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  • 1 year ago

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Animals
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00:00बारिश में तीन बहु की रसोई
00:03गाहित्री देवी और किशोर के तीन बेटे थे
00:06अविनाश्ट तीनों की शादी मौनसून के महीने में माया, शिवानी और परी से हो जाती है
00:10जब सास दोनों बहु का ग्रह प्रवेश करते हैं तब माया चीक देती है
00:15आची! आची!
00:18अरे बहु ये तुने क्या किया? घर में ग्रह प्रवेश से पहले ही चीक दिया
00:25तुझे पता ऐसे चीक न आप्शगुन होता है
00:27ओ ओ माजी मुझे नहीं पता था आप ऐसी चीजों में अपना बिलीव रखती हैं
00:34मैं ये सब नहीं मानती
00:35अरे तुम तीनो बहु पानी पियो फिर ग्रह प्रवेश करो
01:05कोई अप्शगुन नहीं होगा
01:07तब तीनो बहु पानी पीकर ग्रह प्रवेश करती हैं
01:10इतने में बाहर जमा जम बारिश शुरू होने लगती है
01:12अरे वाह बारिश हो गई इस असराल की पहली मौनसून बारिश मिल गई
01:18मेरा तो पकोड़े खाने का दिल कर रहा है
01:19मा जी मैं आपके लिए पकोड़े बना दू
01:21बताईए मेरे रसोई कहा है
01:22रसोई पकोड़े बारिश
01:26अरे हाँ कुसुम और लता ने कहा था कि उन दोनों ने भी अपनी बहु की परिक्षा ली थी
01:32क्यो ना मैं भी अपनी तीनों बहु की बारिश में परिक्षा लो
01:36ये सही रहेगा
01:37मा जी आपके सोच में डूब गई
01:40बताईए ना बारिश देखकर मेरा भी पकोड़े खाने का मन है
01:43मैं भी रसोई में पकोड़े बना देती हूँ
01:46हाँ हाँ वो मैं ये कहरी थी कि अब बारिश का मौसम है
01:49अब तुम तीनों एक ही रसोई में घुसी रहोगी
01:51तो कम खाना बनाना पड़ेगा
01:52ऐसे में मुझे कैसे पता चलेगा मेरी कौन सी बहु कितना अच्छा खाना बनाती है
01:56इसलिए तम तीनों की रसोई कुछ दिन अलग रहेगी और अलग-अलग खाना बनाओगी हम सब के लिए
02:01तो अब तुम तीनों सोच लो कौन उस रसोई को लेगा और बाकी की दो खाना बनाएंगी
02:08माझी माझी मैं मैं मैं मैं लूंगी उस रसोई को परीबहु जो हूँ और तमदन
02:18माझी मैं सोच रही हूँ उपर चट पर रसोई बनालो बारिश होगी लेकिन उसका जुगाड है मेरे पास मैं छोटा सा टेंट लगा लूँगी
02:24आर परी बहुतम
02:26मुझे समझ नहीं आरा माजी
02:28मैं बाहर आंगन में चूला बना कर खाना बना लूँगी
02:31बाहर इतनी तेज बारिश में मिटी के चूले पर काम करना बहुत मुश्किल है
02:38माँ तुम कैसे खाना बनाओगी?
02:39मतलब तुम तो पहले ही हार गई
02:41नहीं दीदी ऐसा नहीं है
02:43जब मेरी माँ गाउं में खाना बनाती थी
02:45तब वह चूले को भीगने से बचाने के लिए वहां तरपाल लगा लेती थी
02:49मैं भी ऐसे ही अपनी अलग रसोई तयार कर लेती हूं माजी
02:52ठीक है जाओ
02:53माँ आप ये सब क्यों रख रही है?
