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Jinn Ki Shadi Unki Shadi - Ep 18 [CC] - 4 Nov 25 - Wahaj Ali & Sehar Khan -
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Jinn Ki Shadi Unki Shadi - Ep 17 [CC] - 27 Oct 25 - Wahaj Ali & Sehar Khan - Presented by Sunsilk

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Jinn Ki Yeh Kahani Hai, Unki Zubaani Hai! ❤✨

A Spooky Story With A Twist Of Love & Laughter! ✨👻 Jinn Ki Shadi Unki Shadi Is All Set To Bring Horror, Comedy & Romance Your Way! 🎭

Writer: Syed Nabeel | Director: Saif e Hasan | Producer: Momina Duraid Productions

Starring 🌟 Wahaj Ali, Sehar Khan, Arslan Naseer, Romaisa Khan, Sidra Niazi, Laiba Butt, Syed Jibran, Irfan Motiwala, Nadia Afgan, Tamkenat Mansoor, Arbaaz Khan, Asif Khan, Nabeel Ahson & others.

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Jinn Ki Shadi Unki Shadi - Wahaj Ali & Sehar Khan -

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Writer: Syed Nabeel | Director: Saif e Hasan | Producer: Momina Duraid Productions

Starring 🌟 Wahaj Ali, Sehar Khan, Arslan Naseer, Romaisa Khan, Sidra Niazi, Laiba Butt, Syed Jibran, Irfan Motiwala, Nadia Afgan, Tamkenat Mansoor, Arbaaz Khan, Asif Khan, Nabeel Ahson & others.

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Transcript
00:00दिल हारे हैं हम तो क्या
00:04बोनादान है, बोनादान है
00:09कर लफज उसे ना बया
00:13ये बेजुबान है, बेजुबान है
00:20ख्वाबों में मिली
00:23फर्स्ट मेगा एपिसोड
00:259 डिवेंबर इतवार शब 9 बजे
00:30तो क्यों अजादान है
00:34क्यों अजादान है
00:39जो अजम से शादी होने तक
00:41ये सक्ता बंद रहेगी
00:43नहीं आजर, आजर उसे घल्टी हो गई है
00:46वो तबस
00:49अमारे बनाएव हुछ है
00:52इन हुछों के आगे
00:54तम जेसे नीजजाद की कोई ऐसी अद्न है
01:00जो नहीं पता कि मैं उसको कैसे तलाश करो
01:06पहले तो मैं सरब उसके बारे में सोचता था
01:09मेरे सामने आके खड़ी हो जाती थी
01:10और अब मैंने इस हवेली के हर कमरे में जाकर उसको आवाजे दी है
01:13लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल रहा
01:15पांच आया ना तो यहां पर बनती है
01:22जी नहीं पांच आया तो स्टॉप पर आएगी
01:25एक, दो, तीन, चार, पांच यहां पर
01:27असित क्या हूं मसला वेमानी क्यूं कर रहे हो
01:30अब दुमारा एक फिर भी नहीं आएगा और तुम देखना मैं बगायर पिटे अपने घर के अंदर चली चाहूं
01:33जोड़ो देख लेख लेख लेख लेख लेख
01:35अब तुम इत्ती बैमानी कर ती हो तुमारे साथ खेलने का बिलकुल मजा नहीं आता
01:42मुझे मज़ा आता है अलीक साथ खेलने के इतने रोंदू क्यों बन रहे हो
01:45यार ऐसे चंगेज चाचा होते है न तुम से चाहेगा कहता भी इतना मूड हो रहा है
01:51तो मैं बनाते थी हूं दो मिनिट में
01:53ने ने तुम पर पहली बहुत वर्कलोड है
01:56चंगेज चाचा को कोई अता पता ही नहीं है
01:58पांच दिन का कहके गए थे साथ दिन हो गए है
02:00उनके गाउं में सिंगनल्स नहीं आते हमारी हवेली में सिंगनल्स नहीं आते
02:04कॉंटेक्ट भी नहीं हो पा रहा है पता नहीं
02:07असद मुझे नहीं लगता कि चंगेश चाचा आप वापस आएंगे
02:13अरे नहीं नहीं चंगेश चाचा ने बच्पन से पाला है हम दोनों को
02:17अब बाजान के जाने के बाद हम इस तरह तो नहीं छोड़ सकते हैं न
02:20बैसे भी मुझे लगता है कि हम उन्हें देई किया रहे थे
02:24सारा दन वो घर के काम करते थे और फिर हम उनको यहां ले आया सेबों के बीच
02:29पुरा दन आयतल कुरसी और दरूद शरीफ पढ़ पढ़के शाम तक उनकी जबान अकर जाती थी
02:35अच्छी बात है कि वो अपनी फैमिली और रिष्टदारों के साथ हैं
02:40उनका जतना दल चाय उनको वहां पर रह लेना चाहिए
02:44कहां जा रहे हूं?
