00:00सामान्य शब्दों में समझें तो जब नम हवाएं पहाडों से टकराती है तो वे उपर की ओर उठती है उन्चाई बढ़ने के साथ तापमान गिरता है इससे हवा में मौजूद नमी संगनित होकर बारिश का रूप लेती है ये प्रक्रिया संगनन कहलाती है जब ये प्रोसे
00:30मौनसूनी हवाओं के अचानक तकराव की स्थिती भी बादल फटने की घटनाओं को बढ़ा देती है इसके अलावा जब बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में आने वाली मौनसूनी हवाएं तकराती है तो ये ज्यादा नमी लेकर आती है जो पहाडों से टकरा कर भारी �
01:00नमी संगनित होकर बारिश का रूप लेती है ये प्रक्रिया संगनन कहलाती है जब ये प्रोसेस बेहत तिबरता से होने लगता है तब बादल फटने जैसी स्थिती पैदा होती है हिमाल्यक शेतर में मौसम की अस्तिर्ता भी इसका कारक बनती है इन इलाकों में ताप्मान �
01:30में आने वाली मौनसूनी हवाएं टकराती हैं तो ये ज्यादा नमी लेकर आती हैं जो पहाडों से टकरा कर भारी बारिश या बादल फटने का कारण बनती है
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