00:30So, this is the case of the 14th August of 1947.
00:4014th August of 1947, you will see that in November of 1948,
00:51there was no official official government.
00:55So that's about 15.5 years ago, there was no movement not there.
01:00Yes.
01:01There was a a sort that was a, which was worth that, which was the most Library of the States,
01:07that was the second state of Islam.
01:14That was the most Library of the States.
01:16This is where it would be written as a representative for Angular of Islam.
01:24और पाकिस्तान में जो कौमी तराना भी तक नहीं था 15 महीं था उसकी कमी को पूरा किया जाता था
01:31तो आईए सबसे पहले तो हम जगरनात अजाद पे लिखे गए इस कौमी तराने के नजर डालते हैं
01:39यानि के हम इसको सुनते हैं क्योंकि रेडियो पाकिस्तान के नशर होता था और उसको तराने की एहमेत हासिल हो गई थी उस वक्त
01:46लेकिन इसकी कोई ओफिशल वीडियो नहीं थी क्योंकि इसको कोई टीवी चैनल नहीं था
01:51तो जो वीडियो आप देखेंगे वो हमारे बैम टीवी में बनाई है
01:55आप लोगों को वीजूली इंगेज करने के लिए
02:16ऐसर जमीने पाफ ऐसर जमीने पाफ
02:25ऐसर जमीने पाफ
02:55जर्रे तेरे हैं आश्तारों से ताब नागाई
03:25रोशन है कहकशों से कहीं आज तेरी खाफ
03:31जर्रे तेरे हैं आश्तारों से ताब नागाई
03:41रोशन है कहकशों से कहीं आज तेरी खाफ
03:47तुन्दी ये हासदां पे है गालब तेरा सिवाख
03:53गामन वसिल गया है जो था मुद्दों से चाफ
03:59एसर जमीने पाक
04:09जनाब उसके बाद एक कहानी आगे बढ़ती है
04:26दिसम्बर 1948 को सरदार अब्दुर्ब निश्टर ने एक अनॉस्मेंट की ये एनॉस्मेंट की जी जो शक्स भी कौमी तराने की धुन या इसके अलफास लिखे गा इससे पाँच हजार पाकिस्तानी रुपे दिये जाएंगे
04:45ये इसकी बहुत बड़ी अमाउंट थी जिसम्बर 1948 को सरदार अब्दुर्ब निश्टर ने अनॉस्ट की थी और इसके बाद कई कंपोजर कई शाय कोही तराना तियार करने में मजबूल हो गए थे
05:01After independence, Pakistan lacked a national anthem. A national anthem committee formed in December 1948 under Sardar Abdul Rab Nishter offered 5,000 rupees prizes for music and lyrics. By early 1949, after reviewing hundreds of entries, no tune was approved.
05:24इसके बाद April 1949 तक कई हजार entries आएं. कौमी तराने के हवाले से, कौमी तराने के या तो शायरी थी या composition थी, लेकिन कोई भी composition final नहीं हो री थी.
05:40तो 1949 को April के महिने में, जब शाह एरान पाकिस्तान तश्रीफ लाए, तो उस वक्त एनरजनसी में, महमद अली चागला ने एक tune तर्तीब दी, जिसको तराने की एहमियत दी गई.
05:57और इसमें सिर्फ और सिर्फ music था, non lyrics, यानि के lyrics नहीं थे, सिर्फ एक music था, और ये वही music है, जो आज का हमारा कौमी तराना है.
06:08तो महमद अली चागला ने एक एमरजनसी में एक धुम्तियार की, जिसको एप्रूफ किया गया, और शाह एरान की आमद पे ये सबसे पहले चलाया गया, और इसको लियाकत अली खान सहब ने भी endorse किया.
06:23और ले तक्रीबल सारे पीन साल तक ये तूम ऐसी ही चलती रही विदाओ लिरेक्स.
06:53And was adopted on August 10th, 1950.
07:23And was adopted on August 10th, 1950.
07:53August 1952 पे फिर उसके बार चुम्तिय पाकिस्तान ने एक बार फिर अनॉस्मेंट की,
08:16के जी, लोग जो शायर हजरात हैं, वो इस ट्यून पर जो अफिशल हमारी कौमी तराने की ट्यून है,
08:24इसको सामने रखते हुए शायरी लिख है, कौमी तराने की शायरी.
