00:00मिशन भागवद गीता शलोक दिवस उन्नीस अध्याय एक शलोक अठारह
00:04दुपदो द्रॉपदेयाश्ट सर्वश्य प्रिथिवीत्ते
00:08सौभदरश्ट महाबाहुः शंखान दधमुः प्रिथक प्रिथक
00:13भावार्थ है धर्ती के स्वामी
00:17राजा दुपद, द्रॉपदी के पुत्र और बल्वान अभिमन्युग जो सुभदरा का पुत्र था
00:23इन सभी ने भी अपने अपने शंख बजाए
00:26ये शंखनाद केवल युद्ध की शुरुवात का संकेट नहीं था
00:31बलकि धर्म की विजय और अधर्म के अंत की चेतावनी थी
00:36हर योद्धा अपने शंख से अपनी उपस्थिती और संकल्प को प्रकट कर रहा था
00:42यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि जब धर्म की रक्षा का समयाता है
00:48तो हर व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होती है
00:52चाहे वह राजा हो, योद्धा हो या युवा अभिमन्यु जैसा भी
00:56शिख
00:58जब धर्म की पुकार हो तो संकोच नहीं, शंख बजाओ और आगे बढ़ो
01:04कल मिलते हैं अगले श्लोक के साथ
01:07जय श्री कृष्न
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