00:00बुद्धा और फकीर
00:06एक वक्त का किस्सा है, एक बेघर इंसान था और वो खाना इकठा करता था
00:13उसने ये गौर किया कि हर दिन उसका खाना गायब हो जाता है
00:18एक दिन उसने उस चूहे को पकड़ा जो उसका खाना चुराता था
00:23ओ तुम चूहे, मेरा खाना क्यों चुरा रहे हो? मैं एक बेघर इंसान हूँ, जाकर अमीरों से खाना चुराओ, उन्हें जरा भी इल्म नहीं होगा
00:34ये मेरी किस्मत में है कि मैं तुम से चुराओं
00:38क्या? क्यों?
00:39क्योंकि ये तुम्हारे किस्मत में ही है कि तुम अपने पास सिर्फ आठ चीजे ही रख सकते हो
00:44चाहे तुम कितनी भी भीक मांग लो या चाहे तुम कितना भी इकठा कर लो
00:48तुम सर्फ उतनी चीजे रख पाओगे
00:50उस बेघर इंसान को सद्मा लगा और उसका दिल भी तूट गया
00:55भाला कौन ऐसी किस्मत पाना चाहेगा
00:58मेरी ऐसी किस्मत क्यों है
01:00मुझे इसका इल्म नहीं है तुम्हें जाकर बुद्धा से पूछना होगा
01:05शायद उन्हीं इस बात का इल्म हो
01:07इस तरहा बेघर इंसान सफर पर निकल पड़ता है
01:10बुद्धा को ढोनने
01:12वो पोरा दिन सफर करता है
01:13और शाम को वो अपने आपको एक दौलत मंद एहलो आयाल के घर पाता है
01:18धका हुआ और खौबालूदा
01:20वो वहां रात गुजारने का फैसला करता है
01:23तो वो जाकर दर्वाजे पर दस तक देता है
01:26सुनिए जनाब अंधेरा हो रहा है और मैं यहाँ नया हूँ
01:31बराय करम मैं यहाँ रात गुजार सकता हूँ
01:34ठीक है अंदर तश्रीफ लाओ
01:37जैसे ही वो फकीर अंदर आता है वो आदमी उससे पूछता है
01:42अरे जनाब क्यों और कहां के लिए इतनी रात को सफर कर रहे हो
01:47ओ मेरे पास बुद्धा के लिए एक सवाल है और मैं उनसे मुलाकात करने जा रहा हूँ
01:53उसी वक्त अमीर आदमी की बीवी आते हुए यह सुन लेती है
01:58क्या हम एक दर्याफ्त दे सकते हैं बुद्धा से पूछने के लिए
02:00ओ ठीक है शायद मैं आपकी तरफ से सवाल पूछ सकता हूँ
02:05आपका सवाल क्या है महतरमा
02:07हमारी एक 16 साल की बेटी है जो बोल नहीं सकती
02:11हमारा सिर्फ यही दर्याफ्त है कि हम ऐसा क्या करें जिससे वो बोलने लगे
02:16तो अगली सुबह ही वो बेगर इंसान उन्हें पनाह देने के लिए शुक्रिया करता है
02:21और इत्मिनान देता है कि वो उनके सवाल बुद्धा से जरूर पूछेगा
02:25अल्विदा
02:26और वो अपना सफर जारी रखता है और वो पहाडों का जुन्ड देखता है जो उसे पार करना है
02:33या लाह मैं इसे कैसे पार करूँ
02:36वो एक पहाड पार करता है और उसे एक जादूगर मिलता है
02:42जनाब क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं इसे पार करने में
02:45चड़ जाओ
02:47फकीर जादूगर की चड़ी पर चड़ जाता है और जादूगर के पीशे बैठता है
02:53वो जादूगर अपनी चड़ी का इस्तमाल करता है खुद को और फकीर को उन पहाडों के जुंड को पार कराने में
02:59जैसे ही वो पहाड़ों के जुंड के ऊपर से उड़ते हैं, जादुगर उस इनसान से पूछता है
03:05तुम कहां क्यों रवाना हो? इन पहाड़ों को तुम क्यों पार करना चाहते हो?