02:57बिचारी तीनों बारिश की रसोई में परिशान हो जाएंगी
03:00मतलब माया तो सेफ है
03:02हाँ गाईत्री तुम तो पहले ऐसी सास हो जो बहु के आते ही रसोई का बटवारा कर दिया
03:09अरे मैं कोई बटवारा नहीं कर रही हूं बस अपनी बहुँओं को अच्छी बहुँ बनने का मौका दे रही हूं
03:14अच्छा जी
03:15हाँ तो तुम तीनों फिलहाल आराम कर लो क्योंकि शिवानी बहु परिबहु बारिश में तुम अपनी रसोई लगा नहीं सकती
03:23तो कल तुम तीनों की पहली रसोई तुम्हारे अपने हाथ की बनाई हुई रसोई से होगी
03:27जी माजी
03:29फिर सब अपने कमने में आराम करते हैं
03:32परि फटाफट से तिरपाल लगा कर खाना बनाने की शुरूआत करती है
03:55वहीं शिवानी एक टेंट मंगवा कर उपर लगा देती है
03:58और फिर उसके अंदर टेबल और रसोई का बाकी का सामान रखती है
04:02साथी दहेज में लाया अपना इंडक्शन चूला
04:04परफेक्ट चलो मेरे दहेज में इंडक्शन चूला लाने का कोई तो फाइदा हुआ
04:08बस ये उलेक्ट्रोनिक है, मुझे बारिश के बारी से से बचा कर रखना होगा
04:11लेकिन समझ में नहीं आ रहा क्या बनाओ
04:13मैं ज़्यादा भारी बरकम खाना नहीं बना सकती बारिश में
04:16जो जल्दी बन जाए और मेरी मेहनत कम लगे वैसा खाना
04:19हाँ, बारिश तो है नहीं तो पकोड़ी बना कर क्या करूँगी
04:23ऐसा करती हूँ, चाय पकोड़ी बना लेती हूँ, मौसम अच्छा तो है
04:25तब शिवानी कचौरी बनाना शुरू करती है
04:29वहीं बड़ी बहु माया आईने के सामने बैठ कर मेकप कर रही थी
04:32कोई कैसे उन्हीं ये समझाए
04:37सजनिया के मन में अभी इनकार है
04:43जाने बलमा गोड़े पे क्यों सवार है
04:48मैं यहां मेकप करी और वो दोनों बेचारी दो घंटे से अपनी रसोई जमाने में मश्रूफ है
04:54अच्छा हुआ मैंने पहले ही मन की से अपनी रसोई मांग ली
04:58मुझे खाना बनाने के लिए चले जाना चाहिए
05:00माया रसोई में जाकर सबसे पहले खिड़किया खोल देती है
05:04वा क्या ठंडी हवा आरे है जब बारिश आएगी तो मुझे भीगना नहीं पड़ेगा
05:08और यहां से मैं बारिश का मजा भी देख पाऊंगी
05:11अब क्या बनाऊ पकॉड़े लेकिन इंप्रेशन जबाना है तो साथ में कुछ यौर बना लेती हो
05:15अरे हां चीजरोल बना लेती हो मा जी खोश हो जाएंगी
05:18ऐसे मैया चीजरोल और पकॉड़े बनाने की तैयारी करती है
05:22कुछी देर में धीरे धीरे बारिश होने लगती है
05:25जिससे शिवानी को तो कोई फरक नहीं बढ़ता
05:27लेकिन चूले पर बना रही परी के कढ़ाई में
05:29बारिश के कुछ छीटे आ जाती है
05:31कुछी देर में तीनों बहु अपनी रसोई का खाना बना कर डाइनिंग टेबल पर पेश करती है
05:45जिसे खाकर घरवाले बहुत खुश होते है
05:47वाह वाह भी वाह मता आ गया
05:50बहुत बढ़िया पुरी तुम्हारी चाय भावियों की चाय से बहुत अलग है
05:54और तुमने तो पालग प्यास पनीर अलग अलग तरीके के पकोड़े बना दिये वाह
05:59शुक्रिया जी वो मैंने चाय गुड़ और अद्रक की बनाई है
06:02ऐसे बारिश के मौसम में ऐसी चाय तो बहुत अच्छी लगती है
06:05बिलकल ठीक कहा बहु तुने
06:07लेकिन बड़ी बहु तुमने ये जो रबर जैसे रोल बनाया है न
