00:00दोल की लैबद थाप और शंक की गूंज से वातावरन भक्ति में हैं
00:09भक्त पालकी पर सवार देवी दुरुगा का गर्म जोशी से स्वागत कर रहे हैं
00:14यह है असम्मे सोनितपुर्जले के तेजपुर में मुखरजी परिवार की दुरुगा पुजा
00:24यह परंपरा 163 साल पहले शुरू होई थी तब से यह परिवार कंधे पर पालकी पर देवी दुरुगा को लाता है
00:31इस दोरान माहौल सांसकतेक और आध्यात्मेक मूल्यों से लबालब रहता है
00:36हम लोग पलकी मैं दुलगा जी का मूर्टि लाते हैं और बिशच्जन भी पलकी में होता है
00:47हम लोग गारी मोटर कोई नहीं इस्तामाल करते हैं और हम लोग जो निती नियम है
00:55ৈશારલા તિતતતકન ৈાતતતરકેન સારમ આવતતભરહીંયામ તૌં પંરાહકે છરાણ
01:05उसी पालन करके अभी भी हम लोग माता जी का स्वा में निव्जित हैं.
01:171863 में शुरू होई पवित्र परंपरा को उखरजी परिवार पांच पेढियों से निभाता आ रहा है.
01:22आज भी पारंपरिक अनुष्ठानों से देवी दुरगा की पूजा की जाती है.
01:35In 1863, my father's father had a puja in this state.
01:45In 1863, we had a puja.
01:56ुशु आ हो कि चार बर्द अनुष्ठान के साथ होई
02:15यह पूजा पंडाल में मूर्त這樣的 की ऑपचारिक शुनुवात थी
02:20पेजपुर में इस साल दुर्गापुर्या के दोरान माहौल गमगीन है
02:30मशूर गायक जुबिन गर्ग के आकस्मिक निधन ने समाहरों का रंग फीका कर दिया है
02:35मुखरजी परिवार ने अनुष्ठान के दोरान शर्दान जली अर्पित की
02:51साथ में शर्दालों के साथ पारंपरिक अनुष्ठान किया
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