00:00फिल्म दो कैदी साल नाहिटिनाईज में रिलीज हुई एक एक्शन और थ्रिलर फिल्म है
00:05इस फिल्म की निर्देशक है अजय कशिप और इसमें मुक्य किरदार निभाये हैं संजेदत, गोविंदा, फराह और नीलम खुठारी ने
00:13ये कहानी दो चोड़ों की है जिनका नाम है मनू और कानू
00:17दोनों का रिष्टा ऐसा है जैसे दो साई जो हर मुश्किल में एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं
00:23लेकिन जिन्दगी की राह उन्हें एक ऐसे मोड पर ले आती है जहां उन्हें अपनी सच्चाई और जूट के बीच जंग लड़नी पड़ती है
00:30कहानी शुरू होती है एक शहर से जहां मनू और कानू छोड़े मोटे चोड़ है
00:35वे अमीर लोगों के घरों में चोड़ी करते हैं और फिर सारा माल अपने मालिक के को दे देते हैं जो एक बड़ा अपरादी है
00:43केके के पास बहुत पैसे और ताकत है और उसके गिरोह में कई लोग काम करते है
00:48मनू और कानू के लिए केके सिर्फ एक बॉस नहीं बलकि जिन्दगी की जरूरत है क्योंकि उन्हीं के जरीए उन्हें जीने के लिए पैसा मिलता है
00:58लेकिन कहानी में मोड आता है जब केके का बेटा बिच्छू मैदान में उतरता है
01:03बिच्छू को मनू और कानू से बहुत नफरत है
01:06पुराने जगडों की वज़े से वह उनके खिलाफ हो जाता है
01:09बिच्छू सोचता है कि अगर मनू और कानू उसके रास्ते से हट जाएं
01:14तो वह अपने बाप का पूरा धंधा अकेले संभाल सकता है
01:17इसलिए वह दोनों को फंसाने की चाल चलता है
01:20एक दिन बिच्छू पुलिस को सूचना देता है कि मनू और कानू किसी बड़ी छोडी की तैयारी में है
01:26पुलिस अचाचानक उन्हें पकड लेती है
01:30दोनों को जेल में डाल दिया जाता है
01:32वहीं से उनकी जिन्दगी बदलने लगती है
01:34अदालत में पेशी के दिन जब पुलिस उन्हें कोर्ट ले जा रही होती है
01:39दोनों किसी तरह गारी से भाग निकलते है
01:42पुलिस के हाथ से फिसल कर ये दोनों फिर से फरार हो जाते है
01:46लेकिन जब खबरें फैलती है तो पूरे शहर में सनसनी मच जाती है
01:50अखबारों और रेडियो में खबर आती है कि मनू और कानू ने एक पुलिस इंस्पेक्टर अमर सिनहा की हत्या कर दी है
01:58पुलिस उन्हें देख कर ही गोली मार देने का आदेश जारी करती है
02:02अब दोनों सिर्फ चोड नहीं बलकि पुलिस के हत्यारे बन जाते है
02:07मनू और कानू दोनों हैरान है उन्हें समझ नहीं आता कि ये क्या हो गया
02:12वे कहते हैं हमने तो बस चोड़ी की है लेकिन किसी की हत्या नहीं की
02:16ये हमारे साथ कौन सा खेल खेला गया है
02:19अब कहानी एक रोमांचक मोड पर पहुँचती है
02:22क्या ये साजिश है या सच में उन्होंने कोई गुनाह किया है जो उन्हें याद नहीं
02:27दोनों को अब अपनी बेगुनाही साबित करनी है
02:30लेकिन पूरा पुलिस विभाग उनके पीछे पड़ा है
02:33शहर के हर चौराहे पर उनके पोस्टर लगे है
02:36लोग उन्हें डर से पहचानते हैं
02:39और बचे तक उनका नाम सुनकर भाग जाते हैं
02:42मनु थोड़ा गुसेल सुभाव का है
02:44जबकि कानू दिल से नरम और सोचने वाला इंसान है
02:48दोनों में कई बार जगडे भी होते हैं
02:50लेकिन दोस्ती अतनी गहरी है कि वो कभी एक दूसरे को छोड़ नहीं पाते