06:10जिसमें से कुछ निकला था मुझे तो वो इतना खास पसंद नहीं आया
06:14मुझे भी अच्छा लगा
06:16लेकिन थोड़ा और शिवानी बहु तुम्हारी चाय पकोड़ी भी अच्छी थी
06:19लेकिन कचोड़ी में मिर्च बहुत जादा थी
06:22पर जो भी बोलो परी बहु के गुड़ वाली चाय और अलग अलग तरह के पकोड़े खाने में बहुत स्वाथ थी
06:27हाँ ये तो मुझे भी अच्छे लगे
06:30मुझे अपनी तीनों बहु की बारिश की पहली रसोई का खाना बहुत अच्छा लगा लेकिन परिणाम तो बाद में आएगा इसलिए अपनी कोशिश जारी रखो
06:37माजी आप चिंता मत कीजे बारिश बंध हो जाने दीजे फिर मार्केट जाकर सामान लेकर आओंगे और आपको बहुत अच्छा खाना बनागर खिलाओंगी हाँ माजी मैं भी
06:48तब बारिश बंध होती है और दीनों बहु बादार से साथ ससुर को खुश करने के लिए अच्छा अच्छा सामान खरीद कर ले आती हैं वो दुपैर का खाना बनाने जाती हैं तब बारिश में परी के कपड़े बारिश से खराब हो जाते हैं
07:00यह भगवान इतनी तेज बारिश हो रही नीचे से साड़ी भी कीचर की हो गई है कोई नहीं मुझे बस अच्छा अच्छा खाना बनाना है और मुझे यकीन है उन्हें आलू पूरी और साथ में भुना हुआ भुट्टा बहुत अच्छा लगेगा
07:10जैसे तैसे बारिश से बचते हुए परी खाना बनाने के कोशिश करती है उसकी मिट्टी का चूला भी खराब होने लगता है तो वो मिट्टी के चूले पर टीन का कनस्तर लगा देती है वहीं शिवानी भी छट पर बारिश में खाना बनाती है कि एक इंडक्शन की वज़ा
07:40लिए मार्केट से इंस्टेंट फ्रोजन मॉमोस बिर्यानी और स्नेक्स ले आती है जिने वो स्टीम और गरम करके प्लेट में निकाल कर सास्तसुर को दे देती है
07:49देखा माजी पापा जी आपकी तीनों बहु में से सबसे पहले खाना मैं आपके लिए लेकर आई हूँ उन दोनों से तो कुछ हुआ भी नहीं और माजी पापा जी बारिश में तीकी चिट्नी के साथ मॉमोस खाने का मजा ही कुछ और है खा कर देखिए बिर्यानी भी है फिर
08:19परी बहु को देखते हैं जहां वो बारिश में भीग चुकी थी आजी आजी आजी अरे बहु तेरा सर भीग और कपड़े भी चल अंदर चल खाने को चोड़ नहीं माजी खाना बस बन गया है पहले आप खा लीजे तब सब लोग परी के हाथ के आलो पूरी खीर और उसके �
08:49परी के हाथ के खाने की बाद ही कुछ और उसके बाद तूने भुटा भी रखा है इससे तो तूने खाने में चार चान लगा दिये शुक्रिया माजी पापा जी शिवानी ये चूले वाली बहुत ज़्यादा नहीं चल रही है यही तो मैं भी देख रही हूं लेकिन कल हम ऐ
09:19का बारिश का पानी नीचे खाना बना रही पडी पर डाल देती है, जिससे कड़ाई का तेल उचल कर पडी के हाथ पर चला जाता है, और वो जल जाती है, बड़ी धीट है, मैं तो इतनी बारिश में मेहनत नहीं करूँगी, मैंने सोच लिया है,
09:46तब परी जैसे तैसे जले हुए हाथ के साथ खाना तयार करके घरवालों को देती है, जिसे खाकर घरवाले खुश होते हैं, वहीं शिवानी और माया फ्रोजन फूड गरम करके साससर को देती है, जिसे खाते ही अचानक से गायत्री की तबियत खराब हो जाती है,
10:01क्या? तुमने हमें खाने में एक्सपाईरी फूट दिया? तुम दोनों से मुझे यह उम्मीद नहीं थी. तुमसे अच्छी तो परी बहु है, जो बारिश में भी भीग कर खाना बनाती है.
