00:00एक ऐसा समय था, जब पूरी दुनिया अंधकार में डूबी हुई थी, न्याय का उजाला जैसे खत्म हो चुका था और जुल्म का ताज पहने वैथा था एक निर्दई शासक मलिक अल जुलमत।
00:30एक नाम दिया सेयदतल नकाब यानि नकाब पोश योध्धा, वो एक विद्वान की बेटी थी जिसे मलिक की फौज ने मार दिया था, वो अकेली रह गई, लेकिन एक बुजूर्ग सूफी ने उसे पाला और उसे सिखाया रोश्नी की ताक्त नूर की विद्या, एक ऐसी शक्
01:00पर सवार, सफेद कब्डों में और चहरे पर काले नकाब के साथ, उसकी तलवार सैफल नूर चांदनी में चमक रही थी, उसकी पहली जलक लोगों ने देखी कसर अलहजान शहर में, जहां जुलमत की फौज छोटे बच्चों को युद्ध के लिए पकड़ रही थी, लोग
01:30आखरी हतियार अंधेरे की तलवार, जुल्फिकार अश्चर, नकाब पोश के पास सिर्फ तीन हजार सच्चे मुजाहिद थे, लेकिन उनके दिलों में थी सच्चाई और उम्मीद, लड़ाई शुरू हुई सूरज निकलने से पहले, पूरा मैदान काम उठा, वो लड़क
02:00सच को चेहरों की नहीं, कर्मों की जरूरत होती है, किसी ने उसका चेहरा नहीं देखा, सिर्फ एक प्रकाश से घिरी स्त्री की परचाई, इसके बाद उसकी कहानिया आग की तरह फैल गई, एक नकाब पोश योध्धा जो अकेले पूरी सेना को हरा देती है, फिर उसने रा
02:30है,
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