00:00कल्पना कीजिए, एक ऐसा रहस्य मही क्षण, जब आकाश में तारे अचानक अपनी जगह से हिलने लगें, प्रित्वी पर अप्रत्याशित आपदाएं आ जाएं, और मानुर्ता का नैतिक कमपास पूरी तरह से गड़ बढ़ा जाएं, क्या होगा अगर मैं आपको बताओं क
00:30युग बदलने से ठीक पहले देवताओं की सभाओं में गुप्त मंतरनाय होती हैं, जहां ब्रम्हांड की नियती तैह होती है, क्या ये संभव है कि राम के स्वर्गा रोहन के बाद धर्ती पर राक्षसी शक्तियां और बढ़ गई और द्वापर युग में महा भारत जैस
01:00पर तक का वो रहस्यमई परिवर्तन सिर्फ एक कहानी है या एक चेतावनी जो हमें आज भी हिला कर रख देती हैं, अगर आप सोच रहे हैं कि ये सब कल्पना हैं, तो रुकिए, पुराणों में ये संकेत वास्तविक हैं, और आज की इस डॉक्युमेंटरी में हम इने एक-
01:30साजिश हैं, अगर हां, तो आईए शुरू करते हैं, लेकिन याद रखिए, एक बार शुरू हुआ, तो रुकना मुश्किल होगा।
02:00जो कुल 43,20,000 मानव वर्षों का होता है, विश्नु पुराण, भागवत पुराण, मनुस्मिर्थी और अन्य ग्रंथों में इनका विस्तरित वर्णन मिलता है, सत्य यूग को स्वर्ण यूग कहा जाता है, जहां धर्म चार पैरों पर खड़ा होता है, तप, शौच, दया
02:30खगोलिये गणनाओं पर आधारित है, सूर्य सिध्धान्त और अन्य जोतिश ग्रंथों में युगों की गणना देव वर्षों में की गई है, जहां एक देव वर्ष 306 मानव वर्षों के बराबर होता है, सत्य यूग 4,800 देव वर्षों का है, यानि 17,28,000 मानव वर्षों
03:00यूग 1200 देव वर्षों का है, यानि 4,32,000 मानव वर्षों का, लेकिन सवाल ये है कि ये यूग कैसे बदलते हैं, क्या कोई अचानक परिवर्थन होता है, या धीरे-धीरे संकेत मिलते हैं, ये रहस्य से हमें त्रेता यूग की ओर ले जाता है, जहां से हमारी कहानी का असल
03:30जाती है, विश्नु पुराण के सकंद एक अध्याय 13 में वर्णन है कि त्रेता यूग में लोग ज्यान की खोज में लगे रहते हैं, लेकिन नैतिक्ता में हलकी गिरावट आती है, यहां अवतारों का महत्व बढ़ जाता है, और सबसे प्रमुक हैं भगवान विश्नु का
04:00जानते हैं कि त्रेता यूग के अंत में एक ऐसा चौकाने वाला मोड आया, जो पूरे ब्रम्हान को हिला कर रख दिया, राम का स्वर्गा रोहन, रामायन के उत्तरकान में वर्णित है कि राम ने अपने शासन के बाद सर्यू नदी में जल समाधी लेकर वैकुंठ लोट ग
04:30क्रिश्न अवतार हुआ? नहीं, ये दिव्वे योजना का हिस्सा है, लेकिन परिवर्तन इतना सरल नहीं, हर यूग के बीच एक संध्याकाल होता है, जो सस्पेंस से भरा होता है।
05:00त्रेता युग की संध्यांच तीन सो देव वर्षों, यानी एक लाख आठ हजार मानव वर्षों की होती है। इस दोरान नैतिक, सामाजिक और कॉस्मिक बदलाव होते हैं। अब हजारों वर्षों में धीरे-धीरे संकेत मिलते हैं, पहले हलके, फिर डरावने। अब कल्�
05:30जो युग बदलने का पहला और सबसे चौंकाने वाला संकेत है। अब सोचिए, अगर रामराज इतना आदर्श था, तो उसके बाद नैतिक गिरावट कैसे आई? ये सवाल हमें नैतिक पतन की गहराई में ले जाता है, जहां रहस से और भी गहरा होता है। नैतिक पतन य�
06:00त्रेता युग में तब कम होता है, लोग ज्यानवान लेकिन स्वार्थी बनते हैं। रामायन में रावण का उदय, इसी गिरावट का प्रतीक है, एक विद्वान राक्षस जो धर्म को चुनोदी देता है। राम के वद के बाद उनके पुत्र कुश और लव के शासन में �
06:30कुछ रिशियों ने देखा कि आकाश में असामन्य प्रकाश फैला जैसे देवता युग बदलने की तयारी कर रहे हूं। क्या ये कौस्मिक संकेत नहीं? और सबसे शौकिंग पुराणों में भविश्वानी है कि युग क्यंत में रोग, भुकंप और बाड जैसी आपदा
07:00हिंदू ग्रंथों में ब्रह्मांड को एक जीवित इकाई माना जाता है जो युगों के साथ सांस लेता है। सूर्य सिध्धान्त में खगोलिय गणनाय हैं जहां एक महा युग में सूर्य 43,20,000 बार प्रिथवी की परिक्रमा करता है। त्रेता युग से द्वापर में संक
07:30महा भारत के शांती पर्व में अध्याय 231 में समय गणना है। देवों का एक वर्ष मनुष्यों के 360 वर्षों के बराबर है और युग इसी चक्र पर आधारित है। ये खगोलिय परिवर्तन मानव जीवन को प्रभावित करता है। एक शौकिंग फैक्ट वायू पुराण म
08:00अब ये हमें पुराणों के छिपे संदर्भों की और ले जाता है, जहां हर्ष लोग एक रहस्य चिपाए है। पुराणों में छिपे संदर्भ युग परिवर्तन के सबसे गहन और शौकिंग रहस्य हैं। भागवत पुराण के सकंद 3 अध्याय 11 में युग गणना है, त
08:30युग समाप्ति का संकेत है, महाभारत वनपर्व अध्याय 119 में त्रेता युग अंत के लक्षन, लोग भटकते हैं जो द्वापर का पूर्वा भास, एक सस्पेंस फुल इंसिडेंट, ब्रह्म पुराण में कहा गया है कि संद्या में एक रहस्यमई ध्वनी सुनाई देत
09:00यग्य प्रधान लेकिन धोका बढ़ता है, क्रिश्ण हवतार अंत में लेकिन शुरुवात में कलह, महाभारत की घटनाएं, विश्णु पुराण में राजा कमजोर, प्रजा असंतुष्ट, खगोलिय रूप से ग्रह चक्र बदलता है, पुराणों में छिपा, युग ब�
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