02:51मैं चाय बनाती हूं अली और नादिया के लिए भी बना लूँगी
02:54चलो मैं भी तुम्हारे साथ ही जलता हूं
02:57एक बार फैसे पहली पढ़ो
03:04दूब बार तो पढ़ चुका हूं
03:08एक और बार पढ़ लो ना बार बार पढ़ना अच्छा होता है
03:12हो सकते कोई कलू हो हम मिस कर रहे हूं
03:14हवेली से दूर हैं एहल-े-कबूर हैं जाके उनसे मिल लेना
03:18फातिया भी पढ़ लेना ढूंडने से मिलता है
03:20खोलने से खुलता है
03:22एक को मिला देना एक को जला देना
03:24इसका क्या मतलब है?
03:36ओ माइ गॉड येस
03:37बेने जहन में बहुत क्रेजी आइडिया आया
03:40कैसा आइडिया?
03:42मेरे जहन में पहले क्यों नहीं आया?
03:44जब मैं घर गई थी तो मैंने गूगल पर रिसरच की थी
03:47जिसमें पुराने जमाने के क्या क्या तरीके थे
03:49खुफिया तहरीर करने के
03:51वो सब मैंने पढ़ा था
03:52तो फिर?
03:55तो फिर पहला तो वो तरीका था
03:56फॉस्फोरिक इंग वाला ठीक है?
03:58और इसमें एक और था
03:59के लीमू के अर्क से तहरीर लिखी जाती थी
04:02और इसमें और भी कुछ चीज़ा आड होती थी
04:04सिंपल सी बात है
04:06इस खाली कागस पर जो तहरीर लिखी है
04:08वो कैसे पढ़े? ये बता दो
04:10अली उस कागस को
04:12मुमबत्य की आँच पर गर्म करने से तहरीर उभड़ती है
04:20Oh my god!
04:21Yes!
04:24इसलिह इस पर लिखाए के जला देना?
04:26Yes!
04:28Oh, I'm so smart!
04:42इसलाम लेकुम जी
04:47जी वालेकुम सलाम
04:48माजरत चाहती हूँ
04:50रात के सपहर आई हूँ
04:51वो मुझे बाबा बदर लिखाए काम था
04:54बीबी आपने वक्त ठीक चुनाएं
04:56पर मकाम गलत है
04:58क्या मतलब?
05:00मतलब यह के बाबा जी इश्चा के नमाज के बाद
05:03अपने दादा हज़त बाबा के मिजार पर हादरी देते हैं
05:05और फिर वही मिजार से मुलब के खानका में
05:08साहिलीन की दादरिसी करते हैं
05:10आप वहाँ चली जाएं
05:11इन्शालाँ आपके मुलाकात बाबा बदर लिखाएं से जरूर हो जाएगी
05:14कहां है रास्ता कहां से उगज़ का
05:17आपने वह बड़ा कबरिस्तान देखा है ना
05:19आहां आहां देखा देखा देखा
05:21बस उसी के पीछे बाबा जी का मिजार है
05:23और उसे ही मुचस्सिल वह खानका है
05:25आप वहां जाकर किसी से भी पूछ लेंगी
05:27तो वह आप खुद बाबा जी के पात लेज़े
05:29ठीक हो गया बहुत शुक्रिया
05:32और हमसे जलामत दिना कागस को बस घरम करना है
05:41पता है मुझे भी पागल नहीं हूँ बहुत
05:44कुछ नजर आया
05:51हाँ बस हटाना नहीं ऐसी रखना
05:57इल्म बड़ी दॉलत है
06:02ये भी कोई क्लू होगा
06:12ये भी कोई क्लू होगा
06:21ये तावीज अपने शोहर के सराने
06:38उसके सोने के बाद रख देना
06:40अल्ला ने चाहतों उसका वसा जाता रहेगा
06:43जाओ पीटा
06:53अल्लेकुम बाबाजी वालेकुम
06:55कैसे आना हुआ पीटा
06:59बाबाजी वो एक मसला है मेरा इसलिए हाजर हुई हूई हूँ आपके पास
07:03क्या मसला है
07:05मेरे दामाद का मसला है
07:11क्या मसला
07:13बाबाजी दरहसल
07:15मेरे डामाद के ओपर
07:17एक जिनने कबजा कर लिया है
07:19व की हाशिक हो गई ह
07:21और मैं चाती हूं कि आप
07:23किसीतरा उस जिनजादी से
07:25मेरे ।ामाद का पीछर शुडबात है
07:27जिनकी ये कहानी है उनकी जबानी है
07:34डूंड लो किताबों में रंग आसमानी है
07:38उसकी नजरें तुम पे हैं उससे ही चुपानी है
07:41हात में ना आया तो खाक ही उडानी है
07:46तो बहुत ही मुश्किल है ली मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा
07:50मुझे अभी कुछ समझ में नहीं हो रहा
07:55पता नहीं खुछी किस हाल में होगी यार
07:59तुम उसके लिए इतना परेशान हो रहे हो
08:01उसे तो तुमारी फिकर नहीं है
08:04अगर तुमने उसको इतना ढूंडा
08:06उसे भी खुछ कोशिश करनी चाही तुम्हें खबर देने की
