00:00बहुत समय पहले की बात है, एक ऐसा गाव था जो सूखा, उदास और बेजान हो चुका था, खेत बंज़ा थे, पेर सूखे खड़े थे और लोगों के चहरे उम्मीद से खाली, एक दिन सुबह आसमान से एक विशाल सफेद कबूतर उतरा, वो कोई आम कबूतर नहीं था, इ
00:30कभी नहीं देखा था, कबूतर ने अपने मजबूत पंजो से जमीन खोदी और बीज बोया, फिर वो अपनी ही चोन चोर पंखो से उठाई गई सुनहरी सुराही में नदी से पानी भर कर लाया, और बीज पर हर रोज डालता रहा, कुछ ही दिनों में उस जगह से एक छोट
01:00लगी, और गाव में चिरियों की चहचाहट लोटाए, लोग हसने लगे, बच्चे घास पर खेलने लगे, और बुरे लोग पेरों की च्छाव में बैठकर दुआय देने लगे, गाव के बीचो बीच अब एक बड़ा जादूई पेर था, जिसकी च्छाव में वही विशा
01:30दूखने की कोशिश की, इसी दोड़ भाग में उसके घोसले से एक अंडा गिर कर तूट गया, सुबह हुई तो गाव वाले स्तब्द खड़े थे, पेर को नुकसान हुआ था और कबूतर उदास था, उसके पंक बिखरे हुए थे और आखों में आसू, लोगों की आखों म
02:00और कबूतर ने फिर से पानी डाला, कुछ ही दिनों में गाव पूरी तरह बदल गया, हर तरफ हरियाली, फलों से लदे पेड, बहती साफ नदिया और रंग बिरंगी तितलिया, और उस पुराने जादूई पेड के घोसले में अब तीन प्यारे नवजात कबूतर थे, गा
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