03:12मैं जाकर बुद्धा से मिलकर पूछने वाला हूं मेरी किस्मत के बारे में
03:18ओ सचमे, बराय करम मैं भी एक सवाल दे सकता हूं तुम्हें बुद्धा से पूछने के लिए
03:25मैं हजार साल से जन्नत जाने की मशक्कत कर रहा हूं और मेरी तालीम के मुताबिक मुझे अब तक जन्नत पहुंच जाना चाहिए था
03:34क्या तुम बुद्धा से पूछ सकते हो मुझे क्या करना होगा जन्नत जाने के लिए
03:39बेशक, मैं आपका सवाल उनसे पूछ हूँगा
03:44जैसे ही वो अपना सफर जारी रखता है, उसे एक आखरी रोक मिलती है
03:53एक दर्या जो वो पार नहीं कर सकता
03:56अब ये क्या, मैं इस गहरे दर्ये को कैसे पार करूँ
04:01खुश किस्मती से उसे एक बड़ा कच्छुआ मिलता है जो उसे दर्या पार कराने का फैसला करता है
04:08जैसे ही वो दर्या पार कर रहे होते हैं, कच्छुआ उससे पूछता है
04:13तुम कहां जा रहे हो?
04:16मैं बुद्ध से मिलने जा रहा हूँ
04:18और मैं उनसे एक सवाल पूछूँगा अपनी किस्मत के बाबत
04:22क्या तुम मेरे लिए एक सवाल?
04:26पूछोगे?
04:29बेशाथ, क्या सवाल है?
04:31मैं बात सौ सालों से एक ड्रैगन बनने की मशकत कर रहा हूँ
04:36और मेरी तालीम के मुताबिक मुझे अब तक एक ड्रैगन बन जाना चाहिए था
04:43पर आए करम तुम बुद्ध से पूछोगे की मुझे क्या करना पड़ेगा?
04:49एक ड्रैगन बनने के लिए?
04:51शुक्रिया प्यारे कच्छुए मुझे दर्या पार कराने के लिए
04:55मैं शुक्र गुजार हूँ
04:57मेरा सवाल पूछना पद भूलना?
05:03बिल्कुल नहीं मैं तुम्हारा सवाल जरूर पूछूंगा
05:06वो बेघर इनसान बुद्धा को ढूनने का सफर जारी रखता है
05:10और आखिर में वो पहुँच जाता है जहां वो रहते है
05:14वो फकीर खंकाह के पास खड़ा रहता है और एक लंबी सांस लेता है
05:20पहुँच गया मैं आखिर मिल ही लूँगा अजीम बुद्धा को
05:25वो बेघर इनसान अंदर दाखिल होता है
05:28पुर जोश से भरा तयार होकर खुद के और बाकियों के सवाल पूछने के लिए
05:34वो अंदर दाखिल होता है और अजीम बुद्धा के सामने सलाम पेश करता है
05:39पराय करम मेरा सलाम कुबूल करें बुद्धा
05:43मैं बहुत दूर दराज देश से आया हूँ
05:45आप से कुछ सवाल पूछने के लिए क्या मैं उन्हें पूछ सकता हूँ
05:50बेशक पूछ सकते हो पर मैं तीन सवालं के जवाब दूँगा
05:55याद रहे सिर्फ तीन सवाल
05:59वो इनसान खौफ सदा रह गया उसके पास चार सवाल थे
06:03पर मेरे पास चार है अब मैं क्या करूँ
06:08तो वो होश्यारी से सोचता है
06:11वो कच्छुए के बारे में सोचता है
06:13कच्छुआ पांच सौ साल से जी रहा है ट्रैगन बनने की फिराक में
06:19पे चारा जानवर जिन्दगी कितनी मुश्किल होती होगी उस गहरे दरिये में रहना
06:25फिर वो जादूगर के बारे में सोचता है जो हजार सालों से जी रहा है जन्नत में जाने की फिराक में
06:33ओ एक हजार साल काफी लंबा वक्त है उसे अब जन्नत जाना ही चाहिए
06:40आखिर में उसने उस लड़की के बारे में सोचा जो अपनी पूरी जिन्दगी जीने वाली है बिना कुछ बोले
