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  • 11 months ago
Do Qaidi is a 1989 Indian Hindi-language action thriller film directed by Ajay Kashyap starring Sanjay Dutt, Govinda, Farah and Neelam Kothari in lead roles.
Manu and Kanu are two thieves. They work for criminal K.K. But, Bichoo who is K.K.'s son, dislikes them because of past disputes. Bichoo out of enmity gets them arrested. However they escape while going to court. It is then revealed that they are responsible for killing a Police Inspector named Amar Sinha, and that the police have issued shoot-at-sight orders for both of them. The question remains, why would two small thieves kill a Police Officer. Is this a conspiracy against them or truth.
Transcript
00:00फिल्म दो कैदी साल नाहिटिनाईज में रिलीज हुई एक एक्शन और थ्रिलर फिल्म है
00:05इस फिल्म की निर्देशक है अजय कशिप और इसमें मुक्य किरदार निभाये हैं संजेदत, गोविंदा, फराह और नीलम खुठारी ने
00:13ये कहानी दो चोड़ों की है जिनका नाम है मनू और कानू
00:17दोनों का रिष्टा ऐसा है जैसे दो साई जो हर मुश्किल में एक दूसरे के साथ खड़े रहते हैं
00:23लेकिन जिन्दगी की राह उन्हें एक ऐसे मोड पर ले आती है जहां उन्हें अपनी सच्चाई और जूट के बीच जंग लड़नी पड़ती है
00:30कहानी शुरू होती है एक शहर से जहां मनू और कानू छोड़े मोटे चोड़ है
00:35वे अमीर लोगों के घरों में चोड़ी करते हैं और फिर सारा माल अपने मालिक के को दे देते हैं जो एक बड़ा अपरादी है
00:43केके के पास बहुत पैसे और ताकत है और उसके गिरोह में कई लोग काम करते है
00:48मनू और कानू के लिए केके सिर्फ एक बॉस नहीं बलकि जिन्दगी की जरूरत है क्योंकि उन्हीं के जरीए उन्हें जीने के लिए पैसा मिलता है
00:58लेकिन कहानी में मोड आता है जब केके का बेटा बिच्छू मैदान में उतरता है
01:03बिच्छू को मनू और कानू से बहुत नफरत है
01:06पुराने जगडों की वज़े से वह उनके खिलाफ हो जाता है
01:09बिच्छू सोचता है कि अगर मनू और कानू उसके रास्ते से हट जाएं
01:14तो वह अपने बाप का पूरा धंधा अकेले संभाल सकता है
01:17इसलिए वह दोनों को फंसाने की चाल चलता है
01:20एक दिन बिच्छू पुलिस को सूचना देता है कि मनू और कानू किसी बड़ी छोडी की तैयारी में है
01:26पुलिस अचाचानक उन्हें पकड लेती है
01:30दोनों को जेल में डाल दिया जाता है
01:32वहीं से उनकी जिन्दगी बदलने लगती है
01:34अदालत में पेशी के दिन जब पुलिस उन्हें कोर्ट ले जा रही होती है
01:39दोनों किसी तरह गारी से भाग निकलते है
01:42पुलिस के हाथ से फिसल कर ये दोनों फिर से फरार हो जाते है
01:46लेकिन जब खबरें फैलती है तो पूरे शहर में सनसनी मच जाती है
01:50अखबारों और रेडियो में खबर आती है कि मनू और कानू ने एक पुलिस इंस्पेक्टर अमर सिनहा की हत्या कर दी है
01:58पुलिस उन्हें देख कर ही गोली मार देने का आदेश जारी करती है
02:02अब दोनों सिर्फ चोड नहीं बलकि पुलिस के हत्यारे बन जाते है
02:07मनू और कानू दोनों हैरान है उन्हें समझ नहीं आता कि ये क्या हो गया
02:12वे कहते हैं हमने तो बस चोड़ी की है लेकिन किसी की हत्या नहीं की
02:16ये हमारे साथ कौन सा खेल खेला गया है
02:19अब कहानी एक रोमांचक मोड पर पहुँचती है
02:22क्या ये साजिश है या सच में उन्होंने कोई गुनाह किया है जो उन्हें याद नहीं
02:27दोनों को अब अपनी बेगुनाही साबित करनी है
02:30लेकिन पूरा पुलिस विभाग उनके पीछे पड़ा है
