00:00बेवकूफ कववाम
00:30ये टेहनियों का गुच्छा भिलो और देवदार की गोंद पता नहीं तुम्हें कहां पर घोसला बनाना पड़ जाए
00:37शुक्रिया काउटल उजे तुम सब की बहुत याद आएगी
00:43और आखिरकार में उन सब तुम्हेट कर जोसके दोस्तों ने दिये थे मिस्टर काउट उड़ गया
00:50मिस्टर काउट उड़ता चला गया पहाणों की उपर से दरियावों, गावों और शेहरों के उपर से
00:57जिन्दगी में पहली मरतबा उसने दुनिया को देखा था
01:01एक दिन उसने सुना बादलों का गरजना और विजली का कड़कना
01:05और ऐसा लग रहा था जैसे बारिश होने वाली है, उसने जल्दी ही दरख्त पर पनहा ली
01:10मुझे लगता है आज रात मुझे यहां रुकना पड़ेगा, बारिश में उड़ना अच्छी तजबीज नहीं है
01:16जब मिस्टर काउ दरख्त पर जगे तयार कर रहा था, उसने एक अचीब सी आवास सुनी
01:22उसने फोरण टहनियों से जचाका और देखा, कि वो आवास कहां से आ रही थी
01:26बारिश होने वाली है, हुर्रा
01:31ये पशिंदे कौन है, ये उड़ रहे हैं, क्या ये परिंदे हैं, पर ये कितने, कितने खुबसूरत है
01:41मिस्टर काउ यानि इस कवे ने जिंदगी में पहली मरतबा मूर देखे थे
01:46और उसे यकीन नहीं हो रहा था, कि वो इतने खुबसूरत हैं
01:49वो अपने चमकीले काले परों का मुकाबला, उनके रंग भी रंगे लंबे परों से करने लगा
01:55अचानक उसे अब कवा होना नागवार गुजर रहा था
01:59मेरी जानिब देखो, मैं कितना काला और बजसूरत हूँ
02:03मैं उनकी तरह बनने की खुआश रखता हूँ, वो कितने खुबसूरत और दिलकश हैं
02:08तो मिस्टर काउ मोरों को दिन रात देखता रहा
02:11इसके अलावा कोई भी बात उसके जहन में आही नहीं रही थी
02:14कि वो भी एक मोर बने
02:16पर कैसे?
02:18वो उनकी तरह बेर खाने लगा और उनकी तरह रक्स करने लगा
02:22और एक दिन उसे एक तजबीज सुची
02:24वो खुबसूरत मोर के पर
02:30उस दिन के बाद से मिस्टर काउ मोरों के गिरे हुए पंग इकठे करने लगा
02:35और जब उसने काफी इकठे कर लिये
02:39तो उसने देवदार की गोंदली जूस को मिस्टर काउटल ने दी थी
02:44और उन परों को अपनी दुम में चिपका लिया
02:47हाँ, अब मैं एक मोर बन गया हूँ, आखिरकार
02:52घर वापस जाने का वक्त आ गया, यूहू
02:59तो ये सोचते हुए कि वो एक मोर बन गया है
03:03मिस्टर काउट ने वापस घर की जाने वरोख किया
03:06मिस्टर काउट नी ने मिस्टर काउट को देखा
03:08और बागी सब कवों कोह इतला की
03:10और जल्दी ही वो सब मिस्टर काव के घोसले में इकटे हो गए
03:14वापस आने पर तुम्हारा इस्तिक्बाल है, मिस्टर काव
03:21तुम्हारी छुटिया कैसे रही
03:23हम कवों ने तुम्हें बहुत याद किया
03:26छुटिया अच्छी थी
03:30शुक्रिया पर अब में एक बदसूरत कवा नहीं रहा
03:34मैं बन गया हूँ एक खुबसूरत मोर
03:38पर तुम भी तो एक कवा ही हो