08:11इसी बात की तो परेशानी है
08:13पता नहीं आधर ने उसके साथ क्या सलोक किया होगा
08:15उसे इस काबिल भी छोड़ा होगा कि नहीं कि वो मुझसे राब्ता कर सके
08:21उसे बहुत महपत करते है नादिया
08:23नादिया
08:25कहने और करने में फरक होता है
08:29नादिया
08:30वोशी मुझसे बहुत महपत करती है
08:32वो चाहती तो तुम्हारे साथ कुछ भी बुरा कर सकती थी
08:36उसने तो तुम्हारा तावीज तक उतरवा दिया था
08:38उतरवा दिया था चाहती तो तुम्हें नुकसान पहुचा सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया
08:43और उस दिन जब हम लोग हॉस्पिल से वापस आये तो वो छट पे तुम्हारी शकल में खड़ी हुई थी
08:50और ऐसे बहिख करी थी जैसे अभी छ्रांग लगा देगी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया
08:54क्योंकि वो तुम्हें नुकसान नहीं पहुचाना चाहती
08:58क्योंकि वो मुझे किसी भी किसम की तकलीफ में नहीं देखना चाहती
09:01क्योंकि वो मुझे से मखपत करती है
09:03मुझे हर हाल में इस तक पहुचना है
09:09मस
09:10आपने फर्माया कि वे जिन्जादी और उसका खांदान
09:27शेहर से बाहर एक हावेली पर बसे रखे हुए
09:31जी बाबाजी
09:33जी वो मेरे दामाद के हावेली है
09:36कुछ दिनों पहले मेरे पास एक बच्ची आई थी
09:42वो भी शेहर से बाहर किसी हावेली का जिकर कर रही थी
09:45और बताया कि उसे और उसके शोहर को जिन्नाद ने किस तरह उस हावेली में कैद कर लिया था
09:52जी बाबाजी समीरा नाम है उस बच्ची का मेरे दामाद ने जिकर किया था उसका समीरा ने तो भीजा मुझे आपके पास
09:59क्या आप ही मेरे तमाम मसलों का हाल निकालेंगे
10:02कुछ कीजिए ना बाबाजी मैं आपको बता रही हूँ
10:05उस जिन्जादी ने मेरे दामाद पर जादू कर दिया है तो उसके सहर में
10:10लेकिन वो सहर में कैसे हो सकता है
10:14मुझे समीरा बेटी ने बताया था कि घर के अव्राद ने खास तावीज पाहन रखे हैं
10:20इसी वज़ा से वहां जिन्जाद के होते हुए भी उस अवीली में रह रहे हैं
10:24आप से क्या पता है इन बातों कैसी तो मैं आपके पास आई हूँ
10:28और वो जिन्थ उस अवेली बाले बहुत चलांके हैं
10:33खास तावर पर वो जिन्जादी उसने अपनी अधाओं के जादों से मेरे दामाद पे कबसा कर लिया है
10:39वो भूत माशूम है मेरा दामाद अली वो उसकी चिदी लिए परी बातों में आके हैं
10:44ये जिन्नात बड़ी मकार मख्लूफ है, जूट रवानी से बोलती है, और धोकदही में अपना सानी नहीं रखती, मेरा दो-चार बार इन से वास्ता पड़ा है, मुझे मालूम है.
10:56बाबाजी, मेरी बेटी ने तो दुख में घाना भी न बीच छोड़ दिया है, ना हसती है, ना बोलती है, अगर उसे अलीना मिलाना, तो मेरी बच्ची तो मर जाएगी, बाबाजी, कुछ कीदी है.
11:10अरे बेटा, दिल छोटा ना करो, इन्शालला हम उसकी जान शुरुआ देंगे.
11:21ये लो, ये कल मगर्ब से पहले हवीली में किसी भी जग़ जला देना, ये अली को उसकी हकीती मुभबत से मिला देगा.
11:31आपका होने वाला दामाद, आपकी बेटी से मुहबबत तो करता था ना?
11:39ये बाबाजी, करता है मुहबबत.
11:43वो जब तक ये जिनजादी ने कबदा नहीं किया था और उससे पहले तो वो नादी के लाबा किसी को देखता भी नहीं था. बच्पन में मंगनी हुई थी उन दनों की.
11:51हम्...
11:52वो उस लड़की से दूर होकर अपनी असली मुहबबत से जा मिलेगा. इन्शालला, जरूर मिलेगा.
12:06इन्शालला, बाबाजी. बहुत शुक्रिया, बाबाजी. वो मैं आप...
12:10ना, ना, ये सब सिल्सला फिर सबी लिल्ला है. आप जाएए.
12:15जजा के लवाब.
12:45नादिया, क्या हुआ है, तुम्हे तुम्हे इतनी अधास की हो?
12:50पुछ नहीं. सारापी, आप अराम करें न, मैं नाश्ता बनाती.
12:53तुम बात को डालनी की कुशिश नहीं करो. मुझे बताओ क्या हुआ है?
13:02सारापी...
13:03नादिया...
