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Visaal E Ishq Ep 02 9th Oct 2025 | NEXT EPISODE


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Transcript
00:00अरे पिया ये तो बता क्या है विन जिदाई है क्या
00:30ये लाउंज में कौन है ये लाउंज में कौन है ये लाइट से जल रही है
01:00फॉसिया तुम इस वक यहां तब यह तो ठीक है तुम्हारी
01:09फॉसिया क्या पूछ रही हूं मैं
01:14हाँ मैं ठीक हूं बाभी और वैसे भी मुझे क्या होना है और अगर कुछ हो भी गया तो किसी को मेरी क्या परवा
01:27क्या बात है सुहिल से लडाई भी है तुम्हारी कहा है सुहिल
01:33सो रहे हैं बे फिकर सकून से
01:39उनको तो किसी चीज़ की फिकर ही नहीं है
01:43लेकिन मैं तो मा हूँ न मुझे तो अपनी बेटी के मुस्तक्बिल की फिकर में नीद ही नहीं आती
01:51क्यों परेशान हो रही हो हम है न तुम्हारे बड़े देख लेंगे सब कुछ जो अभी जाके अराम करो सुबा बात करते हैं
01:59भावी बड़े अगर सिर्फ नाम के ही बड़े हो न तो टेंशन और बढ़ जाती है
02:06जब तक फौसिया तुम मुझे बताओगी नहीं के बात क्या है मुझे कुछ समझ नहीं आएगा
02:14यह तो आप फारूब भाई से ही पूछे क्योंके अगर मैं बताओँ या ना बताओँ तो बुरी तो मैं ही बनूगी
02:23या लाब इसे क्या हो गया
02:29क्या बात है तुम नाच्ते नहीं करूगी
02:39करती हूँ
02:44क्या बात है
02:59साइमा उस पर इशान लगरूगी है
03:03नहीं सब ठीक है
03:08आप बताएं आपका क्या सुहेल से किसी बात पर जगडा हुआ है
03:14सुहेल मुझसे क्यों जगडा कर दें लगा हम और ये बात तुम से कहीं किसने
03:20किसीने भी नहीं बस ऐसी पूछ रही थी आपसे
03:26आपसे आप बताएं आफिस में तो सब कुछ ठीक चल रहा ना खासतर पर आपके और सुहेल के तरम्यान
03:36आकर बात क्या है जाज तो मुझसे इस तरह की बातें कर रही हो इस पता तो चले मुझे भी
03:43पताया ना कोई बात नहीं है बस कुछ दिनों से दिल कुछ अजीब सा है अजीब से वस्वसे आ रहत है तो सोचा आप से ही पूछ कर क्लियर कर लूँ मैं चाहती है उस घर के इतफाक हमेशा बना रहे है फारूक
04:01हाँ सर्थीख चल रहा है बलकि ठीक ने बहुत अच्छ चल रहा है मैं तुम्हें बताया नहीं था कि हम अपनी कमपनी की नहीं ब्रांच उपन करने जा रहे हैं उस तरह मैं उसमेल बिजी हैं बहुत बलकि हो सकता आज रात आते भी अमें लेट हो जाए बागी सिब लोग क
04:31मुझे तो डर है कि युनिवस्टी के लिए लेट नौजा भी जगाती हो से असलावालकुम भाबी असलावालकुम भाईजान वालेकुम असलाव
04:39सुहिल भजिया कोई बच्ची तो नहीं है जिससे उठाना पड़े शी तक ग्रोनअप गर्ल उसे खुद से अपने जिम्मेदारी का इसास होना चाहिए यह नहीं
04:52जी भाईजान बिल्कुल ठीक करे रहे हैं आप वैसे भाबी एक काम तो आप भी कर सकती है आपकी चाहिती है आपकी बात मांती है एक दफ़ आप समझा के देखें हो सकता है मांजा तुम फिकर नहीं करो मैं समझा दूँगा नाच्टे खुरू जी यह चाहिए
05:22हालो हानुशा मैं तुम्हें लेनी आया हूं बहार आज़र वहाज मैं खुद चली जाती तुम्हें क्या जिर्वति आने की
