00:00धूप की महीन किरने जब घने जंगल की शाखों से चंकर जमीन पर गिरती हैं तो सन्नाटा भी कुछ कहने लगता है। उस सन्नाटे में तीन दोस्त एक कच्छे रास्ते पर चल रहे थे। हिना।
00:30अवाज काप रही थी हिना। बस हवा में उड़ता हिना का दुपट्टा बचा था और पेडों की सरस्राहट जो अब दराने लगी थी। फिर एक धीमी गूंज गूंजी मैं यहां हूँ। और वो जंगल जो अब तक खामोश था एक जिन्दा रहस्य बन चुका था। उस दि
Comments