13:04नादिया ये मत भूलो कि वो एक जिन है
13:24वो अली की जिन्दगी में खुशी नहीं सर्फ गम लेकर आईगी
13:27तुम्हें अंदाजा नहीं है कि असद कितने परेशान है
13:30वो रातों को कही मरतबा उटकर बैट जाते हैं
13:33वो कभी भी अली को खुशी के करीब नहीं जाने देंगे
13:36तुम्हें क्या कि रुजारा आपी
13:37अली जिस तरह अपनी मुहबबत का इजार करता है
13:42मुझसे खुशी के लिए मुझसे नहीं बर्दाश्ट होता
13:44वो मुझसे पताए कि खुशी मुझसे जादा मुहबबत नहीं कर सकती अली से
13:52अधिया
13:54तुम्हें पताए कि मैं और असर देख सकते हैं तुम जतनी कोशिशें कर रही हो अली के लिए
14:00और हम दोनों इस बात को बहुत अप्रिशेट करते हैं
14:02अधिया नहीं महनत का कोई फाइदा नहीं है
14:05अधिया हमीली में आने से पहले खुशी से मिलने से पहले उसकी आखों मैं अपने लिए पसंदीदीदी देखी थी
14:14अगर अब तोस्ते के लावा कुछ नजर नहीं आता मुझे
14:18मुझे ऐसे चूइट करता है जैसे कोई नड़का दोस्तू मैं इसके रहो कुछ भी नहीं है
14:31लेकिन मादिया अली की खुशी से शादी तो नहीं हो सकती ना
14:36मैंने तो आज तक नहीं देखा किसी जनकी इंसान से शादी होते वे तुमने देखा है क्या
14:40नहीं न तो फिर जो बात मुमकिन ही नहीं उसके लिए कैसा फिकर मंद हो ना
14:44जारा प्याहरी सो यह मुमकिन करना चाहता है न
14:47मैटर तो यह करता है कि वह क्या साथा है
14:51यह सब का क्या फाइद है
14:53नातिया
14:57अ बसकते है चंगे साचाओं मैं देखकर आती
15:10मैं अपने बच्चे से मिले के लिए नहीं आ सकती हूँ नाति तो थोड़ा से तो सफ़र है तो आजाती हूँ नहीं यह तो आपने बहुत अच्छा की आँटी
15:28लेकिन मस्दा वही है ना कि सवेवी में कोई भी इनसान तावीस के बगएरा यह बात खत्रे से खाली नहीं है
15:33उसके तुम बिलकुल फिकर ना करो इस दफा मैं पका काम करके आई हूँ
15:37यह नहीं थो वरियर बाट दान
15:39यह पक्रा में नहीं है
15:42जारा तुमने ना मुझे वो कोर्मा दुबहरा से खिलाना है
15:46उसका टीस अपीत ना मेरे मूमस का जाइका आ था
15:51यह नो अगर उस दिन उसमें जहर ना मिला होता ना मैंने तो पताने कितना सारा खा लेना था
15:55यह तो कुए मसला ही नहीं आएंटी कोर्मा तो जटपट बन सारगा
15:58नादिया तुम अपनी मामा को अपने रूम में लेके जाओ
16:01मैं कोर्मा बनाती हूँ
16:02ताक्यू सो मुझ
16:04उठा वो इसका ना वील खराब होना लेक में हेल्प यू
16:07अच्छा किती पहली है बूझ दी अभी तो तीन सौ अभी है चौती रहती है अभी अड़ी सोर है जब उठेगा तो आपको भी सुना देगा
16:13तो रहा है क्या है
16:15वाट
16:16क्यों आगे आभी वो भी पिना तावीज के
16:19तो मैं नहीं पता मैं इतना बड़ा माल का मार के आई तो पाल कर दी है मेरे
16:24क्या हुआ है
16:25वह बाबा बद्रल इसनाम के बास करें दी और वहां से में
16:30का हो गया हूँ
16:32तावीज देक रहा हूँ
16:35यह तो बहुत अची बात है
16:38इसमें से धाका डालके पहन लेना सेफ हो जाएंगी आपी
16:41यह पहनने वाला तावीज नहीं यह जलाने वाला तावीज है
16:44जलाने वाला
16:45उन्होंने कहा है
16:47कि इस तावीज को जब हम जलाएंगे
16:49तो अलीख खुशी की मुहपट स्टिकल के तुम्हारी मुहपट में वो अबतला हो जाएगा
16:53सच में
16:54कि वाके ऐसा हो सकते है ममा
17:10आजें
17:12अलीज आग रहे हूँ
17:14जे जे भाई आए प्लीज
17:19क्या हुआ
17:24क्या हुआ
17:26पिर से अबाजान को खुआब में देख लिया क्या
17:32तुम्हे लिए परिशान क्यों हो
17:34तब खेरिये थे
17:36खुशी की वज़ा से परिशान हुआ है
17:44हाँ हाँ मुझे याद आया
17:46समीरा एना उबता रही थी
17:48कि इनके तावीज मौटसादी तोर पर असर करते
17:51सोचे जिन वांती ताला टूट किया था
17:54उनके तावीज क्या असर से
17:55जी और जब आप इसे जलाएंगे तो जिन की बच्ची जोगा ना वा मल्या मेट हो जाईए
18:00मेट हो जाईए
18:01मैं ते मामा आपका क्या होगा
18:03अगर उन जिन नात ने आपको नुकसान पहुचाने के कोशिश की तो