02:33शहर के हर चौराहे पर उनके पोस्टर लगे है
02:36लोग उन्हें डर से पहचानते हैं
02:39और बचे तक उनका नाम सुनकर भाग जाते हैं
02:42मनु थोड़ा गुसेल सुभाव का है
02:44जबकि कानू दिल से नरम और सोचने वाला इंसान है
02:48दोनों में कई बार जगडे भी होते हैं
02:50लेकिन दोस्ती अतनी गहरी है कि वो कभी एक दूसरे को छोड़ नहीं पाते
02:54जब वे भागते हैं तो भूखे प्यासे गावों में छिपते हैं
02:59पहारों में शरन लेते हैं
03:00और कई बार पुलिस के जाल से बाल बाल बचते हैं
03:03एक रात दोनों एक मंदिर में छिपे होते हैं
03:05कानू कहता है भाई हमने जो किया वो छोड़ी थी पर किसी को मारा नहीं
03:10भगवान को पता है
03:11मनू कहता है सच है लेकिन जब तक हम सच्चाई नहीं डूंडेंगे
03:16कोई हम पर यकीन नहीं करेगा
03:18दोनों ठान लेते हैं कि असली हत्यारे को डूंड कर रहेंगे
03:22धीरे धीरे उन्हें कुछ सुराग मिलते हैं
03:24पता चलता है कि जिस रात इंस्पेक्टर अमर सिनहा की हत्या हुई थी
03:29उसी रात बिच्चू भी वहां मौजूद था
03:32एक गवाह बताता है कि उसने बिच्चू को गोली चलाते देखा था
03:36लेकिन डर के कारण कुछ कहनी पाया
03:39अब दोनों को यकीन हो जाता है कि बिच्चू ने ही उन्हें फसाया है
03:44वे बिच्चू तक पहुँचने की कोशिश करते हैं
03:47रास्ते में उन्हें कई मुश्किले आती है
03:49पुलिस उनसे पहले ही एक कदम आगे होती है
03:52कई बार उन्हें घेर लिया जाता है
03:54लेकिन चालाकी से दोनों निकल जाते हैं
03:56वे अब अपराधी नहीं
03:58बल्कि अपने हक के लिए लड़ने वाले लोग बन गये हैं
04:01कहानी में रोमांच तब बढ़ जाता है जब दोनों बिच्चू के अड़े पर पहुंचते हैं
04:07वहां गोली बारी होती है और कई लों घायल हो जाते हैं
04:11बिच्चू अब भी सोचता है कि वो बच जाएगा सै
04:14लेकिन मनू और कानू इस बार पीछे नहीं हटते
04:16वे बिच्चू से उसकी सच्चाई उगलवाते है बिच्चू मान लेता है
04:20कि उसने ही अमर सिन्हा को मारा और सारा इलजाम
04:24मनू और कानू पर डाल दिया ताकि वो जेल चले जाएं
04:27और वो अपने बाप का धन्धा अकेले संभाल सके
04:31अंत में पुलिस भी सच्चाई जान जाती है
04:34केके को भी एहसास होता है कि उसके बेटे ने गलत काम किया
04:37बिच्चू गिरफतार होता है
04:39और मनु और कानू की बेगुना ही साबित होती है
04:41पुलिस रेस इंस्पेक्टर के परिवार को भी सच्चाई पता चलती है
04:45कि इन दोनों का कोई कसूर नहीं था
04:47मनू और कानू अब आजाद है
04:49लेकिन उनकी जिंदगी का नजरिया बदल चुका है
04:53उन्होंने देखा कि अपराद की दुनिया में सच्चाई का कोई मोल नहीं
04:56वे ठान लेते हैं कि अब इमानदारी से काम करेंगे और नई जिंदगी शुरू करेंगे
05:00फिल्म का आखिरी द्रश्य बहुत भावनात्मक है
05:04दोनों दोस्त एक पहाड़ी रास्ते पर चलते हैं
05:07कानू मुस्कुराता है और कहता है अब हम छोड़ नहीं इनसान है
05:11मनू हसते हुए कहता है हाँ भाई दो कैदी थे हम अब आज़ाद है
05:15दो कैदी
05:17सिर्फ एक एक्शन मुवी नहीं है बलकि दोस्ती सच्चाई और इनसाफ की कहानी है
05:24इसमें दिखाया गया है कि हालात चाहे कितने भी बुरे हो
05:28अगर इनसान सही रास्ता चुने तो सच्चाई आखिर जीतती है
05:31कुल मिलाकर ये फिल्म दिखाती है कि जिन्दगी में जूट और साजिशें कितनी भी बड़ी क्यों नहों
05:38सच्चा दिल रखने वाले कभी हरते नहीं
05:41मनू और कानू जैसे दो आमचोड भी जब सच के लिए खड़े होते हैं
05:45एटाग तो पूरी दुनिया को दिखा देते हैं कि असली ताकत हतियारों में नहीं
05:49बलकि सच्चाई में होती है

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