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Every human being will face regret after death.
Some will regret their sins, while others will wish they had done more good deeds.

This is a true Islamic story about two sisters and their graves — one filled with torment, and the other filled with fragrance from Paradise. A story that has changed thousands of lives. Many who never prayed started praying, and lost youth returned to the straight path.

👉 Watch till the end with your heart.
👉 Share this life-changing reminder with your family and friends.

Remember: Wealth, status, and children will not go with us in the grave. Only our deeds will remain.

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Transcript
00:00As-salamu alaykum, Sok TV की एक नई वीडियो के साथ हादिर है
00:17जहां आम लाते हैं ऐसे वाकियात जिनको सुनके दिल देहल जाए, रूह जाग जाए और इमान ताजा हो जाए
00:23एक बुजर्ग, नहायत नेक और अबादत गुजार बंदा था, दिन को रोजे रखता, रात को अबादत करता
00:33इसका दिल दुनिया की लज़तों से कट चुका था, और वो हर वक्त अपने रब की याद में मशबूल रहता
00:39एक दिन वो कहीं जा रहा था कि रास्ते में एक कब्रस्तान आया
00:43इसने सोचा, क्यों न यहां रखकर मरहूमिन के लिए दुआ कर दी जाए
00:49वो कब्रस्तान में दाखिल हुआ, दाहा के लिए हाथ उठाने ही वाला था
00:54कि अच्छानक एक कब्र पर इसकी नजर पड़ी
00:57और क्या देखता है, इस कब्र पर एक होलनाक सांप लप्टा हुआ बैठा है
01:01ये मनजब देखकर वो अल्लावाला हैरान रह गया
01:07फ़ुरन कब्र के करीब बढ़हा, दिल में इरादा किया कि इस सांप को हटाना है
01:13लेकिन जैसे ही करीब पहुँचा, इस सांप अच्छानक कब्र के अंदर एक सुराख के जरीए गाइब हो गया
01:19वो और ज्यादा मुतजस हुआ
01:21करीब जाकर मिट्टी को हाथ में लिया और नाक के करीब ले गया
01:25जांक को एक नाकाबल बर्दाष्ट बद्बू, उसकी नाक से ठिकराई, ऐसी बद्बू, जैसे हराम की बसान दो, उसके दिल पर लर्जा तारी हो गया
01:34उसने सोचा कि शायद ये वहम हो, फौरण साथ वाली कब्र की मिट्टी को हाथ लगाया और सौंगने लगा
01:41लेकिन यहां मौामला बिलकुल मुख्तलिफ था, वहां से ऐसी खुश्बू आ रही थी जैसे जनत की कस्टोरी, दिल को सुकून देने वाली, नूरानी खुश्बू, अब वो और ज्यादा हैरान हुआ, आखिर एक कब्र से हराम की बद्बू, और दूसरी से जनती खुश्
02:11पच्चीस साल की, और सबसे हैरत अंगीज बात ये कि वो दोनों बहने थी, ये सोचकर उस अल्लह वाले का दिल और भी बेचीन हो गया, उसने फैसला किया कि हकीकत को जाने बगेर वापस नहीं लोटूंगा, जा वो कई घंटों का सफर दे करता हुआ, इन बहनों के गाउं
02:41नहायत नर्मी से कहा, उमा जी, मैं आपकी बैटियों की कबरों पर गया था, वहां एक अजीब मनजर देखा, एक कबर से हराम की बद्दी और दूसरी कबर से जंत जैसी खुश्बू आ रही थी, उमा, मुझे बताईए, असल हकीकत क्या है, बोड़ी उमा की आँखों से आ
