00:00शतिसगड की राजनन्द गाउं के तेजकरण जैन का शौक कुछ हटकर है इनके पास नोटों और सिक्कों का कलेक्शन है जिसमें 146 देश की 476 केरेंसी हैं जिन पर गववंश मौजूद है जिसको वो 1985 से संजो कर रखते आ रहे हैं
00:18इतना विस्तार पुर्वत बना चुका था कि मुझे 2016 में लिंका बुक आफ रिकार्ड मिला और धीरे धीरे मैं इस पर रिकार्ड भी लिये और मेरे इस काम को देख करके भारत की अच्छी जानिमाने संस्थाओं ने मुझे सम्मानित किया
00:37तेजकरण के पास BC से लेकर वर्तमान तक, एलमूनियम और कौपर से लेकर सोने तक के सिक्क्यों का कलेक्शन है लेकिन इनको मलाल है कि विदेशी मुद्राओं में गोवंच को महत उतो दिया गया लेकिन अपने देश की करन्सी से गाय गायव है
00:50कुछ देशों ने जैसे कि मेडा गाशकर मालदोवा और न्यू जर्सी ऐसे देशों ने अपने नोट के वाटर मार्क में भी गाय का गौमुख चित्रांकित किया है भारत में तो बना ही ने कोई नोट ही नहीं बना भारत में
01:11सिक्कों में जो आना पद्धती थी तब तक थी और जहां से डेसीबल पद्धती आई वहां से तो सब मामला ही खाया हो गया
01:21तेशकरण ने पिये मूदी से गोवंश के चित्रवाली करेंसी जारी करने की मांग की है तेशकरण देश के 10 राजियों में 49 प्रदरशनी लगा चुके हैं
01:29देश भर में और 50 प्रदरशनी ये कुर्वा में लगाएंगे और ये प्रदरशनी काफी खास होती है काफी लोग सरामा भी करते हैं और दूर दो से लोग इसे देखने भी आते हैं
01:42कुर्वा सिराज कमाशा एक विभारत चप्तिजगर
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