00:00नमस्कार, आज हम एक बहुत ही दिल्चस्प किताब पर बात करने वाले हैं, रॉबर्ट केयोसाकी की रिच डैड, पूर डैड, इस किताब ने पैसों को लेकर बहुत लोगों की सोच बदली है
00:12जी हाँ, बिल्कुल, ये दो बिल्कुल अलग सोच, दो अलग दुनियाएं दिखाती हैं पैसे को लेकर
00:18हाँ, एक तरफ है, पूर डैड, ये क्योसाकी के अपने पिता थे, पढ़े लिखे, अच्छी, सुरक्षित नौकरी वाले, उनका मानना था, महनत करो, पैसा बचाओ
00:42ये हमारी आर्थिक स्थिती पर कैसे असर डालती है, और क्यों, मतलब पैसे की समझ इतनी जरूरी है, तो चलिए, शुरू करते हैं
00:51जरूर
00:51तो पहले पूर डैट की बात करते हैं, उनका रास्ता जाना पहचाना है, अच्छी पढ़ाई करो, डिगरी लो, फिर एक अच्छी सी नौकरी पकड़ो, पैसे बचाओ, और हाँ, जोखिम बिलकुल मतलो, ये सुनने में कितना सही और सुरक्षित लगता है न?
01:06हाँ, और यही यही इसका सबसे बड़ा आकर्शन है, सुरक्षा, एक तैशुदा जिंदगी का हैसास, पर क्यो साकी कहते हैं कि यही सोच एक तरह से दौलत बनाने में सबसे बड़ी रुकावट भी बन सकती है, अच्छा, वो कैसे?
01:22देखे, क्योंकि इस रास्ते पर आप अपनी पूरी जिंदगी, अपना सारा वक्त, अपनी सारी महनत, वो आप पैसे के लिए लगा रहे हैं, मतलब आप अपना समय और हुनर बेच रहे हैं एक तनखा के बदले, तो यह आपको सक्रिय रूप से संपत्ती बनाने, मतलब ऐस
01:52बिलकुल नहीं, बलकी पैसा आप से काम करवाए, मतलब निवेश करना, ऐसी चीजें खड़ी करना जो आपके लिए पैसा कमाती रहें, भले ही आप काम ना भी कर रहे हो, यह तो सोचने का पूरा तरीका ही बदल देता है
02:07बिलकुल, और इस सोच का क्या केते हैं, दिल है संपत्ती यानि एसेट्स और दायत्व यानि लाइबिलिटीज की बीच का फर्क समझना, कि उसाकियस पर बहुत ज़ादा जोर देते हैं
02:17हाँ, यह एसेट्स और लाइबिलिटीज वाला कॉंसेप्ट, थोड़ा और बताएंगे इसके बारे में
02:20जरूर, देखिए उनके मुताबिक अमीर लोग संपत्ती जमा करते हैं
02:24एसेट्स वो चीज़ है जो आपकी जेब में पैसा डालती है, लगातार
02:28जैसे, कोई उधारन?
02:30हाँ, जैसे, मान लिजे, आपने कोई प्रॉपर्टी खरीदी और उसे किराय पर चड़ा दिया
02:34तो उससे जो किराया आ रहा है, वो आपकी जेब में पैसा डाल रहा है
02:36तो वो प्रॉपर्टी एक ऐसेट हुई, या जैसे डिविडेंट देने वाले स्टॉक्स, या कोई चलता हुआ बिजनिस, जो प्रॉफिट दे रहा हो
02:42ठीक है, समझा रहा है
02:43और दूसरी तरफ लाइबिलिटी यानि दायत्व
02:45ये वो चीज़े हैं, जो आपकी जेब से पैसा निकालती है
02:48कियो साकी कहते हैं, कि घरीब और मिडल क्लास अकसर लाइबिलिटीज खरीदते हैं, ये सोचकर कि वो एसिट है
02:54अच्छा, जैसे की?