03:11रास्ते में एक शखस अपने छोटे से बैटे के साथ बैठा हुआ था, उनकी हालत नहायत खिस्ता थी, भूक और प्यास से नढाल, बिलकुल जानकनी के आलम में, जीसे ही हमें देखा, वो शखस परियाद करने लगा, उसकी आँखों से आंसु बह रहे थे, वो कहने लगा
03:41लेकिन मेरी बड़ी बैटी के दिल में घरूर और तकपर भरा हुआ था, हलांके हमारे पास खाने पीने का सामान मौजूद था, लेकिन उसने रहम ना किया, बलकि इन दोनों को धुका देकर रास्ते से हटा दिया, और सिवार होकर आगे बढ़ गई, बेटा, जब हम वाप
04:11बलकि हिस्ती हुई अपनी छोटी बेहन से कहने लगी, देखा, दो घूंट पानी नहीं दिया और दोनों मर गए, ये जमला सुनकर मेरी छोटी बैटी का दिल काम पुठा, आँखों से आंसू बहने लगे, उसने इसी लम्हें अल्ला के हुजूर सच्ची तोबा की, फर्या
04:41यतीम बच्चों को खुलाती, अपने वजूद को भूका रखती, मगर दूसरों को सीर करती, इसके दिल में ऐसी नर्मी और खिदमत का जजबा हुआ जो कभी खत्म नहुआ, जब तक वो नेक लड़की जिन्दा रही, हर यतीम का सहारा बनी, हर फकीर का ख्याल रखा, हर भ
05:11निकलता है, सुकून और रहमत नाजल होती है, लेकिन दूसरी बहन, जिसने तक बुर किया, रहम ना खाया, दो मासूम जानों की परवाह न की, और दुनिया में गुनाहों में डूबी रही, गैबत, चगली, सूद और जुल्म, आज उसकी कबर जहनम का गढ़ा बन चुकी
05:41कि हमारी आँखें खोलने के लिए काफी है, जिन्दगी के लम्हें कीमती है, किसी भुके को खाली मत लोटाओ, किसी प्यासे को पानी देने से इनकार मत करो, किसी गरीब को हकीर मत समझो, याद रखो, आज जो दौलत, इज़ट और वक्त तुम्हारे पास है, वो सब अल्ल
06:11हजरत मुसा अलाहिससलाम के जमाने की बात है, एक ऐसा वक्त जब लोग सिर्फ जाहरी तौर पर चीज़ों को परक्ते थे, दिल की नियत और हकीकत के बारे में बिलकुल नहीं सोचते थे, उस दोर में एक शख्स की बीवी का इंतिकाल हो गया,
06:31बगर अफसुसनाक बात ये थी कि मरने के बाद भी, उस औरत के जनाजे के लिए कोई तैयार नहीं था,
06:44महले के हर फर्द के चेहरे पर एक ही तरह की जलक थी, नफरत, और बूरा भला कहना, हर तरफ यही सुनाई दे रहा था, कि ये औरत बदकिरदार थी, बेहया थी,
06:56और उसका जनाजा पढ़ना किसी के लिए काबल गबूल नहीं, लोग कहते, ये औरत तो बेगेरत है, और उसका शुखर भी बेगेरत है, कि उसके होते हुए भी ये गेर मर्दों को अपने घर बलाती थी,
07:11महले वाले इस औरत और उसके शुखर के बारे में बातें करकर के अपनी जबाने तेज़ कर रहे थे,
07:21लेकिन हकीकत कुछ और ही थी, लोगों की नजर में ये औरत बदकरदार थी,
07:26मगर अल्लाह के नजदीक इसकी हकीकत बिलकुल मुख्तलिफ थी,
07:29लोग जाहिरी एमाल देखकर फैसला कर लेते थे,
07:33लेकिन अल्लाह तालाह हर दिल की नियत को जानता है,
07:36और इस औरत का दिल, अल्लाह की महबत और खोफ से भरपूर था,
07:44यहां तक कि जब उसकी मौत वाके हुई,
07:47तो कोई भी उसके जनाजे में शरीक नहीं हो रहा था,
07:51ना कोई घसल देने के लिए आगे आया,
07:53ना कोई जनाज़ा पढ़ने के लिए,
07:55लोग दूर से देखकर बस बातें करते रहें,
07:58और किसी की हिम्मत ना हुई,
08:00कि वो उस औरत के लिए दूआ करे,
08:02या उसकी इज़त में कुछ करे,
08:04आइसी दौरान,
08:05अल्ला ताला ने हज़रत जबराईल अलिहिस्सलाम को मुखातब किया और फरमाया,
08:10ए जबराईल, तू क्या कर रहा है?
