00:00एक आम लड़का, शहजादी और तीन अनोखे सवाल
00:02एक जमाने में एक बादशा अपनी रियाया की खुशाली और सल्तनत की तर्की पर बहुत खुश था लेकिन एक परेशानी उसे अंदर ही अंदर खाय जा रही थी
00:10ये परेशानी और कुछ नहीं, बलकि उसकी इकलोती बेटी शहजादी सना की शादी से मुतलिक थी
00:16हर बाप की तरह बादशा भी चाहता था कि अपनी बेटी की शादी एक काबिल और समझदार इंसान से करे
00:23मगर शहजादी ने शर्ट रख दी थी कि वो उसी शक्स से शादी करेगी जो उसके तीन सवालों के दुरुस्त और बामानी जवाब देगा
00:29मुल्क मुल्क से शहजादे, अमीरजादे और दानिश्वर आए, लेकिन कोई भी शहजादी के सवालों का जवाब न दे सका
00:36हर बार नाकामी का सामना करके वो लोट गए, उसी सल्तनत में एक नौजवान तालिब ए इल्म रहता था, जिसका नाम अजम था
00:44उसने जब ये अलान सुना, तो दिल में ख्वाहिश जागी कि वो भी अपनी किस्मत आजमाए
00:49अजम के वालिद एक नेक सीरत और इल्म दोस्त उस्ताद थे, जिनके शागिर्दों में वजीर ए आजम, काजी ए शहर और कई आला उहदेदार शामिल थे
00:57अजम ने अपने वालिद से कहा, अब्बा जान, मैं भी शहजादी के सवालात का जवाब देना चाहता हूँ
01:04वालिद ने थोड़ी देर सोचा और बोले, बेटा, अगर नाकाम लोटा तो दुनिया कहेगी कि एक उस्ताद का बेटा भी नाकाम हो गया
01:12अजम ने मुस्कुरा कर जवाब दिया, अब्बा, काम्याबी या नाकामी तो किस्मत की बात है, लेकिन अगर मैं काम्याब हो गया तो उस्ताद की इज़त और बढ़ेगी
01:21बाप ने बेटे के अजम को देखकर इजाज़त दे दी, अजम ने तेयार होकर महल का रुख किया
01:27शहर में जैसे ही ये खबर फैली की एक उस्ताद का बेटा महल पहुँचा है, लोग जोग दर जोग महल के बाहर जमा होने लगे
01:33दरबार लोगों से खचा-खच भर गया, बादशा तक्त पर बैठा था, शहजादी अपनी मक्सूस नशिस्त पर जल्वा अफरोज थी और मलिका आलिया भी दरबार में मौजूद थी
01:44आखिरकार वो लमहा पहुचा, शहजादी ने पहला सवाल किया, उसने आस्मान की तरफ एक उंगली बुलंद की, अजम ने चंद लमहे सोचा, फिर उसने भी अपनी शहादत की उंगली के साथ साथ दूसरी उंगली भी बुलंद कर दी
01:57शहजादी के चहरे पर मुस्कराहट दोल गई, मलिका आलिया ने एलान किया, शाबाश, नौजवान, तुमने पहला सवाल दुरुस्त हल किया, अब दूसरा सवाल था, शहजादी अपनी नशिस्ट से उठी, हाथ में तलवार ली और फिजा में तलवार के वार करने लगी,
02:27भी दुरुस्त है, मलिका की आवाज में फक्रा नमाया था, अब तीसरे सवाल की बारी थी, शहजादी तक्त से उतर कर सिलिया नीचे उतरी और तेजी से वापस सिलिया चद कर अपनी नशिस्ट पर बैग गई, सवाल का इशारा तो दे दिया गया, मगर पूरा दर्बार ख
02:57पर शर्मीली मुसकराहट फैल गई, और वो महल के अंद्रूनी हिस्से की तरफ चली गई, मलिका आलिया ने खुशी से एलान किया, मुबारक हो, शहजादी ने तुम्हें पसंद कर लिया है, दर्बार, आल्ला अकबर, मुबारक हो, जिन्दा बाद, जैसे नारों से गूं�
03:27और तुमने उनके क्या जवाब दिये, अगर एक भी जवाब गलत हुआ तो तुम्हारी गर्दन उणा दी जाएगी, अजम पूरे एतमाद से बोला, बादशा सलामत, पहला सवाल था, क्या तुम अल्ला को एक मानते हो, शहजादी ने एक उंगली बुलंद की, मैंने दो उ
03:57शहजादी ने तलोर चलाए, और मैंने कलम बुलंद किया, यानी मैंने जवाब दिया कि कलम की ताक्ट, इलम की ताक्ट, तलोर से कहीं ज्यादा है, बादशा ने तालिया बजाते हुए कहा, शांदार, इलम ही इंसान को असल एजमत देता है, अब तीसरे सवाल की वजाहत �
04:27सलसल धड़कता रहता है। ये सुनकर बादशा अपनी जगह से उठा, अजम को गले लगाया और एलान किया।
04:57इल्म से लेस हो, उसे जिन्दगी की सब मुकाबलों में काम्या भी हासिल होती है।
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