Skip to playerSkip to main content
Mission Bhagavad Gita Day 42 – अधर्म का बढ़ना और कुल का पतन | Gita Shloka 1.41 Explained | Hare Krishna Bhakti Vibes

Mission Bhagavad Gita – Day 42
Chapter 1, Shloka 41
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः।
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसंकरः॥

भावार्थ:
जब अधर्म बढ़ता है हे कृष्ण,
तो कुल की स्त्रियाँ पतन की ओर चली जाती हैं।
और जब स्त्रियों का पतन होता है,
तो समाज में वर्णसंकर उत्पन्न हो जाता है।

🕊️ यह श्लोक हमें सिखाता है कि धर्म और मर्यादा का पालन समाज के संतुलन के लिए कितना आवश्यक है।
हर दिन एक श्लोक समझें और जीवन को बेहतर बनाएं —
Hare Krishna Bhakti Vibes के साथ।

🙏 कमेंट करें: “जय श्रीकृष्णा”
📖 रोज़ एक श्लोक — रोज़ आत्मा का उत्थान।
जय धर्म की विजय। जय श्रीकृष्ण।

#MissionBhagavadGita #BhagavadGitaExplained #HareKrishnaBhaktiVibes #BhagavadGitaQuotes #SanatanDharma
#GitaSloka #SpiritualWisdom #KrishnaBhakti #GitaDaily
#JayShriKrishna

Mission Bhagavad Gita
Bhagavad Gita Day 42
Gita Chapter 1 Shloka 41
Bhagavad Gita explanation in Hindi
Sanatan Dharma teachings
Hare Krishna Bhakti Vibes
Daily Gita Shlok
Krishna motivation
Spiritual India
Dharm aur Samaj

Category

📚
Learning
Transcript
00:00हरे कृष्ण दोस्तों, मेरा एक ही लक्ष्य है श्रीमत भगवद गीता के साथ सौ श्लोकों को हर दिल तक पहुचाना अगर यह ज्यान आपको छू जाएं तो इसे साजा कीजिए और जुडिए मेरे साथ इस मिशन में
00:13मिशन भागवद गीता श्लोक दिवस बयालीस अध्याय एक श्लोक इकतालीस अधर्मा भिभवात कृष्ण प्रदुष्यंती कुलस्त्रिया स्त्रीशो दुष्टासु वार्षने जायते वर्नसंकरा भावार्थ जब अधर्म बढ़ता है हे कृष्ण तो कुल की स्त्रिया पत
00:43यही कारण है कि धर्म की रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है क्योंकि जब कुल की मर्यादा तूटती है तो पूरे समाज का संतुलन बिगड़ जाता है कमेंट में लिखें जै श्री कृष्ण और रोज एक श्लोक समझने के लिए जुड़े हरे कृष्ण भक्ती वाइ�
Comments

Recommended