05:52कैसे ज़रूरत नहीं थी और तुम कैसे चली जाती तुम्हारी वैन नहीं आई उन तुम्हाला ने मुझे बता दिया अच्छा किया है तुम्हें आगे है वैन तो अक्सर नहीं आती मैं रिक्षा या टैक्सी ले ले ले ती ऐसे तुम मेरी आदते खराब कर रहे हो आज अ�
06:22अच्छे दोस्त है वह इसलिए क्यूंके तुम दिल के बहुत अच्छे हो मेरी बाते समझ जाते हो और यह एक इंसान की बहुत अच्छी क्वालिटी होती है यह लेकि फिर भी तुम से अच्छा नहीं है बस इतनी तारीफे मत करो मेरी क्यों ऐसे ही दिल को कोई खुश फैम
06:52साथ मिले एक मुझे तेरा होगा ना को रहा से जाते हैं तो बाजी आप मांगने की बज़ाए कोई काम क्यों नहीं कर लेती है
07:12मैं क्या करूं बाजी कोई काम ही नहीं देता मैं पड़ी लिखी नहीं हो न और आपको पता है कि आज कल नोकरी मिलना कितनी मुश्किल है एक मिनिट यह ले यह मेरे स्कूल का विजिटिंग कार्ड है आप यह सुबा दस बजे आ जाएगा और मेरा कह दीजेगा मेरा नाम अ
07:42अगर लिखी क्या पड़ता था अगर सौ दो सो दे सती टें तो आएगे बढ़ता है वहाज तुमें शायद नहीं पड़ता लेकिन हमारे माइसरे को पड़ता है इनको इसी तरह सौ दो सौ दे कर हम इनकी तादाद में अजाफा कर रहे हैं असल शव रखदार का हक मारा जात
08:12चले
08:13भी ऐसा तो नहीं होना चाहिए था
08:23है तो फिकर वाली बात ना
08:25क्या बताओ मलकापा
08:27टेंशन से मुझे सारी रात नीन नहीं आई
08:30दिकरा है
08:31तुमारी आखों से
08:33लाल हो रही है
08:35और चहरा देखो बिलकुल फिका हो गया
08:37मलकापा
08:39मुझे लगता है मैं जल जल कर इस घर में मरी जाओंगी
08:42भाई अल्ला ना करे
08:44ऐसी बाते मरने की क्यों कर रही हो
08:46मरे तुमारे दुश्मन
08:48मलकापा
08:49एक आप ही है जो मेरी अपनी है
08:52कि मुझे समझ नहीं आ रहा
08:55मैं सुहेल को समझा समझा कर
08:56तक गई हूँ लेकिन नहीं
08:58वो किसी सूरत मानने को तयार नहीं कि कंपनी उनके नाम हो जाए
09:03अब यही देख लो
09:05हमारे परोस में एक बाप और चार बेटे रहते हैं
09:09जिनका अपना जर्नल इस्टोर था
09:11बहुत आंदनी थी
09:13लाख रूपे कमाते थे
09:14बाप के मरने के बाद
09:16बड़े भाई ने छोटे भाईयों से कारोबार अलग कर लिया
09:19और यह पता चला के बाप मरने से पहले
09:22अपना सारा कारोबार बड़े बेटे के नाम कर गया था
09:25ताके वो छोटे भाईयों का ख्यार रख सके
09:28लेकिन उसने तो छोटे भाईयों से आखे ही फेड लियुग
09:31क्या कह रही है आप मलका अपा
09:33मैं तो वही कह रही हूं जो आखों से देखा है
09:36भी आजकल तो यह हो रहा है
09:38मकान, दुकान, जायदा, जो भी है
09:41अपने नाम ही करवाना चाहिए
09:43वक्त का क्या पता?
09:45आज भाईयों भाईयों में महबबत है
09:47बाद में वह एक दुसरे के दुश्मन बन जाए
09:49फिर क्या होगा?
09:53अच्छा तुम मेरी एक बात सुनू
09:55तुम ना साइमा से बात करो
09:58भाईयों से कर मलकापा
10:02अरे बेगा मलकापा कर रही
10:04तुम्हारे जिठानी ही कुछ कर सकती है
10:07यह कि सब कुछ क्या बहुत कुछ कर सकती है
10:11यह कमपनी क्या चीज़ है
10:13अरे यह तो घर भी तुम्हारे नाम कर देगी
10:15असलाम अलेकुम अलकापा कैसी हैं?
10:20असलाम मैं बिल्कुल ठीक हूँ आप कैसे हो?
10:22यह बिल्कुल ठीक हूँ आप बताएं कैसी है
10:24ठीक हो अलाहाई?
