Skip to playerSkip to main content
क्या आप सोच सकते हैं एक देश जहाँ नमाज़ न पढ़ना गुनाह नहीं, जुर्म है?...जहाँ मस्जिद में हाज़िरी रूहानी ज़रूरत नहीं, कानूनी मजबूरी है? और अगर आप सिर्फ एक बार भी चूक गए… तो सीधे जेल या जुर्माना...ये कोई तालिबानी इलाका नहीं..सउदी अरब नहीं...ईरान नहीं..पाकिस्तान नहीं...ये है मल्टी-कल्चरल मुल्क मलेशिया...यहां एक राज्य की सरकार ने कानून बनाया है कि अगर कोई मुसलमान जुमे की नमाज छोड़ता है तो उसे गंभीर सजा भुगतनी होगी...क्या है कानून, किसने लागू किया, क्यों लागू किया और इसका क्या है असर...क्या वाकई ये एक आस्था का मामला है या फिर कुच और... इन सब पर बात करेंगे विस्तार से...


#MalaysiaNews #FridayPrayer #ShariaLaw #jumanamaz #JummahPrayer #ReligiousPolitics #Terengganu #MuslimWorld

#IslamicLaw #HumanRights #PoliticalIslam #MinorityRights

~HT.178~ED.276~GR.122~CA.145~

Category

🗞
News
Transcript
00:00क्या आप सोच सकते हैं एक देश जहां नमाज ना पढ़ना गुना नहीं जुर्ब है।
00:04जहां मस्जिद में हाजरी रूहानी जरूरत नहीं गौनूनी मजबूरी है।
00:08और अगर आप सिर्फ एक बार भी चूप गए तो सीधे जेल या जुर्माना।
00:12ये कोई तालिबानी लाखा नहीं, साओधी अरब नहीं, एरान नहीं, पाकिस्तान नहीं।
00:16ये है मल्टी कल्चुरल मुल्क मलेशिया।
00:19यहाँ एक राज्ज की सरकार ने कानून बनाया है कि अगर कोई मुसल्मान जुम्हे की नमास छोड़ता है तो उसे गंभीर सजा भूगतनी होगी।
00:26क्या है कानून किसने लागू किया, क्यूं लागू किया और इसका क्या है असर, क्या वाख़ी में ये एक आस्था का मामला है या फिर कुछ और, इन सब पर बात करेंगे विस्तार से।
00:36सबसे पहले मलेशिया में तरिंग गानू राजजनी 2001 में शर्या क्रिमिनल ओफेंस तकजीर तरिंग गानू इनेक्टमेंट को लागू किया था।
00:52मलेशिया का नया कानून कहता है कि अगर कोई मुसल्मान बिना किसी जायज वज़े के जुम्य यानि की शुकरवार की नमाज छोड़ता है तो उसे 3000 रिंगिट यानि लगभग 6780 रुपय तक का जुर्माना दो साल तक की जेल या दोनों सजाएं दी जा सकती है।
01:08या कानून करंगानू राज सरकार दोरा पारित किया गया है जहां पैन मलेशियन इसलामिक पार्टी सत्ता में है।
01:38पैन मलेशिया के मंतरी मुहमद खलील अब्दुलहादी इस कानून को लागू करने के पीछे वज़े कुछ भी बताएं लेकिन मकसद कुछ और है।
02:08कि जुम्ह की नमाज छोडने वालों को सजा देना इसलाम की हिवाज़त का काम है जबकि ये एक राजनितिक मजबूती का तरिखा भी है।
02:16तरंगानू राज़ में P.A.S. पार्टी ने 2022 में सभी 32 सीटें जीची थी और अब जब 2027 में अगला चुनाओ नस्दीक है तो इसलामी कानूनों को कड़ा कर अपने वोट बैंक को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
02:30धार्मिक कठोड़ता से सिर्फ अपनी च्छवी मजबूत नहीं होती बलकि विरोधियों की च्छवी को भी कम धार्मिक या धर्म विरोधी बताने का मौका मिलता है।
03:00मलेशिया के प्रधान मंतरी अन्वर इबराहीम एक तरफ दुनिया को मौडरेट इसलाम की च्छवी दिखाना चाहते हैं लेकिन देश के अंदर कटर धार्मिक गुटों को भी संतुष्ट करना चाहते हैं।
03:31खबर आगे बढ़ाने से पहले बात कर लेती हैं के मलेशिया का कानून कैसा है।
03:35मलेशिया की जदतर अदालते सिविल कानून का पालन करती हैं जैसे हाई कोर्ट, कोर्ट आफ अपील, फेडरल कोर्ट।
03:42आपराधिक कानून वेपार जमीन शमिक अधिकार जैसे मामलों में यही कानून लागू होता है।
03:47शरिया कानून मलेशिया में सिर्फ मुसल्मानों पर लागू होता है और यह सिर्फ निजी, पारिवारिक या धार्मिक मामलों तक सीमित है।