10:23सास के हालत देख फटाफट परी नमक का पानी गायत्री को पिलाती है जिससे वो ओल्टी कर देती है और सारा खाना बाहर आ जाता है वहीं डॉक्टर भी दवाई दे कर चले जाते हैं
10:32देखा आपने डॉक्टर ने भी मेरी बहु की तारीब की जो उसने टाइम पर मेरे पेट से खराब खाना निकलवा दिया ये दोनों तो रसोई संभालने में फेल होगे सबसे अच्छी बहु मेरी परी ही है जिसने इतनी बारिश में भी परेशान होकर भी यहां तक कि अपना ह
11:02नाना भी सीखेंगे सिखाओगी ना परी हाँ क्यों नहीं दीदी तब दोनों बहु परी से खाना सीखती हैं जिसके बाद गायत्रियों उन दोनों को माफ कर देती हैं और वो साबब खुशी-खुशी रहने लगते हैं
11:14बहु आज मैंने रसोई में देखा था सारे स्नैक्स खत्म हो गए हैं एक काम कर इस संडे मेरे साथ मिलकर घर में मठी और नमक पारे बनवा देना
11:23लेकिन क्यों माजी हम बाहर से भी तो मठी और नमक पारे मंगवा सकते ना इतनी मेहनत क्यों करनी है मैं ओनलाइन देख लेती हूँ कि मिया सेकेंड
11:31हमेशा फिजोल खर्चों के बारे में ही सोचती रहती है हम घर में ही मठी नमक पारे बनाएंगे
11:36माजी मैं बनवा तो देती लेकिन आप तो जानती है कि मैंने अभी दो दिन पहले नेल एक्सेंशन करवाए हैं अब मैं नेल एक्सेंशन के साथ काम तो नहीं कर सकती ना
11:44शालू काम चोरी दिखाते हुए जल्दी से अपने कमरे में चली जाती है जिसे देख मनोर मा
11:50अपनी मौर्डन बहु की काम चोरी और खर्चीले पन की वज़ा से मनोर मा अपने चोटे बेटे मनोच के लिए गाउं की लड़कियों के रिष्टे देखना शुरू करती है
12:20और जल्द ही गाउं की रहने वाली शीतल नाम की लड़की से मनोच की शादी करवा देती है
12:25शालू बहु शीतल बहु को पूरा घर दिखा दो दो मिनट मा जी
12:30शीतल अपने पती मनोच से कहकर बाहर गाड़ी में दो कच्चे आम की बोरिया मंगवाती है
12:36इतने सारे कच्चे आम देख सभी लोग काफी हैरान होते हैं
12:40अरे शीतल बहु इतने सारे कच्चे आम कहां से लेकर आई तू
12:43भाजे आप एक गाउं की गवार लड़की से क्सपिक भी क्या कर सकती है
12:47मुझे तो लगता है कि जिस तरह ये गाउं में इन कच्चे आमों को बेचती होगी
12:51इसी तरह भी शेहर में भी इने बेचेगी
12:54भाबी आपको ज़्यादा ही सोचती है
12:56हम गाउं में रहकर कच्चे आम थोड़ी ना बेचते थे
12:59वो तो जब हमारी विदाई हो रही थी तो हमारी अम्मा ने हमें बोरी भरकर कच्चे आम दिये थे
13:03गर्मी का मौसम है और अगर गर्मी के मौसम में कच्चे आम नहीं खाए तो फिर क्या ही खाया
13:08शीतल का जवाब सुन शालू का मूँ बन जाता है
13:11दो से तीन दिन शादी की रसमों में गुजर जाते हैं
13:14आज शीतल की पहली रसोई की रसम होती है
13:17जिसमें शीतल तरह तरह के देशी और स्वादिष्ट पक्वान बनाती है जो सभी को काफी जादा पसंद आते हैं
13:23सच कहूं तो मुझे खुद को याद नहीं है कि मैंने इससे पहले इतना अच्छा खाना कब खाया था
13:28शीतल बहु तुमने तो मेरा दिल खुश कर दिया
13:31मानना पड़ेगा मनुच तू है तो बड़ा किसमत वाला अच्छा खाना बनाने वाली जो बीवी मिली है
13:37भाबी मेरे लिए भी मेरी पसंद का कुछ बना दिया करना
13:41तारीफ तो ऐसे कर रहे हैं जैसे किसी मास्टर शेफ ने खाना बनाया है
13:44रोज रोज मैं इतना अलग अलग तरह का खाना बना कर देती हूँ
13:47कभी मेरी तो इतनी तारीफ करी नहीं
13:50शालू मन ही मन शीतल से जल ही रही होती है कि तभी मनूर्मा देखती है कि शीतल कुछ भी नहीं खा रही है
13:56अरे शीतल बहू खाना क्यों नहीं खा रही है इतना अच्छा खाना बनाया है तूने
