00:0011 जुलाई से सावन की शुरुआत हो रही है और इसी दिन से कावड यात्रा का भी आरंभ हो रहा है शिव भक्त गंगा जल कावड में भर कर शिवलिंग पर अर्पित करते हैं ऐसे में कावड का क्या महत्व होता है ये तो आप जानते ही है लेकिन अगर कावड यात्रा के बी�
00:30बनी हुई सन्रचना होती है जिसे शिव भक्त अपने कंधों पर रखकर गंगा जल लेकर शिवलिंग पर चड़ानी के लिए चलते हैं ये एक बहुत पवित्र और कठिन व्रत होता है जिसमें नियम, सैयम और आस्था का विशेश महत्व होता है लेकिन अगर यात्रा के दौर
01:00की पूजा में तुटी की तरह देखा जाता है अगर कावड तूटी है तो गंगा जल को किसी पवित्र स्थान जैसे गंगा में ही विसरचित करें उसे अपवित्र स्थान पर नडालें अगर संभव हो तो नया कावड लेकर पुनह यात्रा शुरू करें कुछ लोग संकल्�
01:30कावड यात्रा पूरी हो जाती है और जल जड़ा दिया जाता है तो उसके बाद कावड का क्या करना चाहिए सबसे पहले कावड को जमीन पर ना फिकें उसे आंदर पूर्वक रखा जाना चाहिए क्योंकि पूरे यात्रा में पवित्र बना रहा कुछ लोग उसे गंगा य
02:00दोस्तों कावड यात्रा सर्फ शरीर की यात्रा नहीं बलकि ये आत्मा की यात्रा होती है इसलिए इसके नियमों और परंपराओं का पालन करना बेहत जरूरी है अगर कोई अन्होनी हो भी चाए तो घबराए नहीं भक्ति सच्ची हो तो भगवान शेव जरूर क्षमा कर दे
02:30कि अर्फ और में जर आत्मा कर दोच्ची होती है अन्होना आप्ण सब माँआ इसके नहीं जरूरी हो जरूता रष्वश्ची हो भी बलगा है झालो हो अस्तों प्रोख उल्टाइस फ्टाराओं आ्स्टाराइस प्राइस भी आरूना कर देचें जरूर जरूईसमा
03:00झाल झाल
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