00:00Camera is a beautiful Indian port in the morning.
00:03In the morning of the night, bright colors of shipping containers are in the middle of the night.
00:08The orange is in the middle of the night, as well as the sun is in the middle of the night.
00:13A good night of the night is in the night.
00:1750%
00:18It will be more than a day in your America.
00:22These are the way of the night.
00:25Antim and Nirdai.
00:27दुनिया के दूसरे कुने में, वाइट हाउस में, प्रेजिडेंट डॉनल्ड ट्रम्प अपने पिन से एक एक इग्जेक्युटिव ओर्डर साइन करते हैं, एक तेज सिगनेचर के साथ.
00:37पचास परसेंट और तेरिफ लग गया इंडियन इंपोर्ट्स पर, पहले से लगे हुए पेनल्टीज के उपर, टोटल पचास परसेंट हो गया, यूएस द्वारा कभी लगाया गया, सबसे उंचा इंपोर्ट टैक्स.
00:51क्या वजा है?
01:21अपने दोस्ती के नाम पर एकोनॉमिक पंच को जेल पएगी.
01:2650 परसेंट, एक ऐसा नंबर जो फैक्टरी फ्लोर्ट्स, पोर्ट्स और परिवारों तक हिला सकता है, एक नई कहानी शुरू करता हुआ.
01:35यूएस इंडिया पार्टनर्शिप के नाजुक रिष्टन में.
01:51वाशिंग्टन और न्यू दिली के बीच जो टेंशन हैं, वो एक दिन में नहीं बनी.
01:57सालों से दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोगतंत्रा एक नाजुक बैलन्स पे तिक्के हुए थे.
02:04ट्रेड, टेक्नोलजी और शेर्ड डेमोक्रेटिक वैल्यूज. यूनाइटिज स्टेट्स हमेशा से इंडिया का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर रहा है. एक ऐसा बजार जहां इंडियन टेक्स्टाइल्स, फार्मस्यूटिकल्स और इंजिनीरिंग प्रोड़क्स क
02:34चलती रही, जब तक दोनों तरफ कुछ अंसेड रूल्स फालो होते रहे. इंडिया अपनी इंडिपेंडेंट फॉरेंड पॉलिसी चला सकता था, बस कंडिशन ये थी कि वो ओपनली यूएस के कोर इंट्रेस्ट को चैलेंज ना करे. और कई दासाकों तक एनरजी का फ्लो
03:04तोट दिया. जैसे ही यरप ने अपनी एनरजी सिक्योरिटी के लिए दाउद लगाई, ट्रडिशनल सप्लायर्ज ने अपना ओयल वेस्ट को डाइवर्ट कर दिया. इंडिया, जिसे स्काय रॉकेटिंग फ्यूल प्राइसेज और एक बेचेन डोमेस्टिक मार्किट का समन
03:34लेकिन वाशिंग्टन की नजर में वो रशन टेंकर्स सिर्फ ओयल नहीं ला रहे थे. वो एक मैसेज भी ला रहे थे. एक दोस्त उस वार मशीन को फ्यूल दे रहा था, जिसे अमेरिका रोकना चाहता था. और जब प्राइवेट वार्निंग्स फेल हो गई, तो गाविल ग
04:04के एक्सपोर्ट्स यूएस में चलिसी परसेंट तक गिर सकते हैं, इस नए तैरिफ के चलते हैं. बिलियन्स का ट्रेड, जो कभी दो डिमोक्रिसी के बीच ब्रिज था, अब दिस्ट्रस्ट के उपर लतक रहा है. लेकिन एकोनामिक्स के पीछे छूपा है. एक और गहरा स�
04:34दो लीडर्स हैं इस स्टॉम के सेंटर में. हर एक अपने देश के प्रायोरिटीज और पॉलिटिकल इंस्टिंक्ट्स के हिसाब से डिसिजन ले रहा है. एक तरफ डॉनल्ड ट्रम्प है, पैन हात में एक सीजन्ड डीलमेकर की तरह लेवरेज कैलकुलेट करते हुए. वो �
