00:00एक बनिया था, भोला भाला था, नीम पागल था, एक छोटी सी दुकान चलाता था, दाल, मुर्मुरे, रेवरी जैसी चीजे बेचता था और शाम तक दाल रोटी का जुगार कर लेता था, एक रोज दुकान बंद कर देर रात वह अपने घर जा रहा था, तभी रास्ते में �
00:30सौदागर है, आप हमें क्यों तोक रहे है, बनिये ने कहा, लेकिन एक पहर रात बीतने के बाद आपचा कहा रहे है, चोर बोले, माल खरीदने, बनिये ने पूछा, माल नकद खरीदोगे या उधार, चोरे बोले, न नकद, न उधार, पैसे तो देने ही नहीं है, अब बन
01:00अपने साथ ले चलेंगे, औरे बोले, चलिये, आपको फाइदा ही होगा, बनिये ने कहा, बात तो ठीक है, लेकिन पहले यह तो बताओ कि यह धंधा कैसे किया जाता है, चोर बोले, लिखो किसी के घर के पिछवा, बनिये ने कहा, लिखा चोर बोले, चुपचाप सेंद ल
01:30कान मालिक से पूछना और न उसे पैसे देना, बनिये ने कहा, लिखा चोर बोले, जो भी माल मिले उसे लेकर घर लोट जाना, बनिये ने सारी बाते कागज पर लिख ली और लिखा हुआ कागज जेब में डाल लिया, बाद में सब चोरी करने निकले, चोर एक घर में चोरी
02:00दिया सलाई जलाकर दिया जलाया, एक बोरा खोजकर उसमें पीतल के, चोटे ब्रे बरतन बेफिकरी से भरने लगा, तभी एक बला तसला उसके हाथ से गिराय और सारा घर उसकी आवाज से गूंज उठा, घर के लोग जाग गए, सबने चोरचोर चिलाकर बनिये को घेर लिया
02:30फिर तो वह जोश में आ गया, जब सब लोग उसकी मरमत कर रहे थे, तब बनिया बोला भायो यह तो लिखापड़ी से बिलकुल उल्ता हो रहा है, यहां तो उल्ती गंगा बह रही है, बनिये की बात सुनकर सब सोच में पर गए, मारना पीतना रोक कर सबने पूछा, यह त
03:00होने बनिय को घर से बाहर धकेल दिया, moral of kid's story in Hindi सोच विचार कर किया कारे कभी कष्टदायक नही होता
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