02:56जैसे एक महेंगी गाड़ी, उसकी कीमत वक्त के साथ कम होती जाती है
03:15अपना घर भी एक लाइबिलिटी ही होता है, एसिट नहीं
03:19अरे, ये तो काफी अलग बात है, घर को तो सब एसिट ही मानते हैं
03:22हाँ, पर उनके तरके हिसाब से अगर वो आपकी जेब से पैसा निकाल रहा है लगातार, तो वो लाइबिलिटी है
03:29और देखे, सबसे चौकाने वाली बात ये है, कि पैसे की ये बुन्यादी समझ, एसिट क्या है, लाइबिलिटी क्या है, यह हमें स्कूलों में सिखाई ही नहीं जाती
03:38सही का, मतलब कमाना जरूरी है पर उससे ज्यादा जरूरी ये समझना है कि पैसा कहां जा रहा है, कहां से आ रहा है
03:45पर किताब में ये भी लिखा है कि ये जानने के बाद भी कई लोग वो एसेट बनाने वाला कदम नहीं उठाते
03:52कुछ डर या हिचकेचाहट होती है, वो कौन की मानसिक बाधाएं है
03:57हाँ, क्योसा की तीन मुख्य चीज़ों की बात करते हैं, डर, लालच और अज्यानता
04:03डर, किस चीज़ का डर?
04:05पैसा खोने का डर? निवेश करने में रिस्क होता है, तो उसका डर? नौकरी छूट जाने का डर? कुछ नया करने का डर? ये डर हमें सेफ जोन में, मतलब उसी नौकरी वाले दाइरे में बांधे रखता है
04:16और लालच?
04:17लालच होता है और बड़ी तंखा का, ज्यादा पैसा कमाने का, लेकिन होता क्या है, जैसे ही तंखा बढ़ती है, लोग अपने खर्चे भी बढ़ा लेते हैं, बड़ी गाड़ी, बड़ा घर, और वो फिर से उसी पैसे की दौड में फस जाते हैं, क्योंसा कि इसे चुहा द�
04:47बढ़ता कैसे है, बिना इस समझ के, लोग सही फैसले नहीं ले पाते, तो फिर इन बाधाओं से निकलने का रास्ता क्या है, वही वित्य साक्षर्ता, फाइनांशिल लिटरसी, पैसों की समझ, यही वो हत्यार है, जो इन बाधाओं को तोड़ सकता है, जब आप समझते हैं
05:17आप लॉंग टरम सोचते हैं, यह समझ आपको भावनाओ, डर और लालच के आधार पर नहीं, बलकि जानकारी और तर्क के आधार पर फैसले लेने की ताकत देती है, तो यह सिर्फ अमीर बनने की रेसिपी नहीं है, बलकि अपनी आर्थिक जीवन पर नियंतरन पाने का तर
05:47तो यह है कि नौकरी ढूनने के बजाए अवसर बनाने पर ध्यान दो, रिच टैट कहते थे, यह मत सोचो कि तुमें नौकरी कैसे मिलेगी, यह सोचो कि तुम नौकरियां कैसे पैदा कर सकते हो, इसका असल मतलब क्या निकलता है, चोड़ यह है कि आर्थिक आजादी का रा
06:17तो पैसे को लेकर अपनी सोच बदलना, लगतार सीखते रहना और अपनी कमाई को काम पर लगाना, यही है वित्यस्वतंतरता की कुंजी, नौकरी पर निर्भरता से मुक्ति का रास्ता
06:27बहुत बढ़िया, तो यह पूरी बातचीत बहुत आँखें खोलने वाली रही, श्रोताओं के लिए जाते जाते एक सवाल छोड़ जाते हैं, इसी किताब की सोच पर आधारित, अगर हम रोज मरहा की जिंदगी में हर खर्च या चीज को इस नजरिये से देखना शुरू क
Comments