00:00राजस्थान के एक दूर दराज गाव मट्याना में एक यूवा किसान था अरजुन
00:05अरजुन पढ़ा लिखा था लेकिन उसने शहर की नौकरी छोड़ कर अपने दादाजी की जमीन पर खेती करने का फैसला किया
00:13एक दिन खेत में खुदाई करते हुए उसे एक चमकता हुआ बीज मिला
00:18बीज न जमीन जैसा था न सोने जैसा वो नीली रोशनी से चमकता था
00:24साथ में एक पत्थर पर कुछ शब्द खुदे थे जो इसे लगा कर समय का इंतजार करेगा
00:31उसे अपनी किस्मत खुद चुनने का मौका मिलेगा
00:34गाव के लोग बोले ये कोई खजाना है इसे शहर ले जाकर बेच दे
00:39लेकिन अरजुन ने ठान लिया ये बीज मेरी धर्ती पर आया है तो इसे यही बोऊंगा
00:45उसने बीज को खेट के बीचों बीच लगाया और रोज उसकी देखभाल करता रहा
00:51लेकिन हफ्तों तक कुछ नहीं उगा सबने उसका मजाक उड़ाया
00:56नबेवे दिन अचानक उस जगे से एक पेड उगा लेकिन इस पेड पर न फल थे न फूल
01:02बलकि घड़ी के कांटे और कैलेंडर की पत्या लटक रही थी
01:06समय बदलने की शक्ति
01:09हर दिन अर्जुन को पेड के पास जाने पर एक नया विकल्प मिलता
01:14अगर आज बारिश चाहिए तो एक दिन अपनी उम्र कम कर दो
01:18अगर फसल दुगनी चाहिए तो पिछले साल की कोई एक याद खो दो
01:23अर्जुन हैरान रह गया
01:25ये पेड उसे समय से सौधे करने की ताकत दे रहा था
01:29पहले उसने छोटी-छोटी चीजे मांगी
01:32और धीरे-धीरे उसकी फसले लाजवाब होने लगी
01:36लेकिन धीरे-धीरे उसका शरीर ठकने लगा
01:40यादे धुन्धली होने लगी
01:42उसने देखा उसकी मेहनत कम होती जा रही थी
01:45और पेड पर निर्भरता बढ़ रही थी
01:48फिर एक दिन पेड ने उससे पूछा
01:52अब तुम क्या चाहते हो?
01:53अर्जुन ने कहा
01:55मैं वो वक्त चाहता हूँ
01:56जब मैं बिना किसी सौदे के सिर्फ
01:59अपने पसीने से खुश था
02:00पेड ने एक आखरी बार
02:03चमका और गायब हो गया
02:04उसकी जगे जमीन में एक नई मिट्टी थी
02:07जो अब पहले से भी उपजाव हो गई थी
02:10अर्जुन ने फिर से बीज बोना शुरू किया
02:13इस बार बिना चमतकार के
02:15लेकिन विश्वास और मेहनत के साथ
02:18गाववालों ने उसकी कहानी सुनी
02:20और उस जगे को नाम दिया
02:23समय की धर्ती