18:06आप दो दफ़ा बाल-बाल बच्ची हैं
18:08जैसा कुछ नहीं होगा मुझे
18:10मुझे मेरी फिकर मत करो
18:11मैंने बस यह माखरब के वाक जलाना है
18:13उसके बाद मैं आवेजी से निकल जाओंगी
18:15फिर मैं जाओंगी बाबाजी के पास
18:16और महा से तावीज लिख रहा हूंगी अवेली के लिए
18:18अच्छा चलें आप जाके फ्रेश हो जाएं
18:20अच्छा में जारा आपी को देख लो उनको हेल्प की ज़रूरत नहीं हो बिचारी कपसे अकेली लगी हुए
18:24और अपर अली का भी कुछ पता नहीं का पहली हो के लिए मुझे बुला ले
18:27अभी तो सो रहा है उठते ही मुझे जूना शूरू कर देगा
18:30मुझे अभी तोर्माट बन गई हो कोई दूरूरत नहीं है मैं जाओंगी जारा की जाके मैं हल्प करा दियो तुम जाओ
18:36अगे लब यू
18:37अली प्लीज इस बात को दिल से निकाल भाया
18:45जिनात के साथ इस किसम का रिष्टा नहीं रखा जा सकता इस किसी भी किसम का रिष्टा नहीं रखा जा सकता यार वो आग से बनी हुई मखलूक है और आग का काम चला कर भजन करना है
19:00अब अच्छी तरह जानते हैं ना कि आप मुझे नहीं समझा सकते
19:04खास तोर फिर उस वक्त जब मैं हक पर हूँ
19:08उसे बहुत महबत करता हूँ यार
19:11उसके बिगर जिंदगी गुजारने के बारे में सोच भी नहीं सकता
19:15इसलिए प्लीज इस टॉपर पे कोई बात ना कीज़ेगा
19:18प्लीज
19:19ठीक एलिम
19:25तुम्हारी जिंदगी है तुम्हारे फैसले है
19:28जो तुम्हे ठीक लगता है तुम करो
19:32लेकिन कल को अगर कुछ बुरा हुआ ना तो मेरे पास रोते हुए मत आना
19:36क्योंकि उस वक्त मैं दुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकूँगा
19:41थैंक्यू एन लव यू
19:42आपकी इतनी सी जासब में ना
19:45मेरे लिए बहुत है यार
19:48और आप देखेगा
19:51इंशाओला मेरे इस वैसले पे आपको बहुत खुशी लोगी
19:55अच्छा तो ये सारी पहेलियां खुशी तक पहुँचने के लिए हल की जा रही थी
20:00अरे नहीं यार
20:01सिर्फ खुशी तक पहुँचना मेरे मकसद नहीं है
20:04मैं अब बाजाम की खौईश भी पूरी करना चाहता हूँ
20:09ये हमारी हवेली है हम इसके असल मालिक है
20:12आजर को यहां से जाना होगा
20:14और मुझे यकीन है कि खुशी इस मकसद में हमारा साथ देगी
20:19तुम्हारा कहने का मतलब है कि खुशी अपने घर वालों को इस हवेली से निकालने के लिए
20:25तुम्हारी मदद करीगी
20:27जी
20:27वो मुझ से इतनी ही महपत करती है
20:30आज हमें हर सूरत चौती पहली हाल करनी है
20:41चले, मैं आरहा हूँ बस
20:45जारा किती अच्छी गुचबु आरहा है
20:56बस, सब कुछ डाल दिया है
20:59अब ये डालूँगी और आपका फेवरिट कुर्मा तयार
21:02थैंकियो सो मच
21:03सुनो नादिया को भी कुछ सिखा दो
21:05अब हमेशा तुम्हे तुम्हे तो नहीं बोलूँगी ना कुर्मा बनाने के लिए
21:07तुहाँ टेंशन क्यों ले रही है
21:09बस एक मरतबह अली और नादिया की शादी हो जाने दे
21:11फिर मैं उसको सब कुछ सिखा दूँगी
21:14वह हम दोनों और करेंगे क्या जब यहां होंगे तो
21:16दिल तो मेरा भी यही है कि उन दोनों की शादी हो जाए
21:18ये नादिया तुझे कोई और ही कहानी सुना रही है
21:21बतानी आउटी
21:23हम तो उस जिनजादी से मिले भी नहीं है
21:25बतानी कौन है? कैसी है?
21:28और हमारे अलीबर बतानी क्या जादU कर दी है
21:31अरसद तो इस रश्टे के लिए किसी सूर्ट तयार नहीं है
21:33और मैं अच्छी तरह जानती हूं कि वो कभी नहीं मानेंगे
21:36हाँ, लेकिन अली की शादी कभी ना कभी तो होनी है ना, जिन्जादी से उसका पीछा कैसे चुड़ाओगे तुम लोग, मैंने तो सुना है जिन्नात, अगर किसी के इश्क में मुबतला हो जाए ना, तो बड़ी मुश्किफ से उसका पीछा चोड़ते हैं या चोड़ते ही �
22:06तो तुमें याद है ना समीरा, उसने एक बाबजी से ताविज लिया था जब इस हवेली के जन्नेर कैद कर दिया था उसके शोहर और उसको, तो बस मैंने भी उसी बाबजी से ताविज की है
22:16पर सचमें
22:17तो उसका करना क्या है? अलि को दिना है या उसको फुष्य को पिलाना है?