10:26बस अभी थोड़ी देर पहले आई हूँ
10:27अच्छा चलें बताएं क्या पिएंगे पिश्रूब लेकर आओ या पिर चाय अरे या भी कुछ ने मैं खाना भी खाऊंगी और चाय वगरा भी प्रू हाँ बिल्कुर वो तो खाय वगर नहीं जाने दूंगे मैं आपको
10:41है साइमा आज तो नहीं आज सकूंगी आज तो मेरी तरफ से महासरत कबूल कर लो भाई
10:59आपा आ जाये ना वेसी भी कितना अरसा हो गया मुलाकात हुए वे आपको पता है फारूक नहीं मुझसे कहा है
11:06कि आपा को खाने पे बुला लो किसी भाणे मुलाकात हो जाएगी वे मैं कोई महमान थोड़ी हूँ मेरा अपना घर है जब मेरा दिल जाएगा मैं आ जाओंगी आज जरह तब यह ठीक नहीं है मेरी इसलिए नहीं आ सकता इसलिए तो कह रही हूँ आपा आज आ जाए असल म
11:36अनुशा बड़ी हो गई है खेर से शादी की उमर को पहुंच गई है अब मैंने कुछ लोगों को कह रखा था तो हमारे पोड़ोस में जो खाला रहती है ना उन्होंने एक बहुत अच्छा रिस्ता बताया है वो लोग आ जा रहे हैं अनुशा को देखने के लिए बलकि मैं
12:06हाँ आपा सुन रही हूं आप एक काम करें अप उन्हों को मना करते हैं वो मता हैं क्या मना करतों ये क्या कह रही हो ठीक कह रही हूं आपा मेरी नजर में अनुशे के लिए एक बहुत अच्छा रिश्ता है और मुझे पूरा यकीन है कि आपको भी वो रिश्ता बहुत अच
12:36आपा मेरी शुरू से खाहिश दी
12:40कि अनुशे मेरे घर की बहु बने है
12:42अरे वाकई तुम सच कह रही हो साइमा
12:46सौ फीस्दी सच कह रही हूं आपा
12:51ये तो वो बात है जो मेरे दिल में पता नहीं कब से है
12:55सोचा था किसी मुनासिब वक्त में आप क्या गरखोंगी
13:01लेकिन पहले फारूक और वहाज से बात कर लो
13:04फिर बाकाईदा रिष्टा लेकर आऊंगी आपके घर
13:07हाँ हाँ बिलकुल
13:09में बेटे के जिन्दगी का मामला है
13:12शोहर से मश्वरा करना तो जरूरी ही है ना
13:14जो भी फैसला करो तुम दो नो फिर मुझे बता देना
13:31खुदा आफिस
13:33या आला तेरा शुकर
13:38हजार दफा शबाना से कहा है चोटा पेड़ा लिया करो ताके रोटी पतली बने
13:50सुहेल तो मुरवत में मारे जाते है
13:56इसलिए उनने कुछ कहा नहीं
13:58लेकिन पारूक भाई को तो सोचना चाहिए ना
14:01कि इतनी बड़ी कंपनी उनके नाम पर है
14:03बलके सब कुछ ही उनके नाम पर है
14:05मेरी बेटी के नाम क्या है
14:07और भाबी
14:10आपका तो बेटा है
14:13जिंदगी में कुछ ना कुछ कर लेगा
14:15मेरी तो आगे बेटी है
14:17इसके बारे में तो सोचे आप
14:18क्या हो जाता है तुम्हें
14:21फाजिया हमने कभी अपने बच्चों में फर्क किया
14:24वहाज और वजिया हमारे लिए दोनों बराबर है
14:27भावी कहने से कुछ नहीं होता
14:29करके दिखाना पड़ता है
14:30अगर फारूक भाई वजिया को अपनी बच्ची समझते न
14:34तो निया एग्रिमेंट उसके नाम पर बनवाते
14:37देखो फाजिया
14:39आफिस के मामलात में तुम्हें और मुझे परेशान होने की जुरूत ने
14:44तुनों भाई हैं खुद देख लेंगे क्या करने और क्या नहीं
14:47हाँ
14:50आप तो ये सब कुछ इसलिए बोल रही है ना
14:53क्या आपके पास तो सब कुछ है
14:54एसास तो उसे होता है जो महरूम हो
14:58मुझे तो समझ नहीं आती तुम ये सब चीज़े सोचती क्यों
15:02जो कुछ भी है वो हम सब का है
15:05हमने वजिया में कभी फर्ख ने रखा वो मुझे मेरी औलाद की तरा जीज है
15:09जो वहाज का है वो ही वजिया का भी है
15:12ठीक है तो फिर आप भाई साफ से बात करें
15:17मैं कैसे बात कर सकती हूँ
15:19मैं आफिस के मामलात में दखल नहीं देती