03:42तुम कवों को बदसूरत कैसे कह सकते हो
03:44मैं तुम भारे लिए आम का हल्वा लाई हूँ
03:50शुक्रिया, पर क्यूंकि अब मैं एक मोर हूँ, मैं केवल बेर ही खाऊंगा
03:58कउओं को मिस्टर काउ का रवया पसंद नहीं आया
04:01उन्होंने फैसला किया कि वे उसे अकेला छोड़ देंगे
04:05पर अभी भी मिस्टर काउ ने अपना सबक नहीं सीखा था
04:08एक दिन उसने एक फैसला किया
04:11ओ, ये बचसूरत कवे, मैं उनके साथ क्यूं रहूं
04:17मेरी हक्की जगे तो मोरों के साथ है
04:21तो मिस्टर काउ मोरों के साथ रहने चला गया
04:24क्यूंकि अब मैं एक मोर हूँ, तो मैंने सोचा कि मैं तुम्हारे साथ रह सकता हूँ
04:32मोरों ने एक दूसरे से मश्विरा किया और इस अजीब और गरीब मोर को वाहर हैने की इजाज़त दे दी
04:38लेकिन एक दिन बारिश होने लगी और मिस्टर काव के मोर वाले परद गिर गए
04:43तुम तु मोर नहीं हो
04:47यकीनन मैं एक मोर हूँ
04:50मैं तुम्हारी तरह खाता हूँ
04:52मैं तुम्हारे साथ रहता हूँ
04:53मेरे तुम्हारी तरह ही चमकदार रंग वी रंगी पंख है
04:56क्या हमारी तरह के पर
04:59तुम्हें कवा हो
05:02नहीं नहीं नहीं
05:05तुम्हारे चमकीले काले पर तुम इतना खुबसूरत बनाते हैं
05:09क्या?
05:10मौरों ने काओ के खुबसूरत काले पंखों की तारीग की
05:13काओ वा इस पर यकिन न कर सका
05:16तुम्हारे पर इतने खुबसूरत हैं
05:20वो तुम्हें आस्मान में उंची परवास देते हैं
05:23इन लंबे परों की वज़े से हम नीचे ही उड़ पाते हैं
05:27काश हम भी तुम्हारी तरह आस्मान चूँ सकते
05:30पर तुम्हें अपने खुबसूरत खांदान और दोस्तों को छोड़ा
05:34और यहां आए बस मौर बनने के लिए
05:37कितनी शर्म की बात है ये
05:39घर वापस जाओ उसमें खुश रहो जो तुम हो
05:43आखिरकार मिस्टर काउ को अपनी बेवकूफी का इल्म हुआ
05:47और वो वापस घर आया
05:49हलो मिसस काउनिंग
05:53मैं जानता हूँ तुम मुझसे नाराज हो और मैं इसी के काबिल हूँ
06:01मैंने वो बनने की कोशिश की जो मैं नहीं हूँ
06:04और इस सिलसिले में मैंने अपने खानदान और दोस्तों को खो दिया
06:07महरबानी करके मुझे मुझे मुझे मुआफ कर दो
06:10तुम्हे मेरा आम का हलवा चाहिए
06:12यकीनन महरबानी करो
06:15मैं हर वक्त बेर खाखा कर तंग आ गया हूँ
06:19मुझे मुआफ कर दो सब लोग
06:21मैं कवा हूँ और चाहे कितने भी पर लगा लूँ मैं कवा ही बना रहूंगा
06:27तुमारा फिर से स्वागत है
06:29किसी की तरह कपड़े पहन कर, किसी के खाने के अंदास की नकल करके
06:34किसी के जीनी के अंदास की नकल करके हम वो नहीं बन जाते
06:38सबसे हुम्दा बात जो हमें करनी चाहिए वो ये है
06:41कि हम उसमें मुतमईन रहे जो हम हैं
06:43चाहे हम कोई भी हो
06:44हम अपनी ही अंदाज में खास और बहतर हैं
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