00:00पेश के अंदर जो महौल है जो हालाद बने हुएं कि आप पोस्टर दिखाने वोपर टांगे तोड़ दे रहा हूँ
00:07जरूरत क्या है आप बुल्डोजर क्यों चला रहे हो साब ऐसा कौन सा उन्होंने गुना कर दिया
00:14आप बुल्डोजर चला रहे हो आप एक वेक्ति को जो इतारा सम्मानित वेक्ति रहाओ उसको इसतरी के वारे में इस तरह के बैनात दे रहे हो
00:26मुकमंतुरियें सब के मुकमंतुरियें जब आप कुरसी पर बैढ़ जाते हो तो रिया कि उमीड की जाती है
00:34ऐसी भाषा की उमीद नहीं की जाती
00:37कि आप ऐसी भाषा बोले
00:39ऐसे ऐसे जुमले बोले
00:40जो जुमले दिल को ठेस पहुँचाने का काम करें
00:44I love मोहम्मत पोस्टर विवात की वज़े से
00:49बरेली में जो हिंसा हुई
00:50उसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है
00:53और फिलहाल बरेली का महौल गर्म है
00:55इसी विवात के बाद
00:57कॉंग्रेसांसद इमरान मसूद
00:59और समाजवादी पार्टी के नेता
01:00सहनवास खान बरेली जाने वाले थे
01:03लेकिन उससे पहले ही
01:05उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया गया
01:07पार्टी का डेलीगेशन हम लोग जा रहे थे
01:11हम तो दो ही लोग थे यहां से
01:13मैं और शानवास साब दोनों ट्रेन से जा रहे थे
01:15और ट्रेन से ही वापसी भी थी
01:17साड़े ग्यारा बजे पहुंचना था
01:19और देड़ बजे हमारी वापसी भी थी
01:20लेकिन ऐसा हालात हो गए
01:24मुझे नहीं समझ मैं आता कि बिल्कुल एक दम
01:26हर चीज़ के ओपर पाबंदी
01:28आपने हमें रोक करके खड़ा कर दिया
01:30क्यों खड़ा कर दिया भई
01:31आपने का नहीं आएंगे साब
01:34मौल खराब है किस बात के लिए मौल खराब है
01:36हम तो शांती के दूट है
01:38हम कांदी बादी लोग है
01:40हम देश के अंदर नफरत के मौल को
01:43शांत करने वाले लोग है
01:44तो हम तो हमसे तो यह उम्मीद कोई नहीं कर सकता
01:46कि हम नफरत की बात करेंगे
01:48हम तो महबत के परहरी है
01:50और जो कुछ हालात बरेली के अंदर बने हैं
01:54मैं तो एक बात पहले भी के विरफ फिर कह रहा हूँ
01:57कि देश के अंदर जो महौल है जो हालात बने हुए
02:01कि आप पोस्टर दिखाने वोपर टांगे तोड़ दे रहा हूँ
02:05पोस्टर दिखाने पर सिर्फ
02:08गुजरात में जलूस निकाला
02:10मद्यपरदेश में जलूस निकाला मार करके
02:13राजिस्थान के अंदर यही हुआ
02:16कि जबरदस्ती अलीगड की भी घटना उठा लीजे
02:21कोई कारवाई नहीं आप करते हो
02:23सिर्फ पोस्टर दिखाने पर
02:26आप टांगे तोड़ दे रहे हो
02:28लेकिन फतेपूर के अंदर मज़ार में घुसकर के तोड़ पूर की जाती है
02:34कबरों को तैसरेस किया जाता है
02:36पुलिस की बेरिडिकेटिंग तोड़ दी जाती है
02:39पुलिस का डंडा नहीं उठता है
02:40मजफ़नगर की सड़कों पर
02:43होटलों में अभी तो महिने पहले कितनी लूट पाट हुई
02:46पुलिस का डंडा नहीं उठेगा
02:49समझा बुजा के शांत कर दिया
02:51समझा बुजा के
02:52यह समझाना बुजाना
02:54उपार दर्वियों के लिए
02:56कहां इस्तमाल होता है या आप भी समझ रहा है
02:59लेकिन हमारा कोई लड़का अगर
03:02खड़े ओकर के पोस्टर भी दिखा देता है
03:04जिसके अंदर लव मुहम्मद लिखा है
03:06मैं उसका पैरोकार नहीं हूँ
03:08क्योंकि आप सल्लाव सल्लम के लिए
03:10इस तरह के पोस्टर दिखाने की कोई जरूरत नहीं है
03:12और तमाम उलेमा अकराम को आगए आकर कि
03:15इस बात को कहना चाहिए
03:16क्या आप सल्लाव सल्लम के नाम को इस तरह से ना लिखके
03:19आप सल्लाव सल्लम के नाम के साथ महबत
03:24मुसल्मान होने की गारंटी है
03:26तो उसको दिखाने की जरूरत नहीं है
03:28उसे परदर्शित करने की जरूरत नहीं है
03:30बनाना सज्जाद नौमानी साब का एक बयान आया है
03:34मैं और तमाम उलेमा एकराम से कहना चाहता हूँ
03:37कि सब को आगे आ करके
03:39ये नौजिक दोर चल रहा है मुलक के अंदर
03:41जिस दोर के अंदर हमारे उपर सबसे ज़्यादा निशाना है
03:44और हमारे उपर निशाना साथ करके
03:47ये तमाम तर नाकामियों को चिपाना चाहते है
03:50ये चाहते हैं कि इनकी तमाम तर नाकामिये
03:53उस नफरत के मौल में दब जाएं जो नफरत का मौल ये देश के अंदर पैदा करने है