22:21अरे नहीं, पिलाना पूलूना कोई नहीं है
22:24बस हवेली की किसी कोने में जाके उस ताविज को अलिकी नजर से बचके जलाना है
22:29पिर तुम देखना, अली को उसकी सची महब्बत मिलने से दुन्या की कोई दाकत नहीं रोक सकेगी
22:36कोई भी नहीं
22:37सरदार गुल्फान, ये इनसाफ नहीं जल्म है
22:48इतनी जी बात पर मेरे भाई को बस्म कर दिया, माड़ा ना उसे
22:52हमारे सामने आने की तमीज भी तुम भूल गए शानो
22:59सरदार के हमें सवाल करने का हग भी नहीं है
23:02क्या जुर्म था मेरे भाई का
23:05कि उसने एक इनसान जादी ते महब्बत की थी
23:08महब्बत करना जुर्म है क्या
23:10जुर्म है
23:11जुर्म है ये
23:13क्योंके किसी इंसान से महबबत नहीं की जा सकती उससे सिर्फ और सिर्फ दुश्मन की जा सकती है बाद
23:21और ये कई हजार नसलों से जीनान कबीले का कानून है और जो भी ने कानून तोड़ेगा वो तो मार जाएगा
23:35सुना तुमने
23:37मैं नहीं मानता इस कानून को ये इंताब नहीं बरबर्यक जोहानत है अरे मुहबबत तो मरदान है
23:47नहमत है तो चाहिए किसी से भी लो उस आदमजादी ने भी तो मेरे भाई से मुहबबत दी थी
23:54बंक करो अपनी ये बक्वास देखते क्यों पकड़ने इसको
24:07बंक
24:37कुछ मिला?
24:38नहीं, इदो तो सिर्फ बढ़तन है, हटो, बारी तो नहीं थी मैं, लगती नहीं हो लें काफी बारी है, अब क्या करें, हबेरी में कोई तो किताबों वाली अल्मारी होनी चाहिए ना,
24:56अरे यार हबेरी में तो जगह जगह किताब हैं, मेरा कमरा नहीं देखा सारा किताबों से भराऊ है, पढ़ते बढ़ते तो थेहनी अबा लबेरी कि लाबेरी यां खोली है, लगता है किताब में कुराए पर छलाते थे,
25:06वो तो देख लिये है हमने, इसके इलावा कुछ बताओ.
25:13एक जगह है, वो एंट्रेंस वाली जगह पे किताबों वाली अल्मारी है.
25:18वो नहीं देखा ना हमने?
25:20चाहा कि दखते हैं.
25:22आचाओ.
25:22मुझे तो यही लगता है कि पहली में अस्मारी रंग के जिल्द वाली किताब का ही जिकर है.
25:29वेकिन है वेली में तो ऐसी कुछ किताब नहीं है, हमने तो हर जगह है देख लिया, यार.
25:33तो सोचो, अली, और कौन सी जगह हैं जहां किताब ही रखी हैं?
25:36शायद वो नीचे वाले बंद कमरे में हैं.
25:47उसे कोलने की कोशिश करें?
25:48ने, ने, ने, उसको नहीं कोल सकते, मैंने अबबाजान को नहीं जाते पर देखा था, बलकि एक दफ़ा भाई ने कोलने की कोशिश की थी, लेकिन भावी ने कसम दे के मना कर दिया.
25:56उस कमरे की चाब भी नहीं मिलती और अब दर्वाजा तो नहीं तोड़ सकते हैं, तो और क्या करें? कोई क्लू नहीं मिल रहा है हमें.
26:05तीसरी पहली से मिलने वाले डबे में जो कागस था, उस पर लिखा बता, इल्म बड़ी दौलत है, इल्म तो किताबों में ही होता है, तब कोई नेटशेट तो था नहीं.
26:19तिमाग पर जोड डालो, कोई जब हम इस कर रहे हैं हम.
26:24आदिया, एक कमरा है अबेली के पिछले हिस्से में जो आप मेंसे कोई यूज ही नहीं करता, कोई वहाँ जाता भी नहीं है.
26:38मुझे तो कभी नहीं दिखा है वो कमरा?
26:40यार मैं खुद पहली बार गया था, अजीब पुराना सा कमरा है, स्टोर टाइप, पुराना समान पढ़ा हुआ है, पुराना फरनेचर शायद दादाजान के जमाने का हो, हो सकते है किताब वहीं कही है?
26:52हम, चारकर देखते हैं.
26:55आजाएं, खाना लग गिया है, थंडा हो जाएगा.
27:00यार, प्रीज पहले खाना कहा लेते हैं, बाई ने भाई ने गुसा करना है, और वो समझेंगी, मैं खुशी को ढूण रहा हूँ, ओके? फिर उसके बाद चलते हैं, आज आजाएं.
