00:00बहु की बिगडी मा
00:02अब मेरी बेटी का घर है, मतलब बेरा ही घर है ना, क्या आपी सम्धन जी?
00:10हाँ हाँ, वो बात भी सही है आपकी, ये तो आपी का घर है, जब चाहे मो उठा के आ जाया कीजे, कोई दिक्कत नहीं
00:18ये कहानी है त्रिवेनी की, जिसकी बेटी मालविका की शादी अरजुन से होती है
00:24अरजुन एक बहुती बड़ा बिजनसमेन होता है, और अरजुन और मालविका को कॉलिच से ही एक दूसरी सिप्रेम होता है
00:31अपनी बेटी महलों में ब्याही गई है
00:34इस बात का पूरा फाइदा उठाती है त्रिवेनी
00:37क्योंकि त्रिवेनी को पहले से ही चोरी करने के आदत होती है
00:41और अब वो अपनी बेटी मालवी का किस सुराल में बार बार जाकर चोरिया करना शुरू कर देती है
00:48तो चलिए देखते हैं कि कैसी है इस बिगड़ी हुई मा की कहानी
00:53ममी सासुमा ये लीजिए नाश्टा
01:00मा ये बिस्कित्स आप मत काईए
01:03ये शुगर फिर बिस्कित्स सासुमा के लिए हैं
01:07इन्होंने खास विदेश दे मंगवाएं है
01:09अरे रहने दो मालवी का बहु
01:13पूना म्रायचन का दिल बहुत बड़ा है
01:16मैं गरीबों को इतना अदान करती हूँ
01:18तो क्या अपनी सम्धन को एक बिस्कित नहीं दे सकती
01:21चास केडिंग सम्धन जी
01:26और हा मालवी का बहु
01:30आइंदा से तुम ये नौकरों वाले काम बलकुल मत करना
01:34इन सब के हाथों में क्या मेहनी रची है
01:36मालकिन वो पिछली बार सोने और चांदी के बरतन हम से तूट गए थे
01:43इसलिए हमें बड़े साब ने रसोय का काम करने से मना किया है
01:46अरे चिल चिल हम राइचंस है और इस महल में ऐसे हजारों सोने और चांदी की चीज़े है
01:53तोटती है तो तुटने दो हमारे पास किसी पी चीज़ की कमी नहीं है
01:58ये सब सुनकर त्रिवेणी के मन में लालज का प्रकुप जाग उठता है
02:03और वो मन ही मन पूरे महल को निहारती हुए कहती है
02:06अब जब ये पूनम राइचंद अपनी जबान कह रही है
02:12फिर तो इस घर पे पी हाथ साफ करना ही पड़ेगा
02:15अपनी बेटी का ससुराल है तो क्या हो
02:17इसमें कोई लाज शरम नहीं
02:20पूरता मैं तो भाग्यवान हूँ
02:22कि मेरी बेटी एक महल की बहु बनी है
02:25त्रिवेनी अब राइचंद मैंशन में रोजाना आना शुरू करती है
02:29और वो चुपके से पूनम की कबने में खुस कर
02:32उसकी अलमारे से उसकी साड़ियां और गहने चुराती है
02:35और अपने बैग में लेकर पीछी के गेट से रफू चकर हो जाती है
02:38पूनम जब हॉल में आती है तब ही
02:41अरे मालविका बहु
02:42समधन जी कहा चली गई
02:44अभी तो यहीं थी
02:45सासुमा वो मम्मी को न आज मंदिर जाना था
02:49आज कोई बड़ी पूजा है वहाँ
02:51इसलिए वो चली गई
02:52पूनम जब अपनी साडिया और गहने गायब दिखती है तो
02:56ओफो लगता है फिर से मैं अपनी साडिया और गहने कहीं रख कर भूल गई
03:02लगता है लॉंडरी में गई है साडिया
03:05और गहनों को पॉलिशिंग के लिए दिया होगा
03:08पूनम को भूलने और लापरवाही की आदत थी
03:12और कोई भी चीज यहां से वहां हो जाए
03:14तो वो उसका कुसूर अपनी लापरवाही पर थोप दी
03:17जो की सच नहीं था
03:20ये बस पूनम के मन का फ्रहम था
03:22ऐसी ही त्रिवेनी कभी रसोई में से चांदी और पीतल के बर्तन
03:26कभी महल के मंदिर में से महंगी मिठाईया
03:28कभी कोई फोन, कभी कोई घड़ी तो कभी तीजोरी से पैसे चुराती रगती
03:33और महल में कानों कान किसी को भनक तक नहीं लगती
03:37एक बार
03:38अरे ये क्या?