14:00माजी मुझे खानी के साथ आम का अचार खानी की आदत है और टीबल पर अचार नहीं है
14:05मुझे पहले के उनी बताया शालू बहु जा किचन में नीचे वाली शेल्फ में आम के अचार की बर्नी रखी है लेया
14:11अब इस गवार के लिए अचार लाना बागी रह गया था मेरा
14:14शालू किचन में जाती है और वहां से आम के अचार की बर्नी लेकर आती है
14:19शीतल जैसे याम के अचार को खाती है तो उसका मूँ बन जाता है
14:49शीतल अब अगले दिन ही छट पर ले जाकर उन सारे कच्चे आमों को अच्छे से धोकर पोँच लेती है और दराती की मदद से आम को काटने लगती है जिसे देख शालू
15:07अब शीतल धीरी धीरे करके एक बोरी के आम काट लेती है और एक बार धूप में सुखा देती है अब अगले दिन किचिन में सास के साथ मिल कर सामान देखने लगती है
15:26मा जी कुछ मसाले रखे हैं और आम के अचार के लिए एकुछ डब्बे भी है इन्ही को धोकर डाल दूँगे इनमें अचार तेल भी है एक किलो और ले लेंगे तो चला जी चलते हैं बाजार
15:38ये अब शीतल अपनी सास के साथ मार्केट जाती है और मसालों की दुकान पर से मसाली देखने लगती है
15:45नहीं भाया ये सौफ मुझे एक किलो चाहिए सही सही दाम लगाओ सो और पे से ज़्यादा नहीं दूँगे इसके लिए और बाकी के सारे मसाले भी दोसों में दो वरना मैं चलू आगे फिर
15:55अब क्या लड़ू मैं आपसे चलो ले जाओ ये लो
15:58इस तरह कम पैसे में वो आम का अचार का मसाला सामगरी ले कर आती है और अगले दिन किचिन में मसाला बनाती है
16:09चलो सारे मसाले डाल दिये कड़ाई में अब जल्दी से इने भून कर बरतन में निकाल लेती हूँ फिर सिल पर पीस लूँगी
16:16शालू शीतल को सुना कर वहां से चली जाती है अब शीतल फिर से चट पर जाती है
16:35और पांच बड़े डिबों में अपनी एक बोरी के कड़े आम डाल कर उसमें मसाला डाल कर अच्छे से अपने हाथों से मिला देती है
16:43और उसे धूप में दो से चार दिन सूखने के लिए रख देती है
16:46कितनी अच्छी खुश्बू आ रही है चार में से भाबी एक बारा अचार चक कर देखना
16:52अब इसमें उपर से तेल डाल दूँगी फिर देखना कुछ दिनों में आम का अचार बन कर तैयार हो जाएगा
16:58इहू तुमने सोच भी कैसे लिया कि मैं सचार को खाऊंगी
17:02मैंने अपनी आँखों से देखा था कि तुमने अचार को अपने हाथों से मसाले में मिलाया था
17:06तुमने घिननी आई और तुमने इसे धूप में सूखने के लिए रख दिया
17:09पता है कितनी जादा दस्ट बैठी होगी इस पर
17:11ची मैं तो क्या कोई भी नीखाएगा इस घर में से
17:14तुम गवार लोगों को सिर्फ गवार तरीके से चीज़े बनानी आती है
17:17कितान हाईजीनिक है
17:19शीतल कुछ समय में शालू के बरताओं से काफी अच्छी तरह वाकिफ हो चुकी थी
17:23इसलिए वो उसे कोई जवाब देना जरूरी नहीं समझती
17:26तक्रीबन दो हफ़ते के बाद गवार बहु का आम अचार बनकर तयार हो जाता है
17:30जो घर में सभी को काफी ज़्यादा पसंद आता है
17:33शीतल बहु सही कहा था तुने असली अचार तो ये है
17:36कितना चटपटा मसालेदार अचार बनाया है तुने
17:39मज़ा आगया खाकर
17:41अगर ऐसे आम का अचार रोज हो तो मैं रोटी चावल अचार के साथ ही खालू
17:45सबजी की तो कोई जरूरत ही नहीं है
17:48तुमने सच में काफी बढ़ी अचार बनाया है
17:51मैंने आज से पहले ऐसा अचार कभी नहीं खाया
17:53आप लोग तो इस मामूली आम के अचार की ऐसी तारीफ कर रहे हैं
17:57जैसे शीतल ने दुनिया का आटमा अजूबा ही बना दिया हो
17:59आम का अचार ही तो है
18:01इसे तो कोई भी बना सकता है और कोई क्या मैं भी बना सकती हूँ
18:04तो जिसे ढंग से रोटी तो आज तक बनाई नहीं गई
