00:00દેવી ઔર સજણો બિને એંડે એલા પ્રીય પેટમ મલ્યાલી સહોધરી સહોધરી સહોધરેન માર્કો એંડે બિને
00:30આજ યે પરીસર દેશ કે ઇતિહાસ કી એક અભૂત પૂર્વા ઘટણા કો યાત
00:46કેતકે કેતરીતાહ્રીત કેતાકે ઘટણા જેતયે નકેબલ હેતરીતા આંદ્લણ
00:59ुद्देश को नई दिशा दी बलकि स्वतंत्रता के उद्देश को आजाद भारत के सपने को ठोस माईने दिये
01:13सो साल पहले स्री नारायन गुरु और महत्मा गांधी की वो मुलाकात आज भी उतनी ही प्रेरक हैं उतनी ही प्रासंगिक है
01:33सो साल पहले हुई वो मुलाकात सामाजिक सम्रस्ता के लिए दिख्सित भारत के सामुहिक लक्षों के लिए
01:47आज भी उर्जा के बड़े स्रोत की तरख है
01:54इस आइतिहासिक अवसर पर मैं स्री नारायन गुरु के चरणों में प्रणाम करता हूँ
02:03मैं गांधी जी को भी अपनी सद्धान्जली अर्पित करता हूँ
02:13भाई बहनों से नारायन गुरु के आदर्श पूरी मानवता के लिए बहुत बड़ी पूंजी है
02:23जो लोग देश और समाज की सेवा के संकल्प पर काम करते हैं
02:33स्री नारायन गुरु उनके लिए प्रकास तंभकी तरह है
02:40आप सबी जानते हैं कि समाज के शोशीत पीरीच वजचीत वर्थ से मेरा किस तरह का नाता है
02:55और इसलिए आज भी मैं जब समाज के शोशीत वंचीत वर्थ के लिए बड़े निर्णे लेता हूं
03:07तो मैं गुरु देव को जरूर याद करता हूँ
03:12सो साल पहले के वो समाजी का हलत
03:19सदियों की गुलामी के कारा आई विकृतियां
03:26लोग उस दौर में उन बुराईयों के खिलाब बोलने से डरते थे
03:34लेकिन स्री नारायन गुरु ने विरोध की परवा नहीं की
03:42वो कठिनाईयों से नहीं डरे
03:45क्योंकि उनका विश्वास समरस्ता और समानता में था
03:54उनका विश्वास सत्य, सेवा और सवहार्द में था
04:02यही प्रेना हमें सबका साथ, सबका विखास का राफ्ता दिखाती है
04:09यही विश्वास हमें उस भारत के निर्मान के लिए ताकत देता है
04:18जहां अंतिम पाइदान पर खड़ा व्यक्ती हमारी पहली प्रात्विक्ता है
04:27साथियों, शिवगिरी मठ से जुड़े लोग और संत जन्वी जानते हैं
04:37कि स्री नारेन गुरू हैं, और शिवगिरी मठ में मेरी कितनी अगहाद आस्था रही है
04:47मैं भाषा तो नहीं समझ पा रहा था
04:53लेकिन पुझे सच्चिजान जी बाते बता रहे थे
04:56वो पुरानी सारी बाते याद कर रहे थे
05:00और मैं भी देख रहा तक उन सब बातों पर अपड़े भाव विबोर हो करके
05:09उसके साथ जूड़ जाते थे
05:11और मेरा सवभाग है कि मठ के पुझे संतों ने हमेशा मुझे अपना स्नेह दिया है
05:23मुझे आद है 2013 में तब तो मैं गुझरात में मुख्यमिंती था
05:34जब केदारनाथ में प्राकृतिक आपदा आई थी
05:41तब शिवगीरी मठ के कई पुझे संत वहां फस गए थे
05:51कुछ भक्त जन भी फस गए थे
05:54शिवगीरी मठ ने महां फसे लोगों सो सुरक्षीत निकालने के लिए
06:01भारत सरकार का संपर नहीं किया था
06:05परकाई जी बुरा मत मानना
06:08शिवगीरी मठ ने मैं एक राज्ये का मुख्यमंत्री था
06:15मुझे आदेश दिया और इस सेवक पर भरोसा किया
06:22कि भाई ये काम तुम करें
06:24और इस वर कुपा से सभी संत सभी भक्त जन को सुरक्षित में लापाया था
06:35साथियों वैसे भी मुश्किल समय में हमारा सबसे पहला ध्यान
06:45उसकी ओर जाता है जिसे हम अपना मानते हैं
06:53जिस पर हम अपना अधिकार समगते हैं
07:02और मुझे खुशी है कि आप अपना अधिकार मुझ पर समगते हैं
07:11शिवगेरिय मट के संतों के इन अपने पन से जाजा है
07:16आत्मिक सुख की बात मेरे लिए और क्या हुए