03:41बालविका?
03:42हमारी तीजोरी खाली और खुली क्यों है?
03:45इसका मतलब घर में चोरी हुई है?
03:47तुम रहती कहा हो?
03:49तुमारा हमारे कमरे उपर ध्यान नहीं रहता है क्या?
03:52ये क्या बीतु की बात कर रहे हैं वाँ परजुन?
03:54मैं इस घर की बहु हूँ और मेरी कंदों पर दुनिया वर की जिम्मेदारिया रहती हैं
03:59अब क्या मैं कुर्सी लगा कर कमरे में बैट कर चौकिदारी करती रहूँ?
04:03वही रह गया है क्या?
04:04पूरे महल के हाउसकेपिंग स्टाफ और सिक्यूरिटी को इकतरत किया जाता है
04:09और सबकी तलाशी ली जाती है
04:11पूनम को अब समझ में आ जाता है कि पिछले कुछ दिनों से
04:14सिर्फ उसकी ही नहीं बलकि महल की काफी चीज़े भी गाब हो रही थी
04:18पूनम का पती इंद्रिश कहता है
04:20अरे पूनम तुम खामका अपने आप पर भुलकड होने का लापरवाही होने का शक कर रही थी
04:26जबकि चोरिया सिर्फ हमारी ही नहीं पूरे महल की चीज़ों की चोरी हो रही थी
04:32और मालवी का बहू और अर्जुन की भी कई सारी चीज़े गायब हुई है
04:35महल में सिक्यूरिटी इंचार्ज बोलता है
04:39बड़े साब हमने ये बात आपको बताने की कोशिश की
04:42लेकिन पिछले कुछ दिनों से आप शहर के बार थे
04:45और मालकीन जी भी दिन बर बाहर रहती थी
04:47दो बताई नहीं पाए
04:49महल में छोटी सी छोटी चीज़े भी चोरी हो रही है
04:52ये बात तो बहुत गंबीर हो गई है
04:55और तकड़ी सिक्यूरिटी तैनात कर लो
04:57लेकिन अब इस घर में कोई चोरी नहीं होनी चाहिए
05:00क्या हुआ दमाजी और आप सब इतने चिंतित और परिशान से क्यों नजर आ रहे हो
05:09कोई समस्यान पड़ी है क्या हाई हाई
05:12अर्जुन त्रिवेनी को आए दिन होने वाली चोरियों के बारे में बताता है
05:17और त्रिवेनी थोड़ी सी घवरा भी जाती है
05:19अरे बाप रे बाप ये तो नहीं बड़ी बात
05:23आमसी बात है हमारे गली महलों में न इतनी सारी चोरिया होती है
05:29तो फिर ये तो एक राज महल थेरा चिंता मत कीजिए आप सब
05:33काड़ी सिक्यूरिटी कर दीजिए
05:35मतलब क्या
05:36चोर और चकन न हो जाएगा और कम चोरी करेगा
05:40क्या मतलब है आपका सम्दन जी
05:43हाई हाई
05:46अरे गदेडी पे उकुफत्रिवेनी ये क्या बोल रही हूँ
05:49आप येल मुझे मार जैसे समस्या खड़ी मत करत्रिवेनी
05:54सम्दन जी
05:56किस सोच में डूब गई आप
05:58कच भी तो नहीं
06:01सम्दन जी
06:02मैं तो बस ये कह रहे हूँ कि
06:05आप अपना सारा सामान सहच के
06:08चुपा के रखे
06:09इसमें भलाई होगी आपकी
06:11पूनम को तरिवेनी के इस व्यवार पर थुड़ा सश्या का जाता है
06:15तरिवेनी अपसी राइचिन मैंशन में आना जाना कम कर देती है
06:19अपने घर में
06:20बस आप अपना अगले कुछ दिनों तक कस्टाउक तो मैं भर लाई हूँ
06:27अब वहां राइचिन मैंशन में मामला काफी गरम है
06:30जब तक वो ठंडा नहीं हो जाता
06:32मैं वहां तीज तिवारों में ही आया जाया करूंगी
06:35क्योंकि अगर मैं वहां गई
06:38तो चाहे में एक चमची क्यों ना लू
06:41उसे भी चोरी करने से अपने आपको रोक नहीं पाऊंगी
06:44क्या करू आदत से मजबूर जो हूँ
06:47और बेखुफ राइचिन्स
06:50उन्हें तो पता भी नहीं कि आज दिन का साप रोज
06:53उनकी घर में आकर चोरी करके जाता है
06:56वे चाहरे
06:57जितने माला माल हुए
06:59उतने ही कंगाल भी हो गया
07:01महल में एक नौकर
07:03पूनम के पास जाकर उससे कहता है
07:05मालकिन मुझे ना आपको एक बात बतानी है
07:08वो दरसल छोटी मालकिन की मम्मी
07:11यानि की त्रिविनी जी को
07:12मैंने अपनी आँखों से
07:13चोरी करते हुए देखा था
07:15क्या? तुम घंचकर हो क्या?