06:48और फिर वो अपनी ओर देखता है
06:56मैं बस एक बेघर फकीर हूँ
06:59मैं वापस अपने घर जाकर भीख मांगना जारी रख सकता हूँ
07:03मुझे इसकी आदत है कुछ भी नहीं बदलेगा
07:06पर उन लोगों के लिए सब कुछ बदल सकता है अगर उन्हें अपने जवाब मिलें तो
07:11तो जैसे ही उसने दूसरों के मसलों की और देखा
07:16एक दम से उसे खुद के मसले छोटे लगने लगे
07:19उसे बुरा महसूस हुआ उस कच्छवे, जादुगर और लड़की के बारे में
07:24और इसलिए उसने उन तीनों के सवाल पूछने का फैसला लिया
07:28और जाहिर है बुद्धा ने जवाब दिया
07:31कच्छवा अपना छिलका छोड़ने के लिए तयार नहीं
07:36जब तक वो अपने छिलके के आराम से बाहर नहीं आएगा
07:40वो कभी ड्रैगन नहीं बन पाएगा
07:43ओ, किसने ये गोर फरमाया होगा?
07:48जादुगर हमेशा अपनी छड़ी साथ रखता है
07:50और कभी भी उसे नीचे नहीं रखता
07:53और ये एक लंगर की तरह है
07:55जो उसे जन्नत जाने से रोक रहा है
07:57आँ, मैं उन्हें ये जरूर बताऊंगा
08:01और उस लड़की का क्या?
08:04रही बात उस लड़की की
08:05वो बोल सकेगी
08:07जब वो अपने हम सफर से मिलेगी
08:09शुक्रिया ए अजीम बुद्धा
08:12बुद्धा उसकी तरफ देख कर मुस्कुराए
08:15वो बेघर इंसान ने बुद्धा को सलाम किया
08:18और अपने घर की ओर वापस रवाना हुआ
08:20वापसी में उसे फिर से वो कच्छुआ मिला
08:23क्या तुमने पूचा?
08:27आँ, बेशक
08:28तुम्ही बस अपना छिलका निकालना है
08:30और तुम एक ड्रैगन बन जाओगे
08:32वो कच्छुआ अपना छिलका निकालता है
08:36और उस छिलके के अंदर बेशकीमती मोती थे
08:39जो गहरे समंदर में मिलते हैं
08:42वो उस बेघर इंसान को वो सारे मोती दे देता है
08:45इन्हें तुम रख लो
08:47पेरी तरफ से शुक्रिया है
08:50मुझे अब इनकी जरूरत नहीं है
08:53क्योंकि अब मैं एक ड्रैगन हूँ
08:55शुक्रिया
08:57रहम दिल इंसान
08:59और वो उर जाता है
09:00वो बेघर इंसान उस जादुगर को मिलता है एक पहाली की चोटी पर
09:06आपको बस अपनी छड़ी नीचे रखनी होगी और आप जन्नत जा पाओगे
09:12सच में
09:14यही बुद्धा ने कहा था
09:17इस तरह जादुगर अपनी छड़ी छोड़ देता है और उस इंसान को छड़ी दे देता है
09:23फिर शुक्रिया कहकर वो जन्नत की ओर रवाना होता है
09:36अपने जवाब की उमीद करते है
09:45अजीम बुद्धा ने कहा कि आपकी बेटी तब बोल पाएगी जब वो अपने हमसफर से मिलेगी
09:53और उसी पल वो बेटी नीचे आई और बोली
09:57क्या ये वही शक्त है जो पिछले हपते में आतश्रीप लाया था
10:01वो लड़की और उसके वालदन हैरान थे वो उस बेघर इंसान की और देखने लगे
10:07वही उस लड़की का हमसफर था उन्होंने उनकी शादी तै कर दी और वो हमेशा खुशी से रहने लगे
10:14तो याद रहे इस जहां में तुम जो भी अच्छा करते हो वो वापस तुम्हारे पास ही आएगा
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