15:21रहने दे भाबी मुझे अच्छी तरह याद है
15:24जब आफिस में नया फर्मीचर डलना था
15:27तो सब कुछ आपकी मर्जी की आपकी पसंद का आया था
15:30इसलिए ओफिस हो या घर हर जगा आपकी चलती है
15:35वाज या वो तो फारुक जबर्दस्ती आकर मुझे ले गए थे
15:41जब आप वो कर सकती है न तो आप ये भी कर सकती है
15:44सब कुछ आपके इक्तियार में है
15:45आप जितनी बेखतियार बन रही है न उतनी है नहीं
15:49और मैं कोई बेवकूफ तो हूँ नहीं
15:52मामा आप बड़ी मामा से किस तना बात कर रही हैं
15:55क्यों उलज रही हैं उनसे
15:56वजीहा तुम बड़ों के मामले में मत बोलो
16:00चलो अपने कबरे में चलो
16:15हाँ जी भोग लग लग रही है बच्चों को
16:25हैं खाना नहीं दिया था
16:30यह लो बई यह लो बई तुम भी का लो तुम भी का लो
16:35असाले कम मी वाले कम असलाम
16:42क्या बात है मैं अज बहुत खुश्क नजर आरही हैं
16:45हाँ खुश तो हूँ मैं आज
16:50आपके मेहमानों की वजासे न वैसे अम्मी आपको भी बहुत जल्दी है
16:55मेरी शादी करवाने को
16:57आप तो ऐसे खुश हो रही है जैसे आज मुझे वो देखने नहीं
17:01रुखसक करने आया हूँ
17:02अरे नहीं भाई उन लोगों को तो मैंने मना कर दिया है
17:07मना कर दिया हाँ मना कर दिया हाँ मगर क्यों अम्मी
17:13वो मैं तुम्हें बात में बताओंगी न betस अभी मैंने मना कर दिया
17:18तुम ये बताओ कि खाना खाओगी
17:21हाँ ला दे लेकिन ये तो बताए आप ने मना क्यों किया
17:26पहले तो आपको इतनी जल्दी होगी थी
17:28और अब अचानक से मना कर दिया
17:30पता क्या, मुझे लगता है तुमारा रिश्टा उससे कहीं ज्यादा अच्छी जगा बेता होगा और मेरा दिल कहता है कि वो रिश्टा तुम्हारे लिए जिंदगी की सारी खुश्यां लेकर आएगा इन्शालाई
17:47मैं तुम्हारे लिए खाना लेकर आती है
18:00एलो पही, आजा।
18:05वो मामा में बडी मामा के पास जा रही हूं, उनको ये चार्जर देने के लिए।
18:18कोई जरूरत नहीं है भावी के पास जाने की।
18:21मामा क्या हो गया आपको?
18:23क्यों आप बिलावजा बडी मामा से लड़ती रहती हैं बस क्यों?
18:27बिलावजा? मैं बिलावजा लड़ती हूं?
18:32तुम भी ना बिलकुल अपने बाप की तरह हूं।
18:36यहां मैं तुम्हारे हक के लिए लड़े जा रही हूं
18:39कि तुम लोगों के साथ ना इंसाफी ना हो।
18:42और तुम हो अपनी मा की हमायत करने की वज़ाए
18:46उन लोगों की हमायत कर रही हूं।
18:48जिनके साथ मैं जंग लड़ रही हूं।
18:51मामा ये महास भी आपने खुदी खोला है।
18:55आप क्यों इस घर को जंगा मैदान बनाने पर तुलीमी हैं।
18:59क्यों।
19:00तुम क्या चाहती हैं।
19:02कि वो लोग हमारी हक तलफी करते रहें।
19:05और मैं खामोश खड़ी तमाशा देखती रहूं।
19:07तुम्हारे बाप की तरह।
19:09जो कि मैंने सारी जिंदी की किया है।
19:12अगर अब ऐसा नहीं होगा।
19:16कान खोल कर सुन लो वजीहाँ।
19:18जब तक मैं नहीं कहूंगी।
19:20तुम भाभी और भाज से नहीं मिलोगी।
19:22अपने कमरे में रहोगी।
19:24समझी।
19:25क्या मगर मामा अगर मगर कुछ लिए।
19:28उन लोगों को भी ऐसास हो हमारी नराजकी का।
19:31खुज से तो कभी होना नहीं।
19:34इसलिए जाओ तुम अपने कमरे में बैठो।
19:36तुम नहीं निकलोगी अपने कमरे से बाहर।
19:38आवाज नहीं आई तुमें।
19:42चलो अपने कमरे में।
20:00बिर्यानी जो है। पहले से ज्यादा उंद्रा बनने लग गई है।
20:03माशा आलला।
20:08शवाना।
20:12अब भी जो है।
20:15यह ढュर्षाना किसके लिए लेके जा रही हो?
