ने ऑपरेशन पवन के परमवीर चक्रविजेता मेजर आर परमेश्वरन को श्रद्धान जिली दी।
01:00शामंत्री दीवस तो खूब सुना होगा पर कभी आपने आपरेशन पवन सुना है क्या शायद आपका जवाब नामे होगा।
01:06इस ऑपरेशन का अंदारा इस बात से लगाया जत्ता है कि 1171 जवान इस ऑपरेशन में शहीद हुए और करीब 3500 से ज़्यादा जवान खायल हुए थे।
01:15लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी इस ऑपरेशन में शहीद हुए जवानों को आपचारिक संधाजी नहीं दी गई।
01:22अब आया को बदाते हैं कि आखिर ये ऑपरेशन था क्या।
01:251987 में राजी युगाई सरकार ने स्री लंका में तमिर और सिंगला समुदाय के बीच चल रहे ग्रह उद्ध को खत्म करने के लिए भारतिये शांती सेना भीजी।
01:37इसका मकसद लिट्टे यानि LTTE ये तमिर उगरबादी संगुद्टनों को हतियार डलवाना और शांती अस्थापित करना।
01:44लेकिन लिट्टे ने समझोते को तोड़ दिया और भारतिये सेना से ही भीड़ गया।
01:48टूबर 1987 से मार्च 1990 तक चलिए इस अभियान को ही ऑपरेशन पवन कहा गया।
01:53जंगलों जहाडियों में छिपे लिट्टे के साथ लाई इतनी भयानक थी कि कई जवानों ने तो अपने साथियों की लासे तक नहीं लापाए।
02:01सबसे बड़ा नाम परमवीर चक्रवजेता मेजर राधा स्वामी परमेश्वरन का है जो 25 नॉवंबर 1987 को शहीद हुए थे।
02:09अभी तक इसका कोई आधिकारिक्स भी दिवास नहीं मनायाता है।
02:11हर साल कुछ पूरु सैनिक शहीदों की विध्वाएं और परिजन चुपचा पसमारक पर इखटा होकर सुद्धानी देते रहे।
02:18लेकिन सरकारी अस्तर पर कुछ नहीं होदा था।
02:20लेकिन इस बार पहली बार सेना प्रमुग जनरल उपेंद दिवेदिय और उप सेना प्रमुग लेफ्टनेंट जनरल पुषपेंद्र सिंख खुद पुषपशक्र चाहती हुए इन विरों को याद किया।
02:29इसमों के पर आप्रेशन पौवन के कई पूर सेनिक और सहीदों के परजन मौझूद रहे।
02:34फिराकर बस अतना ही बाकी अप्डेट लेवने रहे है वन इंडिया हैंदी के साथ।
02:59जया हैंदी के साथ।
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