08:12हज़रत जबराईल अलिहिस्सलाम ने आजज़ी से जवाब दिया,
08:15या अल्ला, मैं तेरी तस्बीख कर रहा हूँ,
08:18मैं तेरे कमालात बयान कर रहा हूँ,
08:20अल्ला ताला ने फरमाया,
08:22फ़ुरान हज़रत मुसा अलिहिस्सलाम के पास जाओ,
08:26और उन्हें बताओ कि मेरे महबूब बंदे की बीवी,
08:29इस दुनिया से रुखसत हो गई है,
08:31जिसे लोग बेगेरत कह रहे हैं,
08:33वो मेरे नज़दीक महबूबा है,
08:36उसे इज़त व इहतराम के साथ दो बारा घसल दो,
08:39और पूरी इज़त के साथ जनाज़ा पढ़ो,
08:41ये वाकिया हमें एक बहुत बड़ी हकीकत याद दिलाता है,
08:45दुनिया की आँखें और लोगों के अल्जामात कभी कभी हमें सच्चाई से दोर कर देते हैं,
08:51मगर अल्ला हर दिल की नियत को जानता है,
08:53जिसे लोग बुरा कहते है,
08:55वो अल्ला के नजदीक महबूब हो सकता है,
08:57और यही वो सबक है जो हमें उस कहानी से सीखना चाहिए,
09:01हजरत मुसा अल्यहिस्सलाम फ़ूरां अपनी कौम के दर्मियान पहुँचे,
09:05और अल्लाह ताला का वो पेगाम सुनाया,
09:11जो हजरत जबराईल अल्यहिस्सलाम के जरीये आया था,
09:15जैसे ही लोगों ने सुना,
09:17उनके चेहरे पर हैरत के आसार नमाया हो गए,
09:20लोग एक दूसरे की तरफ देख रहे थे और बोले,
09:23या मुसा, ये औरत तो गुनाहगार थी,
09:25वो कैसे अल्ला की महबूबा हो सकती है,
09:28क्या ये मुम्किन है कि जिसे हम सब बदकिरदार और बेहया समझते हैं,
09:32वो अल्ला के नजदीक महबूबा हो,
09:35हजरत मुसा अल्यहिस्सलाम ने आखें बंद करके दूआ के लिए हाथ उठाए,
09:39और दिल में हैरत के साथ कहा,
09:41या अल्ला, ये लोग तो उसे बदकिरदार और गुनाहगार समझते हैं,
09:46फिर तो उसे महबूब कैसे कह रहा है,
09:48क्या ये मुम्किन है,
09:50अल्ला ताला ने नहायत हिक्मत और महब्बत के साथ फरमाया,
09:53आए मुसा, जो मैं जानता हूँ,
09:56वो ना तू जानता है और ना तेरे लोग,
09:59जो राज मेरे पास है,
10:01वो किसी इनसान के इल्म में नहीं,
10:03जो हकीकत में सही और सच है,
10:05वो सिर्फ मेरे इल्म में है,
10:07तो बस वही कर जो मैंने तुझे हुक्म दिया है,
10:09حضرت موسیٰ علیہ السلام نے اللہ کے حکم کی تعمیل کی
10:12اس عورت کو نہایت احترام کے ساتھ غوسل دیا گیا
10:15جسم پر سفید اور صاف ستھرہ لباس پہنایا گیا
10:19خوشبو لگائی گئی
10:20اور پورے وقار کے ساتھ جنازہ پڑھایا گیا
10:23جب اسے دفن کرنے کے لیے قبر کھو دی گئی
10:29تو ایک عجیب اور غریب منظر ہوا
10:31قبر سے خوشبو آنے لگی
10:33ایسا محسوس ہو رہا تھا جیسے زمین پر جنت کے باغات کھل گئے ہوں
10:37حضرت موسیٰ علیہ السلام خود حیران تھے
10:40یہ منظر کسی عام قبر کا نہیں لگ رہا تھا
10:42دفن کے بعد حضرت موسیٰ علیہ السلام
10:45کوئی طور پر چلے گئے اور اللہ تعالیٰ سے ہم کلام ہوئے
10:49آجزی اور حیرت کے ساتھ عرض کی
10:51یا اللہ یہ ماجرہ کیا ہے
10:53لوگ تو اسے بدکردار اور گناہگار کہہ رہے ہیں
