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Krishna ne Dukh ka Permanent Solution bataya tha – Par hum bhool gaye
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00:11क्या आपने कभी अपने आप से ये सवाल पूछा है इतनी सुविधाओं के बावजूद इतनी टेक्नोलोजी के बावजूद इतनी आजादी
00:21के बावजूद आज का इनसान इतना दुखी क्यों है
00:24हमारे पास घर है, नौकरी है, फोन है, इंटरनेट है लेकिन फिर भी मन बेचैन है, रात को नींद नहीं
00:33आती, दिन में शान्ती नहीं मिलती
00:35कभी भविश्य का डर, कभी बीते कल का पच्टावा, कभी रिष्टों का तनाव, कभी खुद से नाराजगी और सबसे बड़ा
00:45सवार
00:46क्या इस दुख का कोई permanent solution है, आज का ये विडियो आपको कोई motivational quote नहीं देगा, कोई temporary
00:54happiness नहीं देगा, बलकि आपको बताएगा, वो समाधान, जो खुद भगवान श्री कृष्ट ने बताया था, पर अफसोस, हम उसे
01:05भूल चुके हैं, आज का इंसान दुखी इसलिए नहीं
01:09क्योंकि उसके पास कम है, बलकि इसलिए दुखी है, क्योंकि उसकी अपेक्षाएज ज्यादा है, हम चाहते हैं, बिना मेहनत के
01:18सफलता, बिना त्याग के सुख, बिना सहन शिलता के रिष्टे, बिना आत्मन यंत्रन के शांती, और जब ये सब नहीं
01:27मिलता, तो हम भगवान
01:28को दोश देने लगते हैं, लेकिन भगवत गीता में श्री कृष्ण साफ कहते हैं, दुखेश्वनुद विग्नमनाय सुखेशु विक्तस्प्रिय हैं, गीता
01:382.56, जिसका मन दुख में विचलित नहों, और सुख में आसक्त नहों, वही स्थिर बुद्धी वाला है, यानि �
01:48दुख बाहर नहीं है, दुख हमारी प्रतिक्रिया में है, महा भारत के युद्धक्षेत्र में अर्जुन के पास सब कुछ था,
01:56परिवार, गुरु, सम्मान, शक्ति, फिर भी वो तूट गया, अर्जुन का दुख हमारे आज के दुख जैसा ही था,
02:08और तब श्री कृष्ण ने कहा, न त्वेवाह जातू नासन अत्वने में जनाधी पाए, गीता दो दशमलव एक दो, अर्थात,
02:18तुम, मैं और ये सब आत्माए कभी नश्ट नहीं होती,
02:22श्री कृष्ण ने अर्जुन को सबसे पहले ये समझाया, कि तुम शरीर नहीं हो, और यही से दुख का पर्मनेन
02:30सल्यूशन शुरू होता है, आज हम दुखी है क्योंकि, हम शरीर को ही सब कुछ मान बैठे हैं, शरीर दुखी
02:38है, मैं दुखी हूँ, मन परेशान है, मेरा ज
02:53जिस प्रकार शरीर में बाल्य, युवावस्था और बुढ़ापा आता है, वैसे ही आत्मा शरीर बदलती है, दुख शरीर का अनुभव
03:03है, आत्मा का नहीं, जब तक हम अपने आपको शरीर मानते रहेंगे, दुख पर्मनेन्ट रहेगा, श्री कृष्ण ने दुख का
03:12जो
03:13पर्मनेन्ट सल्यूशन बताया वो था, आसकती छोड़ो, कर्म नहीं, कृष्ण कभी नहीं कहते कि सब छोड़ कर जंगल चले जाओ,
03:22वे कहते हैं, कर्मन ये वाधी कारस्ते मा, फलेशु कदाचल, गीता 2.47, तुम्हारा अधीकार कर्म पर है, फल पर
03:33नहीं, हम दुखी इस
03:42चाहते हैं, जब पल हमारे अनुसार नहीं आता, तो दुख पैदा होता है, श्री कृष्ण का समाधान केवल शलोक नहीं
03:50था, बलकि एक लाइफ सिस्टम था, एक एक सेप्ट रियालिटी, जो है, उसे स्वीकार करो, दो डू यो ड्यूटी, जो
04:00तुम्हारा कर्तव्य है, व
04:12दशमलव चार आठ, आज का सबसे बड़ा दुख रिष्टों से जुड़ा है, अपेक्षा ज्यादा, समझ कम, इगो ज्यादा, धैर्यकम, कृष्ण
04:23कहते हैं, अहंकारं बलन, दरपक कामक रोधं परिग्रेह, गीता 18.53, जहां अहंकार है, वहां शान्ती नहीं हो सकती, रि
04:39शुरू कर देते हैं, श्री कृष्ण जानते थे कि मन ही सबसे बड़ा शत्रू है, चंचल ही मने कृष्ण, गीता
04:486.34, मन चंचल है, उसे कंट्रोल करना कठिन है, लेकिन समाधान भी वही देते हैं, अभ्यास, वैराग्य, भक्ती, जब
05:00मन भगवान में लगता है, तो दु�
05:09गीता 18.66, मेरी शरण में आ जाओ, भक्ती का अर्थ ये नहीं कि आप कमजोर हो जाते हैं, भक्ती
05:18का अर्थ है, आपका बोज अब भगवान उठाते हैं, जब आप कहते हैं, हे कृष्ण, मैंने अपना कर्तव्य किया, अब
05:27आगे जो होगा आप देख लेंगे, वही से दु�
05:37तुलना मत करो, खुद को कम मत समझो, हर चीज कंट्रोल करने की कोशिश मत करो, जो तुम्हारे हाथ में
05:45हैं, वो इमानदारी से करो, बाकी मुझ पर छोड़ दो, दुख जीवन का हिस्सा है, लेकिन दुख में डूबे रहना,
05:53ये हमारी चॉइस है, श्री कृष्ण ने दु
06:04को थोड़ा साभी जुग गया हो, तो समझ लीजिए, कृष्ण ने आपको याद दिलाया है, अगर आप ऐसे और सनातन
06:12रहस्य जानना चाहते हैं, तो जुड़े रहिए हमारे साथ, जै श्री कृष्णा, दिस वीडियो is created originally by हरे कृष्ण
06:21भक्ती वाइब्स for spiritual knowledge purposes, जै श्री क
06:25दिलिए आपको याद कर दूफॉछ तो जैए।
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