20:18वह थो खोती वहार।
20:20लेकिन क्यों।
20:21जी हो हनोनी मुझे नही नही मुझे नही बताया।
20:25चाची और अजेया नहीं कमरे में देते कहना किमवा गई।
20:28अजिए के थulse थाट Elaa
20:31मैं देख रहा तुम बैठो, कोई जरूरोत नहीं जाने की है
20:35दो मिनट में आया है, मैं
20:37सामझ में नहीं आरी है वहाज
20:39मैं तुम से क्या कह रही हूँ
20:40बैठ कर खाना को, जरूरोत नहीं जाने की
20:43क्या बात है साहमा
20:46परिशान लग रही हूँ, घर में कुस अब चीक तो है
20:49हाँ सब ठीकल
20:52सोयल क्या बात है, फाजिया वजिया क्यों नहीं आई खाने पर
21:01बाज़ान वो फाजिया के सर में दर्द हो रहा था तो उसने वजिया को नहीं रोक लिया है
21:10कहा के खाना यहीं कबरे में मंगवा के खा देंगे है
21:40हमादी खाने खाने खाने खाने के तो
21:52कि विजव भाद रहे और रहे खाने है
21:55हमादी खाने है
22:05हलो
22:06कहा हूँ, सबाद से नजर नहीं आ रही तू?
22:09कहां होना है माने वहाज, अपने कमरे में हूँ
22:12मामा का और बडी मामा का फिर से जगरा ऊ गया
22:15इसलिए मामा ने मुझे माना किया कि मैं पने रूम से बाहर न� λाने कि
22:18आप गार अभी है तभी तो मैं सोच राथा कि आज तुम खाने पर क्यूंदी आई
22:22मामा भी परिशान थी और एक तो चाची भी छोटी-छोटी बातों पर बतंगड बना देती हैं, मूह बना लेती हैं
22:30बता निया वहाज, मामा ऐसी क्यों होती जा रही है
22:33पर थक गई उन्हें समझा समझा के
22:36और तुम तो उनके मिजाद से वाकिफ हो ना
22:38अच्छा ये सम मैं नहीं जानता, प्लीज मेरी सुभा प्रेजेंटेशन है और मैं पिछले दो गंटे से अपने कप्ड़ों के साथ जूज रहा है
22:45तो प्लीज कम और मेरी हल्प कर दो कि मैं सुभा क्या पहर
22:48तुम पागल हो क्यों क्या वाहज
22:50मामा ने तुमसे और बड़ी मामा से मिलने से मना क्या मैं नहीं आ सकती हूँ
22:55देखो ये मेरी बहुत इंपॉर्टन प्रेजेशन है और मैं ये कपड़ों के मामले में अगर उचा रहा तो प्रेजेशन खाग दूँगा
23:00और तुम जानती हूउर्टन को कितना संसिटिव हो प्लीजाओ मेरी हल्प कर दो तुम जानती हूए तुम्हारे लावा मेरी कोई हेल रहल्प नहीं कर सकता, प्लीज
23:10ऑ कर दो नहीं आ सकती हूँ dessert
23:14फ्लीज तुम बहुत खुदगरज हो जो मेरी मामा हैं cells
23:17एई, वो जैसे भी है मेरी मामा है
23:20आचा यार मेरा मतलब वो तो नहीं था, तुम्हें पता है मजाग कर रहा था, प्लीज आजवानो यार, प्लीज
23:25मैं तुम्हें कैसे समझाओ वहाज, ऑलरेडी घर का महल इतना खराब हो, अब पता नहीं क्यू मामा का मूँड आचकर खराब रहना चुरूग गया, तुम बात क्यों नहीं समझ अगर मैं आओ, और मामा ने देखिया मुझे तुम्हें साथ, तुम बात क्यों नहीं समझ रहे
23:56नहीं सुनता है रग।
24:03पड़ी सेलेक्टिन आवी काम है
24:25करेंगार आवी काम है
24:30दोली काम है
24:33चक्टिन आवी काम है
24:36लुटरोगी काम है
24:38भी आवी काम है
24:40धुट आवाल
24:42वाल
24:45झाल
24:47प्रृब आवी
24:51पॉब एंगा एंगा
24:52पहाज, मुझा लगता है कि ये कॉम्बिनेशन अच्छा लगीगा,
25:21रख रही आए लगाए।
25:22क्या कहते है?
25:23और भी है.
25:24द्न करो.
25:25द्न?
25:26गुड.
25:31Thank you so much.
25:32चुम्हें लिख ले फिछ गंटेश से ले और इंकपड़ों करते हैं.
25:35तुम्हें आती पांच विर नड में सब कुस रुज़ करती हैं..
25:37Thank You.
25:38बसुआ करो मेरी..
