00:11इस नए विडियो में आपका स्वागत है।
00:30अगर आपको ये पसंद आएं तो इसे अपने प्रियजनों के साथ शेर करें।
00:34प्रस्तावना, शंका से मुक्ती की ओर यात्रा, सनातन धर में महादेव केवल एक देवता नहीं है, बलकि चेतना, वैराग्य और
00:44सत्य के जीवंत प्रतीक है।
00:46वे आदियोगी हैं, जिनसे योग का जन हुआ।
00:50वे भोलेनाथ हैं, जो निश्पट भक्ती से तुरंत प्रसन हो जाते हैं।
00:55और वे महाकाल हैं, जो समय के भी स्वामी है।
00:59आज का मनुश्य सबसे अधिक जिस समस्या से जूज रहा है, वो है शंका।
01:05शंका स्वय पर, जीवन पर, संबंधों पर और यहां तक की ईश्वर पर भी।
01:12महादेव की शिक्षाए हमें सिखाती है, कि जब शंका समाप्त होती है, तब जीवन अपने आपसरल, स्पष्ट और सार्थक हो
01:20जाता है।
01:21ये कथा केवल सुनने के लिए नहीं है, ये जीने के लिए है।
01:26महादेव का मौन, जब शब्दों से आगे समझ होती है।
01:30महादेव अकसर मौन में लीन दिखाई देते हैं, ये मौन किसी अज्ञान का नहीं, बलकि परम ज्ञान का प्रतीख है।
01:38आज हम हर बात का उत्तर शब्दों में चाहते हैं, परंतु महादेव सिखाते हैं, हर प्रश्न का उत्तर शब्दों में
01:45नहीं होता।
01:46जब जीवन में उल्जन हो, तब बाहर नहीं, भीतर देखो
01:51मौन तुम्हें वो बताएगा, जो शोर कभी नहीं बता सकता
01:55शिक्षा, हर परिस्थिती पर तुरंत प्रतीक्रिया मद्दो
01:59पहले भीतर स्थिर्ता लाओ, मौन को अपना गुरु बनाओ
02:04भस्म से वेराग्य, जो अंत है, वही सत्य है
02:09महादेव अपने शरीर पर भस्म धारन करते हैं
02:12ये भस्म हमें याद दिलाती है, ये शरीर नश्वर है
02:16हम जीवन भर बाहरी सुंदर्ता, पद, पैसा और पहचान के पीछे भागते रहते हैं
02:23पर महादेव कहते हैं, जिसका अंत भस्म है, उस पर अहंकार कैसा?
02:29शिक्षा, अपने अहंकार को पहचानो, जो आज है, वो कल नहीं रहेगा
02:35स्थाई केवल आत्मा है, नील कंट की कथा, विश को भी अमरित बनाना सीखो
02:41समुद्र मंथन के समय, जब विश निकला, तब सभी देवता भाईभीत हो गए
02:47महादेव ने बिना शंका, उस विश को अपने कंट में धारन कर लिया
02:52ये कथा हमें जीवन का सबसे बड़ा सूत्र सिखाती है
02:56हर विश को फेंकना आवश्चक नहीं, कुछ विश को संभालना पड़ता है
03:01जीवन में अपमान, पीडा, अस्फल्ता, ये सब विश है
03:07यदि तुम इन्हें समझदारी से धारन कर लो, तो यही तुम्हें नील कंट बना देंगे
03:12शिक्षा, समस्याओं से भागो मत, उन्हें समझो, स्विकारों और रुपांतरित करो
03:20त्रिनेत्र, केवल दो आखों से मत देखो
03:23महादेव का तीसरा नेत्र, हमें चेतना की दृष्टी देता है
03:28दो आखें संसार को दिखाती है, तीसरी आख सत्यपो
03:33आज हम केवल वही देखते हैं, जो दिखाई देता है, पर महादेव सिखाते हैं
03:39जो दिखाई नहीं देता, वही सबसे महत्वपोन है
03:43शिक्षा, हर व्यक्ति को केवल उसके कर्म से मत आको
03:48इस्थिति के पीछे के कारणों को समझो
03:50जागरुकता ही तीसरा नेत्र है
04:03तो अहंकार बढ़ता है, यदि केवल विनाश हो, तो निराशा, डमरू हमें सिखाता है, संतुलन ही जीवन का संगीत है,
04:13शिक्षा, काम और विश्रा में संतुलन रखो, भोग और त्याग में संतुलन रखो, कैलाश परवत, उंचाई में एकांथ, महादेव कैलाश
04:25पर वास क
04:26करते हैं, जहां शान्ती है, एकांथ है, आज हम भीड में रहते हुए भी अकेले हैं, महादेव सिखाते हैं, एकांथ
04:35से मद्दरो, एकांथ तुम्हें स्वय से मिलाता है, शिक्षा, रोज कुछ समय अकेले बिताओ, स्वय से संबाद करो, भोलापन, सच्ची
04:46शक्ती का रहस
04:47रहसे, महादेव को भोले नात कहा जाता है, ये भोलापन कमजोरी नहीं, बलकि परमशक्ति हैं, जो व्यक्ति सरल होता है,
04:57वो छल से मुक्त होता है, शिक्षा, सरल बनो, पर मूर्क नहीं, सच्चाई में अध्भुच शक्ती होती है, अर्धनारिशवर, पूनता
05:07का अर्ध,
05:07महादेव और पार्वती का अर्धनारिश्वर स्वरूप सिखाता है
05:12पुरुष और स्त्री उर्जा का संतुलन
05:15जीवन में तर्ग के साथ करोना, शक्ती के साथ सम्वेदना आवश्चक है
05:21शिक्षा, कठोर्ता और कोमलता में संतुलन रखो
05:25नंदी, श्रध्धा और धहर्य, नंदी केवल वाहन नहीं
05:31वे प्रतीक हैं, श्रध्धा, धहर्य और सेवा के
05:35नंदी की तरह प्रतीक्षा करना सीखो
05:38सही समय पर महादेव स्वय दर्शन देंगे
05:41शंका का त्याग, शिवत्व की ओर पहला कदम
05:45महादेव की सबसे बड़ी शिक्षा है
05:48शंका का त्याग
05:49शंका तुम्हें तोड़ती है
05:52विश्वास तुम्हें बनाता है
05:54जब तुम स्वयापर विश्वास कर लेते हो
05:56तब महादेव तुम्हारे भीतर प्रकट होते है
06:00उपसनहार, महादेव को पूझो नहीं
06:04जीओ, महादेव किसी मंदिर में सीमित नहीं है।
06:13जब तुम बिना शंका जीवन जीते हो, तब तुम स्वयश्षिव हो जाते हो।
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06:27रहीए।
06:28हर हर महादेव
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