05:04उनके लिए पचस परसंट तेरिफ सिर्फ एकनॉमिक पेनल्टी नहीं है. ये दुनिया को दिया गाया एक मेसेज है. अमेरिका की पेशन्स की भी लिमिट होती है. ट्रम्प के नारेटिव में इंडिया के साथ पुरानी दोस्ती सेकंड प्रायोरिटी बन जाती है. पहला फ
05:34मोडी के लिए रशन ओयल लेना किसी बिट्रेल का एक्ट नहीं था बलकी जरूरत थी. ट्रडिशनल सप्लाइज यूरोप को डाइवर्ट हो गई थी और उनके डिप्लोमेट्स कह रहे हैं. हमने अपनी एकॉनमी को स्टेबल रखने के लिए एक्शन लिया. इंडियन गवर
06:04प्रोटेक्ट किये जाएंगे लेकिन बिना एसकलेशन के. इन दोनों लीडर्स के बीच हैं दो अलगालग रास्ते. पुराना रास्ता सेफ हैं लेकिन सबमिसिव भी. इंडिया शंतिपुर्ण तरीके से अपने रशन इंपोर्ट्स कम, कैरे और यूएस सैंक्शन्स के साथ
06:34अनप्रेडिक्टिबल होते हैं. नाया रास्ता रिस्क से भारा हुआ है, लेकिन इंडिपेंडन्स का प्रॉमिस करता है. इंडिया अपने रशन ओयल इंपोर्ट्स जरी रखता है और अपने नैशनल इंट्रेस्ट को असर्ट करता है. इस चोईस का एकोनॉमिक नुकसान हो
07:04एलाइज और राइवल्स दुनों को. इंडियन फैक्टरीज के अंदर ये डिसिजन बिलकुल रियल महसूस होता है. वरकर्स को लगता है जैसे ओर्डर्स गैब होने वाले हैं. एक्स्पोर्टर्स को चिनता है कि अमेरिकन शेल्व्स पे जल्दी ही इंडियन कपडे, दवा
07:34क्या इंडिया मॉस्काव और बेजिंग के और करीब चला जाएगा? जैसे जैसे मोडी और ट्रम्प अपने अपने रस्ते चुनते हैं, एक सोच पैसिफिक के पार घूमती रहती है. हर डिसिजन अब ट्रेट से आगे जा चुका है. ये एक नाए मल्टी पोलर वर्ल्ट के �
08:04खतरनक रास्ता. इस क्राइसिस की जर्नी शुरू होती है एक शांत मोमेंट से, जैसे किसी दूर के तूफा की हलकी सी गूंच. ये बिगिनिंग एक सोचा समझा. कदाम जब यूक्रेन में जुंग शुरू हुई, फ्यूल प्राइसिस स्काय रॉकेट हो गए और टैंकर्ज
08:34या स्लो डाउन का रिस्क उताओ, जो मिलियंस की डेली लाइफ को अफेक्ट करेगा. रशन ओयल जो डिसकाउंट पे मिल रहा था, एक लाइफ लाइफ लाइन बन गया. डिप्लोमेट्स याट करते हैं, वार के अरली डेज में इवन वाशिंग्टन ने क्वाइटली इंड
09:04के अंदर इंडियन टैंकर्स के सैटलाइट इमेजिस हेडलाइन्स बनने लगे. वाशिंग्टन के थिंक टैंक्स और सेनेटर्स ने क्वेस्चन्स उताना शुरू किया. क्या इंडिया इंडिरेक्ली पूटिन की वार मशीन को सपोर्ट कर रहा है? इंडियन डिप्लोमेट्
09:34और जब अमेरिकन जॉब्स इंपैक्ट होने लगी. इंडियन इंपोर्ट्स की वाजा से तो ट्रंप ने एक बूल्ड युनिलेटरल मूव लिया. एक एक एक्जेक्यूटिव ओर्डर जो टैरिफ्स को एक बलंट वेपन बना देता है डिप्लोमेसी में. दफॉल जब दोस
10:04लेकिन emotional shock और भी गहरा था. ये वाही अमेरिका था जिसे इंडिया ने quad में welcome किया था. इंडो पैसिफिक में counterweight बनाने के लिए support दिया था और global forums पे democratic ally के रूप में treat किया था. अब वो ही अमेरिका एक economic dagger लेकर आया था. पीत में नहीं, लेकिन सीधा समने.