25:41मैंनहीं होगी ना जएट तो याद करो कि
25:44तुम क्यों होगी?
25:45तुमने कहाँ जाना है?
25:46और वैसे भी मैं तुम्हें कहीं नहीं जाने दूँगा
25:49कभी भी
25:53कावास क्यू रही है?
25:55खुछ दें, मैं जारी हूँ
25:57कहाँ जारी हो?
25:58क्या मसले है?
26:00यह जो पूरा बैट फिलाया है, इसको गौन साफ करेगा?
26:02पहले तुम मेरे कपड़े अलमारी में रखोगी, फैर चाहोगी
26:05वाट?
26:07यह सब मैं करोगी?
26:09यह सब तुमने फिलाया, तुम साफ करोगी
26:11समझारी है तुम्हें?
26:13चलो
26:13हाँ तुम्हारी वज़ा से है, तुम जल्दी आ जाती, ना यह कपड़े फैलते, इधर भी कपड़े, उधर भी कपड़े, इससब तुम्हारी वज़ा से हुआ, इसलिए तुम समेट होगी है
26:21और याद रखो, जब तक यह सिम्टेंगे नहीं, मैं जाने नहीं दूँगा
26:25मैं इस बात सुन लो तुम, मामा को नहीं पता कि मैं तुम्हारी रूम में आई हुए उस वक्त
26:30उनको पता चल गया ना, तो मेरे सासा तुम्हारी भी शामात आज़ागी
26:33चलो हाटो
26:34याद, दो मिनट तो रुक जाओ नो, सारा दिन तुमसे बात भी नहीं, बोर हो गया मैं सारा दिन
26:37नो, मैं जा रिए
26:38अरे याद, वलत बात है, कपड़े कॉन समा लेगा
26:40क्या मुसी पता है, सारा काम तो करती है मैंने तुम्हारा, क्या चाहिए तुम्हें
26:52दो मिनट तो रुक जाओ, कल भी चाची की विज़े से सारा दिन मुझसे बात दिन करूँ
26:56कॉल पर बात करेंगे
26:58अरे यार, एक ही घर में रहते हैं, हम और कॉल पर बात करेंगे, ऐसा गहा होता है
27:04वहाज, तुम नहीं चानते है मामा को क्या, सिफ एक दो दिन की बात है, सबर कर लो, फ्लीज
27:12हम
27:14बढ़ों की लड़ाई में हमेशा चोटे क्यों पिस्ता है
27:18क्यों, तुमने वह कहा हैं सुनी, कि गंदुम के साथ गुन भी पिस्ता है, हमारी मेन यही मिसाल है, और इसी तरह सुग
27:32अजी क्या किया तुमने
27:34यह, ओमाइगाद, उचलबते ओपर से कोई आ रहा है, तुम
27:37वहाँ, वहाँ, वहाँ, वहाँ जागे चुगो
27:40क्या हुआ, यह आवाज कैसी थी?
28:00और तुम इस वत खड़ी यहां क्या कर रही है, सोही नहीं अभी तक?
28:04मामा मैं किचन में आया थी, पानी पीने के लिए
28:08और यह कैसे तूटा?
28:13बिली आई, बिली ने तोड़ा और चली गई
28:17यहाँ
28:20यह, अवाज, आ रही है?
28:23हाँ
28:24कितनी बार यह शबाने से का है के यह पिछली ग्रेल का दर्वाजा बंद रखा करे
28:30तेरी बात सुनती नहीं, देखो कितना नुकसान हो गया
28:34तुम खड़ी क्यूं हो, जाओ जाकर सो
28:38जाओ
28:42जी जी जारी हूँ मैं जारी हूँ
28:45शबाना
29:02शकर रवच्चत हो गये
29:04बच्छत हो गए।
29:12असलाम अलेकूम
29:13वालेकूम
29:14वालेकूम
29:15अचानक कैसे आगए भाज?
29:17यार क्या करूँ
29:18इन्वेसिटी चे आके पोर हो रहा था
29:19सोचा यहां आकर तुमारा दिमाग खा लेता
29:21अच्छा
29:23इसका मतलब है कि वजीहा घर पर नहीं है
29:26और तुम उसका दिमाग नहीं खा सकते
29:28कहीं गई है क्या?
29:29जी वजीहा तो घर में
29:31लेकिन जालिम माश्रे ने
29:33हम दोनों के दिरमयान दिवारें खड़ी करती है
29:35क्या मतलब?