07:19तुम्हें ये बात मुझे पहली बतानी चाहिए थी ना?
07:22मुझे वैसे भी उस
07:24सो कॉल्ड सम्दन जी त्रिविनी पर
07:26शक तो आई रहा था
07:27लेकिन कनफार्म नहीं कर पा रही थी मैं
07:30मैं आपको ये बात पहले
07:32इसलिए नहीं बता रहा था
07:33क्योंकि मेरे पास कोई सबूत नहीं था
07:35और आप मेरी बात पर विश्वास भी नहीं करते
07:37और तो और त्रिविनी जी इतनी चालाक है
07:39कि उन्होंने महल की उनी जगव पर चूरी किये
07:42जहां सीसी टीवी कैमेरा नहीं है
07:44हम्
07:45अब देखना
07:47मैं क्या चक्रव यू रचाती हूँ
07:50अब मैं हमारा पुष्टेनी हीरे का हार
07:52सरे आम हाल में रखतूंगी
07:54और जैसी ही वो त्रिवेनी उस हार को चुराएगी
07:57तब मैं उसे रंगे हाथ पकड़ लूगी
08:00पूनम की इन सब बातों को मालवी का कामरे के बाहर ही सुन लेती है
08:04और वो अत्यन्त हैरान और स्थब्द हो जाती है
08:07मालवी का फॉरण अपनी मा त्रिवेनी को फोन लगाती है
08:10ममी आपसे यह उमिर नहीं थी
08:13आपने अपनी ही बेटी के ससुराल में इतनी सारी चोरियां की
08:17very bad ममी
08:18सासु मा को आपकी इनकाली करतों के बारे में सब पता चल चुका है
08:22मालवी का पेटा यह तो क्या करी है
08:26मैंने कोई चोरिय चकारी नहीं की और
08:29मुझे आपसे कोई बात नहीं करती बाई
08:32मालवी का इतना कहकर फोन कॉल कट करतीती है
08:35त्रिवेनी अब पूरी तरह डर चुकी थी
08:38वही राईचन मैंशन में पुनम हॉल में
08:40खुले आम पुष्टे नहीं हीरे का हार रख देती है
08:43और त्रिवेनी को न्योता देने के लिए फोन लगाती है
08:46त्रिवेनी पुनम का कॉल देखकर कापने लगती है
08:49पुपुनम राईचन का कॉल
08:52मेरे तो आज शाम अधा
08:54अरे आज सुर्योदे किसी और दिशा से हुआ है क्या
09:00त्रिवेनी मेरा फोन नहीं उठा रही
09:02खैर वो वैसी पिया जाने ही वाली थी दो बज़े तक
09:06अपने आप आएगी और सारी चोरी सीसी टीवी में रेकॉर्ड हो जाएगी
09:11पूनम अपने कमरे में आराम करने चली जाती है
09:15और सभी नौकर भी भूजन करने जाते है
09:17तब भी वहाँ पर बालकनी से एक चूर आता है
09:20और वो पुश्टेनी हीरे का हार चुरा कर लिजाता है
09:23और बाद में जब पूनम ये सीसी टीवी में देखती है तब
09:26ये क्या ये तो एक आदमी चोर है अरे नहीं ये क्या करती है मैंने
09:32तबी पुनम का फोन बचता है और उसे एक वीडियो मेसेज आता है जिसमें त्रिवेनी का वीडियो होता है
09:39क्यों सम्धन जी आपको क्या लगा आप मुझे पकड़ लोगी लेकिन मैं तो चली साथ समंदर पार अब आप मुझे कभी पकड़ नहीं पाओगी मेरी मालविका का खायल रखना और अपने सावान का भी
09:55त्रिवेनी तुम्हारी इतनी हिम्मद
10:00पूनम गुस्से में फोन पटक देती है और वहां त्रिवेनी एरोपलेन में उड़कर सारा चुराया हुआ सामान लेकर रफ चकर हो जाती है
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