03:5827 का चुनाओ है चुनाओ हारने का डर सता रहा है
04:02इसलिए मुसल्मान के उपर लाठी, डंडा, बुल्डोजर, गोली सब चलाने का काम हो रहा है
04:07और ये जो नफरते हैं, इन नफरतों के बुनियात के उपर उन तमाम नाकामियों को चुपा करके चुनाओ के आज़ंडे को अपने चलाना चाहते है
04:16तो ये सीधा सीधा केल चल रहा है, तो इसके अंदर किसी भी सूरत में हमें इस्तमाल नहीं होना चाहिए
04:24ये मस्जिदे नमाज के लिए, यहां नमाज पढ़ी जाती है, जुमा के अंदर लोग नमाज पढ़ने के लिए आते है, चार लड़के बाहर खड़े हो करके पोस्टर लेके कोई भी खड़ा हो जाए
04:35और फिर पूरी नमाजी उस भीड का हिस्सा बन जाएं, ना चाहते हुए भी वो उसके अंदर उस नफरतों का शिकार हो जाएं, जिनका वो कभी चाहते नहीं, नमाज के अंदर कोई नफरत की बात, मस्जिद में कोई नफरत की बात, इसलाम के अंदर अगर आप गौर करें
05:05अपने एजंडे को चलाने के लिए, अपनी नाफागमियों को छपाने के लिए पहला हैं।
05:35हमारे से यह उमीर नहीं की जा सकती, हमारे लिए सम्विदान सबसे उपर है, सम्विदान की शपत ले करके उसको जूटा कर रहे हैं।
06:05प्रशाशन जो है उनको जाने के अनुमती देश्टा तो शायद यह सब कुछ ना होगा और आपने कल देखा भी होगा तो कि घर पर बुल्डोजर भी नहीं तो चाने की जरूरत एक बात तो बताईए अनुमती मांग क्यों रहे हैं आप क्यों घटा कर रहे हैं जरूरत क्या ह
06:35पर महिमा मंडित के उसको उसको उसके बारे में इस तरह के बहानात दे रहे हो तू तराक की भाज़शा का इस्तमौल कर रहे हैं यह तो मीडिया को भी केहना चाहता हूँ
06:45क्या आप दो मिनिट के अंदर ऐसी भाज़ा इस्तवाल करते हैं उनके लिए भी करके दिखाऊ ना उन नफरती लोगों के लिए भी करके दिखाऊ ना जो सीधे सीधे खुले आम नाम लेकर के नफरत बोलते हैं आप में इंहमत नहीं है आप तो एजंडा चला रहे हो
06:58मैं तो ये कह रहा हूँ ना ये तो ये तो काम सब होना है हमारे साथ ये सब काम होना है जब हमें पता है कि हमारे साथ ये सब काम होना है तो हमें मोतात रहने की जरूरत है हमें उश्यार रहने की जरूरत है ये तो हो नहीं है ये कोई ऐसी चीज नहीं है कि ये नहीं चीज है �
07:28खरोरों की समपतियां सब तीज कर रहा है
07:31तो यह तो
07:31मैं कह रहा हूँ ना कि यह सब हो रहा है
07:34यह तो सब चल रहा है
07:36लेकिन यह जो आप कर रहा है उसका देश के ओपर
07:38बहुत बुरा असर पड़ रहा है
07:39इसका देश के ओपर बहुत बुरा असर पड़ रहा है
07:42पूरे विश्व केंदर, हम कहां खड़े हो गए
07:45आपकी नफरतों की वज़ा से
07:47आपको, इसका आंकलन करना पड़ेगा
07:49आपको सोचना पड़ेगा
07:50कि जो हमारे दोस्त थे
07:52जो हमेशा हमारे साथ खड़े रहे,
07:54वो आज हम से दूर हो रहे
07:55आपको सोचना पड़ेगा
07:56आपको देश के लिए सोचना पड़ेगा
07:58आप देश के लिए नहीं सोच रहे हो
08:00आप केवाल अपनी कुरसी के लिए सोच रहे हो
08:03अगर देश के लिए सोचोगे तब समझ में आएगा
08:05कि हम पूरे विश्व के अंदर आज अकेले खड़े हुँ रहे हैं
08:07मुकमंतरी योगिया जोते नात कह रहे हैं
08:09कि मौलाना को भूल गया था कि शाशन किसका है
08:13दोजार सफरा से पहले इस अबची चल दोगा
08:14ये तकब्बूर के लफज हैं
08:16ये तकब्बूर के लफज हैं
08:18इश्वर को घमंड पसंद नहीं है
08:20घमंड ना करें
08:23इश्वर को घमंड पसंद नहीं है
08:24मुकमंतरी हैं
08:26सब के मुकमंतरी हैं
08:27जब आप कुरसी पर बैठ जाते हो तो नियाग की उमीद की जाती है
08:31एसी भाषा की उमीद नहीं की जाती
08:34कि आप एसी भाषा बोले
08:36ऐसे ऐसे जुम्ले बोले
08:38जो जुम्ले दिल को ठेस पहुंच आने का काम करें
08:47पढ़ाने की बजाए उनको लिखाने की जाए
08:49सड़कों के लेके आते हैं
08:52मैं तो खुद कह रहा हूं देखिए
08:53ये तो मैं खुद कहां रहा हूँ
08:54के ये मस्जिदे, नमास के लिए
08:58लोगों की, राजनीती क्या अड़्दा नहीं हो सकती
09:01लोगों की, परदर्षन का हिस्सा नहीं हो सकती
09:05मस्जिदे नमास के लिए
09:07अब आप कागेशेया अपल выпуск
09:08नहीं कुछ नहीं है हम लोग बैटे हैं इन्होंने चार तरफ घेरा लगाया हुआ है
09:38नहीं कुछ नहीं हुआ है
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