00:00बहुत समय पहले, एक घने जंगल के किनारे, रामू नाम का एक गरीब लकड़ारा रहता था, उसके पास ना जमीन थी, ना पैसा, सिर्फ महनत और इमानदारी, हर रोज वो कुलहाडी लेकर जंगल जाता, था और पेड काटता, और लकडिया बेच कर अपने बिमार बेटे का
00:30एक दिन की कमाई भी ना हो पाई, बच्चा भूका सो गया, अब तू ही कुछ कर
00:37एक दिन, जब वो नदी के किनारे प्यास बुछाने गया
00:43इतना गर्मी है कि लकडी भी नहीं काट पा रहा, चलो थोड़ा पानी पी लेता हूँ, अरे, ये कैसी मचली है, सोने जैसी चमक रही है, ये मचली भी पानी बिना तरप रही, इसको पानी में छोड़ देता हूँ
00:59मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस मेरा बेटा ठीक हो जाए, और घर में रोटी पकती रहे
01:29जब रामु घर पहुचा, तो वो चौंग गया, पुरानी जोपड़ी अब एक सुन्दर घर बन चुकी थी, बेटा ठीक था, और रसोई से रोटी की खुश्बुआ रही थी
01:43ये, ये मेरा घर है, बच्चा, तू ठीक हो गया
01:50रामु, ये सब कैसे हुआ, बता
01:59वो मचली सबको नहीं मिलती, उसे सिर्फ सच्चा दिल चाहिए
02:03मचली कहा है, ओ मचली, हमें सोना दे, महल दे, सब कुछ दे
02:14मैं सिर्फ पिमनदारों की मदद करती हूँ, तुम जैसे बेमानों की नहीं
02:18जो इमानदारी से जीते हैं, कभी हारते नहीं
02:22और जो लालच में जीते हैं, वो सब कुछ होते हुए भी, खो देते हैं
02:27नेक्स्ट वीडियो बहुत वाएकर रख्चोंने