29:37मॉम और चाची में फिर किसी बात पर कोई लड़ाई होई है
29:40और तुम तो चाची को जानती हूँ
29:42ऐसे महौल में वो पूरे घर को में नाने जंग बना देती है
29:45और वजीहा पर परबंदियां लगा देती है कि वो किसी से बात नहीं करेगी
29:48और तुम तो जानती हूँ
29:49जब ऐसी सिचुवेशन हो तो वो कुछ ज्यादा ही फर्मापरदार हो जाती है अपनी यह माम की
29:53वल वाला का नजर नहीं आ लिए
29:57अम्मी अम्मी यही महुले में कहीं गई भी है
30:01तुम कहो तो वो फोन करके बिला देती हूँ
30:03तुम्हारा सुनके फॉरण आ जाएंगी
30:05नहीं रहने तो
30:07उन्हें परशान मत करो वैसे भी मैं थूरी देर के लिया है
30:11यहार एक अच्छी से काफी बनाती हूँ
30:13अच्छा
30:15तो तुम यहाँ काफी पीने आयो
30:17तुम तो जानती हूँ तुम्हारे हाथ की काफी मुझे कितनी पसंदी
30:21जा तुम्हारे हाथ की काफी मैं
30:23अच्छा भई बस करो मसके मत लगाओ लेकर आ रही हूँ
30:25वैसे एक बात तुम्हारा शौर
30:27बहुत कुछ नसीब होगा तुम्हारा शौर
30:29तृट मुझे मुझे के स्वारे दुम्हारे क्काफी की इनसान सारी धकन, सारी टैंशनर हो हम Betsy
30:35इनसान दुम्हारे काफी आएगा से दुम्हारे हानगे की काफी कən लकाना लेकर आती हूं
30:41जैंक्यू
30:49यार अनुशा
30:51कैसी टीचर हो यार, इतने नमर काटती हो बच्चों के, कोई बात नहीं गलती हो जाती है
30:56वाहाज, प्लीज कॉप्यों को मत छेड़ो
30:58अच्छा बाबा, तुम कौन सी इंटर की टीचर है
31:03आपा असल में फारुक आजकल नए बिजनस को लेके इतने उलचे-उलचे से रहते हैं, बहुत मस्रूफ है
31:10इसलिए मैं बस उनसे बात नहीं कर सकी
31:14कोई बात नहीं साइमा, इतनी जल्दी किस बात की है
31:18दोनों घर के बच्चे हैं
31:23जब भी वक्त हो, फुरसत हो
31:27मिल बैटके हम सब मामला तेह कर लेंगे, परिशानी की तो बात ही नहीं है
31:32हाँ आपा, ठीक ही कह रही है आप, घर के बच्चे हैं, कभी भी बात कर लूँगे
31:38लेकिन मुझे तो लगता है, आजकल मेरा ही दिमाग काम नहीं कर रहा हूँ
31:42क्या करूँ, फौजिया की बातों को लेकर हर वक्त टेंशन में रहती हूँ
31:49अब आप मैंने तो कभी सुहिल और फौजिया का बुरा नहीं चाहाँ
31:53लेकिन फौजिया बतानी क्यों, फिर भी मेरा दिल दुखाने वाली बाते करती है
31:59साइमा, पता तो है तुमें फौजिया हमेशा से ऐसी है
32:06लेकिन फिर भी तुम बड़ी हो, तुमें समझधारी से काम लेना हो
32:12बड़ों को हमेशा चोटों की गलतियां इग्नोर करनी पड़ती है
32:17आपा हमेशा से यही करती आ रही हैं
32:20यही कोशिश करती हूँ कि मेरे घर का महाल ना खराब हो
32:23लेकिन फिर भी कोई ना कोई बात होई जाती है
32:27अब आप ही मुझे बताएं
32:28अगर बात फारुक और सुहील के दरमयान की है
32:32दोनों भाई खुदी सुलजा लेंगे
32:34तो इसमें हम देवरानी जिठानी क्यों बोलें
32:37बस यही बात फारुजा को समझ में नहीं आ रहे
32:41वो तो मुझे ऐसे नराज है जैसे सारी गलती ही मेरी है
32:45शायद वो समझ रहे है कि मैंने ही फारुक को मना किया है
32:50कि नए बिजनस का एगरिमन्ट मत करें
32:53मुझे तो सची इस औरत की समझ नहीं आती
32:57खतनी के इस्तिमाग की है
32:59क्या हो गया है साइमा
33:01तुम भी ऐसी बातें करोगी तो गलत बात है ना
33:07इससे तो टेंशन और बढ़ेगी
33:10घर का माहौल खराब होगा
33:12मेरी बात मानो
33:16मैं तो कहती हूँ फारूग से बात करो तो
33:20अगर नई कंपनी का कोई अगरिमन्ट हो रहा है
33:24तो सुहेल के नाम पे ही करवा दो वो अगरिमन्ट
33:27कोई बात नहीं
33:29बढ़ों को ऐसी कुर्बानिया देनी पड़ती है
33:36घर के सुकून के लिए, घर के माहौल के लिए
33:39करती हैं बात
33:45ऐसे चाहे तो पी यह ठंडी हो चाहेगी
33:49हाँ
33:50परिशान में दुआ करो
33:54क्या?
