00:00एक नदी के किनारे एक संत, 55 वर्षिय ध्यान कर रहे थे।
00:05एक बिच्छू पानी में गिरा, संत ने निकाला, बिच्छू ने काटा, संत ने फिर निकाला, फिर काटा, तीसरी बार एक
00:16शिश्य 20 वर्षिय ने देखा।
00:19गुरुजी, आप बार-बार क्यों? बिच्छू का स्वभाव, काटना, मेरा स्वभाव, बचाना, पर दर्ध, जो बिच्छू अपना स्वभाव नहीं छोड़ता,
00:31मैं अपना क्यों छोड़ू?
00:32शिक्षा, करुणा, परिस्थिती पर निर्भर नहीं, दया धर्म का मूल है, जो केवल तब दया करे, जब आसान हो, वो
00:42करुणा नहीं, यही संद का स्वभाव, यही इश्वर का स्वभाव, हरे कृष्ण।
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