Skip to playerSkip to main content
ताज़ा सैटेलाइट तस्वीरों से ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम के भंडार की संभावित आवाजाही को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, प्रमुख परमाणु ठिकानों के पास ट्रक और काफिले देखे गए हैं, जिससे यह अटकलें तेज़ हो गई हैं कि संवेदनशील सामग्री को शायद कहीं और ले जाया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियाँ बढ़ते तनाव के बीच यूरेनियम को सुरक्षित करने या छिपाने के प्रयासों का संकेत हो सकती हैं। हालाँकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि असल में क्या ले जाया गया था। इस घटनाक्रम ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से ही अस्थिर स्थिति में एक नई अनिश्चितता जोड़ दी है।
#Iran #Uranium #Nuclear #SatelliteImages #BreakingNews #MiddleEast #Geopolitics #NuclearProgram #WorldNews #GlobalTensions #Security #Intelligence #Conflict #WarAlert #Investigation

~HT.504~PR.514~

Category

🗞
News
Transcript
00:00इरान ने हमले से पहले चिपाया नुकलियर यूरेनियम
00:04सेटिलाइट इमें से खुला बड़ा राज दुनिया में हडकम
00:08एक ऐसा नुकलियर रहसे जो पूरी दुनिया की सुरक्षा को हिला सकता है
00:12इरान और अमेरिका इसराइल के बीच जारी तनाओ के बीच अब एक नया खुला सास सामने आया है
00:17जिसने इस पूरे संगर्ष को और ज्यादा खतरनाक बना दिया है
00:21नए सेटिलाइट तस्वीरों से संकेत मिल रहे हैं कि इरान ने अमेरिकी और इसराइली हमलों से ठीक पहले
00:26अपने सबसे सम्वेदंशील नुकलियर मिटेरियल को कहीं और शिफ्ट कर दिया
00:30बताया जा रहा है कि सैकडो किलो हाइली एंरिच्ट यूरेनियम जो परमानों हत्यार बनाने के बेहद करीब होता है
00:37अब अपने पुराने ठीकानों पर मौझूद नहीं है
00:39ये दावा जून की एक हाई रिजोल्यूशन सेचलाइट इमेज पर अधारित है
00:43उसमें एक भारी ट्रक करीब 18 कंटेनर के साथ इस्वहान के एक अंडरग्राउंट टेनल कॉंपलेक्स में जाता हुआ दिखाई दे
00:49रहा है
00:50विशेशगियों का कहना है कि ये कंटेनर सामान ये नहीं थे
00:53बलकि न्यूक्लियर मेटेरियल ले जाने वाले विशेश शिल्डेड गॉस जैसे दिख रहे थे
00:57अगर इन दाओ पर भरोसा किया जाए तो इरान के पास मौझूद करीब 540 किलो
01:02यानि 60 प्रतिशत तक समर्द यूरेनियम को स्टेनल के नेटवर्क में छुपाया गया हो सकता है
01:0860 प्रतिशत एन्रिश्ट यूरेनियम यानि कि हत्यार बनाने के लिए जरूरी 90 प्रतिशत के बेहद करी
01:14विशेशग्य मानते हैं कि इसे सिर्फ 10 दिनों के भीतर वेपन ग्रेड में बदला जा सकता है
01:18अब सबसे एहम बात ये मूमेंट हमलों से सिर्फ 4 दिन पहले हुआ
01:23यानि सवाल उठता है कि एरान को पहले से हमले की भनक लग चुकी थी
01:27और क्या उसने सबसे एहम अपनी संपती को पहले ही सुरक्षिजगे पे पहुँचा दिया
01:31अगर ऐसा है तो नतांज और फॉर्डो जैसे नुक्लियर साइट्स हमले के पहले ही खाली कर दिये गए होंगे
01:36और अब ये यूरेनियम इस्वाहन के जिस अंडरग्राउंड चनल नेटवर्क में है
01:40वो इतनी मजबूती से बनाया गया है कि एर स्ट्राइक से इसे नुक्सान पहुचाना लगभग नामुम्किन है
01:45ताजा तस्वीरों में ये भी दिखा है कि चनल के एंट्रेंस को मिट्टी से ढख दिया गया है
01:50ताकि अंदर पहुचना और भी मुश्किल हो जाए
01:53सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी परमानू निगरानी संस्था
01:57आई ए ए ए को भी सी उरेनियम की सही लोकेशन का पता ही नहीं है
02:02यानि दुनिया के सबसे खतरनाक नुक्लियर मेटेरियल में से एक अब कहीं और छपा हुआ है
02:07और कोई नहीं जानता की वो कहां छपा हुआ है
02:09हलाकि कुछ लोग से भरम यह डिकॉय भी मान रहे हैं
02:12लेकिन ज्यादा तर एक्सपर्ट इसे गंबे खत्रे के तोर पर देख रहे हैं
02:16उस बीच अमेरिका भी अब एक बड़ा और जोकी भरा कदम उठाने पर विचार कर रहा है
02:20सीधे इरान के अंदर जाकर इस यूरेनियम को कबजे में लेने का सोच रहा है अमेरिका
02:25लेकिन ये मिशन आसान नहीं होगा
02:27हजारों सैनिकों का खत्रा दुश्मन का इलाका और लोकेशन का कोई स्पष्ट सुराग ही नहीं
02:32अगर ये उरेनियम सच में सुरक्षित छिपा दिया गया है तो इसका मतलब ये है
02:36कि अमेरिका और इसराइल के हमले इरान के नुक्लियर प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाए
02:41बलकि हो सकता है कि अभी और ज्यादा सुरक्षित हो गया है
02:44क्योंकि इस जंग में खत्रा सर्फ मसाईलों से नहीं बलकि उस शीर से है
02:48जो नजर नहीं आती है लेकिन जिसका असर सदियों तक महसूस किया जा सकता है
02:54इस खबर में इतना ही अपडेट्स के लिए देखते रहें One India Hindi
Comments

Recommended