27:25तुम्या अकेली क्या कर रही हो, वहाँ जाएं की महासरदार अखोबेगम तुम्हारा पूछ रही है, मैंने कह दी अच्छम की चारसो दिन से सोई नहीं है, नह पले रही है, मैं खुशी के लिए बहुत खौफ सदा हूँ, अगर जाएं को पता चल गया तो, तो उसको मार �
27:55और हम तो उसे बताने का सोच भी नहीं सकते हैं, लेकिन अगर उसने कोई जजबाती फैसला कर लिया तो, अगर वो खुशी करना चाहे, तो हम उसे नहीं रुक सकते हैं, अगर खुशी ने ये बेवकुफी की, तो वो अपनी राक खुद बनाएगी, मेरी इकलौती बहन है �
28:25तो वो हमें भी जिन्दा नहीं छोड़ेगा, तुम जानती हो से इंसानों से कितनी नफरत है, खुशी सकता बनतो है ना, हाँ, वही है, इस लड़के अली का जल से चल कोई बंदबस करना पड़ेगा,
28:55नहीं रहेगा पांस, नह बचेगी पांसरी,
29:09क्या सुछ स्वार राकौमा बनाया, ये सा बचाने पांसरी, ये साधर्या, थैसे हो है, और ये तो अधर भी दिखते नहीं की के दिखते हो का, तो उसस हो में तosphुद बनाती ती?
29:16तो फुरेव का नाहम मुंगा थार जागे ही ख़ाब कर दिया मुंगा थे खराब करता है
29:19ज सब कहा है और मेरा कोई । इसका कोर्मा और कहा है
29:23झाल तारा अगर मेरा कोई डीटा हो था ना मैनने तुवरी वही पना देता
29:26स्लिख सब्स्थित
29:28वह बहुत पहसा हो और तुमारी पपपो, सेभी, बुच्छ गोर्मा नहीं बनाती थी, पानी में बुटिया तराती थी.
29:38प्राटी पहली किया तौरी.
29:41मम्मा, अभी तो हमें नीले रंगी जल्द वाली किताब की तलाश है.
29:45नीले रंगी जल्द वाली किताब?
29:47एसी किताब तो हमें कभी नहीं देखी नहीं है, वेरी में जल्द वाली बहुत सरी किताबें है वेली में, पर नीली तो…
29:58चौर्थी पहली दुबारा से पड़ो.
30:03पड़ो.
30:17जिनकी यह कहानी है, उनकी जबानी है.
30:23ढूंड लो, किताबों में, रंग आस्मानी है.
30:28उसकी नदरे तुम पे हैं उससे चुपानी है.
30:32हाथ में न आया, तो खा की उड़ानी है.
30:36आस्माने.
30:38लेकिन इसमें कहा जिखर है आस्मानी रंग की किताब का?
30:41लेकिन अटी जो शेर ही ना、
30:43छूर्ड लो किताबों में रंग आसमानी है.
30:47हो सकता है कि आसमानी किताब की बात नहोंगी हो.
30:49हो सकता है कि यह बात हो रही हो,
30:51कि जो जुचीज ढूंडने में हो आसमानी रंग की हो.
30:55वाव!
30:58बहुत प्सक्षाला.
31:00लेकिन,
31:00लेकिन वो क्या चीज हो सकती है जिसको जिसका रंग आस्मानी हो और इसको ढूना हो?
31:06मतलब कि क्या चाते थे तो तुम्हारे वालत साब?
31:09एंड रिजर्ट क्या है? क्या ढूनना है इन पहेलियों को बुझवा के?
31:12तो बीसिक लिए अबबाजान ने जो डायरी लिखी ना उसके अंदर ये जिकर किया हुए कि इन पहेलियों को सौल्फ करके हम एक ऐसे हतियार तक पहुंच जाएंगे
31:18जिसकी मदद से हम जिनात से लड़ सकेंगे
31:21यह नि कि हतियार वो हमारे हक्ते लग गया, तु इस हवीली को हम जिनात से अजात करना
31:27..इसका मतलम हमें असमानी किताब नहीं।
31:30किताब में असमानी हतियार डूना होगा
31:36असमानी रंग का थियार
31:51कोरमा अच्छा था
31:54यार जारा, क्या मसला है
31:59फिर परिशान बैठी वी
32:01तुम इतना परिशान रहोगी न
32:03तो हमारी आुलाद भी परिशान ही पैदा होगी
32:05सब मुझे एक बात बतानी है आपको
32:10सब ठीक तो है न
32:19तुम्हारी तब यह ठीक है, बीपी तो लो नहीं हो रहा
32:21वो, मैं बिल्कुल ठीक हूँ
32:23मैंने तुम्हे यह बताना था
32:25कि फरीदा आंटी समीरा के बज़र्ग बाबा के पास कहीं थी
32:28खुशी से जान चुडाने के लिए तावीज देकर आई है
32:32मगरिब के बाद जलाना है
32:34भी यह तो बहुत अच्छा हो गया
32:36मैं भी कुछ ऐसा ही सोचाता, शुकर है उन्ना खुदी कर लिया
32:38एक प्रॉब्लम है ना इसमें
32:42फरीदा आंटी के तावीज से अली को उसकी महबत मिले की
32:45और अली तो नादिया से महबत ही नहीं करता
32:48वो तो खुशी से महबत करता है
32:50तो अगर फरीदा आंटी के इस तावीज के चकर में
32:53अली खुशी को मिल गया तो
32:55ये तो तुम ठीक कह रही हो
32:58और वो बाबा के तावीज में असर भी बहुत है
33:02मैंने खुद अपनी आँखों से देखा था