18:09आम का अचार क्या बनाएगी
18:10रहने दे मौडन बहू
18:11आपको तो मेरे बारे में कुछ पता ही नहीं
18:15अब आप देखते जाएए कि कैसे आपकी मौडन बहुस गवार बहुसे अच्छा आम का अचार बनाती है
18:19शालू अपने कमरे में चली जाती है
18:22और अगले दिन किचिन में बैट कर वो बचे हुए कच्चे आमों को लेकर उन्हें चाकू से काटने लगती है
18:27कच्चे आम काटते काटते शालू अपनी उंगली ही काट बैटती है
18:48चाकू से आम काटने के चक्कर में शालू की दो से तीन बार उंगली कटे हो जाती है
18:52लेकिन वो अपनी जिद नहीं छोडती
18:54आम काटने के बाद अब शालू आउनलाइन आम का अचार बनाने के लिए मसाला देखने लगती है
18:59मुझे तो रेडिमेंट आम का अचार का मसाला मिल गया
19:02कहां वो मेरी गाउं से आई गवार घर में मसाला बना रही थी
19:05और पूरे घर में दुआ पहला रही थी
19:06बस अब थोड़े ज्यादा पैसे का ही तो है
19:08ये दो हजार का बस इसमें क्या बड़ी बात है
19:11शालू आउनलाइन काफी महगा आम के अचार का मसाला मिल गवाती है
19:15और सारे आम में मसाला डाल कर उसे चमच की मदद से मिलाने लगती है
19:19मा जी की गवार बहू को तो ये भी नहीं पता
19:22ऐसे चीज चमच से मिलाने चाहिए या गलव्स पहनना चाहिए
19:26उसने तो अपने गंदे हाथों से गंदे तरीके से आम का अचार बनाए था
19:29लेकिन मैं तो बिलकुल हाईजीन तरीके से आम का अचार बना रही हूँ
19:32और अच्छा हुआ मैंने 500 रुपे का ये लो कोलिस्ट्रॉल का तेल भी मंगवा दिया
19:36उस गवार ने तो अचार में इतना सारा सरसों का तेल डाला था
19:39मैं तो लो कोलिस्ट्रॉल तेल से आम का अचार बनाऊंगी
19:42टेस्ट के साथ साथ हेल्थ भी तो मैटर करती है
19:45कितनी समझदार हुँ मैं उस गवार ने तो इतनी धूल मिटी में अचार को धूप में सूखने के लिए रखा था
20:06मैंने तो अपने रूम में रखा है अब ना तो इस पर धूल मिटी लगेगी और ना ही कोई बैक्टीरिया और आराम से टेबल फैन की हवा में सूख भी जाएगा
20:13बिना धूप की रोशनी मिले उस अचार को बनने में कम हफते भर से जादा का समय लग जाता है
20:19शालू जैसे ही अपने कमरे में जाती है तो देखती है कि आदे से जादा अचार जमीन पर गिरा हुआ है
20:25लगता है मैंने अपने गमरी की खिर्की खुली रग दी थी
20:28बिली ने कितना सारा चार गिरा कर खराब कर दिया
20:30इससे पहले बाकी का चार खराब हो
20:32इसे रसूई मिले जाती हूँ
20:33सारा चार अभी भी काफी ज़्यादा टाइट था
20:36जिसे मुलाइम करने के लिए शालू अपना दिमाग का इस्तेमाल कर बनने में से उसे निकाल कर उसे स्टीम कर देती है
20:42जिससे अचार मुलाइम हो जाता है और अब घर में सब जैसे ही शालू का बनाया हुआ अचार खाते है
20:48ये कैसा अचार बनाया है तुने, नस्वाद है न कुछ, ये तो शेहर में मिलने वाले अचार से भी गया गुजरा है
20:55अपनी सिंदिकी में मैंने इससे घटिया चीज कभी नहीं खाई, अरे मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि कोई इतनी घटिया चीज भी बना सकता है
21:02लेकिन मैंने तो ऑनलाइन देखकर अचार बनाया था, बाहर से पूरे 2000 का मसाला भी मंगवाया था और 500 रुपे का लो कोलिस्ट्रॉल तेल मंगवाया था, तो ये इतना खराब कैसे बना
21:12कुछ चीज देसी तरीके से बनती है ना, तो उसे देसी तरीके से ही बनाना चाहिए, हर चीज में अपने मौडन तरीके को घुसाना जरूरी नहीं है
21:20मनूर्मा की बास दून सभी हसने लगते हैं, वहीं शालू को भी अब अकल आ जाती है, जिसके बाद अब वो कभी भी शीतल से किसी भी चीज में मुकाबला नहीं करती है
21:43और देसी आम का अचाहर बनाना सीखती है