02:54जब वे भागते हैं तो भूखे प्यासे गावों में छिपते हैं
02:59पहारों में शरन लेते हैं
03:00और कई बार पुलिस के जाल से बाल बाल बचते हैं
03:03एक रात दोनों एक मंदिर में छिपे होते हैं
03:05कानू कहता है भाई हमने जो किया वो छोड़ी थी पर किसी को मारा नहीं
03:10भगवान को पता है
03:11मनू कहता है सच है लेकिन जब तक हम सच्चाई नहीं डूंडेंगे
03:16कोई हम पर यकीन नहीं करेगा
03:18दोनों ठान लेते हैं कि असली हत्यारे को डूंड कर रहेंगे
03:22धीरे धीरे उन्हें कुछ सुराग मिलते हैं
03:24पता चलता है कि जिस रात इंस्पेक्टर अमर सिनहा की हत्या हुई थी
03:29उसी रात बिच्चू भी वहां मौजूद था
03:32एक गवाह बताता है कि उसने बिच्चू को गोली चलाते देखा था
03:36लेकिन डर के कारण कुछ कहनी पाया
03:39अब दोनों को यकीन हो जाता है कि बिच्चू ने ही उन्हें फसाया है
03:44वे बिच्चू तक पहुँचने की कोशिश करते हैं
03:47रास्ते में उन्हें कई मुश्किले आती है
03:49पुलिस उनसे पहले ही एक कदम आगे होती है
03:52कई बार उन्हें घेर लिया जाता है
03:54लेकिन चालाकी से दोनों निकल जाते हैं
03:56वे अब अपराधी नहीं
03:58बल्कि अपने हक के लिए लड़ने वाले लोग बन गये हैं
04:01कहानी में रोमांच तब बढ़ जाता है जब दोनों बिच्चू के अड़े पर पहुंचते हैं
04:07वहां गोली बारी होती है और कई लों घायल हो जाते हैं
04:11बिच्चू अब भी सोचता है कि वो बच जाएगा सै
04:14लेकिन मनू और कानू इस बार पीछे नहीं हटते
04:16वे बिच्चू से उसकी सच्चाई उगलवाते है बिच्चू मान लेता है
04:20कि उसने ही अमर सिन्हा को मारा और सारा इलजाम
04:24मनू और कानू पर डाल दिया ताकि वो जेल चले जाएं
04:27और वो अपने बाप का धन्धा अकेले संभाल सके
04:31अंत में पुलिस भी सच्चाई जान जाती है
04:34केके को भी एहसास होता है कि उसके बेटे ने गलत काम किया
04:37बिच्चू गिरफतार होता है
04:39और मनु और कानू की बेगुना ही साबित होती है
04:41पुलिस रेस इंस्पेक्टर के परिवार को भी सच्चाई पता चलती है
04:45कि इन दोनों का कोई कसूर नहीं था
04:47मनू और कानू अब आजाद है
04:49लेकिन उनकी जिंदगी का नजरिया बदल चुका है
04:53उन्होंने देखा कि अपराद की दुनिया में सच्चाई का कोई मोल नहीं
04:56वे ठान लेते हैं कि अब इमानदारी से काम करेंगे और नई जिंदगी शुरू करेंगे
05:00फिल्म का आखिरी द्रश्य बहुत भावनात्मक है
05:04दोनों दोस्त एक पहाड़ी रास्ते पर चलते हैं
05:07कानू मुस्कुराता है और कहता है अब हम छोड़ नहीं इनसान है
05:11मनू हसते हुए कहता है हाँ भाई दो कैदी थे हम अब आज़ाद है
05:15दो कैदी
05:17सिर्फ एक एक्शन मुवी नहीं है बलकि दोस्ती सच्चाई और इनसाफ की कहानी है
05:24इसमें दिखाया गया है कि हालात चाहे कितने भी बुरे हो
05:28अगर इनसान सही रास्ता चुने तो सच्चाई आखिर जीतती है
05:31कुल मिलाकर ये फिल्म दिखाती है कि जिन्दगी में जूट और साजिशें कितनी भी बड़ी क्यों नहों
05:38सच्चा दिल रखने वाले कभी हरते नहीं
05:41मनू और कानू जैसे दो आमचोड भी जब सच के लिए खड़े होते हैं
05:45एटाग तो पूरी दुनिया को दिखा देते हैं कि असली ताकत हतियारों में नहीं
05:49बलकि सच्चाई में होती है