08:28और जनाब तक्रीबंग साथ सो से जायर शायरियां, कौेक्री, गजलियाद, कौेंट, जो कौमी तराने के लिए लिखी गई उनको शॉटलिस किया गया,
08:39जिसमें से हफीज जानंधरी की जो शायरी थी, जोनोंने पार्शी तरज में इस शायरी को लिखाता, पर्शियन वे में, उसको फाइनलाइज किया गया,
08:51और तकरीबन दो साल तक उनकी शायरी में रदो बदल किया गया, कि इस धुन पर उनकी शायरी को जोड़ा जा सके.
09:211954, the anthem, a symbol of unity and pride, crowned a seven-year journey to give Pakistan its own voice and identity.
09:51किसी को नहीं पता थी, उसकी कुछ क्लिप्स आप लोगे साथ में शेयर कर रहा हूँ कि आरिफा नजमा ने क्या कहा कि जी अगले दो साल तक इसकी recording की तियारियां हुई, वो किस तरहां गए कौमी तरहने की?
10:04कौमी तरहने का जहां तक तालुक है तो ये, असे दराजी से तकरीबन इसकी धुन छागला साभ ने बनाई थी, इप्टेडा में, और ये सालों धुन बच्ती रही, उसके बाद जब ख्याल आया कि इसमें बोल भी होने चाहिए, तो लहाजा ये हुआ कि इसके बोल लिखन
10:34मतलब बोल लिखना इंतहाई मुश्किल चीज़ थी, इस तिल से फिर हफी जालंडिरी साफ कामियाब हुए उसमें, और उनों ने फिर इसमें बड़ी महिनत से बोल लिखे, जो मतलब पाबिल नश्र करार दिये गए, फिर ये हुआ कि इस दुन में अरज़स्ट किया जाए
11:04कि हम रिकॉर्ट करें उस दमाने में राषिद लटीफ साफ थे इन्होंने कहा कि नहीं यहां पर होगा रिकॉर्ट उस दमाने में एहमद उद्धी साफ, एद्मी जॉन, शमीन बानू, नसीमा शाहिन, कौकब जहां, तनमीर जहां, उस्ताद बंदु खान साहब भी थे और म
11:34सब चार पांच, बजसे को चार फाठ बजसे तक है काफी मेहनत एक करूं को एक करने में बड़ी मेहनत कहनी पडिता इए उसस्ञादा इसमें की साइद मेहिधी जई
12:04and everyone listened to it...
12:08they gave us a nice welcome,
12:12it was a really nice welcome.
12:16This is a good thing because it was a good thing.
12:20Whenever we listen to a political climate,
12:24we will stay alive.
12:28When we are alive, we will listen to that.
12:32so it's really good to be here.
12:34Now, the word is not good for Pakistan.
12:36I hope that Allah is good for Pakistan.
12:40And then,
12:42then,
12:44in the past,
12:46when the two years ago,
12:48after that,
12:50after that,
12:52in the past,
12:54the past,
12:56the past,
12:58the past,
13:00It was finally approved and it was finally that this is the official government of Pakistan.
13:10This is in Pakistan, which I am going to listen to you.
13:14But it was not a visual.
13:17It was a visual that we have created for you.
13:30I'll see you next time.
14:00P.T.V. IR.
14:29P.T.V.
14:59P.T.V.
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18:53P.T.V.
18:55Ladies and gentlemen, two more times. Pakistan, Pakistan, are you ready? Are you ready?
19:14Are you ready? Here we go. Bismillahirrahmanirrahim. One.
19:25Two. Three.
19:55Watch me.
20:00Two. Three.
20:02Mystery.
20:06O Virus Chantanet,
20:09Jain-la-sahim-ha-gah,
20:12Tshhahaz,
20:14Tshhahaz,
20:16Kshhahaz,
20:18Kshhahaz,
20:21Kshhahaz.
20:23Edilei Kshhahaz,
20:25Kshhahaz,
20:29Tshhahaz,
20:30Kshhahaz,
20:32Kshhahaz,
20:33Kshhahaz,
20:34Kshhahaz,
20:35Do you think, happy dinner?
21:05In 1954, in 2015, it was about 65 years after, in 2017, Kork Studio had decided that Kork
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