00:00यह खजर जनाब फिराग गुरकपूरी साहब के लिखे हुई है
00:07सर में सौधा भी नहीं दिल में तमना भी नहीं
00:14सर में सौधा भी नहीं दिल में तमना भी नहीं
00:18लेकिन इस तर के मुझबत का भरोसा भी नहीं
00:23लेकिन इस तर के मुझबत का भरोसा भी नहीं
00:27दिल की गिंती न यगानों में न बेगानों में
00:36लेकिन इस जल्वा गहे नास से उठता भी नहीं
00:45महरबानी को महबत नहीं कहते है दोस्त
00:55आह अब मुच्छे तेरी रंजिशें बेजां भी नहीं
01:04एक मुदद से तेरी याद भी आई नहीं
01:13और हम भूल गए हो तुझे ऐसा भी नहीं
01:17और हम भूल गए हो तुझे ऐसा भी नहीं
01:22आज गफलत भी इनाँकों में है पहले से सिवा
01:33आज इहीं खातिर के महारशत भी नहीं
01:37बात भी है कि सकूने इनी वहषी का मकाम बात भी है किसकूने इनी वहषी का मकाम
01:50तुने सेाथ अविड़िए तुने सब्सां के सहरा भी निए
01:59और इसे याद हमें बूले हमीं के दुने
02:08तुने कुछ आख सवर्भी नहीं देखा भी नहीं देखा भी नहीं
02:16आखिये मजमाए आखबाब ये बजमी खामोश
02:24आज मैं फिल में फिरात सुखन आरा भी नहीं
02:33ये भी सच है के मुझबत पे मैं नहीं मेश्बूर
02:42ये भी सच है के तेरा हुस्न कुछ है साब नहीं
02:51और यूँ तो हंकामे उठाते नहीं दिवाला है इश्क
03:00मगर ऐ दोस्त कुछ है सोंगा ठिकाना भी नहीं
03:08फिर दे हुस्न तो मालूम है तुछ को हंगा
03:12चारा ही क्या है बजुस सबसो होता भी नहीं
03:21उसे हम अपने बुरातों नहीं कहते है कि फिराग ऐ तेरा दोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं
03:30अपने बुरातों नहीं कहते है कि फिराग ऐ तेरा दोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं
03:39तोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं
03:44कर दोस्त मगर आदमी नहीं
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