03:54हर राज्य की अपनी शरिया अदालते होती हैं और इनका संचालन राज्य सरकारे करती हैं।
04:00मलेशिया में फैडरल सम्विधान शरीया को एक राज विशय के रूप में मानता है
04:04इसका मतलब है कि हर राज को खुद शरीया कानून बनाने और लागू करने का हक है
04:10शरीया अदालतों की अधिक्तम सजा होती है
04:13तीन साल की जेल, पांच हजार, मलेशियन रिंगिट का जुर्माना और छे कोडों या बेत की मार
04:19अलकि मलेशिया के सरावाक राज में जुम्य की नमाज ना पढ़ने पर इस तरह का कोई खानून लागू नहीं होता है
04:26अब सवाल ये है कि इस मामले में कैसे पता चलता है कि व्यक्ति नमाज पढ़ने गया है या नहीं, किसी शक्स ने जुम्य की नमाज पढ़ी या नहीं
04:34ये तैह करने के लिए कोई माकूल तकनीकी तरीका नहीं है कि आमतोर पर इस्थानी अधिकारियों की निगरानी, गवाहों, समुदाय की रिपोर्टिंग और व्यक्ति की सफाई के अधार पर तैह किया जाता है
04:46मस्जिद में मौजूदगी की निगरानी
04:48देरंग गानू जैसे रज्जों में जुम्हे की नमास के दौरान कुछ मस्जिदों में शरिया इनफोर्स्मेंट आफिसर्स या इस्थानी धार्मिक विभाग के लोग मौजूद रहते हैं
04:57वो मस्जिद में मौजूद लोगों की गिलती या रेजिस्ट्रेशन करते हैं जैसे सीसी टीवी रेजिस्टर या मौखिक रिपोर्ट के अधार पर
05:03कई बार स्थानी समुदाय के मुखिया या इमाम भी रिपोर्ट करते हैं कि कोई व्यक्ती लगातार नजर नहीं आया
05:09ये निगरानी आम तोर पर शहरी लाकों की बड़ी मस्जिदों तक सीमित होती हैं गावों या छोटे लाकों में विवस्था इतनी सख्त नहीं है
05:17अगर किसी व्यक्ती के बारे में शिकायत मिलती है कि वो बार-बार नमाज में नहीं आ रहा है तो धार्मिक अधिकारी उसकी जांच शुरू कर सकते हैं
05:27शिकायत कोई पडोसी, रिष्टिदार या समुदाय का सदस भी कर सकता है
05:31मुश्टाच और सबूर
05:34अधिकारी व्यक्ति से पूछते हैं कि वो जुमे की नमाज कहां और कब अधा करता है।
05:38अगर व्यक्ति कहता है कि उसने नमाज किसी दूसरी मस्जद में पढ़ी तो उसे प्रमार्ट करने को कहा जाता है जैसे इमाम से बयान या गवार।
05:45ये प्रक्रिया पूरी तरह से इसलामी शरिया कोर्ट और धार्मे कादिकारियों के विवेक पर अधारित होती है और इसमें गवा और समुदाय का बयान
05:57कुछ मामलों में अगर कोई लगातार गैर हाजर रहता है तो मस्जद के इमाम या नमाजियों के वयान भी कोर्ट में पेश किये जा सकते हैं
06:04इस नए कानून की कई वैभारिक चुनोतियां भी हैं जैसे हर मस्जद में सभी नमाजियों की गिंती करना वैभारिक नहीं है
06:10व्यक्ति कहीं और नमाज पढ़कर आ सकता है, इसे साबित करना मुश्किल होता है।
06:15लोगों का मानना है कि ये व्यक्ति की धार्मिक स्वतंतरता और निजिता में दखल है।
06:19तभी कभी निजी, दुश्मनिया, राजनिती के चलते भी जूटे आरोप लगाये जा सकते हैं।
06:24चलिए अब बात करते हैं मलेशिया के कानून की।
06:27मलेशिया का कानून एक dual legal system है, मुसल्मानों और गयर मुसल्मानों के लिए अलग अलग नियम और अदालते हैं।
06:33मुसल्मानों के लिए यहां शरीया कानून लागूा है।
06:36तो अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि नमाज पढ़ी या नहीं।
06:39सवाल ये है कि क्या आपकी वादत अब सरकार की निगरानी में है?
06:42क्या धर्म अब निजी नहीं रह गया है?
06:45क्या ये राजनितिक टूल किट बन गया है?
06:47जिसे जब चाहे जैसे चाहे सत्ता अपने असाब से मोड लेती है.
06:51मलेशिया की एक अहानी सिर्फ उसकी नहीं है.
06:53ये चितावनी है उन सभी लोग तांत्रिक देशों के लिए
06:56जहां धर्म को धीरे-धीरे राजनिती में घुला जा रहा है.
07:00फिलाल के लिए इतना ही देखते रहें वन इंडिया.
Comments

Recommended