India is known as the world’s largest democracy — but recent events raise a critical question: Is Indian democracy truly strong, or is it under pressure?
This in-depth documentary case study explores the arrest of Sonam Wangchuk, the Ladakh protests of September 2025, and the wider concerns about freedom of expression, press freedom, and civil liberties in India.
👉 In this video, we cover:
The history of Indian democracy and its constitutional foundations
Ladakh’s demand for Statehood and Sixth Schedule protection
The role of Sonam Wangchuk as an activist, innovator, and protest leader
What happened on 24th September 2025 in Leh – protests, clashes, and curfew
Laws like Sedition (124A), UAPA, and Public Order laws and their impact on dissent
International reports: Freedom House 2025 (Partly Free) and RSF World Press Freedom Index 2025 (India ranked 151/180)
The future of democracy, dissent, and development in India
🔴 This documentary asks a fundamental question: “Is India still a strong democracy, or are dissenting voices being silenced?”
If you care about freedom, democracy, and civil rights, this video is a must-watch.
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00:00नमस्कार दोस्तों लदाक खामोस पहाडों की धर्ती जहां जिन्दिगी के सवाल अक्सर सन्नाटे में दब जाते हैं लेकिन 24 सितंबर 2025 को लेह की सर्कों से उठी एक आवाज ने पुरे देश का ध्यान कीश लिया वो आवाज थी इस्टेट हुड और सिक्ष इडिूल की मानत
00:30अपनी धर्ती को दिया आईस स्टूपा पर उसी इंसान को उसी धर्ती पर गिरफतार कर लिया गया और इस गिरफतारी ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया क्या भारत अब भी एक मजबूत लोग कंत्र है साल 1947 में जब भारत आजाद हुआ तो सम्विधान ने हमें fundamental rights दि
01:00अब सत्ता मजबूत हो जाती है तो ये अधिकार कमजूर पड़ जाते हैं और इसी का उधारण है 1975 की emergency जब प्रधान मंत्री इंद्रा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए आंतरिक असांति का हवाला देकर आपात खाल लगाया 21 महिनों तक देश में नागरिक अधिकार निल
01:30और जब सत्ता सेंटरलाइज हो जाती है तो सबसे पहले कुर्बान होती है जनता के आजादी साल 2019 में आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मु कस्मीर का पुनर गठन किया गया और इस प्रकरिया में लदाक को एक अलग यूनिन टेरिटरी बनाया गया यहां लोगों को उमीद �
02:00सेड्यूल का ट्राइबल प्रोटेक्शन भी नहीं मिला जबकि लदाक के कुल आबादी में लगबग 97 परसेंट लोग सेड्यूल ट्राइब्स में आते हैं यहां के लोगों का डर है कि आउटसाइडर्स उनकी जमेन खरीच सकते हैं उनकी रोजगार और सरकारी नोकरियां �
02:30स्टुडेंट्स एड्यूकेशनल एंड कल्चरल मूमेंट ओफ लदाक जो लदाक के बच्चों को प्रैक्टिकल एड्यूकेशन और एंवायर्मेंट कॉंशेस लर्निंग का रास्ता दिखाता है उनकी आइस स्टूपा टेक्नीक ने पूरी दुनिया को क्लाइमेट इनोवे
03:00वे आंदुलन का चहरा बन गए उनका एक्टिविज्म, सिक्षा, एंवायर्मेंट और ट्राइबल राइट्स के मुद्दों को जोड़ता है और अक्सर उन्हें पीसफुल सिविल प्रोटेस्ट के प्रतीक के रूप में देखा जाता है
03:1224 सितंबर 2025, लेह के सडकों पर हजारों लोग इकठा हुए, उनकी मांगें साफ थी कि लदाक को स्टेट हुड मिले और सिक्ष सेड्यूल के तहट ट्राइबल प्रोटेक्शन लागू किया जाए
03:25शुरुवात में प्रदर्शन सांतिपून था, लोग परचे और बैनर लेकर मार्च कर रहे थे और अपनी आवाज को लोगतांत्रिक तरीके से सुनाना चाते थे
03:36लेकिन दो पहड तक इस्तिती बदल गई, कुछ प्रदर्शन कारी सड़क पर पत्थराओ और सरकारी संपत्ति को नुच्सान पहुचाने लगे
03:44पुलिस ने प्रदर्शन को काबू में करने के लिए बैरियर्स और टियर गैस का अस्तिमाल किया
03:49ता हिंदू की एक रिपोर्ट कहती है, सेवरल पीपल वर फियर डेड, मैनी इंजर डेड और लगबग 30 सेक्यूर्टी परसनल घैल हुए
03:58और शाम तक प्रशाशन ने सुरक्षा कारणों से पूरे ले सहर में करफ्यू लभा दिया
04:04सडकें सुनसान थी, दुकाने बंद और सभी लोगों को घरों में रहने का आदेश दिया गया