10:56پھر تو اسے محبوبہ کہہ رہا ہے
10:58اس کے ساتھ یہ کیسا کرم اور محبت ہے
11:01یہ منظر نہ صرف حضرت موسیٰ علیہ السلام کے لیے
11:04بلکہ ہم سب کے لیے ایک سبق ہے
11:06انسان صرف ظاہری اعمال اور لوگوں کی باتوں کو دیکھ کر
11:10کسی کی نیت یا مقام کا اندازہ نہیں لگا سکتا
11:14جو ہم سمجھتے ہیں بد
11:16وہ اللہ کے نزدیک محبوب ہو سکتا ہے
11:18کیونکہ اللہ ہر دل کی گہرائی میں جھانکنے والا ہے
11:22اللہ تعالیٰ نے حضرت موسیٰ علیہ السلام سے فرمایا
11:26اے موسیٰ وہ عورت بدکردار نہیں تھی
11:29بدکردار تو یہ بستی کے لوگ ہیں
11:32یہ لوگ کبھی سکون کے لمحے نہیں پاتے تھے
11:37یہاں تک کہ وہ گناہ نہ کرے
11:39ان کے دل زنا اور دیگر گناہوں میں ٹوبے ہوئے تھے
11:42لیکن یہ عورت اور اس کا شوہر میرے محبوب بندے تھے
11:46حضرت موسیٰ علیہ السلام کی آنکھیں ہیرت اور تجسس سے کھلی رہ گئی
11:50اور اللہ تعالیٰ نے آگے وضاحت فرمائی
11:53ان دونوں کا ایک خاص مقصد تھا
11:56دن کو وہ روزہ رکھتے اور رات پھر عبادت کرتے
11:59لیکن ان کے دل میں ایک غم بھی تھا
12:02ان کے محلے کے لوگ گناہوں میں مبتلا ہیں
12:05اور اگر وہ اسی راستے پر چلتے رہے
12:09تو جنت سے محروم رہ جائیں گے
12:11یہ سوچ کر انہوں نے ایک ایسا طریقہ اپنایا
12:14جو انسانوں کی عقل سے باہر تھا
12:16مگر میرے نزدیک نہایت حکمت والا تھا
12:19اللہ تعالیٰ نے آگے فرمایا
12:20وہ رات کو ایک شخص کو اپنے گھر بلاتے
12:24اسے عزت کے ساتھ رکھتے
12:26اور کہہ دیتے
12:27آج کی رات تم یہاں رہو
12:29گناہ نہ کرو
12:30بس اللہ اللہ کرتے رہو
12:32چاہے تم پڑھو یا نہ پڑھو
12:33بس گناہ سے بچو
12:35صبح کے وقت وہ شخص عزت کے ساتھ رخصت کیا جاتا
12:39یہ ان کا طریقہ تھا
12:41کہ لوگوں کو گناہوں سے بچایا جائے
12:42دلوں کو نرم کیا جائے
12:44اور انہیں راستے کی طرف بلایا جائے
12:46یہ سن کر حضرت موسیٰ علیہ السلام کو
12:49مکمل طور پر سمجھ آ گیا
12:51کہ کس طرح اللہ تعالیٰ کی محبت
12:54اور حکمت انسانوں کی عقل سے بلاتر ہوتی ہے
12:57جو لوگ صرف ظاہری طور پر نظر آتے ہیں
13:00وہ حقیقت میں نہایت حکمت
13:02محبت اور قربت کے حامل ہو سکتے ہیں
13:05یہ سبق ہمیں یہ سکھاتا ہے
13:07کہ کبھی بھی کسی کی ظاہری حرکت کو دیکھ کر فیصلہ نہ کریں
13:11کیونکہ اللہ ہر دل کی نیت جانتا ہے
13:17اور بعض وقات وہ جو لوگ سب کی نظر میں گناہگار لگتے ہیں
13:21اللہ کے نزدیک سب سے زیادہ محبوب اور برقزیدہ ہو سکتے ہیں
13:26صدقہ جاریہ سمجھتے ہوئے
13:27ویڈیو کو لائک اور شیئر کر دیں
13:29اور زوگ ٹی وی کو ابھی سبسکرائب کر لیں
13:31تاکہ ہماری نئی آنے والی ویڈیو آپ تک پہنچ سکیں
13:33مینٹ میں اپنے رائے ضرور دیں
13:35ملتے ہیں اگلی ویڈیو میں
13:36تب تک لئے اللہ حافظ
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