00:00वकील बहु जनक पेशे से एक बहुत अच्छी वकील थी लेकिन कहते हैं न बहु कितनी भी बड़ी तोप क्यों न हो सास के सामने तो भीगी बिल्ली ही होती है
00:15अरे जनक क्या बात है आज रोटी नहीं मिली अभी तक ये तेरा कोट नहीं है जो आज फैसला ना हुआ तो कल की तारीख मिल जाए रोटी तो रोज वक्त में चाहिए हाँ
00:29मा जी रोटी तो कब की बन गई मैंने आपको कहा तो खाना खाने के लिए आपने शैद सुना नहीं होगा
00:36ओहो जज नहीं हूँ मैं तेरे कोट की सास हूँ सास कोई दलिल फाल्दू की मत देना यहाँ बहुत जानती हूँ मैं इन वकिलों को अपनी बात उपर रखने के लिए जूठ बोलने में जरा भी नहीं सोचते
00:51तभी वहाँ जनक की ससुरा जाते हैं
00:55अरे भागवान क्यों बेचारी के काम को कोस्ती रहती है हमेशा मैं भी तो था वहाँ जब यह आई थी तुझे रोटी खाने को बुलाने के लिए
01:04सास को तो अब गुसा आजाता है कि कैसे किसी ने बहु की साइड ले ली
01:09अरे वाजी वाँ वो तो मैं जानती थी कि कोई ना कोई गवाँ तो ये पेश कर ही देगी
01:16पर मैं तो अब सीधा खाना खाकर सोने जाऊंगी
01:19मुझे आदत नहीं किसी से बहसा बहसी करने की
01:22पता नहीं कैसे ये वकिल इतना दिमाग लगा कर खुद तो जुठ बोलते ही है
01:28साथ में जुठे गवाबी ले आते हैं
01:32जनक को सास की ताने सुनने की अब आदत सी पढ़ जाती
01:35एक दिन जनक वकिल की ड्रेस पर काला कोट पहन कर कोट के लिए निकल ही रही होती है की
01:41अरे कहा चली काला कोवा बन कर
01:44टोक दियाना अब कोट तो वकिल वाले ड्रेस पहन कर ही जाओंगी न
01:50वा भी वा दामिनी तो मैंने भी देखी है
01:54सन्नी पाजी ने ऐसा ही कोट पहना था
01:57और कहा था कि तारीक पर तारीक तारीक पर तारीक
02:01मतलब की कोई बात करनी है तो बोलिये बना वक्त नहीं है मेरे पास खराब करने के लिए
02:08अरे पता नहीं तुझ में क्या देखा मेरे बेटे ने
02:12सारा दिन वकिलो वाली बहस करती है भूली भाली सास के साथ
02:17अच्छा सुन जो इतनी बहस मेरे आगे करती है न
02:20जर आपने बास से कर ले जो एक साल भी ना हुए तेरी शादी को और काले कपड़े पहना दिये
02:27अंदर जा और लाल कोट पहन करा पता तो चले के नई नवेली शादी हुई है
02:33अरे माजी कोट में मेरा बॉस क्या करेगा ये तो पूरे देश की ड्रेस है वकिलों के लिए
02:40लेकिन सास तो ठेरी सास
02:42अच्छा तो कोई जरुवत नहीं है दो चार साल कोट जाने की
02:47शादी थोड़ी पुरानी हो जाए तब इजाज़त दे दूँगी मैं तुझे काले कपड़े पहनने की
02:52अब क्या था मन मार कर जनक को लाल रंग का कोट पहन कर कोट जाना पड़ता है
02:59उसकी जाने की बाद
03:00अब सास आए दिन या तो जनक को उसकी काम का ताना देती या फिर उसका काम छुडवा देने की धमकी
03:16तंग आकर एक दिन जनक पती से कहती है मैं सोचरीयों की कोट जाना बंदी कर दूँ
03:22अरे क्यों यार इतना अच्छा करियर है क्यों चोड़ने की सोच रही हो
03:26अरे लाल रंग का कोट पहन कर जाना पड़ता है
03:29हर बात पर सास्ताना देती है
03:31कि वकिल तेज होते हैं
03:33सवाल जवाब करते हैं
03:34जूठी दलीले देते हैं
03:36अरे तो ठीक है ना
03:37वो जो कहती है अपनी समझ से कहती है
03:40लेकिन तुमको तो पता है ना
03:42कि सचाई क्या है जनक को पती की बात से होसला मिलता है कि तभी घर पर कुछ लोग आ जाते हैं अरे आई ये पंची साहब कैसे आना हुआ अरे भाई साहब सुना है कि आपकी बहु वकील है तभी वहां सास आ जाती है हाँ है तो लेकिन क्या हुआ फिर कहीं बहस कर आई क्या अ
04:12हम यहाँ बहुरानी की कोई शिकायत नहीं बलकि अपनी परेशानी लेकर आएं हैं ससुर जी खुश हो जाते हैं हाँ मैं भी बहु को बुलाता हूँ जनक वहाँ आती है सब को नमस्ति करके बैठ जाती है बहुरानी हमारे गाउं में बड़ी मुसीबत आ गई है अब तो पू
04:42यह आप चुप हो जाओ यहाँ पड़े लिखे लोगों की बात हो रही है आप जाओ जरा रसोई से सब के लिए चाय लेकर आओ मैं काफी लोंगी हाँ हाँ वकिल साहिबा के लिए काफी सास सर पैर सब पटकर वहाँ से निकल जाती है बहु गाउं में पानी नहीं आ रहा है
05:12वो राजिया हम लोगों से पानी के पैसे मांग रहा है अब आदे गाउं में पानी की सप्लाई खत्म हो गए यह बोरानी अच्छा पंच साहब बात गाउं की है तो मैं जरूर कीस लड़ूंगी यहाँ एक बार फिर सास की एंट्री हो जाती है आरे वा जीवा ये काम करवा
05:42अरे भाबी जी आपकी आवाज तो पुरे गाउं को सुनाई पड़ती है जब आप बहुरानी को सुनर बचन सुना रही होती है अरे वकील बहू मिली है फकर करो फकर
05:54हाँ जी हाँ सारी फकर तो हम लोग ही करें
05:58अब जो केस लड़ेगी और पानी गाउं में आ जाता है
06:03तो पंच सहाब लिख कर देना होगा
06:05कि हेंड पाइप में सबस्वे पहले मेरी बालटी और घड़ा परेगा
06:10अरे फिर तो हम बहु रानी के नाम पर घर पर ही सप्लाई दे देंगे
06:15लेकिन ये इतना आसान नहीं है
06:17बहु गाउं के पास अभी वकिल करने की भी पैसे नहीं है तो
06:22हरे पंच सहाब ये मेरे गाउं का मामला है
06:25मैं आप से एक भी पैसा नहीं लूँगी
06:28सास को बहु की बात पर गुसा आजाता है
06:31लेकिन सबकी जानी के बाद जहनक मन लगा कर
06:34गाउं की परिशानियों को दोर करने में लग जाती है
06:37और वो दिन भी आता है कि जहनक केस जीच जाती है
06:41अरे आज तो प्लंबर आकर घर तक पाइप लगा गया है
06:45खुश हो जाओ
06:47मेरे कारण तुम लोगों को घर के अंदर ही पानी मिल जाएगा
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