07:20साथियों मेरा आप सबसे एक रिस्ता काशी का भी है
07:27वरकला वरकला को सद्यों से दक्षिन की काशी भी कहा जाता है
07:42और काशी चाहे उत्तर की हो या दक्षिन की
07:46मेरे लिए हर काशी मेरी काशी ही है
07:53साथियों मुझे भारत की आध्यात्मिक परंपरा
08:01रुशियों और मुनियों की विरासप
08:05उसे करीब से जानने और जीने का सौभागी मिला है
08:12भारत की विशिस्ता है
08:16कि हमारा देश जब भी
08:20मुश्किलों के भावर में फस्ता है
08:25कोई न कोई महान विभूती
08:29देश के किसी कौने में जन्म लेकर
08:33समाज को नई दिशा दिखाती है
08:37कोई समाज के अज्धात्मिक उठान के लिए काम करता है
08:43कोई सामाजी क्षेत्रे में समाज सुधारों को गति देता है
08:47स्री नारेण गुरु ऐसे ही महान संत्र थे
08:55निवृत्ती पंचकम और आत्मोपदेश शतकम
09:04जैसे उनकी रचनाएं ये अध्वेट और अध्यात्म के किसी भी स्टुडेन के लिए
09:15गाइड की तरह है
09:17साथियों योग और वेदान्त
09:22साधना और मुक्ती
09:25नारेण गुरु के मुख विशे थे
09:29लेकिन वो जानते थे
09:32कि कूरितियों में फसे समाज का अध्यात्म को थान
09:37उसके सामाजी को थान से ही संभव होगा
09:41इसलिए उन्होंने अध्यात्म को
09:46समाज सुधार और समाज कल्यार का एक माध्यम बनाया
09:53और स्री नारेण गुरु के ऐसे प्रयासों से
09:57गांधी जी ने भी प्रेरना पाई
10:01उन्से मारदर्शन लिया
10:05गुरुदेव रविन्ना टेगोर जैसे विद्वानों को भी
10:10स्री नारेण गुरु से चर्चा का लाब मिला
10:14साथियों एक बार किसे ने
10:21स्री नारेण गुरु की आत्मोप देश शतकम
10:26रमण महरसीजी को सुनाई थी
10:29उसे सुनकर रमण महरसीजी ने कहा था
10:35अवर एलाम तेरी निजवर
10:39यानि वो सब कुछ जानते हैं
10:47और उस दोर में जब विदेशी विचारों के प्रहाव में
10:54भारत की सब्विता, संस्कृति और दर्शन को
10:57नीचा दिखाने के शड्यंत्र हो रहे थे
11:01स्री नारेण गुरु ने हमें ये ऐसास कराया
11:07कि कमी हमारी मुल्परंपरा में नहीं है
11:12हमें अपने आध्यात्म को सही अर्थों में आत्मसाथ करने की जरुरत है
11:22हम नर में स्री नारेण को जीव में शीव को देखने वाले लोड है
11:32हम द्वाइत में अद्वाइत को देखते है हम भेद में भी अभेद देखते है हम विवीतता में भी एक्ता देखते है
11:47खाथियों आप सभी जानते हैं स्री नारेण गुरु का मंत्र था ओरु जाती ओरु मतम ओरु देवं मनुष्यनू
12:02यानि पूरी मानवता की एक्ता जीव मात्र की एक्ता यह विचार भारत की जीवन संस्कृति का मूल है
12:24उसका आधार है आज भारत उस विचार को विश्व कल्यान की भावना से विस्तार दे रहा है
12:36आप देखिए अभी हाल ही में हमने विश्व योग दिवस मनाया
12:45इस बार योग दिवस की थीम थी योगा फर वन अर्थ वन हिल्क
12:53यानि एक जर्ती एक स्वाथ
12:57इसके पहले भी भारत ने विश्व कल्यान के लिए
13:01वन वर्ड वन हिल जैसे इनिशेटिव शुरू किया है
13:06आज भारत सस्टेनेबल डवलप्मेंट की धिशाम है
13:11वन सन वन अर्थ वन ग्रीड जैसे ग्लोबल मुमेंट को भी लीड कर रहा है
13:20आपको याद होगा
13:222023 में भारत ने जब G20 समीट को होस किया साथ
13:31हमने उसकी भी थीम रखी थी
13:34वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर
13:39हमारे इन प्रयासों में वसुधेव कुटुम कम की भावना जुड़ी हुई है
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