10:28मोडी government का response measured था. न तो panic नहीं retaliation. साउथ ब्लॉक के अंदर close door meetings में एक ही बात घूम रही थी. ये सिर्फ economic नहीं, strategic भी है.
10:42बैक channel diplomacy activate हुई. वाशिंग्टन और देली के बीच late night calls चलू हो गई. इंडियन negotiators ने stress किया कि Russian oil सिर्फ एक necessity थी. और इंडिया ने रशा को weapons या military tech नहीं दिया.
10:59उन्होंने reminder भी दिया. इंडिया ने कभी भी sanctions को violate नहीं किया. लेकिन Trump administration ने signals दिये कि ये personal भी हो सकता है, especially जब loyalty under pressure हो.
11:13इस moment में एक question बहुत loud हो गया. क्या इंडिया सिर्फ एक partner है, जब convenient हो या क्या उसकी strategic autonomy को respect किया जाएगा?
11:25और दूसरी तरफ, क्या अमेरिका को अपनी leadership assert करने के लिए दोस्तों पे भी pressure दालना पड़ता है?
11:32ये सिर्फ तो capital cities की कहानी नहीं थी. ये नए global order की test case थी. एक world जहाँ oil barrels, tariffs और tweets foreign policy को shape करते हैं. और जहाँ alliances भी permanent नहीं होते. सिर्फ interests हमेशा के लिए होते हैं.
11:52The rebuild. एक नई सोच की जरूरत तारिफ्स के कुछ हफ्तों बाद एक quiet shift होने लगा. Indian diplomats ने European partners के साथ energy cooperation expand करने के लिए meetings fast track की.
12:08Domestic level पर renewable energy projects को और accelerate कर दिया गया. गोल था कि dependency किसी एक source बिना रहे. Washington में भी कुछ lawmakers ने concern raise किया.
12:22क्या हमने एक crucial ally को push कर दिया alternate directions में explore करने के लिए?
12:28Trade experts ने warn किया. ये tariff एक short term win हो सकता है. लेकिन long term fracture भी create कर सकता है. दिल्ली में एक नाया narrative उभरने लगा.
12:41न वो victim बनने वाले थे, न बुली के आगे जूकने वाले. उनका जवाब clear था. Resilience और reform.
12:48Policy makers ने नए FTAs, Free Trade Agreements पे काम स्टार्ट किया. लेटिन अमेरिका और साउथ हीस्ट एजिया के countries के साथ.
12:58MSME sector, micro, small, medium enterprises के लिए financial stimulus launch किया गया. ताकि export losses से buffer मिल सके.
13:08और सबसे बड़ी बात, यूथ को encourage किया गया कि वो नए global supply chains में रोल लेबूँ. जहां इंडिया सिर्फ एक factory नहीं, एक creator बन सके.
13:20अमेरिका के लिए भी ये एक reflection का moment था.
13:24Strategic Communities ने acknowledge किया कि इंडिया एक transactional partner नहीं है. वो एक sovereign power है जो अपने rules खुद बनाता है.
13:33ट्रम्प administration के अंदर भी कुछ voices ने tariffs को re-valuate करने का advice दिया.
13:40लेकिन ट्रम्प का style clear था, hardball diplomacy. उसके लिए strength दिखाना किसी भी alliance से ज़्यादा important था.
13:50और इंडिया के लिए self-respect किसी भी market access से ज़्यादा.
13:54जब हम इस कहानी को wrap करते हैं, एक चीज clear होती है. 21st century की diplomacy सिर्फ handshakes और summit से नहीं चलेगी.
14:05ये दूनिया अब oil के barrels, tariffs के numbers और youth के dreams से लिखी जा रही है.
14:12इंडिया और America दोनों crossroad पर खड़े हैं, जहां decisions सिर्फ leaders नहीं, बल्कि लोग भी ले रहे हैं.
14:20और तुम भी उनमें से हो. सोच समझ के choose करो.
14:24सोच समझ के choose करो. क्या तुम एक ऐसे world में जीना चाते हो जहां pressure tactics diplomacy बन चुकी हो,
14:32या एक ऐसे world में जहां respect और resilience नए rules define करते हो.
Comments