33:04तैखाने का ताला कैसे तूट के जमीन पर गिरा था तावीज के असर से
33:07हमें जाके रोकना होगा फरीदा आंटी को
33:12हम फरीदा आंटी को ये कैसे बताएंगे
33:15कि अली उनकी बेटी से महबत नहीं करता
33:16यार जितना मैं जानता हूँ ना नादिया ने खुद ही बता दिया होगा उनको
33:22और वैसे भी वो अपनी अम्मी से कुछ भी नहीं चुपाती है
33:25तुम्हारा क्या मतलब है कि फरीदा आंटी खुद अपनी बेटी को उसकी महबत से दूर करेंगी
33:30नुझे नहीं पता यार चलते हैं जाके फरीदा आंटी से बात करते हैं उनसे पूछते हैं कि उनके दुमाग में आखिर चल क्या रहा है
33:36चुनो
33:38नहीं भाई मैं अच्छी तरीके से देख लिया है यहां कोई आस्मानी रंग के किताब नहीं है
33:51यारी यह चौती भाईली ने तो पागल करती है कोई क्रुवी नहीं मिल रहा
33:57एली मुझे लगता हमें वो कमरा खोलना है पड़ेगा
34:02कौन साब नीचे वाला जो बंद है
34:05जाहर है सारी हवेली तो देख लिया है कहीं तो वो होगी ना किताब जिसमें हमें हत्यार की इंफोमेशन मिले
34:11अब यह भी नहीं पता कि हत्यार क्या है
34:14नादिया, मैंने तुमें बताया था ना कि हवेली के पिछले हिस्से में कमरे जो बंद है, पुराना फ़निचर है, उसमें एक हलमारी है, कुछ किताब है
34:21हाँ, वहाँ चरकर देखते हैं ना, हम तो वैसे भी जाने वाले थे
34:25जारा आप इने खाने के लिए बला लिया था
34:27शर्ट
34:28नादिया, हमारी मामा के दिर है, वो अपने कमरे में तो नहीं है
34:33हाँ भाई, अपने कमरे तो क्या, किसी भी कमरे में नहीं है
34:37जहाँ जहाँ भी वो समा सकती थे थे ना, हमने हर को ना देख लिये
34:41कोई अता पता नहीं है भाई
34:43आप लोगों ने किचन में देखा?
34:46वो खाने के बाद उनको चाय की तलब होती है
34:48हो सकता है चाय बना रही हो
34:49यह सही कह रही है
34:50हमने किचन में तो देखा ही नहीं
34:51आप लोगों ने ऐसी इतना परिशान कर दिया
34:54आप चल कर देखते हैं ना?
34:56हाँ, आप लोग जो, मैं वेली के पिछला हसा में जाता हूँ गताब देखने है
35:00ठीक है?
35:01ओके
35:15हो, चाल चाल चाल चाल चाल चाल
35:21हाँ, अंटी, आपने ताफीस जला भी दिया
35:26हाँ, और ठीक मगर्ब से पहले जलाया मैंने
35:29क्यों? कमस्ता है?
35:30अगर ये ताफीस जलाने से तो अली को उसकी महबत मिलनी है ना?
35:34तो अली तो खुशी से महबत करता है, वो तो नादिया से महबत ही नहीं करता
35:37पर नादिया को कैसे मिलेगा वो?
35:39नहीं, असल में तो अली नादिया से महबत करता है, वो तो जिनजादी है
35:43वो उसके जादू के असल में आया वाली
35:45और तुम्हे क्या लगता है? ये बात उससे नहीं सोची होगी?
35:49आपका कहने का ये मतलब है, कि अली असल में नादिया से महबत करता है?
35:54मतलब नहीं है, अफकोस नादिया से महबत करता है
35:58और वैसे भी नादिया तो अली की जिंदगी में खुशी से पहले से है ना?
36:02और इसने मुझे खुद बताया था, जब तक वो इस हवेली में शिफ्ट नहीं हुआ था, वो तो नादिया के आगे पीछे पिरता रहता था
36:09ममा अली के हवेली में शिफ्ट होने से दो दिन पहले तो इसे में मिली हूँ
36:13तो बेटा, दो दिन से क्या होता है? एक शक्स को दुसरे शक्स से महबबत उने में सिर्फ एक लमहा लगता है
36:18तो उसने कौन सा मुझे परी दफ़ा देखती ही बोल दिया था कि असे मुझे से मुझे से मुझे हो गई है
36:22पेटा हर बात कहीं नहीं जाती है
36:24कुछ बाते आंकों से भी समझी जाती है
36:27आंकों से भी कभी नहीं कहा उसने
36:28अरे ना तो तुम को क्या हो गया है? इतनी पुरानी बात तो नहीं है तुमने मुझे खुदी बताया था
36:33कि खुशी के मिलने से पहले, अली तुम्हारे साथ घुमा पेरा करता था, तुम लोग लांग ड्राइस पे जाते थे, मुवीज देखते थे, आइस्क्रीम खाते थे, तुम लोगों ने कटे वीडियो बनाये थे, और अली तुमसे मोहबत करने लगा था, अगर खुशी बीच
37:03देखो नादो, मैंने बहुत मेंनत की है, अब तुम वक्त को जाय मत करना, ये नाओ के खुशी फिर तुम्हारी जिन्दगी में गं भरते है, अगर जोगों किताब में है यार,
37:33दिल का है ये बंजारा बंद
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