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पुरी, ओडिशा : भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की बाहुड़ा यात्रा की भव्य तैयारियां की गई हैं। बाहुड़ा यात्रा के दौरान जब महाप्रभु श्रीमंदिर लौटते हैं तो प्रेम और भक्ति से भरी एक पुरानी परंपरा फिर से जीवंत हो उठती है। मौसी मां (भगवान की मौसी) द्वारा पारंपरिक धीमी आंच पर पकाए गए चावल के केक पोड़ा पिठा का भगवान को भोग लगाया जाता है। यह सदियों पुरानी रस्म मातृ स्नेह का प्रतीक है और प्राचीन काल से इसका पालन किया जाता रहा है। मंदिर की परंपराओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर से लौटते समय मौसी मां मंदिर में कुछ देर रुकते हैं, जहां उन्हें पोड़ा पिठा अर्पित जाता है, जो उनका मनपसंद व्यंजन है। बाहुड़ा यात्रा को देखते हुए मौसी मां के वंशानुगत पुजारी डॉ. विश्वनाथ मिश्रा ने प्रेम और भक्ति के साथ यह विशेष व्यंजन तैयार किया है। बाहुड़ा यात्रा के दौरान पोड़ा पिठा प्रसाद जगन्नाथ पूजा पंडा सामंत और माधव चंद्र पूजा पंडा सामंत की ओर से अर्पित किया जाएगा, जो तीनों रथों को पोड़ा पीठा भेंट करेंगे। अनुष्ठान का अंतिम भाग बिश्वनाथ मिश्रा के पुत्र बिश्वरुद्र मिश्रा संपन्न करेंगे, जो इस अनूठी परंपरा के भावनात्मक समापन को चिह्नित करता है।

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