00:00एक जवान आदमी कलपना करिये, 24-25 साल का है, दो डिगरिया ले चुका है जिनको भारत में बड़ा माना जाता है
00:06एक सरकारी नौकरी ले चुका है जिससे उसने अभी इस्तीफा नहीं दिया है, वो भी रखी हुई है कि जाओ तो जॉइन कर लो
00:11और यहां कॉर्परेट की नौकरी मिली हुई है, जाओ उसको कर लो
00:17किसी भी तरीके से उस वक्त कोई भी आदमी यहां तक की वो जवान लड़का भी यह कलपना कर सकता था कि आज वो यह कर रहा होगा
00:23और अगर कलपना करके योजना बना के किसी रास्ते पर चलता तो क्या आज यहां पहुँच पाता
00:28क्या मेरी कोई भी योजना मुझे यहां ला सकती थी
00:31हाँ मेरी योजना मुझे छिटागो ले जाती, कैलिफॉरनिया ले जाती, लंडन ले जाती
00:35लेकिन उन जगहों पर तो इतने लोग पहले ही भरे हुए हैं, लंदन की भीड़ का क्या कहना, या किसी सरकारी बंगले मिले जाती, उसमें भी इतने भरे हुए, कुछ भी अच्छा तभी होता है, जब वो पहले से तै नहो, योजित नहो, संकल्पित नहो, योजना बना के छ