34:03चाची इस बात पर आपसे लड़ रही थी
34:04दिमाग तो ठीक है उनका
34:06और ये बात आपने मुझे या बाबा को पहले क्यों नहीं बताई
34:09खेर, मैं जाकर उनसे बात करता हूँ
34:12पूछता हूँ क्या मसला है उने
34:13कोई जरूरत नहीं है तुम्हे
34:14फासे से कोई भी बात करने की
34:17मौमाप मुझे और बाबा को बोलने क्यों नहीं देती
34:21इसी विज़े से चाची आपको इस तरह ट्रीट करती है
34:24और यह कोई वज़ा है लड़ने वाली
34:26अब मुझ फुलाकर कमरे में बैठी है
34:28और वज़िया को भी कमले से नहीं निकलने दे रहे
34:30आप तो उन्हें कुछ बोलेंगी नहीं
34:32मैं जाकर चाची और चाचु से बात करता हूँ
34:34पूछता हूँ उनसे क्या मसला है
34:36क्योंकि हम मैं बच्चा नहीं रहा
34:39बड़ा हो गया हूँ
34:40और मेरे होते मेरे माबाप को
34:42कोई परिशान करेगा, कोई टेंशन देगा
34:44मैं परदाश नहीं करूँगा
34:45तुम्हें मेरी बात समझ में नहीं आती
34:48कहा है न अपने आपको इस मामले से दूर रखो
34:51और मैं बात करने जा रहा हूँ
34:55रुक जाओ वाहाच
34:56तुम्हें बड़ों की बीश पे बोलने की कोई जरूरत नहीं है
34:59अभी हम जिन्दा है
35:01जब आप ना रहे
35:04तो फिर अपनी मन मानी करते फिर ना
35:07बापा आप
35:09चाचू और चाची पर गुसा होने की बचाए मुझ पर गुसा हो रहे है
35:12चाची की वज़ा से पूरे ग़र में टेंशन है घर का महौल खराब है
35:17अब ये बात क्यों नहीं समझ रहे है
35:19और ये बात तुम्हें क्यों नहीं समझ में आ रही है कि तुम्हारे बीच में बोलने से बात बनने के बज़ाए मजीद बिगर सक्किये घर का महुत खराब हो सकता है
35:25और ये मैं हर्गिस नहीं चाहूँगा
35:29समझ आगी बात
35:31इलिट क्लियर?
35:35जे
35:49ये
36:06येस
36:06वाजिया
36:08भाबी अगर आप मुझे खाने पर बुलाने आई है तो चली जाएं
36:17मुझे भूक नहीं है
36:19और अगर मुझे खाना खाना होगा
36:21तो मैं उपर मगवा लूँगी अपने कमरे में
36:23जैसे दो दिन से मगवा रही है
36:26और वैसे भी
36:27मेरे होने ना होने से किसी को क्या फर्ट पड़ता है
36:30फर्ट तो पड़ता है
36:33पहले तुम ये तो लो
36:35यह क्या है?
36:43यह नई ब्रांच के पेपर्स हैं
36:45फारुक ने एक्रिमेंट बनवा लिया था
36:49नई ब्रांच सुहिल के नाम कर दी है
37:05मुझे तो यकीन नहीं आ रहा
37:12मान गए आपको
37:15आप कितनी अच्छी है
37:17आपने मेरी परेशानी को इतनी जल्दी समझ लिया
37:21जब तक आप इस घर में हैं
37:24किसी के साथ बुरा नहीं हो सकता
37:26किसी के हक तलफी नहीं हो सकती
37:28और मैं जानती हूँ
37:30कि ये सिर्फ आप ही करवा सकती थी
37:35और वैसे भी मैंने ये अपने लिए थोड़ए किया है
37:38मैंने तो अपनी बेटी के लिए किया है
37:41हर मा की तरह
37:42उसका मुस्तक्बिल महफ़ूस किया है
37:45आप ही सोचे ना
37:47मैंने कोई गलत किया
37:48नहीं फाजया
37:50तुम्हारी सोच बिल्कुल गलत नहीं थी
37:52लेकिन जो तरीका तुमने अपनाया
37:55वो नामुनासित
37:57और मैं तुम्हें यही समझाने की कोशिश कर रही थी
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