00:00एक साथ ते पॉलीस इंस्पेक्टर थे मुझे से कहने लगे 71 की जंग में मैं अपने 8-10 बंदों की फोर्स के साथ था हर तरफ से गोलियां आ रही थी मुझे कुछ समाई नहीं आ रही थी क्या करूं तो मैंने अपने मातहटों से कहा कि दरूद इबराहीमी पढ़ो और कहने �
00:30हो जाती थी उसका रुख बदल जाता था कहने लगे के एक गोलियों का रुख बदल जाता था और मैं और मेरे सारे साथी माफूद रहे हम मुझसलसल दरूद इबराहीमी पढ़ रहे थी
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