00:00शेर, लकढ़ारा और जबान का घाव
00:02एक दफा का जिक्र है, एक लकढ़ारे की जंगल के बादशा शेर से दोस्ती हो गई
00:06जब भी लकढ़ारा जंगल में लकढ़िया काटने आता, शेर उसके पास आ जाता और दोनों घंटों बैठ कर बाते करते
00:13लकढ़ारा बेखौफ होकर शेर के पास बैठा रहता क्योंकि वो जानता था कि शेर उसका दोस्त है और उसे कभी नुकसान नहीं पहुँचाएगा
00:21एक दिन एक अजनभी आदमी ने जंगल में लकढ़ारे और शेर को एक साथ बैठे देखा
00:26वो हैरान रह गया जब शेर चला गया तो वो शक्स लकढ़ारे के पास आया और कहने लगा
00:32भाए तुम्हें अकल नहीं आय क्या तुम एक खुआखार शेर के साथ बैठे हो
00:37अगर एक दिन उसे भूख लगी और कोई और शिकार ना मिला तो वो तुम ही को चीरफार डालेगा
00:42लकढ़ारा मुस्कराया और कहा मैं शेर को अच्छी तरह जानता हूँ
00:47वो मेरा दोस्त है उसने मुझे कभी नुकसान नहीं पहुँचाया
00:50आदमी ने कहा दोस्ती अपनी जगह लेकिन आखिर वो है तो दरिंदा
00:55उसकी फित्रत कब जाग जाए कोई नहीं जानता
00:57लकढ़ारे ने थोड़ा संजीदा हो कर कहा
01:00तुम्हारी बात में वजन है
01:02वो वाकई दरिंदा है
01:04मुझे एहतियात करनी चाहिए
01:05इत्ते फाक से ये सारी बाते शेर ने दूर से सुन ली
01:09उसे अपने दोस्त की जबान से ये सुन कर बहुत दुख ह Alma कि वो उसे दरिंदा समजने लगा है
01:14अगले दिन शेर आया तो मामूल के बरक्स खामोश था
01:18फिर उसने लकणहारे से कहा
01:20मेरे दोस्त आज मेरी एक ख्वाहिश है
01:22मेरी कमर पर कुलहारी का एक वार कर दो
01:25लकणहारा हैरान हुआ
01:27क्या पागल हो गए हो
01:28मैं तुम्हें क्यों जखमी करूंगा
01:30शेर ने इसरार किया
01:32यहां तक कि लकणहारे को मजबूरन कुलहारी से
01:34हलका सा वार करना पड़ा
01:36शेर को जखम लगा
01:38खून निकला लेकिन वो कुछ ना बोला
01:40और खामोशी से वापस चला गया
01:42वक्त गुजरता रहा
01:43शेर का जखम आहिस्ता आहिस्ता भरने लगा
01:46यहां तक कि वो बिलकुल खत्म हो गया
01:48ना दर्द रहा
01:50ना कोई निशान
01:51फिर एक दिन शेर ने कहा
01:52मेरे दोस्त देखो
01:54तुम्हारे वार का जखम अभर चुका है
01:56उसका कोई निशान भी बाकी नहीं
01:58लेकिन जिस दिन तुमने मुझे
02:00दरिंदा कहा और मेरी दोस्ती पर शक किया था
02:03तुम्हारी वो बात आज भी मेरे दिल में तीर की तरह चुकती है
02:06वो जखम अभी तक नहीं भरा
02:08ये सुनकर लकणहरा शर्मिंदा हो गया
02:11उसकी आखे नम हो गई
02:13उसने दिल से माफी मागी और वादा किया
02:15कि आएंदा कभी किसी को अपने अलफाज से तकलीफ नहीं पहुचाएगा
02:19सबक
02:20जबान का जखम तलवार के जखम से गहरा होता है
02:23दोस्तों
02:24ये सिर्फ एक कहानी नहीं
02:26एक आइना है
02:27हमें अपने अंदर झापने का मौका देता है
02:29हम में से हर एकने जिन्दगी में कभी न कभी किसी को अपने अलफाज से तकलीफ जरूर दी होती है
02:35बाज ओकात एक सक्त बात
02:37एक जुमला
02:38किन आख दिल ऐसा तोड़ देता है
02:39कि वो सारी जिन्दगी भुलाया नहीं जा सकता
02:42हम कहकर भूल जाते हैं
02:44मगर दूसरा दिल पर ले लेता है
02:46खुदा के लिए
02:47अपनी जबान से दूसरों को जख्मी ना कीजिए
02:50तंकीद जरूर कीजिए
02:52इक्तिलाफ राय भी रखिए
02:53मगर तहजीब और मोहबबत के दाइरे में
02:55क्योंकि अलफाज के नश्तर
02:57बदन पर नहीं रूम पर लगते हैं
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