00:00सिलिंडर में लोग लाइन में लगे हैं सुबार रात दिन तक लाइन में लगते लगते हैं इस सो भी है
00:08कोरोना के समय भी एक जुटता से ऐसी चुनोज़ों का सामनाब करते हैं
00:13अब हमें फिर से उसी तरह तयार लहने की आवश्चक्ता
00:19देश में एक बार फिर अच्छे दिनों की कतारे सचने लगे और वजह है इरान, अमेरिका, इसराइल की वो जंग
00:26हर्मुज के जलसंधी क्या बंध हुई मानुस सरकार की आत्म निरभरता के डावों की गैस निकल गई
00:32प्रधान मंत्री जी की तरफ से तो जनता को सतर करहने की नसिहत दी गई
00:36तो वहीं दूसरी तरफ बड़े आत्म विश्वास से ये भी कहा गया कि घवराने की कोई जरुवत नहीं सब चंगा
00:44सी
00:44ये विरुदाभाज वैसा ही है जैसे डॉक्तर मरीज से कहे कि आपकी सांसे उखड रही है पर आप बिलकुल स्वस्थ
00:52हैं
00:53देश के अलगलग कुनों से आ रहे विडियोज इस विकास की पूल खोल रहे हैं
00:58जहां कड़ागे की धूप और शोर के बीच गैस सिलेंडर के लिए मीलो लंबी सडकों पर लाइने लगी
01:04लोग खड़े अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे हैं इंतिजार में पूरा दिन बिता रहे हैं
01:10कॉंगेस ने भी इन विडियोज को अपनी सोशल मीडिया प्लाइटफॉर्म पर साज़ा किया
01:14सुप्रिय अश्रिनेत ने भी एक विडियो दिखा कर सरकार की नीद तोड़नी की कोशिश की
01:20लेकिन सत्ता के गलियारों में एक अजीब सा सन्नाटा और इनकार का भाव पसरा है
01:25विडम न देखिए जिस देश को विश्व गुरू और तीसरी सबसे बड़ी अर्थववस्था बनाने के बड़े बड़े सपने बेचे जाते
01:32हैं
01:33उसकी रसुई की आग साथ समंदर पार होने वाली हल्चल से बुझने की कगार पर है
01:39सरकार कह रही है कि चिंदा की कोई बात नहीं
01:42लेकिन आम आदमी खाली सिलंडर लिकर सड़कों पर खड़ा यही सोच रहा है
01:46अगर सब चंगा सी तो ये लाइने क्या मनुरंचन के लिए लगी है
01:50शायद ये अमरित काल का कोई नया अध्याय हो जहां जिनता को लाइन में खड़ा होना
01:55सबसे बड़ी देश भक्ती के तौर पर गिना जाए
01:58सरकारी आंकडों के मताबिक लपीजी की कोई कमी नहीं
02:01बस हकीकत में आम आदमी के पास सिलंडर नहीं पहुँच रहा
02:05टीवी चैनल्स पर बैट कर आंकडों का माया जाल बुना जा रहा है
02:09मगर चूला जलाने के लिए आंकडों की नहीं बलकि नीली लॉग यानि की लपीजी की जरुरत होती है
02:16सरकार की ये सब चंगा सी वाली नीती अब जनता के सबर का कड़ा इम्तिहान ले रही है
02:21जब सत्ता के शीर से सब कुछ ठीक होने का दावा किया जाए
02:25और जमीन पर जनता खाली बरतन बीट रही हो तो समझ लीजे
02:30हुक्मरानों की जमीनी हकिकत से राप्ता ठूट चुका है
02:34जनता अब सिर्फ ये पूछ रही है कि उनके हिस्से की राहत आखिर कस फाइल में कैद है बंद है
02:55आपर जनता भाध्ता वाने है
02:58जो दूब है
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