04:10इसी बीच सोनम वांग्चुक को ग्रफतार कर लिया गया
04:14और सरकार ने ये तर्क दिया कि एक अदम लॉयन ओर्डर बनाये रखने के लिए जरूरी था
04:19लेकिन कई आलोचक इसे सांतिपोन विरोध को दबाने का प्रियास मान रहे हैं
04:25इससे यहाँ एक सवाल उड़ता है कि क्या भारत में सांतिपोन विरोध अब अपरात बन गया है
04:31भारत में कई ऐसे कानून हैं जिनका प्रियोग सुरक्षा और पबलिक ओडर बनाये रखने के नाम पर किया जाता है
04:37इनमें जो प्रमुक हैं वो है सेडिशन सेक्शन 124 से
04:42यह कानून उन लोगों पर लागू होता है जिनके कथन या लेखन से सरकार के खिलाब हिंसा या सारवजनिक असांति फैलने का वास्तविक जोखिमों
04:52और यहां सुप्रीम कोर्ट ने किदारनाज सिंग वसेज स्टेट आप बिहार 1962 के फैसले में स्पष्ट किया था
04:59कि केवल आलोचना या विरोज सेडिशन नहीं बनता दूसरा है UAPA यानि Unlawful Prevention Act 1967 इसे आतंखवाद और Anti-National Activities रोकने के लिए बनाया गया था
05:14और आलोचक कहते हैं कि इस कानून के तहट Pre-Trial Detention लंबा हो सकता है और Peaceful Activist पर भी कारेवाही के स्थंभावना रहती है
05:23और तीसरा है Public Order Laws CRPC Section 144, 139 और 130 ये प्रशाशन को Assemblies को रोकने, Dispers करने और कर्फियू लगाने की सक्ति देता है
05:37और कभी-कभी ये सांतिपूर्ण परदर्शन पर भी लागू हो जाती है
05:41लेकिन यहाँ समश्या ये है कि अदालतों में मामलों के सुनवाई महिनों या सालों तक लंबित रह सकती है
05:48और इस दोरान कुछ Activist जेल में ही रह जाते हैं बिना Conviction के जिससे उनका अधिकार और जीवन परभावित होता है
05:55सोनम बांग्चुक की गरपतारी को कई आलोचक डेसंट दबाने के संकेत के रूप में देख रहे हैं
06:02यानि लदाक की आवाज को दबाने की एक घटना सिर्फ एक isolated प्रोटेस्ट नहीं थी
06:07यह सवाल उठाती है क्या भारत का लोगतंतर सर्फ कानून के नाम पर डेसंट को सहता है
06:12या वास्तों में लोगतंतरिक सहन सीलता मजूद है
06:16भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोगतंतर है लेकिन अंतर राष्ट्रियां आंकलन कुछ और ही कहानी कहते है
06:23Freedom House की Freedom in the World Report 2025 कहती है कि भारत पार्टली प्री देश है
06:30इस रिपोर्ट के नुसार भारत को पॉल्टिकल राइट्स में 31 आउट आउट आउट आउट आउट आउट आउट आउट आउट आउट आउट आउट आउट आउट मिले हैं
06:40इस रिपोर्ट का कहना है कि हाल के वर्षों में अभिव्यक्ति की स्वतंतरता, सिवल सोसाइटी और मीडिया के आजादी पर दबाव बड़ा है
06:52जिसमें जर्नलिस्ट, एंजियोज और सरकार के आलोचक सब बढ़ती निगरानी, कानूनी मामलों और कभी-कभी हिंसा का सामना कर रहे हैं
07:02वहीं Reporters Without Waters, RSF की World Press Freedom Index 2025 में भारत का इस्थान 151
07:11RSF ने भारत को One of the World's Most Dangerous Countries को रुजजर्नलिस्ट कहा है
07:17हाला कि 2023 और 2024 की तुलना में रैंक में थोड़ा सुधार आया है
07:23लेकिन अब भी भारत को Very Serious केटेगरी में रखा गया है
07:27यानि मीडिया स्वतंतरता के स्थिती गंभीर चिंता का विशय बनी हुई है
07:32Freedom House की रिपोर्ट कहती है कि सरकार अक्सर कानून ब्योस्था के नाम पर आलोचुकों और NGO's के खिलाब कारेवाही करती है
07:40जिससे भारत के लोग कांतरिक धांचे पर सवाल उखते हैं
07:44कुछ इसे डेमोक्रेटिक बैक्सलाइडिंग कहते हैं
07:47और यहां एक सवाल उटता है
07:49क्या ये सिर्फ विदेशी नजर है या सचमच हमारी आजादी सिकुड रही है
07:54इस आंदूलन के पीछे हर आवाज की अपनी वज़ा है
07:58किसी के लिए ये रोजगार और सरकारी नोक्रेव का सवाल है
08:02तो किसी के लिए भूहभ और सांस्कृतिक पहचान बचाने की लड़ाई
08:06सरकार कहती है डेवलॉप्मेंट जरूरी है
08:09लेकिन इस्थानिया लोग कहते हैं कि डेवलप्मेंट बिना सेवगार्ड बेकार हैं
08:13क्योंकि अगर जमीन, संसादन और अधिकार सुरक्षित नहीं होंगे
08:17तो विकास का लाब उनकी जेव और पहचान तक नहीं पहुचेगा
08:22सोनम वांग्चुक की गिरपतारी सिर्फ एक अरेश नहीं हो सकता
08:25ये हमारे लोग कंतर की सेहत का आइना है
08:28जब लोग अपने अधिकारों, संस्कृति और भविश्य की खातिर आवाज उठाते हैं
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