00:00Sharing is caring.
00:30जहां कोई औरत ना होने के वज़े से शादी वाले दिन से ही घर के साथ दोनों भाईयों के जिम्मेदारिया प्रियंका संभाल लेती है.
00:39दोनों भाई शांते से नाश्टा कर रहे होते हैं कि अंकुष अपने भाई की प्लेट से पराठे का एक टुकड़ा उठा लेता है.
01:00अरे ये कैसा बीहेवियर है अंकुष एक टुकड़ा ही तो है.
01:07एक हो या आदा मुझे भूक लगी है तो ये सिर्फ मेरा ही है. उसे भी किसी के साथ शेयर करने बैठा तो भूखा नहीं रह जाऊंगा.
01:14अरे बाबा ठीक है अब इस पर भी लड़ाई दूसरा बना देती हूँ पर प्लीज ऐसे खाना बीच में छोड़ कर मत जाओ. इससे अन्न का अपमान होता है.
01:26ओ प्लीज भाबी ऐसी कोई चीज होती ही नहीं है. आपके पास पैसे हैं, खरीदो और खाओ. अगर नहीं खाया जाए तो फेग दो. अरे दुनिया में सब यहीं करते हैं.
01:37अंकूर बैग उठाकर आफिस के लिए चला जाता है. जिसके पीछे उसका बड़ा भाई मायूस सा घर में खड़ा रह जाता है.
01:47जिसने बच्पन से सोने की चमच में खाया हो, उससे दुनिया के बारे में क्या पता होगा? वैसे गलती तो हमारी ही है. अगर कभी बच्पन में ही सही गलत का फरक सिखाया होता तो आज यह हाल नहीं होते.
02:01आप फिक्र क्यों करती हैं जी? भगवान है, वो जो भी करता है सबकी भलाई के लिए ही करता है. और जब वो चाहेंगे तो अपनी तरह से अंकुर भाईया को भी सब कुछ सिखा देंगे.
02:13पतनी की बात पर विश्वास कर अंकुष भी ऑफिस चला जाता है. सुबह से दोपैर होती है और अंकुर लंच करने ऑफिस के पास वाले रेस्टोरेंट में पहुँचता है, जहां वो एक साथ बहुत सारा खाना ओर्डर कर दीता है.
02:28सार, क्या कोई आपको जॉइन करने वाला है? नई तो, क्यो? अब कुछ नहीं सार, ऐसे ही. वेटर चला जाता है और कुछ देर में अंकुर का ओर्डर लेकर वापस आता है, जिस पर अंकुर सब डिशिस में से थोड़ा-थोड़ा खाकर, बाकी ऐसे ही छोड़कर, बिल दे
02:58पैसे वालो की माया. वेटर टिबल साफकर, बचा हुआ सारा खाना लेकर, रेस्टोरंट के पीछे घूम रहे बच्चों के पास पहुँच जाता है, जिससे देख बच्चों के चहरे खिल उड़ते हैं. वा, आज इतना सारा खाना आया, थैंक्यो भईया, भगवान आपको
03:28वालो तुम लोग खाओ, पर ध्यान रखो, किसी को पता ना चले, ने तो मेरी नौकरी चली जाएगी. इसी के साथ दिन बीटता है, और रात को दोनों भाई एक साथ घर पहुँचते हैं. कुछ दिर में सब डिनर करने बैठते हैं, जहां अंकुष अंकुर को समझाने की क�
03:58उनकी वज़े मैं तो नहीं ना. और ऐसे बहुत लोग हैं जिनके पास सब कुछ है. इसलिए अगर मैं एक इनसान कुछ नहीं करूँगा, तो कोई फर्क नहीं बढ़ने वाला.
04:07तुम्हारे भाईया बस एक चीज़ समझाना चाते हैं, कि जिस चीज़ की हमारे पास कमी नहीं है, उसे बरबाद करने से अच्छा है कि लोगों के साथ शेयर करें.
04:18इससे हम सिर्फ सामान नहीं, खुश्यां भी बाढ़ते हैं, और इसमें तुम्हारा ज्यादा कुछ तो जाएगा नहीं.
04:26भाईया भावी की बात सुन, अंकूर कुछ बोले बिना उठकर चला जाता है, इसी तरह दिन बेटते रहते हैं, जिसमें अंकूर प्रियंका कोशिश तो बहुत करते हैं, पर अंकूर पर किसी भी चीज़ का कोई असर नहीं पढ़ता.
04:39एक दोपैर अंकूर सैंविच खाते हुए सड़क के किनारे चल रहा होता है, तब ही उसके नजर आइसक्रिम वाले पर पढ़ती है, और वो सैंविच सड़क किनारे फैंक, आइसक्रिम खरीतने पहच जाता है.
04:52अब इसे कहते हैं जिन्दगी का सुख.
04:56जैसे ही अंकूर आइसक्रिम लेकर पीछे मुड़ता है, तो एक आदमी को सड़क से वही सैंविच उठाते हुए देखता है.
05:04वो आदमी बहुत कमसूर, गरीब, जैसे बहुत दिनों से खाना ना खाया हो वैसा लग रहा था.
05:11अंकूर उसकी पास जाकर खड़ा हो जाता है, उसे देखकर आदमी सैंविच अंकूर की तरफ कर देता है.
05:18आपको भी खाना है क्या, क्या हम इसे हादा हादा कर ले, मुझे बहुत भूख लगी है.
05:26वो मेरा ही जूठा सैंविच है, तुम दूसरा खरिद कर क्यों नहीं खा लेते, इसे क्यों कहा रहे हो?
05:32अरे भाईया, अगर खरिद दे के पैसे होते, तो चार दिन से भूखा नहीं खूम रहा होता.
05:39है, क्या, तुमने चार दिन से कुछ नहीं खाया? फिर भी इस आदे सैंविच को मेरे साथ बाटने के लिए तैयार हो गए, क्यों?
05:51अरे भाईया, पैसा नहीं है तो क्या हुआ? इंसानियत आज भी उतनी महंगी नहीं हुई, और नहीं उस पर अमीर गरीब का टैग लगा है, जो हम उसे रखना सके, पर अफसोस आजकर लोगों के अंदर पोशन, खून या विटामिन से ज्यादा इंसानियत की कमी होने लग
06:21करता रहा था, इसके बाद से वो अपनी किसी के साथ शेयर नहीं करने और खाने को बरबाद करने वाली आदत को छोड़ देता है
Comments